MISTER AMEERZADA Ch. 2

MISTER AMEERZADA - Chapter 2

Posted by Shayna choudhary • Feb 22, 2025 07:24 PM

और जैसे ही सरिता राहुल के पास आकर बैठ गई, उसने जाने-अनजाने में उसका हाथ दो-तीन बार छुआ।

खिड़की पर खड़े राघव ने यह देख लिया, और उसकी आँखों के किनारे भीग गए। वहाँ रुके रहना अब उसके लिए असहनीय हो गया था, और वह वापस निकल गया। उसकी मज़दूरी का समय हो गया था। उसे आठ घंटे की मज़दूरी पूरी करनी थी; नहीं तो मालिक उसे पैसे नहीं देता।

इसीलिए, उसी गति से साइकिल चलाकर वह अपनी निर्माण स्थल पर पहुँच गया। उसने अपना काम शुरू कर दिया। छुट्टी के बाद, रात में वह घर लौटा। उसने देखा कि माँ-बेटी आराम से टीवी देख रही थीं।

राघव के आने पर, उन्होंने उसे पानी तक नहीं दिया। राघव ने पहले हाथ-मुँह धोए। हाथ-मुँह धोकर उसने पानी पिया; पानी पीकर नहा-धोकर वह खाना खाने बैठ गया। और सरिता को आवाज़ लगाकर बोला,

"सरिता, मुझे बहुत जोरों से भूख लगी है। कुछ खाने को ले आओ।"

तभी उसकी सास गुस्से से बोली,

"तेरा दिमाग खराब हो गया है? तुझे मेरी बेटी खाने के लिए देगी? तेरे क्या हाथ टूट गया है? क्या तू खुद खाना नहीं ले सकता है?"

उसने राघव को बुरी तरह से डाँटा।

राघव ने सरिता की ओर देखा। सरिता बेपरवाही से टीवी देख रही थी। राघव खुद उठा; किचन में जाकर उसने देखा कि खाने के नाम पर केवल थोड़े से चावल थे, और कुछ भी नहीं; दाल का एक दाना भी नहीं था। राघव को समझ नहीं आया कि वह खाली चावल कैसे खाए, और सारा दिन मज़दूरी करने के बाद उसे बहुत भूख लगी थी।

उसने थोड़े से चावल एक प्लेट में लिए और ऊपर हल्का सा नमक डालकर खाना शुरू कर दिया। भूख के मारे, नमक के चावल उसे किसी फ़ाइव-स्टार होटल के खाने से कम नहीं लगे। खाना खाने के बाद राघव ने पानी पिया और सीधा अपने कमरे में चला गया।

कमरे में जाकर उसने देखा कि वहाँ दो बिस्तर अलग-अलग पड़े थे। वह चौंक गया, लेकिन समझ गया कि उसकी पत्नी ने फिर दो बिस्तर कर दिए हैं। दो साल सरिता के साथ बिताने के बाद राघव इतना समझ चुका था कि जब उसे उसके शरीर की ज़रूरत होती थी, तब वह उसे अपने पास सुलाती थी; वरना दूर रखती थी।

पूरा दिन थका हुआ होने के कारण, राघव गहरी नींद में सो गया। करीब दो-तीन बजे रात में, राघव को अचानक खटपट की आवाज़ से आँख खुली। वह हैरान हुआ कि इस वक़्त कौन हो सकता है? आवाज़ तेज होने लगी, तो राघव ने देखा कि सरिता बेड पर नहीं थी। उसे लगा कि सरिता को कोई समस्या हो गई है। उठकर बाहर देखा, तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया। अब राघव ज़्यादा हैरान हो गया, और तभी उसे स्टोर रूम की लाइट जलती हुई दिखाई दी।

राघव के घर में सिर्फ़ तीन कमरे थे: एक कमरा राघव और सरिता का, एक उसकी सास का, और एक स्टोर रूम। और एक किचन था। एक मिडिल-क्लास परिवार था; उनका गुज़ारा चल रहा था। ज़्यादा-कम ₹400-₹500 रोज़ कमाकर वह सरिता के हाथों में रख दिया करता था। इस तरह उसे एक-दो वक़्त का खाना मिल जाता था। कभी नमक ज़्यादा होता था, कभी खाना ही नहीं होता था; कभी एक रोटी मिलती थी। इस तरह उसका गुज़ारा चल रहा था।

लेकिन राघव और क्या करता? वह अनाथ आश्रम में पला-बढ़ा था; उसका कोई बैकग्राउंड नहीं था। अनाथ आश्रम में कम से कम दो वक़्त का खाना मिल जाता था। लेकिन अब वह जवान हो चुका था, और अनाथ आश्रम में रहने में उसे शर्म आती थी। कभी-कभी उसका मन करता था कि वह आश्रम में ही भाग जाए, लेकिन उसे सरिता से मोहब्बत थी, इसलिए वह सरिता को छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहता था। वह सोचता था कि जब उसके बच्चे हो जाएँगे, तो सरिता का स्वभाव नरम पड़ जाएगा। यही ख्याल लिए वह अपनी शादी की चक्की खींच रहा था।

स्टोर रूम की लाइट जलती देखकर, वह हैरान हो गया, और आगे बढ़ने लगा। स्टोर रूम का दरवाज़ा बाहर से बंद था, और दरवाज़े के नीचे से हल्की लाइट दिखाई दे रही थी। लेकिन कमरे के अंदर से अजीब सी आवाज़ आ रही थी। राघव ज़्यादा हैरान था; उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह आवाज़ क्या है और कौन है वहाँ पर। तभी उसे एक आईडिया आया। स्टोर रूम के दरवाज़े के ऊपर छोटे-छोटे खाने से बनी जाली लगी हुई थी। राघव ने सोचा कि उसे वहाँ से देखना चाहिए।

यह सोचकर राघव ने डाइनिंग रूम से एक छोटा सा स्टूल दरवाज़े के पास रख दिया और खड़ा होकर जाली से अंदर झाँका, तो राघव के होश उड़ गए। उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई; उसे लगा मानो उसकी टाँगों में जान ही ना बची हो। राघव ने देखा कि उसकी पत्नी का बॉयफ्रेंड, राहुल, उसकी पत्नी को बुरी तरह से किस कर रहा था, और उसकी पत्नी उसका साथ दे रही थी। उसकी पत्नी के जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था, और दोनों एक-दूसरे को प्यार करने में मस्त थे।

यह देखकर राघव के होश ही उड़ गए। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या यह सच था? अब उसे समझ आया कि अजीब आवाज़ उसकी पत्नी की मदहोश आवाज़ थी। राघव एक जगह जम गया और संतुलन खोकर स्टूल समेत नीचे गिर पड़ा।

सरिता और राहुल ने किसी के गिरने की आवाज़ सुनी, तो जल्दी से अलग हुए। उन्होंने कपड़े पहने, और जैसे ही सरिता ने दरवाज़ा खोला और राघव को ज़मीन पर गिरा देखा, वह हैरान हो गई। लेकिन तभी उसकी माँ, राघव की सास, वहाँ आ गई और सब कुछ समझ गई। और सरिता की ओर देखकर बोली,

"तेरा दिमाग ख़राब हो गया है? यह क्या कर रही थी तू? हाँ, अपने बेडरूम में यह सब नहीं कर सकती थी? और इस फ़टीचर को इस स्टोर रूम में सोने के लिए नहीं छोड़ सकती थी क्या?"

यह सुनकर राघव की आँखें हैरत से फैल गईं। उसने सोचा था कि शायद उसकी माँ उसे रोकेगी, लेकिन उसकी माँ कह रही थी कि उसे बेडरूम में यह सब करना चाहिए था। राहुल मुस्कुराते हुए अपनी पैंट की ज़िप बंद करने लगा और राघव के सामने ही सरिता की कमर पर हाथ रखकर उसके होठों को चूमते हुए बोला,

"क्या यार! इस फ़टीचर ने सारा मज़ा किरकिरा कर दिया। चलो, क्यों ना एक पारी तुम्हारे बेडरूम में खेली जाए? बोलो, क्या ख़्याल है तुम्हारा?"

सरिता ने बेशर्मी से कहा,

"हाँ-हाँ! क्यों नहीं? चलो, चलते हैं।"

यह कहकर दोनों ज़मीन पर गिरे राघव को लाँघकर, हाथ पकड़कर बेडरूम में चले गए। राघव की सास मुस्कुराकर यह सब देख रही थी और राघव की ओर देखकर बोली,

"क्या हुआ? आँखें फ़ाड़-फ़ाड़कर क्या देख रहा है? जब तू अपनी बीवी को किसी तरह का कोई सुख दे ही नहीं सकता है, हाँ, तो तेरी बीवी तो कहीं और जाएगी ही ना। और तेरे पास है ही क्या? हमारे टुकड़ों पर पलता है तू और मज़दूरी करके ₹400 लाकर हमारे हाथों पर रखता है। क्या होता है उस ₹400 में? हाँ, अब मेरी एक बात कान खोलकर सुन ले। तू अपना ठिकाना कहीं और कर ले; बहुत हुआ। और वह जो टेबल है ना, वह तलाक के पेपर रखे हुए हैं। अरे, मैं तो बहुत पहले ही तेरा और सरिता का तलाक करना चाहती थी, लेकिन सरिता ही करने को तैयार नहीं थी। अब जैसे-तैसे उसे समझाया है और अब उसे समझ में आ गया है कि राहुल तुझसे हर लिहाज़ में बेहतर है। और अब सरिता राहुल से शादी करेगी और तू तलाक के पेपर उठा और अपना बोरिया-बिस्तर बाँध और जा यहाँ से। अगली सुबह जब मैं आँखें खोलूँ, तो मैं तेरी यहाँ शक्ल ना देखूँ। अब तेरी मर्ज़ी; अंदर बेडरूम में तो वह दोनों थोड़ी मौज-मस्ती कर रहे होंगे। तेरी मर्ज़ी है; मैं तो बेडरूम के बाहर बैठकर उनकी आवाज़ सुनूँ या फिर अभी और इसी वक़्त यहाँ से निकल जा।"

यह कहकर उसकी सास अपने कमरे में सोने चली गई, और राघव थोड़ी देर बाद उठा। एक नज़र बेडरूम की ओर देखकर उसने तलाक के पेपर उठा लिए और जल्दी से चप्पल पहनकर सड़कों पर निकल पड़ा। रात का तीसरा पहर था, लगभग चार बज चुके थे। राघव ने सोच लिया था कि वह अपनी बेमानी ज़िन्दगी खत्म कर देगा, इस गरीबी, इस ज़िन्दगी, इस ज़िल्लत से निजात पा लेगा। यह सोचते हुए वह बदहवास, कीचड़ में लथपथ, चल रहा था। शहर के बाहर जाकर उसने देखा कि अभी तक कोई गाड़ी नहीं आई थी। उसने सोचा कि किसी गाड़ी के आगे कूदकर जान दे देगा, लेकिन फिर सोचा कि क्यों ना पास की नदी में कूदकर जान दे दे? इसलिए राघव नदी की ओर बढ़ने लगा। उसने मन बना लिया था कि आज वह जान देकर ही रहेगा, क्योंकि पत्नी की बेवफाई के बाद उसकी ज़िन्दगी में कुछ नहीं बचा था। वह एक लानत भरी ज़िन्दगी जी रहा था। जैसे ही राघव आगे बढ़ा, नदी से थोड़ी दूरी पर, अचानक 15-20 गाड़ियों ने आकर उसे घेर लिया।।।।।।

आखिर कौन था उन गाड़ियों में? जानने के लिए बने रहिए दोस्तों!

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