My Boss is my Secret Lover! - Chapter 3
अगले दिन, एस के डिजाइनिंग हाउस में शिविका अपने केबिन में बैठी हुई थी। वह बहुत परेशान थी। उसने दोनों हाथों से अपना सिर पकड़ रखा था। तभी दरवाज़ा खुला और एक आदमी अंदर आया। वह ठीक-ठाक दिखने वाला, औसत कद-काठी का व्यक्ति था, उसकी उम्र लगभग तीस साल होगी।
उसे अंदर आते देख शिविका चिल्लाई, "व्हाट द हेल ऑफ़ ऑल दिस डिजाइन्स, जतिन! इनमें से एक भी ढंग का नहीं है! इसके साथ ही, अब तक मेरे पर्सनल असिस्टेंट के काम के लिए एक भी ढंग का कैंडिडेट सेलेक्ट नहीं किया तुम लोगों ने! मैंने जितने भी इंटरव्यू दिए हैं, सब एक से बढ़कर एक डफर थे!"
"आई एम सॉरी मैम! मैं हेड डिजाइनर को बोल कर आता हूँ इंटरव्यू के लिए। अभी एक कैंडिडेट और बचा है। आप उसका इंटरव्यू ले कर देख लीजिए। बाकी फिर कल देखते हैं।" इतना कहकर जतिन ने शिविका के सामने रखी टेबल पर पड़े सारे कागज़ समेटे, उन्हें फाइल में रखा और केबिन से बाहर निकल गया।
जतिन के जाने के कुछ सेकंड बाद, कमरे का दरवाज़ा फिर खुला। शिविका ने बिना उधर देखे कहा, "नहीं, जतिन! फिर से नहीं! मुझे अब और कोई बहाना नहीं सुनना है।"
"लेकिन मेरा नाम तो जतिन नहीं है, मैम!" एक बिल्कुल अलग, गहरी आवाज़ शिविका के कानों में पड़ी, जो जतिन की आवाज़ से बिलकुल अलग थी। शिविका ने नज़र उठाई और दरवाज़े पर खड़े शख्स को देखकर तुरंत पहचान लिया। "तुम!! तुम यहाँ...? डोंट टेल मी पापा ने तुम्हें यहाँ पर मुझसे मिलने के लिए भेजा है।"
"व्हाट मैम! किसके पापा?" उस आदमी ने एकदम क्लूलैस चेहरे से कहा।
उसके चेहरे के भाव देखकर शिविका समझ गई कि उसे शायद इस बारे में कुछ भी पता नहीं है। लड़के की पर्सनैलिटी काफी अच्छी थी, लेकिन उसके चेहरे पर बहुत तनाव भी दिख रहा था। ऐसा लग रहा था कि वह काफी दिनों से ठीक से सोया नहीं है; उसका चेहरा काफी थका हुआ लग रहा था।
शिविका ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। यह वही लड़का था जो कल रात पार्टी में उसे मिला था, और जिससे उसके पिता ने उसकी शादी तय की थी। इसीलिए उसे यहाँ देखकर शिविका के मुँह से तुरंत यह सवाल निकल गया।
कल पार्टी में जब शिविका उससे मिली थी, तब भी वह उसे कुछ जाना-पहचाना सा लग रहा था, और आज भी उसे देखकर शिविका को वैसा ही लग रहा था। शिविका ने इस बात पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और उसे अपने पिता की बात याद आ गई कि उस लड़के के पिता उनकी कंपनी में काम करते थे। शिविका को लगा कि शायद आते-जाते उसने उसे देखा होगा, इसीलिए उसे ऐसा लग रहा है।
वह लड़का भी अब तक शिविका को पहचान गया था। पिछली रात की पार्टी की बात याद करके, उसने बेचारे जैसी शक्ल बनाते हुए कहा, "आई एम सॉरी फॉर लास्ट नाइट मैम! एंड मे आई कम इन... मैं यहाँ पर जॉब इंटरव्यू के लिए आया हूँ। आप पिछली बात को लेकर मुझे जज नहीं करेंगी।"
उसकी इस बात पर शिविका को हँसी आ गई। लेकिन अपना एक हाथ चेहरे पर रखकर अपनी हँसी रोकने की पूरी कोशिश करते हुए, उसने एकदम सीरियस टोन में कहा, "नो नो, कम इन। सिट डाउन प्लीज़। एंड डोंट वरी अबाउट दैट! फर्स्ट इंप्रेशन इज़ लास्ट इंप्रेशन, सब ऐसा बोलते हैं, लेकिन मैं फर्स्ट इंप्रेशन और लुक्स से ज़्यादा नेचर और बिहेवियर में मानती हूँ, और काम के लिए तो उससे भी ज़्यादा टैलेंट और हार्ड वर्क में..."
शिविका का मन नहीं कर रहा था कि जिस लड़के से उसकी शादी होने वाली है, उसके लिए वह अपनी सेक्रेटरी का जॉब इंटरव्यू ले, लेकिन उसकी शक्ल देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसे इस जॉब की बहुत ज़रूरत है। इसलिए शिविका सीधे तौर पर उसे मना नहीं कर पाई।
असल में, शिविका उससे शादी ही नहीं करना चाहती थी। इसलिए उसने फिलहाल उसे अपने पति के रूप में नहीं सोचा और उससे इस बारे में कोई बात भी नहीं की। वह एकदम प्रोफ़ेशनली उसका इंटरव्यू लेने लगी, लेकिन वह लड़का बीच-बीच में शिविका की तरफ़ देख रहा था और उसकी बातों के बारे में सोच रहा था।
शिविका ने उसका बायोडाटा देखकर कहा, "ओह, यू आर वेल क्वालिफाइड, बट नॉट इनफ एक्सपीरियंस्ड फॉर दिस जॉब। इससे पहले तुम किसी के सेक्रेटरी नहीं रहे हो।"
"यस मैम! मुझे पर्सनल असिस्टेंट या सेक्रेटरी की जॉब का कोई एक्सपीरियंस नहीं है, लेकिन मैं आपसे इतना प्रॉमिस कर सकता हूँ कि मैं आपको डिसएप्वाइंट नहीं करूँगा। प्लीज़ गिव मी दिस जॉब, आई रियली नीड दैट!" लड़के ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा। शिविका ने फाइल में उसका नाम पढ़ते हुए कहा, "मिस्टर करण मल्होत्रा, सन ऑफ़ मिस्टर आशीष मल्होत्रा... वेट, आपके फादर यहाँ पर काम कर चुके हैं हमारी कंपनी में, ऐज़ अ डिजाइनिंग कंसलटेंट..."
"यस मैम! उन्होंने यहाँ पर दस सालों तक काम किया है, और आपके पापा के साथ उनके काफी अच्छे रिलेशन भी हैं।" करण ने जैसे उसे नौकरी पर रखने के लिए एक और वजह देते हुए कहा।
यह बात सुनकर शिविका ने हाथ में पकड़ी हुई फाइल टेबल पर रखते हुए कहा, "करण, तुम्हें क्या लगता है? हम इस तरह से रिक्वेस्ट करोगे और अपने पापा का नाम मेरे पापा के साथ लोगे तो मैं तुम्हें आसानी से काम पर रख लूँगी?"
"नो नो मैम! मेरा ऐसा कोई भी इरादा नहीं है, और मैं किसी की सिफ़ारिश पर भी यहाँ पर नहीं आया हूँ। मैंने जॉब वैकेंसी देखी और मुझे इस वक्त जॉब की ज़रूरत है, तो बस यह इंटरव्यू देने आया हूँ। बाकी आपकी मर्ज़ी..." करण ने अपनी बात समझाते हुए कहा।
शिविका उसकी तरफ़ देखते हुए अपने मन में बहुत कुछ सोच रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि करण को सचमुच शादी की बात के बारे में कुछ भी पता नहीं है या फिर वह सिर्फ़ उसके सामने अनजान बनने का नाटक कर रहा है।
यह सोचते हुए शिविका अपनी जगह से उठी और करण की तरफ़ बढ़ते हुए बोली, "ठीक है, अगर मैं तुम्हें एक चांस देती हूँ तो क्या तुम अपने आप को प्रूफ़ करोगे? क्योंकि इस जॉब में तुम्हें कोई वीकली छुट्टी नहीं मिलेगी और मेरे साथ तुम्हें हर जगह पर जाना-आना होगा। इज़ दैट ओके फॉर यू? क्योंकि मुझे बाद में कोई एक्सक्यूज़ नहीं सुनना।"
शिविका की बात सुनकर करण ने थोड़ा सोचते हुए उसकी तरफ़ देखकर पूछा, "इसका मतलब मेरी जॉब फ़ाइनल हो गई है? थैंक यू सो मच मैम, और मैं आपको बिल्कुल भी डिसएप्वाइंट नहीं करूँगा, आई रियली..."
करण को खुश होते देख शिविका ने उसे हाथ के इशारे से चुप रहने को कहा, "ओ वेट... वेट... इतना एक्साइटेड होने की ज़रूरत नहीं है। तुम अभी इस जॉब के लिए फ़ाइनल नहीं हुए हो। मैं बस तुम्हें सारे टर्म्स एंड कंडीशन बता रही हूँ कि अगर तुम फ़ाइनल होते हो तो बाद में कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। क्योंकि मेरे पास इतना टाइम नहीं है कि मैं एक पोस्ट के लिए बार-बार इंटरव्यू लेती रहूँ।"
यह बात सुनकर करण का मुँह उतर गया। शिविका उसे समझने की कोशिश करने लगी। इतना सोचते हुए शिविका उसकी तरफ़ देखते हुए कुछ कदम आगे बढ़ी और उसकी हील फ्लिप हो गई। वह लड़खड़ा गई। करण ने उसे जल्दी से पकड़ लिया क्योंकि उसका ध्यान भी उसकी तरफ़ ही था।
"आर यू ओके मैडम?" करण ने उसका हाथ पकड़े हुए पूछा। इस वक़्त शिविका का चेहरा उसके चेहरे के सामने था, और वह आधी झुकी हुई, करण के सामने तेढ़ी खड़ी थी, जिसे करण ने बड़ी मुश्किल से गिरने से बचाया था।
यह बात सुनकर शिविका जल्दी से सीधी खड़ी हुई, लेकिन उसके पैर में शायद मोच आ गई थी। इसलिए उसने खड़े होने के लिए टेबल का सहारा लिया। इस तरह से करण के सामने लड़खड़ा कर गिर जाने की वजह से वह थोड़ी शर्मिंदा महसूस कर रही थी।
इसलिए उसने करण की तरफ़ देखे बिना कहा, "यू कैन गो नाउ! वी हैव योर फोन नंबर... तुम्हें कंपनी की तरफ़ से कन्फ़र्मेशन कॉल आ जाएगा।"
करण ने चुपचाप अपनी कुर्सी से उठकर धीमी आवाज़ में कहा, "थैंक्यू मैम, इट्स अ नाइस मीटिंग यू!" इतना बोलकर वह शिविका के केबिन से बाहर निकल गया।
उसके जाने के बाद शिविका वापस अपनी चेयर पर बैठ गई और सोचने लगी कि यह सब किस्मत का खेल है या जानबूझकर उसके साथ हो रहा है। क्या जब करण को पता चलेगा कि उसकी शिविका से शादी होने वाली है, तब भी वह उसके असिस्टेंट का काम करना चाहेगा?
करण कैसा इंसान है? उसके परिवार, उसकी लाइफ़ में क्या है, इस बारे में शिविका को कुछ भी नहीं पता था। लेकिन उसकी सारी क्वालिफ़िकेशन्स और टैलेंट जॉब प्रोफ़ाइल से मैच होती थीं, इसलिए उसने कुछ सोचकर करण को यह जॉब देने का फैसला किया।
इसलिए उसके जाने के आधे घंटे बाद ही उसने अपने मैनेजर को कॉल करके केबिन में बुलाया और करण की फाइल देते हुए कहा, "इस कैंडिडेट को फ़ाइनल कर लो, और कल इसे कॉल करके ऑफ़िस बुलाकर सारा काम समझा देना।"
मैनेजर फाइल लेकर चला गया। शिविका इस बारे में सोच ही रही थी कि कुछ मिनट बाद, लगभग उसी उम्र की एक लड़की ने उसके केबिन के दरवाज़े पर क़ोका दिया। बिना कुछ बोले उसने दरवाज़ा थोड़ा खोला और अंदर झाँकने लगी। वह शिविका की तरफ़ ऐसे देख रही थी जैसे वह उसका मूड और वहाँ की सिचुएशन समझने की कोशिश कर रही हो। उसने अंदर आने के लिए नहीं पूछा, और शिविका ने उसे चुपचाप अंदर आने का इशारा किया।
क्रमशः