Rebirth: pyar ya mout? - Chapter 1
अंधेरे का निमंत्रण
Shimla
की सर्द हवाएं अपने साथ रहस्यमयी कहानियों को लेकर चलती हैं। हर गली, हर मोड़ पर कोई न कोई कहानी छुपी होती है—कुछ प्रेम की, कुछ दर्द की, और कुछ ऐसी जो रूह तक कंपा देती हैं।
रात का समय था। पहाड़ों पर फैली बर्फ की सफेद चादर चांदनी में चमक रही थी। पेड़ों की शाखाएं ठंडी हवा में धीरे-धीरे रही थीं, जैसे कोई अदृश्य शक्ति उन्हें छू रही हो।
नायरा ने अपने हाथों को जैकेट की जेब में डाला और तेज़ी से कदम बढ़ाने लगी। वह एक छोटी सी बुकशॉप से घर लौट रही थी। रास्ते में बर्फ गिरी हुई थी, जिससे उसके जूते हर कदम पर सरसराहट की आवाज़ कर रहे थे।।
"आज फिर देर हो गई," उसने खुद से बड़बड़ाया।
Shimla में अजीब बातें होने लगी थीं। पिछले कुछ हफ्तों से, लोग अजीब-अजीब आवाजें सुनने की शिकायत कर रहे थे। कोई कहता कि उसने रात के अंधेरे में किसी को रोते सुना, तो कोई कहता कि उसे अपने पीछे किसी के चलने की आहट महसूस होती है। लेकिन जब मुड़कर देखा जाता, तो वहां कुछ नहीं होता।
नायरा ने इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। वह तर्कशील लड़की थी और भूत-प्रेत की कहानियों में विश्वास नहीं करती थी। लेकिन आज… आज कुछ अलग महसूस हो रहा था।
रास्ता सुनसान था, सिर्फ हवा की आवाज़ और उसके जूतों की सरसराहट सुनाई दे रही थी। लेकिन अचानक…
टप… टप…
किसी और के कदमों की आहट…
नायरा के दिल की धड़कन तेज़ हो गई। उसने धीरे से मुड़कर देखा, पर वहाँ कोई नहीं था।
"शायद मेरा वहम है," उसने खुद को समझाने की कोशिश की और चलने लगी।
पर फिर वही आहट! और इस बार ज्यादा तेज़… जैसे कोई उसके और करीब आ रहा हो।
उसके कदम तेज़ हो गए। ठंडी हवा उसकी गर्दन पर सरसराने लगी। उसने सोचा कि किसी को फोन कर ले, लेकिन उसका फोन जैकेट की गहरी जेब में था और उसे निकालने में देर लग सकती थी।
फड़ाक!
एक झटके से हवा इतनी तेज़ चली कि पास का सूखा पेड़ चरमरा उठा। नायरा का दिल जोर से धड़कने लगा।
वह अब लगभग दौड़ने लगी थी। घर पास था—बस दो गलियां और।
पर तभी…
"नायरा…"
एक धीमी, ठंडी, और किसी अजनबी की आवाज़ ने उसे रोक दिया।
वह थम गई। उसके पैरों ने जैसे चलने से इनकार कर दिया। उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा।
सामने कोई खड़ा था—एक लंबा, छायामय अक्स। उसकी आँखें अजीब तरीके से चमक रही थीं, जैसे चांदनी ने उन्हें रौशनी दी हो।
नायरा का गला सूख गया।
"त… तुम कौन हो?" उसकी आवाज़ कांप रही थी।
लेकिन जवाब नहीं मिला। वो आकृति बस खड़ी रही, उसे घूरती हुई।
नायरा ने डरते हुए एक कदम पीछे लिया, और तभी वो आकृति तेज़ी से उसकी तरफ बढ़ी।
उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई। वह भागी, पूरी ताकत से। लेकिन उसके कानों में वो आवाज़ फिर गूंजी—"तुम मुझसे भाग नहीं सकती, नायरा…"
वह सड़क के मोड़ पर पहुँची और ठिठक गई। सामने उसका घर था—सुरक्षित, परिचित, लेकिन आज अजनबी सा लग रहा था।
उसने जल्दी से दरवाज़ा खोला और अंदर घुसते ही ज़ोर से बंद कर दिया।
धड़क… धड़क… धड़क…
उसका दिल पागलों की तरह धड़क रहा था।
उसने गहरी सांस ली, खुद को संयमित किया और खिड़की से झांका। बाहर कुछ नहीं था—वही बर्फीला रास्ता, वही शांत अंधेरा।
"शायद मेरी कल्पना थी," उसने खुद को समझाया।
लेकिन तभी…
पीछे से किसी के सांस लेने की आवाज़ आई।
ठंडी… धीमी… और खौफनाक।
नायरा ने झटके से मुड़कर देखा—
एक परछाईं!
कोई उसके पीछे खड़ा था, एकदम करीब…
"मैं आ गया हूँ, नायरा…"
नायरा का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। उसकी साँसें बेतहाशा चल रही थीं। पीछे से आती ठंडी साँसों की सरसराहट ने जैसे उसकी रूह तक जमा दी थी।
वह धीरे-धीरे मुड़ी।
सामने कोई नहीं था।
बस कमरे में हल्का अंधेरा था, और खिड़की से चाँदनी अंदर झाँक रही थी। लेकिन फिर भी, उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वहाँ कोई था—कोई जो उसे देख रहा था… किसी की नज़रें उसकी गर्दन पर चुभ रही थीं।
"नायरा…"
वही आवाज़।
यह असली थी। उसने अपने कानों से सुनी थी।
"क… कौन है यहाँ?" उसकी आवाज़ काँप गई।
कोई जवाब नहीं आया।
उसने लाइट ऑन की। कमरा बिल्कुल खाली था। हर चीज़ अपनी जगह पर थी—वही किताबें, वही फोटो फ्रेम, वही पर्दे… लेकिन फिर भी, उसे सब कुछ बदला-बदला सा लग रहा था।
उसने लंबी साँस ली और खुद को समझाने की कोशिश की।
"यह सब मेरा वहम होगा। हो सकता है मैं ज़्यादा डर गई हूँ, और मेरी दिमाग ने ये सब गढ़ लिया।"
लेकिन उस ठंडी सांसों का क्या? उस परछाई का क्या?
नायरा ने जल्दी से अपने कपड़े बदले और बिस्तर पर लेट गई। उसने कम्बल अपने सिर तक खींच लिया, जैसे वो उसे किसी अनजान खतरे से बचा लेगा।
लेकिन नींद कहाँ आने वाली थी?
हर छोटी सी आवाज़ उसे चौका रही थी। पत्तों की सरसराहट भी उसे डराने लगी थी।
करीब एक घंटे बाद, उसकी पलकें भारी होने लगीं। लेकिन तभी—
क्लिक!
उसके कमरे की लाइट बंद हो गई।
नायरा का पूरा जिस्म सुन्न हो गया।
उसने झटके से अपना फोन उठाया और टॉर्च ऑन की। कमरे की रोशनी में कुछ भी अजीब नहीं था, लेकिन उसका दिल कह रहा था कि कुछ ग़लत हो रहा है।
उसने धीमे से करवट बदली, लेकिन तभी…
किसी के ठंडे हाथ ने उसका हाथ पकड़ लिया।
नायरा का शरीर झटके से सुन्न हो गया।
उसके पास चीखने की भी हिम्मत नहीं बची थी। उसने अपनी आँखें हल्के से खोलीं और देखा—
कोई उसके बिस्तर के पास बैठा था।
लंबा, काला, धुंधला सा अक्स… उसकी साँसें धीमी और भारी थीं।
और फिर, उस आकृति ने धीरे से कहा—
"मैं तुम्हें बहुत पहले से जानता हूँ, नायरा…"
नायरा की आँखों से आँसू बहने लगे। "त… तुम कौन हो?"
परछाईं ने धीरे से अपना सिर झुकाया, जैसे मुस्कुरा रहा हो।
"क्या तुम्हें सच में नहीं पता?"
नायरा ने सिर हिलाया।
"मैं… तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था।"
"क्यों?" नायरा की आवाज़ अब और भी हल्की हो गई थी।
आकृति धीरे-धीरे उसके और करीब झुक गई। उसकी ठंडी साँसें नायरा के चेहरे से टकरा रही थीं।
"क्योंकि…"
वह एक पल को रुका, और फिर—
"क्योंकि तुम सिर्फ मेरी हो।"
नायरा की आँखें फैल गईं। उसकी पूरी आत्मा जैसे इस एक वाक्य में कैद हो गई थी।
और तभी…
आकृति गायब हो गई।
कमरे की लाइट अचानक से फिर जल गई, और सब कुछ पहले जैसा लगने लगा।
पर नायरा जानती थी—यह कोई सपना नहीं था।
वह बिस्तर पर बैठ गई, उसका शरीर अभी भी डर से काँप रहा था।
"यह कौन था? क्या यह वही शख्स था, जिसे मैंने रास्ते में देखा था?"
या फिर… यह कोई और था?
उसका दिमाग सवालों से भर चुका था, लेकिन एक बात वह अच्छे से समझ गई थी—अब उसकी ज़िंदगी पहले जैसी नहीं रहने वाली।
नायरा रातभर सो नहीं सकी। वह बस एक ही बात सोच रही थी—"वो कौन था?"
क्या यह कोई सपना था? या कोई बुरा वहम?
लेकिन अगर वहम होता, तो उसके हाथ पर वो ठंडा स्पर्श कैसा था?
सुबह की पहली किरण कमरे में दाखिल हुई। नायरा ने बिस्तर से उठने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया, उसकी कलाई पर कुछ अजीब दिखा।
एक काला निशान।
उसके पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई।
"ये क्या है?"
निशान जलने के निशान जैसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसकी कलाई पर अपनी उंगलियाँ जोर से दबाई हों।
उसने जल्दी से अपने हाथ को पानी से धोया, पर वो निशान जस का तस था।
उसका मन अब और बेचैन होने लगा।
क्या ये वही रहस्यमयी परछाई थी?
लेकिन अब डरने से कोई फायदा नहीं था। उसे अपनी दोस्त रिया से बात करनी थी।
कॉफ़ी शॉप में एक अजनबी
नायरा अपने डर से बचने के लिए रिया से मिलने एक कॉफ़ी शॉप गई।
रिया पहले से वहाँ उसका इंतज़ार कर रही थी।
"क्या हुआ? इतनी परेशान क्यों लग रही है?" रिया ने पूछा।
नायरा ने संक्षेप में उसे पूरी बात बता दी—रास्ते में किसी का पीछा करना, घर में किसी के होने का अहसास, और फिर उसकी कलाई पर ये अजीब सा निशान।
रिया कुछ देर तक चुप रही, फिर बोली, "तुझे लग रहा है ये सब तेरा वहम है, लेकिन मैं जानती हूँ कि ये पहली बार नहीं हो रहा।"
"मतलब?"
रिया ने धीरे से कहा, "तुझे याद है, तेरा बचपन का हादसा?"
नायरा की साँसें एक पल को रुक गईं।
बचपन… एक धुंधली याद… एक रात जब वो लगभग मर गई थी।
लेकिन इससे इसका क्या संबंध था?
"रिया, तू क्या कहना चाह रही है?"
रिया कुछ कहने ही वाली थी कि तभी—
"अगर मैं तुम्हारे पास बैठ जाऊँ, तो कोई दिक्कत तो नहीं?"
एक गहरी, दिलकश लेकिन ठंडी आवाज़ आई।
नायरा ने सिर उठाकर देखा।
सामने एक अजनबी लड़का खड़ा था।
लंबा कद, काले घने बाल, भूरी आँखें… और चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान।
लेकिन सबसे अजीब बात थी—उसकी उंगलियों के पास हल्का सा जलने का निशान था… ठीक वैसा ही जैसा नायरा की कलाई पर था।
नायरा का दिल ज़ोर से धड़क उठा।
"हम पहले भी मिल चुके हैं..."
"तुम कौन हो?" नायरा ने धीरे से पूछा।
लड़के ने हल्की मुस्कान दी और कहा—
"मेरा नाम अविक है। लेकिन असली सवाल ये है… क्या तुम्हें सच में नहीं पता कि मैं कौन हूँ?"
नायरा और रिया एक-दूसरे को देखने लगीं।
"नहीं… मैंने तुम्हें पहले कभी नहीं देखा," नायरा ने जवाब दिया।
अविक की आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उसने धीरे से कहा—
"झूठ मत बोलो, नायरा। मैं तुम्हें तुम्हारे बचपन से जानता हूँ। बल्कि, मैंने तुम्हें बचाया था…"
नायरा की आँखें चौड़ी हो गईं।
"बचाया था?"
अविक ने धीरे से उसकी कलाई को देखा, जहाँ वो काला निशान था।
फिर उसने धीरे से फुसफुसाकर कहा—
"क्या तुमने कभी सोचा है कि तुम बचपन में मरी क्यों नहीं? क्योंकि मैंने तुम्हें मरने नहीं दिया…"
नायरा के हाथ से कॉफ़ी कप छूटकर ज़मीन पर गिर पड़ा।
to be continued 💫 🦋 💙