बैड बॉयज (लव एडिशन) Ch. 3

बैड बॉयज (लव एडिशन) - Chapter 3

Posted by Sarvam • Jan 16, 2025 04:30 AM

सुबह का समय था जब रोहन का रोना एक बार फिर शुरू हो चुका था। बिना रूशाली के दोनो बच्चे संभालना सच में मेहनत भरा काम था। लेकिन ऋषभ ने एक की जिम्मेदारी अपने सर उठा ली थी इसलिए मार्क अपना पूरा ध्यान रोहन पर लगा पा रहा था। इस बीच उसे कोई परवाह नही थी की उसका ध्यान पहली बार क्लब से पूरी तरह हट चुका था। वहा क्या हो रहा था मार्क को कोई खबर नहीं थी।

वो हॉल में ही बैठा हुआ था जब दरवाजे से एक आवाज आई "क्या हम अंदर आ सकते है?"

मार्क के हाथ में दूध की बोतल थी। रोहन से बाते करते हुए वह उसे पिलाने की कोशिश कर रहा था। एकदम से उसकी आंखे ठंडी पड़ गई जब उसने सामने खड़े विश्वास मेहरा को देखा।

विश्वास मेहरा अपने छोटे भाई विकास के साथ अंदर चला आया। कुछ अन्य लोग भी थे उनके साथ। ये देख कर ऋषभ अपनी जगह पर खड़ा हो गया। ऋषि तुरंत ही डर कर उसके पीछे हो चुका था।

मार्क अपनी जगह से बिल्कुल नही हिला। विश्वास सीधे उसके सामने सोफे पड़ बैठा और उसने कहा "आपकी दोस्त के बारे में सुना बस इसलिए अब आ रहा हु। भले ही तब तक हमे दिक्कत हो गई हो। लेकिन आपको कोई दिक्कत ना हो ये मेरा भाई चाहता था।"

मार्क ने अपनी ठंडी नजरे विकास की तरफ डाली तो विकास गहराई से मुस्कुरा उठा।

विश्वास ने फिर मार्क का ध्यान खींचते हुए कहा "आपने केस कर दिया मेरे भाई पर मिस्टर मार्क?"

"आपका भाई बस सतरा साल का है मिस्टर मेहरा। क्या आपको ये बात पता नही? एक तो वो क्लब में झूठ बोल कर , पैसे देकर प्रवेश करता है। ऊपर से उसे वहा झगड़े भी करने है।" मार्क ने गुस्से में कहा।

"वही तो मिस्टर मार्क। बच्चा है , हो जाती है बचपने में ऐसी गलतियां। लेकिन ये केस वगैरा में उसके करियर पर आगे जाकर क्या असर होगा आप समझ रहे है ना?" विश्वास ने कहा।

"मै अच्छे से समझ रहा हु आप मुझे केस वापस लेने के लिए बोलने आए है। मै ऐसा कर भी दूंगा अगर आप वादा करते है आपका भाई मुझे दुबारा मेरे क्लब के आसपास भी नही दिखाई देगा।" मार्क ने बिना बात को घुमाए सीधा मुद्दे पर आकर कहा।

"अगर शांति से बात कर सब कुछ सुलझ रहा है तो बिलकुल। जैसा आप कहेंगे हो जायेगा।" विश्वास ने हल्के से सर झुका कर कहा।

"तो फिर अब आप आ सकते है।" मार्क ने उससे अनुमति मांगी तो एक नकली मुस्कान के साथ विश्वास उठ कर खड़ा हुआ। एक नजर उसने रूशाली की तस्वीर पर डाली और फिर बच्चो के लिए झूठा अफसोस जताया। फिर वो अपने लोगो के साथ जाने लगा।

लेकिन विकास अभी वही खड़ा था। होठों पर मुस्कान लिए आगे आकर वह घुटनो पर हाथ रख मार्क के सामने झुक गया "बस मेरे अठरा के होने का इंतजार है। उसके बाद मैं जब चाहे तब आ सकता हु आपको देखने। तब तक मुझे कंट्रोल करना पड़ेगा खुदको।"

इतना कह कर उसने उंगली से रोहन का गाल छुआ "आपके हाथ में बच्चा काफी अच्छा लगता है। कौन ज्यादा क्यूट है फर्क करना मुश्किल।"

और अगले ही पल वह मार्क के गाल पर होठ टीका कर भाग गया। ऋषभ की आंखे बड़ी होकर मुंह खुल चूका था। वही मार्क के चेहरे पर दुनिया भर का गुस्सा था। कुछ कहने का मौका विकास ने उसे दिया ही नहीं, वरना वो जरूर उसे सुनाता।

इस बीच उसे ऋषभ का खयाल आया तो नजरे अनायस ही घूम गई। अब तक हैरान खड़े ऋषभ का चेहरा एकदम से लाल हो गया और ऋषि को उठा कर गुस्से में पैर पटकते हुए वो चला गया।

मार्क ने दो तीन बार पलके झपका दी "मेरे फ्लर्ट करने से दिक्कत है। लेकिन अपना जेलिस होना कभी नोटिस नही किया। खैर , तुम्हे बहुत ज्यादा वक्त की जरूरत है। मै तुम्हे स्पेस दे रहा हु। ताकि तुम इन दूरियों को समझने की कोशिश करोगे।"

खुद से कह कर वह हल्के से मुस्कुराया और फिर रोहन से कहा "तुम्हारा बाप दुनिया का सबसे बेवकूफ , नकचड़ा और जिद्दी इंसान है। तुम उसकी तरह बिलकुल मत बनना। तुम्हे अपनी मम्मा की तरह जिंदादिल और खुश रहने वाला बनना है। ठीक है?"

रोहन ने खुश होकर बस आवाज कर दी तो मार्क खिलखिला उठा।

उसी शहर के एक दूसरे हिस्से में अपनी पीठ पर एक आठ साल के बच्चे को उठाए व्यास आचार्य ने उस आलीशान आचार्य मेंशन में प्रवेश किया।

घर के बाहर जैसे काले पत्थर की ईगल की मूर्ति बनी हुई थी । ठीक वैसी ही तस्वीर एक दीवार पर उकेरी गई थी । जो मुख्य दरवाजे से प्रवेश करते ही ठीक सामने दिखाई देती थी । उसके सामने लगे सोफे पर एक बूढ़ा व्यक्ति बैठा हुआ था । तीन साल का बच्चा नीचे उनके पास खेल रहा था ।

व्यास को देखते ही उन्होंने ठंडी आवाज में कहा "कबीर पर फिर अटैक हुआ?"

"किंग के होते हुए उसके प्रिंस कबीर का कोई बाल भी नही छू सकता डेड । सब ठीक है ।" लापरवाही से कहते हुए व्यास ने कबीर को सोफे पर लाकर उतार दिया ।

नीचे खेल रहा बच्चा एकदम से खड़े होकर मुस्कुराया "डेड! भाई, आप लोग आ गए? मै कब से इंतजार कर रहा था।"

"हा समु!" कहते हुए व्यास ने अपने छोटे बेटे समीर को उठा लिया।

इस बीच उसके पिता ने कबीर को अपने करीब लेकर अच्छे देखा। जब तक उनकी आंखों को विश्वास नही हुआ कबीर ठीक था वह राहत में ना लौट सके।

तभी कोई दनदनाते हुए आया और कबीर का स्कूल बैग एक गार्ड के हाथ से खीच लिया। उसके बाद कबीर के पास जाकर उसका हाथ पकड़ते हुए वो अपने साथ ले जाने लगी।

व्यास के मुंह से एक शब्द नही निकला जब तक वो चली नही गई। फिर धीमी आवाज में वो बोला "हमारी महारानी को क्या हुआ? आपने अटैक की बात उनके सामने कर दी?"

"सुन लिया उसने तो अब मैं क्या करू ?" उसके पिता ने आराम से कंधे उठा दिए।

"डेड आप भी ना। कभी कभी बच्चो की तरह बिहेव करते हो। पता है मुझे , जानबूझ कर डांट पड़वाने के लिए ये किया है।" व्यास ने हल्की नाराजगी से कह कर समीर को उनकी गोद में रख दिया और अपनी पत्नी स्मिता के पीछे उसे मनाने के लिए भागा।

व्यास के पिता मुस्कुरा दिए थे "बाप से कभी नही डरा। बीवी से डर जाता है। लव मैरिज!"

व्यास जब कमरे में पहुंचा तो स्मिता कबीर की यूनिफॉर्म को चेंज करवा रही थी।

हिचकिचाते हुए व्यास ने अंदर प्रवेश किया और स्मिता से कुछ दूरी बनाकर बिस्तर पर बैठ गया।

"भूख लगी है की बाहर से ही खाकर आ गए?" स्मिता ने ठंडी आवाज में कबीर से पूछा।

कबीर ने बेचारगी से अपने पिता की तरफ देखा तो व्यास ने कहा "मेरा गुस्सा मुझ पर उतारो ना। बच्चे को क्यों ....!"

स्मिता की बस एक घूर काफी थी व्यास का मुंह बंद होने के लिए।

"हमने आज बाहर कुछ नही खाया मॉम। मुझे भूख लगी है।" कबीर ने तुरंत ही जवाब दिया। बाप बेटे में डर का माहौल था महारानी को लेकर।

"हाथ मुंह धो लो। मै कुछ लेकर आती हु।" स्मिता कहते हुए उठने लगी तो व्यास ने एकदम से उसका हाथ पकड़ लिया। जैसे ही कबीर वॉशरूम में चला गया व्यास ने कस कर स्मिता को गले लगा लेते हुए सांस लेना भी मुश्किल कर दिया।

वह कसमसा कर खुदको छुड़ाने की कोशिश करती रही लेकिन व्यास भी जिद्दी था "जब तक माफी नही मिलेगी और बात नही करोगी मै नही छोड़ने वाला।"

स्मिता ने मुंह खोल कर ठंडी सांस छोड़ी "हा छोड़ दो। कर दिया माफ। वरना पता चला माफी मांगते मांगते मुझे मौत दे दी।"

एकदम से अपनी पकड़ ढीली करते हुए व्यास ने हल्के से उसका गाल चूम लिया।

जब कबीर बाहर आया और उसने दोनो पति पत्नी को शांत होकर बैठे देखा तो उसकी आंखे छोटी हो गई। वह ठंडी आवाज में बडबडा दिया "नाटक करके दोनो पूरे घर को डरा कर रखते हैं। एक बार बड़ा होने दो मुझे , फिर ये काम मै करूंगा।"

स्मिता ने उसे घूरा "तुम्हारे लक्षण अभी से नजर आ रहे है मुझे की बिगड़ रहे हो। व्यास संभाल लो इसे समय रहते।"

"आह.. मेरे पास बस दो हाथ है। जिसमे मैं सिर्फ तुम्हे संभाल सकता हु।" व्यास ने उसे प्यार से देखते हुए कहा। उसका ध्यान भी नही था स्मिता ने क्या कहा?

आगे जानने के लिए कहानी के साथ बने रहे। कहानी की अपडेट्स लेने के लिए सब फॉलो कर ले।

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