Obsessed Billionaire Hubby - Chapter 2
"अगर तूने आज यह शादी नहीं की, तो अरमान सिंघानिया हम सब की जान ले लेगा। तुम नहीं जानती कि वह गुस्से में कितना ज़्यादा तेज है! उसके लिए जान लेना बहुत मामूली सी बात है। बेटी, हमारी बात मान लो, और शादी के लिए हाँ कह दो।" ऐसा कहकर वह बड़ी ही बुरी तरह से रोने लगे।
तब आस्था ने एक और कोशिश की और कहा,
"लेकिन मेरी नानी का क्या होगा? मेरी नानी मेरे बगैर नहीं रह पाएगी!"
तभी मनोज जी ने कहा,
"बेटा, शायद तुम भूल रही हो, तुम्हारी नानी मेरी माँ भी है। तुम्हारा ध्यान रखने के लिए हमने उन्हें उस गाँव में तुम्हारे पास छोड़ रखा था। लेकिन अब मैं उन्हें हमेशा वहाँ से ले आऊँगा, बेटा। बस तुम शादी के लिए हाँ कह दो, मैं तुमसे वादा करता हूँ कि मैं तुम्हारी नानी को गाँव से यहाँ अपने साथ में ही रखूँगा, और उनकी दिन-रात सेवा करूँगा। वैसे भी वह मेरी माँ है, और मैं उनकी दिन-रात सेवा करूँगा। अपनी नानी को लेकर परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है, मेरे बच्चे। अभी के लिए बस तुम शादी के लिए हाँ कह दो, उसके बाद हम कुछ ना कुछ करके तुम्हें अरमान की ज़िन्दगी से निकाल लेंगे! बस कुछ दिनों की बात है, कुछ दिनों तक इस शादी के रिश्ते को निभा लो, प्लीज़ बेटा, प्लीज़!" ऐसा कहकर वह उसकी ख़ुशामद करने लगे।
आस्था अब पूरी तरह से मजबूर हो चुकी थी। आस्था, जो कि अपने मामा के एक फ़ोन कॉल पर पूरे गाँव में उछलने लगी थी, क्योंकि उसके मामा ने पहली बार उसे अपनी बेटी की शादी में शिरकत करने के लिए बुलाया था। साथ ही साथ, हालाँकि आस्था की नानी ने, यानी कि मनोज की माँ ने, उसे मना भी किया था,
"बेटी, तुम इस शादी में मत चलो! अपनी बेटी और दामाद की मौत के बाद, आस्था ही उनका इकलौता सहारा थी।"
और उसकी दादी ने उसे कहा था,
"कि मनोज अच्छा नहीं है, भले ही वह मेरा ख़ून हो, मेरा बेटा हो! लेकिन तूने देखा नहीं, शहर में जाकर वह इस तरह से बस गया है कि उसने एक बार भी अपनी बूढ़ी माँ की खैर-ख़बर नहीं ली, बस हर महीने के तौर पर घर ख़र्च के लिए पैसे भिजवा देता है और अपनी सारी ज़िम्मेदारी से आजाद हो जाता है।"
लेकिन आस्था काफी ज़्यादा एक्साइटेड हो गई थी क्योंकि वह काफी समय से गाँव में रह रही थी। उसने शहर की दुनिया, शहर का माहौल, वहाँ के कोई फ़ंक्शन नहीं देखे थे। तब आस्था ने अपनी दादी को समझाया,
"कम से कम मनोज मामा ने हमें बुलाया तो है ना!"
और वैसे भी उनकी इकलौती पोती प्रियंका की शादी थी। तो उन्हें ज़रूर जाना चाहिए। जब आस्था ने अपनी नानी को काफी ज़्यादा समझाया, तब वह दोनों दादी-पोती शादी में जाने के लिए तैयार हो गईं! और वह दोनों प्रियंका की हल्दी से दो दिन पहले शहर में पहुँच चुकी थीं।
शहर को देखकर आस्था काफी ज़्यादा खुश हो रही थी, हालाँकि उसे डॉक्टर की पढ़ाई करने के लिए भी शहर में ही आना था। तो इसीलिए आस्था ने सोचा कि वह शादी में जाएगी, साथ ही साथ शहर के रंग-रूप, ढंग, शहर का माहौल देख लेगी! और किस तरह से उसे शहर में सर्वाइव करना है, उस बारे में कहीं ना कहीं यह सोचते हुए, आस्था शहर में आई थी! और पूरे दो दिन उसने अपनी मामी के साथ उनके बाज़ार का सारा काम, घर का खाना बनाया था। इतना ही नहीं, उसकी मामी ने पूरी तरह से सारी ज़िम्मेदारी आस्था के कंधों पर ही दे दी थी। साग-सब्ज़ी लाना, घर में मेहमानों की देख-रेख, खाना-पीना, झाड़ू-पोछा, बर्तन... हालाँकि नौकर भी उन्होंने घर में काम करने के लिए लगाए हुए थे! लेकिन सब कुछ आस्था अपनी निगरानी में ही करवा रही थी। और बड़े ही जोरों-शोरों से प्रियंका की हल्दी का फ़ंक्शन भी हुआ था, और मेहँदी का फ़ंक्शन भी हुआ था!
और फ़ंक्शन के बाद रात के 2:00 बजे के वक़्त, जब अचानक आस्था की आँख खुली, उसने देखा कि प्रियंका किसी से रो-रोकर बात कर रही थीं, तब आस्था को उस पर कुछ शक भी हुआ था! लेकिन उसे अपनी दादी की कही हुई बात याद थी, कि उसे किसी के भी मामले में नहीं घुसना है, और ना ही किसी के बारे में ज़्यादा सोचना है। तो यही सोचकर आस्था चुप हो गई थी, और उसने किसी से कुछ नहीं कहा। लेकिन प्रियंका यूँ इस तरह से शादी के वाले दिन, शादी का मंडप छोड़कर भाग जाएगी, इसके बारे में तो आस्था ने दूर-दूर तक कुछ नहीं सोचा था। उसके मुँह से सिर्फ़ और सिर्फ़ इतना ही निकला था कि उसने प्रियंका दीदी को किसी से बात करते हुए सुना था, और इसी बात की गलतफ़हमी में उसके मामा और मामी दोनों ने यह समझ लिया कि आस्था ने ही प्रियंका को भगाया है।
अब आस्था के पास कोई और रास्ता नहीं था। और जल्दी ही उसे एक शादी का जोड़ा पहनाया गया था और उसके सर पर लंबा सा घूँघट डाल दिया गया। अरमान को इस बात के बारे में दूर-दूर तक कोई एहसास नहीं था कि उसकी शादी प्रियंका से नहीं, बल्कि आस्था से होने वाली है। आस्था को तो उसने आज तक देखा भी नहीं था। अब जल्दी ही आस्था को दुल्हन बनाकर अरमान के ठीक बराबर में बिठा दिया गया, और अरमान सिंघानिया ने एक बार भी अपने बराबर में बैठी हुई दुल्हन की ओर नहीं देखा। उसका पूरा ध्यान उस वक़्त अगर किसी चीज़ पर था तो सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने लैपटॉप और फ़ोन की स्क्रीन पर। वह एक भी मूवमेंट, एक भी पल अपना काम बर्बाद नहीं करना चाहता था। सिर्फ़ और सिर्फ़ उसे पूरे मंडप में आलोक सिंघानिया के अलावा किसी और को इस बात के बारे में दूर-दूर तक एहसास नहीं था कि जिसकी शादी इस वक़्त अरमान सिंघानिया से हो रही है, असल में वह लड़की है ही नहीं, जिस लड़की को उन्होंने अरमान के लिए दुल्हन चुना है। दुल्हन बदल चुकी थी।
वेल, जल्दी ही अरमान सिंघानिया ने पूरी फ़ॉर्मेलिटी पूरी करते हुए सातों फ़ेरे कंप्लीट कर लिए, और साथ ही साथ आस्था के माँग में सिंदूर भर दिया, और मंगलसूत्र भी पहना दिया। आस्था का दिल काफी ज़्यादा रो रहा था। अरमान सिंघानिया ने एक बार भी यह जानने या देखने की कोशिश नहीं की कि उसकी बीवी कैसी दिख रही है, दुल्हन बनकर यहाँ क्या हो रहा था, क्या नहीं! वह तो सिर्फ़ और सिर्फ़ पूरी तरह से अपने काम में खोया हुआ था। और जब वह आस्था को मंगलसूत्र पहना रहा था, तब आस्था के आँसुओं की कुछ बूँदें उसके हाथ पर गिरीं, तब जाकर अरमान को थोड़ा सा अजीब लगा, और उसने एक पल शादी के जोड़े में सज़ी हुई अपनी दुल्हन की ओर देखा, लेकिन लंबा घूँघट होने की वजह से वह उसका चेहरा नहीं देख पा रहा था। वह यह केवल कुछ ही पल के लिए रुका, और उसके बाद अरमान फिर से अपने फ़ोन और काम में पूरी तरह से खो चुका था।
आलोक जी ने जल्दी ही आस्था की पूरी जन्म-कुंडली अपने हाथों में मँगवा ली थी क्योंकि वह जिस लड़की को अपनी बहू बनाने जा रहे थे, उसके बारे में सारी चीज़ें उन्हें अच्छी तरह से जाननी थीं। और जैसे ही आलोक जी की नज़र आस्था के माँ-बाप पर, डिटेल्स पर पड़ी, जो कि एक्सीडेंट में मारे गए थे, तब आलोक जी के चेहरे पर कुछ अलग ही तरह के भाव आ गए थे। तब आलोक जी मन ही मन में सोचने लगे,
"मैंने तो सोचा था कि आज अपने ख़ानदान की इज़्ज़त बचाने के लिए शादी करवा लूँगा और उसके बाद इस लड़की को दो-तीन दिन के बाद तलाक़ देकर आज़ाद करवा दूँगा! लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब इस लड़की को ज़िन्दगी भर मेरे पोते, अरमान सिंघानिया की पत्नी बनकर ही रहना होगा।" कहीं ना कहीं यह सोचते हुए आलोक जी कहीं खो गए!
जल्दी ही पूरे रीति-रिवाज के साथ शादी के फ़ंक्शन कंप्लीट हो चुके थे। और एक जगह चार लोग अपनी नज़र झुकाए खड़े हुए थे। वह उस शादी के हाल में अरमान सिंघानिया के बाद, उस शादी का सबसे हैंडसम चेहरा कोई था, तो वह चार लोग ही थे। और चार लोगों में से एक अरमान सिंघानिया का भाई, कज़िन ब्रदर और दोस्त थे। साथ ही साथ वह तीन बचपन के चाइल्डहुड फ़्रेंड्स थे, जो कि बहुत बड़ी-बड़ी पोस्ट पर थे। उनमें से एक फ़ेमस डॉक्टर था, जो कि अरमान सिंघानिया का दोस्त था, और स्पेशली उसके साथ शादी अटेंड करने के लिए वह वहाँ आया था। लेकिन चारों का उस वक़्त मूड काफी ज़्यादा ख़राब था। सब के सब शेरवानी पहने हुए थे! और एक से बढ़कर एक हैंडसम और चार्मिंग लग रहे थे। जितनी भी शादी हाल में लड़कियाँ आई हुई थीं, सबकी नज़रें बार-बार जाकर उन पर ही ठहर रही थीं। क्योंकि अरमान सिंघानिया को अब देखने का उनका कोई फ़ायदा नहीं था, अरमान सिंघानिया की शादी हो चुकी थी। तो इस वक़्त वह चारों स्मार्ट लड़के सभी लड़कियों के क्रश बने हुए थे, लेकिन उन चारों का मुँह पूरी तरह से लटका हुआ था। उन चारों को बहुत ही ज़्यादा बुरा लग रहा था।
तभी दादाजी उनके पास जाकर खड़े हो गए और कहा,
"क्या बात है? तुम चारों इस तरह से मुँह लटकाकर यहाँ क्यों खड़े हुए हो? शादी में आए हो या किसी के मातम में आए हो? तुम्हारे चेहरे को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे अपने दोस्त या भाई की शादी में नहीं, बल्कि किसी की शोक-सभा अटेंड करने के लिए तुम लोग यहाँ आए हो।"
अब जैसे ही दादाजी ने यह कहा, आकाश मुँह पिचकाकर बोला,
"क्या दादा जी? भाई की शादी तो आपने करा दी! मेरा इकलौता दोस्त था, मैंने क्या कुछ नहीं सोचा था उसकी शादी के लिए, लेकिन आपने हमें इतनी सी भी मस्ती करने नहीं दी! इसलिए अब हम आपसे बात भी नहीं करेंगे!" ऐसा कहकर आकाश ने फिर मुँह बना लिया। अब तक आलोक जी समझ चुके थे कि इन चारों को मौज-मस्ती करने का मौका नहीं मिला है। इसी वजह से शायद ये सब मुँह लटकाकर खड़े हुए हैं।
तभी दादाजी ने कहा,
"अच्छा-अच्छा, अपना मूड सभी के सभी बिल्कुल ठीक करो! और घर जाकर जो तुम लोगों को मौज-मस्ती करनी है वह करते रहना, मैं तुम लोगों को नहीं रोकूँगा।"
अब जैसे ही दादाजी ने यह कहा, तब सुमित ने कहा,
"क्या वाकई दादा जी? क्या आप हमें बिल्कुल भी पार्टी करने से नहीं रोकेंगे? पूरी रात हम लोग मज़े करेंगे। अब वादा कीजिए! कि आप हमें नहीं डाँटेंगे।"
अब जैसे ही सुमित, जो कि उस शहर की अच्छी-खासी कंपनी का बड़ी पोस्ट का सीईओ था, ने इस तरह की बात की, उसके दादा आलोक जी उसकी ओर देखकर कहने लगे,
"तुम्हें देखकर कोई नहीं कह सकता है कि तुम्हारे नीचे कम से कम 600 लोग काम करते हैं। हाँ, बिल्कुल बच्चों जैसे हरकतें हैं तुम सबकी। ना जाने कब बड़े होंगे तुम लोग। अब अरमान की तो शादी हो गई है। अब धीरे-धीरे तुम चारों की शादी भी करवा दूँगा, उसके बाद देखूँगा कि तुम लोग कैसे और किस तरह से पार्टी करोगे?"
अब जैसे ही दादाजी ने उन चारों की टाँग खींची, वह चारों बुरी तरह से मुँह बनाने लगे, और तभी उनमें से ध्रुव आगे आया और कहा,
"दादाजी, प्लीज़ अभी शादी-वादी की बात हमसे मत कीजिए! यह हमारे हँसने, खेलने, कूदने के दिन हैं! और शादी के चक्कर में हम अपनी ज़िन्दगी बिल्कुल भी बर्बाद नहीं होने देंगे..."
"और वैसे भी अभी मेरी उम्र ही क्या है! अभी मैं सिर्फ़ 26 साल का हूँ, क्या इस उम्र में कोई शादी करता है भला? और वैसे भी दादाजी, आपने अरमान ब्रो की जो शादी करवाई है, अब वह बेचारे देखो, अपनी बीवी को एक नज़र उठाकर भी नहीं देख रहे हैं! देखो ज़रा, अपनी बीवी से ज़्यादा प्यार तो उन्हें अपने फ़ोन और लैपटॉप से है। आपको दिख नहीं रहा है क्या? आपको पूरी शादी में सबके आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं!" ऐसा कहकर ध्रुव दादाजी को अरमान की ओर दिखाने की कोशिश करने लगा।
तब उसके दादा ने कहा,
"अपने फ़ालतू की बकवास बंद करो!"