\"His doll\"..... (Beyond the possession) - Chapter 3
आरव (अयाना की आंखों में देखते हुए): मैं नहीं जानता कि लोग क्या कहते हैं… और क्या सच या क्या झूठ है… मैं जानता हूँ तो बस इतना… कि आई बिलीव यू… मुझे तुम पर खुद से ज़्यादा भरोसा है… फिर चाहे दुनिया कुछ भी कहे, मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता!!!
अपनी बात कहकर आरव ने अयाना के माथे से अपना माथा टिकाया और वहीं खड़ा रहा। अयाना कुछ पल खामोशी से खड़ी रही, जब तक उसे यह एहसास नहीं हुआ कि वह बीच रास्ते पर खड़ी है और इस वक्त आरव उसके साथ है। वह शुक्रगुज़ार थी कि तेज बारिश और अंधेरे की वजह से किसी ने भी उसे आरव के साथ इतने करीब नहीं देखा था। वरना यहाँ लोगों को राई का पहाड़ बनाने में देर नहीं लगती। अयाना को जब आरव के साथ अपनी निकटता का एहसास हुआ, तो वह फ़ौरन उससे दूर हो गई, कुछ कदम पीछे हट गई। हालाँकि आरव को अयाना का अचानक खुद से दूर होना अच्छा नहीं लगा, पर फिर भी उसने उस वक्त अयाना से कुछ नहीं कहा। कुछ पल तक दोनों के बीच बिल्कुल खामोशी छा गई। तभी उस मद्धम रोशनी में एक टैक्सी की हेडलाइट की रोशनी उनकी दिशा में पड़ी और वह टैक्सी उनसे कुछ दूरी पर जाकर रुक गई। कुछ पल बाद उस टैक्सी में से अयाना की दोस्त कशिश नीचे उतरी। उसे देख अयाना जल्दी से उसकी ओर कदम बढ़ाते हुए उसके गले लग गई।
कशिश (थोड़ा परेशान होते हुए): क्या हुआ है आयु… तू ठीक तो है ना???… और इस वक्त तू घर के बाहर क्या कर रही है???… और आरव, आरव यहाँ क्या कर रहा है????… कहीं तुम दोनों एक साथ तो नहीं?????
कशिश की बात सुनकर अयाना ने अपनी गर्दन जल्दी से ना में हिलाई और उसे पूरी बात बताई। अयाना की बात सुनकर कशिश का रिएक्शन भी वही था जो कुछ पल पहले आरव का था। लेकिन चूँकि कशिश काफी वक्त से अयाना को जानती थी, इसलिए वह अपनी दोस्त को झुठला नहीं सकती थी। क्योंकि वह जानती थी कि अयाना ऐसी मनगढ़ंत या झूठी बातें करने वालों में से बिल्कुल भी नहीं है। पर फिर भी जो कुछ अयाना कह रही थी, उस पर विश्वास करना भी थोड़ा मुश्किल था। कुछ पल बाद आरव वहाँ से उन दोनों से विदा लेकर वापस चला गया और कशिश अयाना के साथ अपने घर की तरफ़ चल पड़ी। तभी लाइट भी आ गई। हालाँकि अयाना अभी भी घर में अंदर जाने से घबरा रही थी, मगर कशिश ने उसे खुद के साथ होने का दिलासा देते हुए उसे अंदर चलने के लिए कहा। कशिश ने अयाना की तसल्ली के लिए पूरे घर को अच्छे से चेक किया और फिर दरवाज़े को लॉक करते हुए दोनों अंदर चली गईं। कशिश ने फ़्रेश होने के बाद अयाना और अपने लिए कॉफ़ी बनाई और मग में निकालकर बाहर लिविंग एरिया में आकर एक कप अयाना की ओर बढ़ाया और उसे बर्थडे विश किया और फिर खुद भी वहीं सोफ़े पर बैठकर अपनी कॉफ़ी का लुत्फ़ उठाने लगी।
कशिश (अपनी कॉफ़ी का सिप लेते हुए): आयु, तुझे नहीं लगता कि तुझे आरव को एक मौका देना चाहिए… आई मीन, जब से तू कॉलेज में आई है… सब जानते हैं कि आरव तेरे लिए पागल है और असल में वो तेरे लिए क्या फ़ील करता है… और जब से तू कॉलेज में आई है, तब से ही आरव ने किसी दूसरी लड़की की ओर देखा तक नहीं है और ना ही उन्हें अप्रोच किया… हालाँकि उसके पास ऑफ़र्स या लड़कियों की कमी नहीं है… लेकिन वह जिसके पीछे सारी लड़कियाँ फ़िदा हैं, वह तुझ पर फ़िदा है आयु… उस जैसे मोस्ट वॉन्टेड मुंडे को कौन नहीं पाना चाहेगा… एंड यू ऑल्सो नो दैट कि वह हर तरीके से परफ़ेक्ट है… तो फिर आखिर प्रॉब्लम कहाँ है???
अयाना (गंभीरता से): तू जानती है कशिश, मेरे ना कहने की वजह क्या है… और भूल मत कि अतुल और जिग्नेश के साथ क्या हुआ था… मुझे आज भी याद है कॉलेज का वह फ़र्स्ट डे जब अतुल और जिग्नेश ने मेरा रास्ता रोककर मुझे परेशान करने की कोशिश की थी… और उसके बाद उन दोनों के साथ जो कुछ भी हुआ था, उसे याद करते हुए आज भी मेरी रूह काँप उठती है… और तभी से यह आवाज़ वाला शख़्स मेरी ज़िन्दगी में आया था… और आज भी उसके कहे शब्द मेरे कानों में गूँजते हैं… उसका कहा एक-एक लफ़्ज़ मेरे ज़हन में आज भी एकदम ताज़ा है!!!
(फ़्लैशबैक…)
अयाना उस दिन इंदौर से अपनी पढ़ाई और सपने को पूरा करने के लिए दिल्ली जा रही थी। उसकी माँ और उसके कुछ ख़ास दोस्त उसे स्टेशन पर ट्रेन में बिठाने के लिए आए थे। अयाना की माँ की आँखें अपनी बेटी के दूर जाने की वजह से नम थीं। हालाँकि वह खुश थी कि उनकी बेटी की काबिलियत के बल पर उसे दिल्ली के एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल चुका था, लेकिन क्योंकि अयाना ही उनकी अकेली फ़ैमिली थी और पहली बार उसका इस तरीके से उनसे दूर जाना उन्हें खल रहा था। हालाँकि वह भी अयाना के साथ जाना चाहती थी, लेकिन वह एक स्कूल में अध्यापिका थी और इस वक्त बच्चों की परीक्षाएँ चल रही थीं, तो उन्हें बीच में छोड़कर जाना उनके लिए पॉसिबल नहीं था और अयाना को अकेले ही दिल्ली जाना पड़ रहा था।
अयाना (अपनी माँ को उदास देखकर उन्हें साइड हग करते हुए): माँ, आप क्यों बेवजह परेशान हो रहे हैं… मैं छोटी बच्ची थोड़ी हूँ… माँ, आप बिल्कुल बेफ़िक्र रहें… मैं अपना पूरा ध्यान रखूँगी और दिल्ली पहुँचते ही आपको कॉल कर दूँगी!!
सावित्री देवी (प्यार से अयाना का गाल छूकर): बच्चे चाहे कितने ही बड़े क्यों ना हो जाएँ… माँ और उसके दिल के लिए हमेशा छोटे और बच्चे ही रहते हैं!!!
अयाना (कसकर अपनी माँ को गले लगाते हुए): अगर आप ऐसे उदास रहेंगे ना… तो मैं सच्ची बोल रही हूँ… कि मैं भी रो पड़ूँगी और फिर मैं यहाँ से कहीं भी नहीं जाऊँगी!!!
सावित्री देवी (अपनी आँखों के कोने साफ़ करते हुए): पगली, यह तो बस यूँ ही है… मैं रो नहीं रही हूँ और ऐसे कैसे नहीं जाएगी तू… आखिर तूने इतनी मेहनत की है… अपने सपने को पूरा करने के लिए… यहाँ तक पहुँचने के लिए… तो अब जब तुझे अपने सपने को पूरा करने के लिए रास्ता मिल रहा है… तो अपनी मंज़िल पर पहुँचे बगैर ही… आधे रास्ते से कैसे वापस आ सकती है तू… जा अब और हाँ, दिल्ली पहुँचते ही मुझे ख़बर कर देना… और अगर वहाँ जाकर कोई भी परेशानी या दिक्कत हो तो फ़ौरन मुझे कॉल कर देना… मैं वहाँ आ जाऊँगी… और हाँ, वक़्त पर खाना ज़रूर खाना… 24 घंटे ज़्यादा पढ़ाई का कीड़ा बनने की ज़रूरत नहीं है… टाइम से आराम करना… थोड़ा इधर-उधर घूम भी लेना… एक बात और, जल्दी से किसी पर वहाँ भरोसा मत करना… सुना है कि बड़े शहरों में बाहर से आए हुए लोगों को आसानी से बेवकूफ़ बना देते हैं… और उन्हें लूट लेते हैं… तो आराम से और सावधानी के साथ रहना और…
अयाना (अपनी माँ को बीच में ही टोकते हुए हँसकर): और मैं अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखूँगी… थोड़ी सी भी तबीयत ख़राब होते ही फ़ॉरेन डॉक्टर के पास जाऊँगी… अगर कोई भी परेशानी आती है… तो तुरंत आपको फ़ोन करूँगी… दिन में दो से तीन बार आपको फ़ोन करना है… अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है… लेकिन वक़्त पर खाना है… वक़्त पर सोना है… और वगैरह वगैरह वगैरह… (प्यार से अपनी माँ के गाल खींचते हुए)… मेरी प्यारी माँ, मुझे अच्छे से ये सारी बातें रट गई हैं… क्योंकि पिछले 1 हफ़्ते से आप 10 बार दिन में मुझे यही नसीहत देते आ रहे हो!!!!
सावित्री देवी (झूठ-मुँठ की नाराज़गी दिखाते हुए): हाँ हाँ, उड़ा ले अभी तो तू मेरा मज़ाक उड़ा ले… लेकिन जब मैं कभी नहीं रहूँगी तेरी ज़िन्दगी में… तब तुझे समझ आएगी मेरी अहमियत और मेरा प्यार!!
अयाना (नाराज़गी से अपनी माँ को कसकर गले लगाते हुए): ख़बरदार माँ, जो आपने फिर कभी भी दोबारा अपने मुँह से ऐसी बात भी निकाली… तो मैं आपसे कभी बात नहीं करूँगी!!!
सावित्री देवी: अच्छा बाबा, सॉरी… (एक पल रुककर)… अच्छा ठीक है, तुम्हारी ट्रेन का वक़्त हो रहा है… तुम जाओ अब और ध्यान रखना अपना…!!!
अयाना (हल्के से मुस्कुराकर): जी माँ और आप भी अपना ध्यान रखिएगा!!!
सावित्री देवी: तुम मेरी चिंता बिल्कुल मत करो, मैं अपना ध्यान रखूँगी, बस तुम वहाँ अच्छे से रहना और खूब मन लगाकर पढ़ना!!!
अयाना (अपनी माँ से अलग होते हुए): जी माँ!!
इसके बाद अयाना अपने बाकी दोस्तों से भी विदा लेकर ट्रेन से दिल्ली निकल गई। दिल्ली में अपने किसी जान-पहचान वाले की मदद से पहले ही अयाना ने वह किराए का घर रहने के लिए ले लिया था जिसमें कशिश पहले से ही उसकी रूममेट थी। वैसे तो दोनों ने उस घर में बने एक-एक रूम को रेंट पर लिया था, लेकिन साथ रहते-रहते और एक ही कॉलेज में पढ़ते हुए वक़्त गुज़रने के साथ ही दोनों की दोस्ती काफी अच्छी और गहरी हो गई थी और दोनों उस पूरे घर में मिल-जुलकर बहनों की तरह रहने लगी थीं। जब अयाना दिल्ली पहुँची, तो कॉलेज खुलने में अभी 4 से 5 दिन बाकी थे। तब तक अयाना ने अपने घर को सेट किया और अपने लिए कुछ शॉपिंग की जिसमें कशिश ने उसकी पूरी हेल्प की। देखते ही देखते चार-पाँच दिन भी गुज़र गए और वह दिन आ गया जब पहले ही दिन अयाना को कॉलेज जाना था। सुबह उठकर अयाना जल्दी से नहा-धोकर फ़्रेश हुई और उसने अपनी माँ को कॉल किया और उनसे आशीर्वाद लेकर कशिश के साथ कॉलेज के लिए निकल पड़ी। क्योंकि अयाना का एडमिशन थोड़ा लेट हुआ था, तो बाकी स्टूडेंट और न्यू एडमिशन छुट्टियों से पहले ही कॉलेज जाना शुरू कर चुके थे। अयाना कशिश के साथ कॉलेज पहुँची, तो कशिश अपने किसी काम से फ़ैकल्टी की ओर चली गई और उसने अयाना को क्लासरूम में जाने के लिए रास्ता बता दिया। अयाना अपनी क्लास में जा ही रही थी कि तभी दो लड़कों ने उसका रास्ता रोक लिया।
पहला लड़का (अयाना को देखते हुए): न्यू एडमिशन?
अयाना: जी!
दूसरा लड़का (गहरी सी मुस्कान के साथ): ओहो!… वेलकम… वेलकम… मिस?
अयाना: अयाना… अयाना शर्मा!
पहला लड़का: नाइस नेम… मगर अयाना जी, शायद आपको नहीं पता… लेकिन न्यू एडमिशन के लिए यहाँ कुछ रूल्स एंड रेगुलेशंस होते हैं… जिन्हें फ़ॉलो किए बिना वह अपनी क्लास में एंट्री नहीं कर सकते!!!
अयाना (असमंजस से): कैसे रूल्स और रेगुलेशंस?
दूसरा लड़का (अयाना को परेशान करते हुए): यही कि आपको अपनी क्लास में एंट्री लेने से पहले… वह काम करना पड़ेगा जो हम कहेंगे!!!
अयाना (गंभीरता से): आप शायद भूल रहे हैं लेकिन रैगिंग करना एक जुर्म है… और अगर मैंने आपकी कंप्लेंट कर दी तो आप कॉलेज से रिस्ट्रिक्टेड भी हो सकते हैं!!
इतना कहकर जैसे ही अयाना अपनी क्लास की ओर बढ़ने लगी, उन दोनों में से एक लड़के ने अयाना का हाथ पकड़ लिया।
अयाना (गुस्से से): हाथ छोड़ो मेरा, वरना प्रिंसिपल सर से जाकर तुम्हारी कंप्लेंट कर दूँगी!
पहला लड़का (हँसते हुए): जाओ कर दो, बेशक कर दो… लेकिन प्रिंसिपल क्या, बड़े से बड़ा इंसान भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता!!!
दूसरा लड़का: वैसे तो तुमने हमारी बात ना मानने की हिम्मत की है… तो तुम्हारी सज़ा बड़ी होनी चाहिए… लेकिन क्योंकि तुम जैसी ख़ूबसूरत लड़कियों पर हमारा दिल जल्दी मेहरबान हो जाता है… तो चलो तुम्हें भी हमने माफ़ किया… और बस एक छोटी सी सज़ा देते हुए… हम तुम्हें क्लास में जाने की इजाज़त दे देते हैं… बस तुम्हें करना इतना है… कि हम दोनों को किस करना है… और फिर तुम बिना किसी रुकावट के क्लास में जा सकती हो!!!
इतना कहकर वह दूसरा लड़का पहले लड़के के हाथ पर ताली देते हुए बेशर्मी भरी हँसी हँसने लगा और वहाँ मौजूद आस-पास के स्टूडेंट की नज़रें भी अब अयाना और उन दो लड़कों पर टिक गई थीं और सब मन ही मन यही सोच रहे थे कि अयाना अब इस रैगिंग से नहीं बच पाएगी और जब तक वह उन दो लड़कों की बात को पूरा नहीं कर देगी, वह उसे इसी तरह परेशान करते रहेंगे। क्योंकि ये दोनों लड़के पावरफ़ुल फ़ैमिली से बिलॉन्ग करते थे। उनमें से एक लड़का जिग्नेश, डीन का बेटा था और दूसरा अतुल, यहाँ के एक नामी पॉलिटिशियन का बेटा था और उन दोनों को ही किसी बात का या किसी भी तरह का कोई डर नहीं था। क्योंकि वे जानते थे कि उन्हें बचाने के लिए उनके बाप यहाँ मौजूद हैं और यही वजह थी कि उनकी इतनी हिम्मत बढ़ी हुई थी कि वे खुलेआम स्टूडेंट की रैगिंग करने या उन्हें परेशान करने से ज़र्रा भर भी नहीं कतराते थे। लेकिन वे कहाँ जानते थे कि इस बार जिस लड़की का रास्ता उन्होंने रोका है… उस लड़की का रास्ता रोकने की वजह से उन्हें बहुत जल्द बहुत ही बड़ी और सोच से परे की कीमत चुकानी पड़ेगी।