Billionaire secret husbands - Chapter 1
मुंबई
एक आलीशान बिल्डिंग के पास एक BMW की लेटेस्ट एडिशन कार आकर रुकी। उसमें से लगभग पैंतालीस वर्षीय एक व्यक्ति उतरा। उसने काले रंग का बिज़नेस सूट पहन रखा था। साथ ही, उसके हाथ में लेटेस्ट एडिशन की रोलेक्स घड़ी थी।
वह आदमी विदर्भ ओबेराय था। वह ओबेराय इंडस्ट्रीज़ का मालिक था। उसकी कंपनी इंडिया की टॉप कंपनी मानी जाती थी। यह बिल्डिंग ओबेराय इंडस्ट्रीज़ का ऑफिस थी, जो बहुत बड़ा और लग्ज़ीरियस था। इसके इंटीरियर में काफी महँगी चीजों का उपयोग किया गया था।
वह ऑफिस में जाकर अपना काम करने लगा।
रात के समय वह अपने घर गया। उसका घर एक बहुत ही बड़ा विला था, जो एक महल जैसा था। वह अपने आप में बहुत सुंदर और लग्ज़ीरियस था। उसके इंटीरियर्स में सारी महँगी चीजों का इस्तेमाल हुआ था। वह विला अपने आप में वहाँ रहने वाले लोगों की संपन्नता को बताने के लिए काफी था।
विदर्भ तेज़ी से घर के अंदर आया। जैसे ही वह अंदर आया, उसने देखा कि उसका पूरा परिवार हाल में जमा था।
वह भी फ्रेश होकर उन सब के बीच बैठ गया। उसके बगल में उसकी पत्नी शालिनी थी। वह एक सोशल वर्कर और फैशन हाउस की ओनर थी। उनका सिर्फ़ एक ही बेटा था। उसका नाम वैश्विक था। वह अभी तक ऑफिस से नहीं आया था।
विदर्भ के साथ उसका छोटा भाई वरद था, जो अभी तैंतालीस वर्ष का था। उसकी पत्नी का नाम कशिश था। कशिश एक हाउसवाइफ़ थी। उसने पूरे घर को बहुत अच्छे से संभाला था। वह घर के काम में परफेक्ट थी। उन दोनों का एक बेटा कौशल था, जो अठारह वर्ष का ही था। उसकी बेटी सत्रह वर्ष की थी, उसका नाम कृतिका था।
उनके साथ ही उसके पिता वैदिक भी थे, जिनकी उम्र लगभग पैंसठ वर्ष थी। वे अभी भी हेड ऑफ़ फैमिली थे। इस फैमिली के सारे फैसले लेने का अधिकार सिर्फ़ और सिर्फ़ इनके पास ही था।
इनकी पत्नी का नाम विदिशा था। इनकी आयु लगभग साठ वर्ष होगी। इस उम्र में भी ये बहुत सुंदर थीं। ये एक सोशल वर्कर थीं।
वे सब मिलकर शाम का नाश्ता कर रहे थे। तभी विदिशा ने कहा, "शालू, विशू आया है?"
"मम्मी जी, उसका फ़ोन आया था कि उसकी दो मीटिंग हैं, वह आज घर नहीं आएगा।" शालिनी ने कहा।
विदिशा ने अपने सिर को हिलाकर उसे मान लिया और बातें करनी लगीं।
सनशाइन होटल
मुंबई (काल्पनिक नाम)
यह मुंबई के सबसे बड़े होटलों में से एक था। यह एक लग्ज़ीरियस होटल था। यह बहुत महँगा होटल था, जिसमें केवल अमीर लोग ही आते थे।
मुंबई की सड़कों पर एक काले रंग की बहुत ही खूबसूरत कार दौड़ रही थी। यह कार लेटेस्ट एडिशन स्पोर्ट्स कार थी, जो अपनी तरह की दो ही थीं। दोनों कारों का ओनर इस कार में बैठा शख्स ही था।
कुछ देर बाद वह कार आकर सनशाइन होटल के सामने रुकी।
उसमें से एक लड़का उतरा। उसका पूरा चेहरा मास्क से ढका हुआ था। उसकी केवल कत्थई आँखें ही दिखाई दे रही थीं। वह पूरे एटीट्यूड के साथ अपनी कार की चाबी गार्ड को देकर खुद अंदर चला गया।
उस लड़के की हाइट लगभग छह फ़ीट थी। वह एक मस्कुलर बॉडी का मालिक था। उसने जिम में अपना पसीना बहा-बहाकर एक खूबसूरत बदन बनाया था। वह एक फेयर स्किन का मालिक था।
वह वहाँ से सीधे उस होटल के रूम नंबर तीन सौ दो में गया। वह जाते ही पूरे एटीट्यूड के साथ वहाँ मौजूद आदमी के सामने बैठ गया।
वह लड़का अपने सामने बैठे शख्स से कहता है, जिसकी उम्र लगभग तीस वर्ष थी। वह भी एक मस्कुलर बॉडी का मालिक था। उसकी हाइट लगभग सात फ़ीट थी। उसका नाम रजीत दीवान था। वह एशिया के टॉप फ़ाइव बिज़नेस मैन में से एक था। इसके साथ ही वह एक माफ़िया किंग भी था।
वह लड़का वैश्विक ओबेराय था। वह विदर्भ ओबेराय का बेटा था। वह इतनी छोटी सी उम्र में ही इंडिया का टॉप बिज़नेस मैन होने के साथ-साथ, वर्ल्ड के टॉप फ़ाइव बिज़नेस मैन की गिनती में आता था।
"मि. रजीत दीवान, आपने मुझे क्यों बुलाया? आपका मुझसे मिलने का क्या प्रयोजन है?" वैश्विक ने कहा।
"वैश्विक, उस दिन जब मैंने आपको देखा था, तब से ही पसंद करता हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे बॉयफ़्रेंड बन जाओ।" रजीत ने कहा।
"तो इस बात के लिए आपने मुझे बुलाया है? आई एम नॉट बिलीव इन लव एंड ऑल दिस बुलशीट। मेरे लिए यह सब सिर्फ़ फ़ालतू का टाइम पास है। इसलिए इस बात को यहीं खत्म करो।" वैश्विक ने कहा।
"क्या तुम किसी और को पसंद करते हो?" रजीत ने पूछा।
"मैं इन प्यार-मोहब्बत में यकीन नहीं करता।" वैश्विक ने कहा।
"मुझे इस बात से मतलब नहीं है कि तुम क्या चाहते हो, मैं तुम्हें चाहता हूँ तो तुम्हें मेरा बनना होगा, तेरी मर्ज़ी हो या ना हो। जो चीज रजीत दीवान को पसंद आती है, वह मेरी होती है।" रजीत ने कहा।
यह कहकर वह उसे उसी सोफ़े पर पुश करके उसके ऊपर आकर उसे किस करने की कोशिश करने लगा।
वह उसे किस कर पाता, उसके पहले ही एक जोरदार लात उसके दोनों पैरों के बीच में पड़ी। वह लात इतना जबरदस्त था कि वह घुटनों पर आ गया। उसने अपने हाथों से उस जगह को कवर कर लिया था। यह लात उसे और किसी ने नहीं, बल्कि वैश्विक ने मारी थी।
वैश्विक पूरी एटीट्यूड के साथ उठकर उसके पास आकर अपने घुटनों पर बैठते हुए कहता है, "एक और लात फिर से अगर मैंने मार दी तो कभी भी बच्चे पैदा करने लायक नहीं बचेगा। तू होगा बहुत बड़ा माफ़िया, पर मेरे साथ बदतमीज़ी करने की कोशिश ना करना बच्चे, मैं किसी को नहीं छोड़ता। जा किसी और के पास जाकर उसे अपने माफ़िया होने का रौब दिखा। अगली बार मुझसे उलझा ना तो ऐसा हाल करूँगा कि बिस्तर से उठ नहीं पाएगा। वैश्विक विदर्भ ओबेराय कोई खिलौना या चीज नहीं है कि तुझे पसंद आ गया तो वह तेरा हो जाएगा। तूने क्या मुझे एक कमज़ोर लड़का समझ लिया था? मैं एक आग हूँ, मुझे हाथों में लेने की कोशिश करोगे तो जलाकर रख दूँगा। मुझसे दूर रहना, अगर मैं अपने पर आ गया तो ना तेरा यह बिज़नेस बचेगा और ना तू माफ़िया बचेगा। साले ने पूरा दिमाग खराब कर दिया। अब घर जाकर माँ के हाथ की चाय पीनी होगी।" यह कहकर वह वहाँ से निकल गया।
वहीँ रजीत अभी भी अपने घुटनों पर बैठा था। "मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा।" वह कहता है।
उसके मुँह से यह सुनते ही वैश्विक एक लात उसके पेट पर मारता है, जिससे रजीत के मुँह से खून निकल जाता है।
"धमकी नहीं देते बच्चा, मेरे कानों को बहुत चुभता है, इसलिए अपने को तकलीफ देने वाले को सज़ा ज़रूर देता हूँ। जैसे अभी तुझे दिया। ओके बाय, मीट यू सून। टेक केयर।" वैश्विक ने कहा।
यह कहकर वह अपने कोट को झाड़ते हुए निकल गया और कहता है, "कमबख्त की वजह से मेरे कोट पर सिलवटें पड़ गईं।"
अगले भाग में जारी.......