Chapter 1 (वो भाग गया!)
Disclaimer : ये कहानी एक ऐसी घटना पर आधारित है जिसका गवाह तो पूरा देश बना, मीडिया ने उसे बहुत लाइमलाइट दिया लेकिन इसके पीड़ित को इंसाफ और दोषी को सजा नहीं मिली और ऐसा क्यों, क्योंकि पीड़ित एक लड़का था और दोषी एक लड़की।
ये कहानी समाज के प्रति आपके नजरिए को चुनौती दे देगी और आपको खुद से ये सवाल करने पर मजबूर कर देगी कि क्या हम एक सुरक्षित समाज में रह रहे हैं! क्या हमारे देश का कानून हमें न्याय दिलाने में सक्षम है और है, तो ऐसी घटनाएं क्यों सामने आती है!
दोपहर का समय,
विजया हॉस्पिटल,
एक डॉक्टर अपने कैबिन में बैठा हुआ था। उसकी उम्र कोई 30-31 साल रही होगी लेकिन उसे देख कर उसकी उम्र का अंदाजा लगा पाना मुश्किल था।
उसने नीले रंग की जींस के साथ बहुत ही हल्के गुलाबी रंग का शर्ट पहन रखा था। साथ में उसने डॉक्टर्स का सफेद रंग का लैब कोट भी पहना हुआ था।
उसकी शर्ट के ऊपरी दो बटन खुले हुए थे जिससे उसके गले में एक चैन साफ नजर आ रहा था जिसके पेंडेंट में बड़े स्टाइल में V लिखा हुआ था। उसके पैरों में काले रंग के जूते थे।
उसके बाएं हाथ में एक महंगी चैन वाली घड़ी थी। उसके दाएं हाथ में एक कलावा था और रिंग फिंगर में एक हीरे की अंगूठी। उसके बाल कुछ बड़े थे जो पसीने में भीगे होने के कारण उसके माथे पर बिखरे हुए थे।
उसके भूरे आंखों पर गोल्डन रिम का एविएटर पायलट शेप का चश्मा चढ़ा हुआ था जो उसकी पतली नाक पर सरक गया था। उसके पतले गुलाबी होठों और गोरे रंग पर उसकी हल्की दाढ़ी बहुत ही जंच रही थी।
उसके सामने टेबल पर डेस्क नेम प्लेट पर डॉक्टर विक्रांत सहाय लिखा हुआ था। वो कुर्सी पर बैठे हुए कुछ रिपोर्ट्स पढ़ रहा था कि इतने में उसका फोन बज उठा।
उसने कॉलर का नाम देखे बिना, अपनी नजरें फाइल में गड़ाए हुए ही कॉल आंसर कर दिया और इसी के साथ एक घबराई हुई आवाज उसके कानों में पड़ी, "विक्की, विक्की! वो भाग गया है।"
ये सुनते ही विक्रांत अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ। उसने वो फाइल उसकी जगह पर रख कर खड़े होते हुए कहा, "मैं, मैं अभी वहां पहुंच रहा हूं।"
इतना बोल कर वो तेजी से बाहर निकल गया। वो दौड़ते हुए एक वार्ड के बाहर पहुंचा। वो तेजी से अंदर गया तो वहां पर कुछ डॉक्टरर्स और नर्सेज खड़े थे।
उसकी नजरें बेड पर गई तो बेड खाली पड़ा था। ये देख कर विक्रांत की आंखों में गुस्सा उतर आया।
उसने एक डॉक्टर की ओर देख कर गुस्से में कहा, "माधव, कैसे हुआ ये सब?"
माधव ने अपना सिर पकड़ कर कहा, "पता नहीं, यार! मैं तो कुछ समझ ही नहीं पा रहा हूं।"
विक्रांत ने गंभीर आवाज में कहा, "तुमने हॉस्पिटल चेक किया!"
माधव ने टेंशन के साथ कहा, "पूरा हॉस्पिटल छान मारा, लेकिन उसका कहीं कुछ पता नहीं चला।"
विक्रांत ने फौरन बाहर की ओर जाते हुए कहा, "चलो, सी सी टी वी फुटेजेस चेक करते हैं।"
माधव ने भी कहा, "हां, चलो।"
और विक्रांत के साथ चला गया। कुछ ही पलों में वो दोनों सिक्योरिटी रूम के सामने थे। विक्रांत ने अंदर जाकर सीधे उस वार्ड की फुटेज चेक करनी शुरू की।
उस फुटेज में एक लड़का नजर आ रहा था जिसकी उम्र विक्रांत जितनी ही रही होगी। उसने पेशेंट के कपड़े पहने हुए थे और उस बेड पर सोया हुआ था।
डॉक्टर और नर्स के अपना काम करके चले जाने के बाद उस लड़के ने अपनी आंखें खोली और इधर-उधर देखने लगा। जब वो श्योर हो गया कि अब उस कमरे में कोई नहीं है तो वो उठा और मौका देख कर बाहर चला गया।
ये सब देख कर माधव ने हैरानी के साथ कहा, "ये क्या! ये तो लग रहा है कि ये इसी बात का इंतजार कर रहा था कि कब सभी लोग उसके वार्ड से बाहर जाएं और वो उठ कर भाग सके।"
विक्रांत ने अपनी नजरें स्क्रीन पर गड़ाए हुए ही टेंशन के साथ कहा, "इसका तो एक ही मतलब है। मुझे वी को इस सबसे दूर रखना होगा। उसे इस बात की भनक भी नहीं लगनी चाहिए।"
वहीं दूसरी तरफ,
कोई पुराना गोदाम,
हर तरफ सामान बिखरा हुआ था और पूरे गोदाम में सन्नाटा पसरा हुआ था। कहीं किसी का नामोनिशान तक नहीं था लेकिन 1 मिनट की शांति के बाद ही टायर्स के ढेर के पीछे से एक गोली चली जो सामने की दीवार के पास एक हाथ पर जा लगी। उस हाथ में एक गन थी।
गोली लगते ही वो गन उस हाथ से छूट कर नीचे गिर गई और वो हाथ पकड़े हुए एक आदमी बाहर आ गया। उसने काले रंग की जींस के साथ सफेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी।
इसके साथ उसने एक काले रंग का जैकेट डाला हुआ था। उसके पैरों में काले रंग के जूते थे और बालों पर उसने एक काले रंग का कपड़ा बांध रखा था।
उसने अपने मुंह पर काला भी कपड़ा बांध रखा था जिससे सिर्फ उसकी आँखें नजर आ रही थीं जिनमें ढेर सारा सुरमा लगा हुआ था।
वो आदमी उस गन को उठाने की कोशिश कर रहा था लेकिन इससे पहले कि वो उस गन को उठा पाता एक गोली उसकी पीठ में आ लगी।
उसे एक झटका लगा और वो नीचे जा गिरा। इसी के साथ कुछ कदम तेजी से अलग-अलग जगहों से बाहर निकले और दोनों तरफ से गोली बारी होने लगी।
जहां वो आदमी गिरा था उधर से वैसे ही 5-6 से आदमी फायरिंग कर रहे थे और सामने से चार लोग इन सभी पर फायरिंग कर रहे थे।
उन सब ने काले रंग की पैंट के साथ काले ही रंग की हाफ टी शर्ट पहनी हुई थी जिनके अंदर बुलेटप्रूफ जैकेट्स थे। उन सबने अपने सिर पर बेस कैप पहना हुआ था और उनके मुंह पर काले रंग का मास्क लगा हुआ था।
वो चारों अपने सामने के आदमियों को भूनते हुए आगे बढ़ रहे थे। कुछ ही देर में वो सारे आदमी जिन्होंने अपने सिर पर कपड़ा बांध रखा था, वो सभी बेजान होकर जमीन पर पड़े हुए थे।
बेस कैप पहने हुए चारों लोग उन सभी के पास पहुंचे। वो सभी अपने पैरों से उन आदमियों के सिर को इधर उधर करके देख रहे थें कि कहीं कोई जिंदा तो नहीं रह गया है न! वो सभी मर चुके थें लेकिन एक आदमी अभी भी जिंदा था।
उसे देख कर एक लड़के ने दूसरे की ओर देख कर कहा, "मैम, इसे जिंदा ले चलें!"
उस लड़की ने उसकी ओर देख कर अपनी भौंहें उठा कर कहा, "क्यों ? तुम्हारा ससुर है ये, जो इसे जिंदा ले चलना है!"
जारी है...