कबीर एक शांत, अंतर्मुखी और सुलझा हुआ कंप्यूटर साइंस स्टूडेंट, जो अपनी ही बनाई खामोशी की दीवारों और कोडिंग के लॉजिक्स में उलझा रहता है। उसके लिए जिंदगी सिर्फ 0 और 1 का एक सीधा-साधा कोड है, जहाँ भावनाओं का कोई बग बर्दाश्त नहीं होता। दूसरी तरफ है अयान बेफिक्र, रंगीन सपनों से भरा और बेहद प्रतिभाशाली आर्टिस्ट, जो अपनी हर भावना को कैनवस पर बिखेर देना चाहता है। लेकिन उसकी उस बेफिक्र मुस्कान के पीछे छिपा है दो साल पुराना एक गहरा अतीत, धोखा और अपनी ही कला से बेदखल होने का दर्द। जब किस्मत इन दोनों को 'अरोमा कैफे' की टेबल नंबर 4 पर एक-दूसरे के सामने लाती है, तो दो बिल्कुल अलग दुनिया आपस में टकराती हैं। एक तरफ कॉफी की भीनी-भीनी खुशबू और पेंट ब्रश के स्ट्रोक्स हैं, तो दूसरी तरफ कीबोर्ड की खट-खट और टेक्नोलॉजी का लॉजिक। अयान की बेबाकी कबीर की बंद दीवारों को तोड़ने लगती है, और कबीर की खामोश मौजूदगी अयान के बिखरे हुए अतीत को समेटने का जरिया बन जाती है। लेकिन जब अयान का बीता हुआ कल रोहन के रूप में एक बार फिर सब कुछ तबाह करने लौटता है, तो कबीर अपनी कोडिंग और डिजिटल दुनिया के हथियारों के साथ अयान की ढाल बनकर खड़ा हो जाता है। "धीरे - धीरे इश्क़ हो रहा है" सिर्फ दो अलग स्वाभाव के लड़कों की प्रेम कहानी नहीं है यह कहानी है सच्चे भरोसे, अतीत के जख्मों को भरने, दूरियों के इम्तिहान और अपने सपनों को एक साथ जीने के अटूट इरादे की। क्या बाइनरी कोड और चित्रकार के रंग मिलकर एक मुकम्मल दास्तान बना पाएंगे? जानने के लिए पढ़िए यह एक बेहद भावुक, आधुनिक और दिल छू लेने वाली प्रेमकथा!
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Chapter 1
पहली मुलाकात -
Chapter 2
अयान और कबीर की दूसरी मुलाकात -
Chapter 3
मुझे दोस्त बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है -
Chapter 4
बारिश और तुम -
Chapter 5
अफ़वाहें और कबीर का दर्द -
Chapter 6
अयान की पेंटिंग रिजेक्ट -
Chapter 7
नई शुरुआत और अयान कबीर का अटूट रिश्ता -
Chapter 8
आर्ट गैलरी और अयान कबीर का साथ -
Chapter 9
अयान का दूर जाना -
Chapter 10
अयान का अतीत