Chapter 16
मल्लिका - शक्ति महलों की - Chapter 16
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शाम ढले ये सोच के बैठे हम अपनी तस्वीर के पास सारी ग़ज़लें बैठी होंगी अपने अपने मीर के पास ***** सभी सैनिक सादर की तरफ अपने कदम बढ़ा देते हैं और वहां पर घोषणा होती है कि यह युद्ध अब