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The Return Of Tiger
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Ch 1 - Abhinav Is Tiger
"अभिनव! अभिनव बेटा भाग जा यहाँ से, नहीं तो यह लोग तुझे भी मार डालेंगे!" अभिनव के पिता संजय ने दर्द में कराहते हुए अपने 5 साल के बेटे अभिनव से कहा। उनके हाथ में गोली लगी थी। वो और संजय रात के अंधेरे में एक पतली सी गली में छुपे हुए...
"अभिनव! अभिनव बेटा भाग जा यहाँ से, नहीं तो यह लोग तुझे भी मार डालेंगे!" अभिनव के पिता संजय ने दर्द में कराहते हुए अपने 5 साल के बेटे अभिनव से कहा। उनके हाथ में गोली लगी थी। वो और संजय रात के अंधेरे में एक पतली सी गली में छुपे हुए...
Ch 1 - Abhinav Is Tiger
"अभिनव! अभिनव बेटा भाग जा यहाँ से, नहीं तो यह लोग तुझे भी मार डालेंगे!" अभिनव के पिता संजय ने दर्द में कराहते हुए अपने 5 साल के बेटे अभिनव से कहा। उनके हाथ में गोली लगी थी। वो और संजय रात के अंधेरे में एक पतली सी गली में छुपे हुए थे। बाहर सड़क पर उनकी गाड़ी खड़ी थी और उसी गाड़ी के पास खड़े थे वो लोग जिन्होंने संजय को गोली मारी थी।
"नहीं पापा! मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा!"
"जिद्द मत कर tiger! मैं अपनी ज़िंदगी जी चुका, लेकिन तुझे अभी बहुत कुछ देखना है, बहुत कुछ सम्भालना है! अब जा!" संजय ने कहा और अपनी उँगली में से एक सोने की अँगूठी निकालकर अभिनव को थमा दी। उसमें एक हरे रंग का नगीना जड़ा हुआ था। संजय ने अभिनव के माथे को चूमा और अपनी बंदूक़ लेकर उन लोगों का सामना करने के लिए गली से बाहर निकल गये। घबराया हुआ अभिनव अपने पिता को छुपकर देख रहा था। संजय जैसे ही अपनी गाड़ी के पास पहुँचे तो एक आदमी ने संजय पर बंदूक़ तान दी। संजय पर तीन गोलियाँ दाग दी गई थी। टूटती साँसों के बीच संजय ने अभिनव को देख कहा,
"इस कमीने का चेहरा याद रखना tiger!" और संजय जमीन पर ढेर हो गया।
"पापा!" अभिनव चिल्लाया और अचानक से उसकी नींद खुल गई। पसीने में तर-बतर अभिनव अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गया और गहरी साँसें लेने लगा। 18 साल, पिछले 18 सालों से यह सपना इसी तरह से अभिनव को परेशान कर रहा था। अभिनव ने पहले अपनी उँगली में पहनी उस अँगूठी को देखा और फिर bathroom की तरफ़ बढ़ने लगा।
अभिनव गुड़गाँव में रहता था और delivery boy का काम करता था। हालाँकि इस काम में उसका मन नहीं लगता था, लेकिन अनाथाश्रम से निकलने के बाद उसके पास यह करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। 18 साल की उम्र में अनाथाश्रम से निकलने के बाद उसने अपना खर्च ख़ुद उठाना शुरू कर दिया था। उसकी ज़िंदगी में बस एक ही ख़ुशी थी, उसकी girlfriend वैभवी। जब भी वो वैभवी को देखता तो अपने सारे दुख भूल जाता था। और आज तो वैभवी का जन्मदिन था, इसलिए अभिनव जल्द से जल्द उससे मिलना चाहता था।
"भैया, यह cake कितने का है?" शाम को जब अभिनव ने अपना काम ख़त्म किया तो वो एक bakery पर आ गया था।
"600"
"अच्छा! और यह pastry?"
"60"
"ठीक है, एक pastry pack कर दो।" अभिनव ने दुकानदार से कहा। असल में अभिनव और वैभवी ने यह तय किया था कि वो पाई-२ जोड़कर अपने लिए किराए का एक बड़ा घर लेंगे, इसलिए वो पैसा waste नहीं करना चाहते थे। pastry लेकर अभिनव ख़ुशी-२ वहाँ से निकल गया।
कुछ देर के बाद जब वो वैभवी के कमरे के बाहर पहुँचा तो उसने पाया वहाँ काफ़ी रंगीन lights जल रही थी और वहाँ से तेज़ music की आवाज़ आ रही थी।। अभिनव हड़बड़ाते हुए ऊपर पहुँचा और घंटी बजा दी। वैभवी ने कमरे का दरवाज़ा खोला। अभिनव ने जैसे ही वैभवी को देखा तो उसके होश उड़ गये। उसने पूछा,
"यह सब क्या है?" वैभवी ने महँगा सा one piece पहना हुआ था और उसके सिर पर एक छोटा सा ताज था। कमरा चारों तरफ़ से सजा हुआ था, table पर एक बड़ा सा cake, शराब और खाना रखा हुआ था। वहाँ बहुत सारे मेहमान आए हुए थे। उन सभी मेहमानों ने एक के बाद एक अभिनव को देखकर कहा,
"यह कौन है वैभवी?"
"देख नहीं रही, यह delivery boy है, पर हम already cake लाये तो थे, फिर तूने pastry क्यों मँगवाई?"
"अरे तुम ग़लत समझ रहे हो। ये तो वो delivery boy है , जिसको वैभवी date कर रही थी।"
"My god! एक delivery boy को date! वैभवी तेरा standard इतना कैसे गिर गया?", अभिनव को यह सुनकर बुरा लगा, लेकिन इससे पहले कि वो कुछ कहता, इतने में पीछे से आवाज़ आयी,
"Happy Birthday वैभवी!" अभिनव ने पलटकर देखा तो पाया कि वहाँ देवेन suit boot में खड़ा था। अभिनव देवेन को अच्छी तरह से जानता था। वो एक बड़े बाप का लड़का था और हर वक़्त वैभवी के आसपास मंडराता रहता था। इस बात से अभिनव चिढ़ता था और जब आज के दिन देवेन यहाँ आया तो अभिनव का दिमाग़ ख़राब हो गया। उसके हाथ में एक बड़ा सा gift था। उसके आगे अभिनव के हाथ में लटकी pastry की थैली कुछ भी नहीं लग रही थी।
"Happy Birthday Darling!" देवेन ने कहा और अभिनव को बग़ल करके वो वैभवी के पास आ गया। उसने वैभवी को gift दिया और उसे कसकर गले लगा लिया। यह देख अभिनव जल भुन उठा। इतने में वैभवी ने कहा,
"दोस्तों, तुम्हें मेरे standard पर doubt है ना! अब मैं तुम्हें बताती हूँ मेरा standard क्या है!" वैभवी ने इतना कहा और देवेन का हाथ पकड़ लिया। इसके बाद वैभवी उसे देखते हुए बोली,
"मैं तुम से breakup कर रही हूँ अभिनव!"
"क्या!"
"और क्या? अबे कब तक बेचारी तेरे जैसे गरीब के साथ आधी pastry खाती रहेगी? नहीं darling?" इतना कहते ही देवेन ने वैभवी के गालों को चूम लिया। अभिनव की आँखें फटी की फटी रह गई। उसने pastry की थैली फेंकी और देवेन की नाक पर एक ज़ोरदार मुक्का जड़ दिया।
"साले! तेरी इतनी हिम्मत!" देवेन जैसे ही अभिनव को मारने के लिए आगे आया इतने में अभिनव ने उसके पेट में एक लात मारी और वैभवी की तरफ़ देखकर बोला,
"यह तुमने ठीक नहीं किया वैभवी!" और अभिनव वहाँ से निकल गया। वो उन दोनों की शक्ल अब और नहीं देखना चाहता था। उसकी आँखों में आँसू थे और उसका दिल ज़ोरों से दुख रहा था।
वो एक बड़े से hotel के सामने footpath पर ही शराब पीने बैठ गया था। हर घूँट के साथ उसकी आँखों के सामने वो दृश्य आ रहा था, जिसमें वैभवी देवेन के गालों को चूम रही थी। हर घूँट के साथ उसके दिल का दर्द और बढ़ता चला जा रहा था।
"यह तुमने ठीक नहीं किया वैभवी! यह तुमने ठीक नहीं किया!" नशे में धुत्त अभिनव ने शराब की आख़िरी bottle सड़क पर फोड़ते हुए कहा। उसे चक्कर आ रहे थे और वो गश खाकर वहीं सड़क पर लेट गया।
उसका दिल तो बुरी तरह से टूट गया था, लेकिन उसके लिए यह रात यहीं ख़त्म नहीं होने वाली थी।
उधर जब अभिनव सड़क पर बेहोश हो गया था, तब इधर सनी सिंह अपनी गाड़ी में बैठा बेचैन हो रहा था। सनी सिंह की बहन अनन्या सिंह उसके गले का काँटा बन गई थी। सनी अपने दादा हरदेव पाल सिंह की नज़र में आने के लिए और अनन्या को रास्ते से हटाने के लिए कुछ भी कर सकता था और आज वो अपनी गाड़ी में अपने आदमियों के साथ निकल पड़ा था अपनी बहन को सबक़ सिखाने के लिए।
इधर कुछ देर के बाद अभिनव के बग़ल से सनी सिंह की महँगी सी गाड़ी गुज़री। जैसे ही सनी की नज़र अभिनव पर पड़ी तो उसने गाड़ी रुकवाई और नीचे उतरकर अभिनव के पास चला गया। वो अभिनव को मुस्कुराते हुए देख रहा था। सनी के आदमी भी उसके पीछे उतरे। उनमें से एक ने हिचकते हुए कहा,
"Boss यह!"
"हमारे पास time नहीं है। सुबह होने से पहले अगर हमने इसे अनन्या के कमरे में नहीं डाला तो हमें दोबारा इस काम को करने का मौक़ा नहीं मिलेगा!" सनी ने कहा और अभिनव को गाड़ी में डालने का इशारा कर दिया। उन्होंने अभिनव को गाड़ी में डाला और वहाँ से रवाना हो गये।
कुछ देर के बाद सनी की गाड़ी एक बड़े से hotel के बाहर आकर खड़ी हो गई थी। सनी ने अपने आदमियों से कहा,
"इसकी pant उतारो और room number 409 में ले चलो!" सनी के आदमी अभिनव को उठाकर सीधा room number 409 में घुसे और उन्होंने अभिनव को बहुत आहिस्ते से उस बिस्तर पर लेटा दिया। वहाँ पहले से सनी की बहन अनन्या लेटी हुई थी।
सुबह जब अभिनव ने करवट बदली तो उसका हाथ एक नर्म हाथ से टकरा गया। अभिनव की नींद टूटी और उसने देखा कि वो एक अनजान लड़की के बग़ल में बिना pant के लेटा हुआ था। इधर अनन्या की भी नींद खुल गई। अपने आपको इस हाल में पाकर वो ग़ुस्से में आग बबूला हो गई। उसने अभिनव के गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा और बोली,
"यह तुमने मेरे साथ क्या किया? कौन हो तुम और मेरे कमरे में कैसे आये! और यह— यह तुमने pant क्यों नहीं पहनी है?" अनन्या ने खींझते हुए कहा। अभिनव को कुछ समझ नहीं आ रहा था। फिर भी उसने कोशिश की और बोला,
"वो मैं—" इतने में अनन्या के कमरे का दरवाज़ा खुला और सनी अपने आदमियों के साथ अंदर आ गया।
"Shame on you बहना! मुझे तो पहले से ही तुम्हारे character पर doubt था! मैंने कितनी बार दादाजी को समझाया, पर वो हर बार बोले कि , मेरी अनन्या ऐसा नहीं कर सकती। इसीलिए मैंने उन्हें अपनी पोती की रंगरलियों का live telecast दिखाने के लिए यहीं बुला लिया।" सनी के मुँह से दादा जी का नाम सुन अनन्या घबरा गई। वो हाथ जोड़ बोली,
"भाई, मुझे सच में नहीं पता क्या हुआ, कैसे हुआ, मैं तो इस लड़के तक को पहली बार देख रही हूँ!"
"मैं भी! और हम दोनों के बीच ऐसा कुछ नहीं हुआ है जैसा—" इससे पहले कि अभिनव सफ़ाई देता, अनन्या और सनी के दादा, हरदेव पाल सिंह कमरे में पहुँच चुके थे। उनके पहनावे से समझ आ रहा था कि वो बहुत अमीर आदमी थे । अनन्या को इस हाल में देख उनकी आँखें ग़ुस्से में लाल हो गई थी।
"मुझे तुम से यह उम्मीद नहीं थी।"
"दादा जी जैसा आप समझ रहे हैं वैसा बिल्कुल भी नहीं है!"
"अनन्या, तुम्हें अच्छी तरह से पता था नियम क्या है, फिर भी तुमने उसे तोड़ दिया! और तू—" जब अभिनव की नज़र हरदेव से मिली तो उसे लगा वो अपनी आँखों के सामने मौत देख रहा है। हरदेव उसके पास आये और बोले,
"तू मेरी पोती के साथ सोया था ना! हमारे परिवार के क़ानून के हिसाब से आज से तू सिंह परिवार का दामाद है!"
"क्या! लेकिन— लेकिन हम दोनों के बीच तो कुछ हुआ ही नहीं!"
"अच्छा!" हरदेव ने तीखी नज़रों से अभिनव के पैरों को देखा। उसने pant नहीं पहनी थी। यह देख हरदेव ने अभिनव को घूरा और अपने आदमियों से बोले,
"मारो साले को!" इससे पहले कि अभिनव कुछ समझता, हरदेव के आदमियों ने उसे मारना शुरू कर दिया था। अभिनव हरदेव की उम्र का लिहाज़ कर रहा था, इसलिए उसने अपने आपको रोक लिया था। कुछ देर बाद हरदेव ने अपने आदमियों को रुकने का इशारा किया और अनन्या की तरफ़ देखते हुए कहा,
"अनन्या, इसे hospital भेजना, ताकि शाम को यह अकरम की party में आने के लिए ठीक ठाक होकर तैयार हो जाये। याद रखना, मुझे शाम को अकरम की party में तुम्हारे साथ यह ज़रूर नज़र आना चाहिए!" इतना कहते ही हरदेव ग़ुस्से में वहाँ से निकल गया। उसके पीछे सनी भी अनन्या को चिढ़ाने के लिए मुस्कुराते हुए वहाँ से निकल गया। अभिनव दर्द से कराह रहा था। अनन्या उसके पास आयी और बोली,
"तुमने मेरी पूरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी! क्यों?" अभिनव के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।
अनन्या का driver उसी की गाड़ी से अभिनव को पहले hospital ले गया और उसके बाद उसे उसके घर छोड़ दिया। वहाँ जाकर अभिनव शाम को होने वाली party के लिए तैयार होने लगा। उसे हरदेव और उसके आदमियों का डर नहीं था। वो जानता था अनन्या पहले से ही काफ़ी मुश्किल में थी और वो अपनी वजह से उसकी मुश्किलें और नहीं बढ़ाना चाहता था।
अभिनव के पास ले देकर सिर्फ़ एक blazer था, वो भी उसके पापा का। वो जगह-२ से फटा और उधड़ा हुआ था, लेकिन जब अभिनव ने उसे पहना तो उसकी ख़ूबसूरती ने blazer के सारी कमियों को ढक दिया। अभिनव अनन्या के घर जाने के लिए निकल पड़ा।
अभिनव का अंदाज़ा सही था, अनन्या का घर काफ़ी बड़ा था। वो एक अमीर परिवार की लड़की थी। जितना अभिनव महीने का कमाता था, उतने की अनन्या ने sandals पहनी हुई थी। अनन्या गाड़ी में बैठी और दोनों party के लिए निकल पड़े। उसकी आँखों में दिख रहा था कि वो अभिनव से कितनी नफ़रत करती थी। अभिनव भी party में, इतने बड़े लोगों के बीच जाने से घबरा रहा था। उसी घबराहट में उसने कब अपने पापा की अँगूठी को उँगली में गोल-२ घुमाना शुरू कर दिया, उसे पता ही नहीं चला।
जब वो लोग अकरम के घर के बाहर पहुँचे तो अंदर जाने से पहले अनन्या ने अभिनव से पूछा,
"इस अँगूठी को उतार दो please? यह काफ़ी गंदी है!" यह सुनते ही अभिनव ने अनन्या को घूरते हुए देखा और बोला,
"Sorry, लेकिन यह अँगूठी ही मेरी सब कुछ है।" अनन्या खींझ गई और अंदर बढ़ने लगी। अभिनव भी उसके पीछे-२ चलता जा रहा था। अकरम का घर क़िले जैसा था, जिसके चारों तरफ़ bouncers बंदूक़ें लिए खड़े थे। जैसे ही अनन्या और अभिनव अंदर आये तो इतने में उसकी नज़र देवेन से टकरा गई। देवेन वही लड़का था जिसकी वजह से अभिनव को आज यहाँ आना पड़ा। अभिनव के मुक्के की वजह से देवेन की नाक पर bandage लगी हुई थी।
"तू यहाँ क्या कर रहा है साले!" देवेन ने पूछा।
"He is my husband!" अनन्या ने बीच में आते हुए कहा।
"अनन्या तुम पागल हो गई हो? इस फटीचर में ऐसा क्या देखा जो इससे शादी कर ली!" देवेन के मुँह से अभिनव को यह सुन ग़ुस्सा आ गया।
"ज़ुबान सम्भालकर बात कर देवेन!"
"नहीं तो— नहीं तो क्या कर लेगा?" देवेन भी तैश में आ गया। अभिनव उसके ऊपर हाथ उठाने ही वाला था कि इतने में उन दोनों का झगड़ा देख party का organiser अकरम वहाँ पहुँच चुका था। उसने कहा,
"क्या हो रहा है यहाँ!"
"अकरम sir, देखिए इस आदमी को! यह एक criminal है और ज़बरदस्ती आपकी party में घुस आया है!" देवेन के कहने पर अकरम ने अभिनव को ऊपर से नीचे तक देखा और बोला,
"कौन हो तुम? यहाँ कैसे आए?"
"यह मेरे husband हैं!" अनन्या ने अपनी शर्म छुपाते हुए कहा। अकरम को अनन्या की बात पर विश्वास नहीं हुआ। माहौल ख़राब ना हो इसलिए उसने अभिनव से कहा,
"तुम यहाँ invited नहीं हो। इससे पहले कि मैं police को बुलाऊँ, चले जाओ यहाँ से!" अभिनव ने देवेन को ग़ुस्से में देखा, अपना हाथ नीचे किया और वहाँ से निकलने लगा। देवेन भी उसे जाता देख मुस्कुरा रहा था।
"Thank you अकरम sir! और अनन्या, तुम भी इससे दूर रहना, साला गरीब!" देवेन ने जैसे ही अभिनव को गाली दी कि इतने में अकरम ने कहा,
"एक minute रुको!" अभिनव रुका और पलटकर अकरम को देखने लगा। अकरम भागते हुए अभिनव के पास गया और उसकी अँगूठी को देखने लगा। आख़िर में अकरम ने कहा,
"क्या मैं तुम से दो minute बात कर सकता हूँ, अकेले में?"
"मुझसे!"
"हाँ! तुमसे ! आओ मेरे साथ!" अकरम ने कहा और अभिनव का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ अंदर ले जाने लगा। अनन्या, देवेन, सनी और party में मौजूद बाक़ी लोग यह देख हैरान हो गए थे।
कुछ देर बाद जब वो अकरम के कमरे में पहुँचे तो अकरम ने दरवाज़ा बंद किया और अभिनव के पास आकर बोला,
"क्या मैं— क्या मैं तुम्हारी यह अँगूठी देख सकता हूँ?"
"क्यों?" अभिनव ने झेंपते हुए कहा।
"चिंता मत करो, मैं इसे माँग नहीं रहा हूँ, बस मुझे कुछ देखना है! Please!" अभिनव उसकी बात सुन हिचकिचाया और आख़िर में अँगूठी उतारकर उसे दे दी। अकरम ने उसे उलट- पलटकर देखा। उस अँगूठी के अंदरूनी भाग में “T” लिखा हुआ था। उसे पढ़ते ही अकरम के दिल की धड़कनें तेज हो गई और उसने अभिनव के पैरों में गिरते हुए कहा,
"tiger!" अभिनव ने अकरम के मुँह से यह शब्द सुना तो वो हैरान हो गया। उसे अचानक से अपनी पिता के वो आख़िरी शब्द याद आ गये जो उन्होंने अभिनव से विदा लेते हुए कहे थे। लेकिन अभिनव हैरान था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अकरम यह सब कैसे जानता था? इससे पहले कि वो कुछ कहता, अकरम ने कहा,
"आख़िरकार हमने तुम्हें ढूँढ ही लिया tiger!"
"tiger?"
"हाँ, मैं पिछले अट्ठारह सालों से तुम्हें ढूँढ रहा हूँ! तुम हमारे tiger हो, हमारे इस हज़ारों करोड़ के business empire के वारिस जिसे हम तीनों दोस्तों ने मिलकर खड़ा किया था। मैं, तुम्हारे पापा संजय गढ़वाल और राणा— राणा अग्निहोत्री!" इतना कहते ही अकरम ने दीवार पर टंगी एक तस्वीर की तरफ़ इशारा कर दिया, जिसमें संजय, अकरम और राणा, तीनों मौजूद थे। राणा को देख अभिनव को झटका लगा। उसकी आँखों के सामने वो सपना फिर से हरा हो गया जो वो हर सुबह देखकर उठता था। उस रात, अभिनव के पिता को जिस आदमी ने गोली चलाई थी वो राणा था। दोस्त होने के बावजूद राणा ने अभिनव के पिता के साथ ग़द्दारी की थी। अभिनव की आँखें चिंगारी सी लाल हो गई। यह देख अकरम ने पूछा,
"क्या हुआ? तुम इतने ग़ुस्से में क्यों हो?"
"नहीं, मैं ठीक हूँ। आपको मुझसे कुछ बात करनी थी ना?"
"हाँ! मैं तुम्हें हमारी company The Mafia King के बारे में कुछ बताने वाला था। हम तीनों ने मिलकर The Mafia King को खड़ा किया था, जिसके नाम से politician, celebrity और इस देश का बड़े से बड़ा आदमी काँपता था। पर तुम्हारे पापा के जाने के बाद सब बिखर गया। इस बीच हमारे कुछ दुश्मन भी खड़े हो गये । उनमें से सबसे बड़ा दुश्मन है दिगपाल छिंगावत। वो सालों से तुम्हें ढूँढ रहा है। वो तुम्हें मारकर हमारा नामोनिशान मिटा देना चाहता है। फ़िलहाल The Mafia King का सारा काम राणा का बेटा मोंटी सम्भाल रहा है, लेकिन अब से company की बागडोर तुम्हारे हाथों में होगी। अपने पिता के काम को, अब तुम्हें ही आगे बढ़ाना है tiger!" यह सुनते ही अभिनव के कान खड़े हो गये थे। कल तक उसकी जेब में सौ रुपये भी नहीं थे और आज अचानक वो हज़ारों करोड़ की company का मालिक हो गया था।
अब आगे क्या होने वाला था? क्या अभिनव अपने पिता का बदला ले पाएगा? कैसे एक डिलीवरी बॉय संभालेगा अपने पिता की हजारों करोड़ की company The Mafia King को ?
"अभिनव! अभिनव बेटा भाग जा यहाँ से, नहीं तो यह लोग तुझे भी मार डालेंगे!" अभिनव के पिता संजय ने दर्द में कराहते हुए अपने 5 साल के बेटे अभिनव से कहा। उनके हाथ में गोली लगी थी। वो और संजय रात के अंधेरे में एक पतली सी गली में छुपे हुए थे। बाहर सड़क पर उनकी गाड़ी खड़ी थी और उसी गाड़ी के पास खड़े थे वो लोग जिन्होंने संजय को गोली मारी थी।
"नहीं पापा! मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा!"
"जिद्द मत कर tiger! मैं अपनी ज़िंदगी जी चुका, लेकिन तुझे अभी बहुत कुछ देखना है, बहुत कुछ सम्भालना है! अब जा!" संजय ने कहा और अपनी उँगली में से एक सोने की अँगूठी निकालकर अभिनव को थमा दी। उसमें एक हरे रंग का नगीना जड़ा हुआ था। संजय ने अभिनव के माथे को चूमा और अपनी बंदूक़ लेकर उन लोगों का सामना करने के लिए गली से बाहर निकल गये। घबराया हुआ अभिनव अपने पिता को छुपकर देख रहा था। संजय जैसे ही अपनी गाड़ी के पास पहुँचे तो एक आदमी ने संजय पर बंदूक़ तान दी। संजय पर तीन गोलियाँ दाग दी गई थी। टूटती साँसों के बीच संजय ने अभिनव को देख कहा,
"इस कमीने का चेहरा याद रखना tiger!" और संजय जमीन पर ढेर हो गया।
"पापा!" अभिनव चिल्लाया और अचानक से उसकी नींद खुल गई। पसीने में तर-बतर अभिनव अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गया और गहरी साँसें लेने लगा। 18 साल, पिछले 18 सालों से यह सपना इसी तरह से अभिनव को परेशान कर रहा था। अभिनव ने पहले अपनी उँगली में पहनी उस अँगूठी को देखा और फिर bathroom की तरफ़ बढ़ने लगा।
अभिनव गुड़गाँव में रहता था और delivery boy का काम करता था। हालाँकि इस काम में उसका मन नहीं लगता था, लेकिन अनाथाश्रम से निकलने के बाद उसके पास यह करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। 18 साल की उम्र में अनाथाश्रम से निकलने के बाद उसने अपना खर्च ख़ुद उठाना शुरू कर दिया था। उसकी ज़िंदगी में बस एक ही ख़ुशी थी, उसकी girlfriend वैभवी। जब भी वो वैभवी को देखता तो अपने सारे दुख भूल जाता था। और आज तो वैभवी का जन्मदिन था, इसलिए अभिनव जल्द से जल्द उससे मिलना चाहता था।
"भैया, यह cake कितने का है?" शाम को जब अभिनव ने अपना काम ख़त्म किया तो वो एक bakery पर आ गया था।
"600"
"अच्छा! और यह pastry?"
"60"
"ठीक है, एक pastry pack कर दो।" अभिनव ने दुकानदार से कहा। असल में अभिनव और वैभवी ने यह तय किया था कि वो पाई-२ जोड़कर अपने लिए किराए का एक बड़ा घर लेंगे, इसलिए वो पैसा waste नहीं करना चाहते थे। pastry लेकर अभिनव ख़ुशी-२ वहाँ से निकल गया।
कुछ देर के बाद जब वो वैभवी के कमरे के बाहर पहुँचा तो उसने पाया वहाँ काफ़ी रंगीन lights जल रही थी और वहाँ से तेज़ music की आवाज़ आ रही थी।। अभिनव हड़बड़ाते हुए ऊपर पहुँचा और घंटी बजा दी। वैभवी ने कमरे का दरवाज़ा खोला। अभिनव ने जैसे ही वैभवी को देखा तो उसके होश उड़ गये। उसने पूछा,
"यह सब क्या है?" वैभवी ने महँगा सा one piece पहना हुआ था और उसके सिर पर एक छोटा सा ताज था। कमरा चारों तरफ़ से सजा हुआ था, table पर एक बड़ा सा cake, शराब और खाना रखा हुआ था। वहाँ बहुत सारे मेहमान आए हुए थे। उन सभी मेहमानों ने एक के बाद एक अभिनव को देखकर कहा,
"यह कौन है वैभवी?"
"देख नहीं रही, यह delivery boy है, पर हम already cake लाये तो थे, फिर तूने pastry क्यों मँगवाई?"
"अरे तुम ग़लत समझ रहे हो। ये तो वो delivery boy है , जिसको वैभवी date कर रही थी।"
"My god! एक delivery boy को date! वैभवी तेरा standard इतना कैसे गिर गया?", अभिनव को यह सुनकर बुरा लगा, लेकिन इससे पहले कि वो कुछ कहता, इतने में पीछे से आवाज़ आयी,
"Happy Birthday वैभवी!" अभिनव ने पलटकर देखा तो पाया कि वहाँ देवेन suit boot में खड़ा था। अभिनव देवेन को अच्छी तरह से जानता था। वो एक बड़े बाप का लड़का था और हर वक़्त वैभवी के आसपास मंडराता रहता था। इस बात से अभिनव चिढ़ता था और जब आज के दिन देवेन यहाँ आया तो अभिनव का दिमाग़ ख़राब हो गया। उसके हाथ में एक बड़ा सा gift था। उसके आगे अभिनव के हाथ में लटकी pastry की थैली कुछ भी नहीं लग रही थी।
"Happy Birthday Darling!" देवेन ने कहा और अभिनव को बग़ल करके वो वैभवी के पास आ गया। उसने वैभवी को gift दिया और उसे कसकर गले लगा लिया। यह देख अभिनव जल भुन उठा। इतने में वैभवी ने कहा,
"दोस्तों, तुम्हें मेरे standard पर doubt है ना! अब मैं तुम्हें बताती हूँ मेरा standard क्या है!" वैभवी ने इतना कहा और देवेन का हाथ पकड़ लिया। इसके बाद वैभवी उसे देखते हुए बोली,
"मैं तुम से breakup कर रही हूँ अभिनव!"
"क्या!"
"और क्या? अबे कब तक बेचारी तेरे जैसे गरीब के साथ आधी pastry खाती रहेगी? नहीं darling?" इतना कहते ही देवेन ने वैभवी के गालों को चूम लिया। अभिनव की आँखें फटी की फटी रह गई। उसने pastry की थैली फेंकी और देवेन की नाक पर एक ज़ोरदार मुक्का जड़ दिया।
"साले! तेरी इतनी हिम्मत!" देवेन जैसे ही अभिनव को मारने के लिए आगे आया इतने में अभिनव ने उसके पेट में एक लात मारी और वैभवी की तरफ़ देखकर बोला,
"यह तुमने ठीक नहीं किया वैभवी!" और अभिनव वहाँ से निकल गया। वो उन दोनों की शक्ल अब और नहीं देखना चाहता था। उसकी आँखों में आँसू थे और उसका दिल ज़ोरों से दुख रहा था।
वो एक बड़े से hotel के सामने footpath पर ही शराब पीने बैठ गया था। हर घूँट के साथ उसकी आँखों के सामने वो दृश्य आ रहा था, जिसमें वैभवी देवेन के गालों को चूम रही थी। हर घूँट के साथ उसके दिल का दर्द और बढ़ता चला जा रहा था।
"यह तुमने ठीक नहीं किया वैभवी! यह तुमने ठीक नहीं किया!" नशे में धुत्त अभिनव ने शराब की आख़िरी bottle सड़क पर फोड़ते हुए कहा। उसे चक्कर आ रहे थे और वो गश खाकर वहीं सड़क पर लेट गया।
उसका दिल तो बुरी तरह से टूट गया था, लेकिन उसके लिए यह रात यहीं ख़त्म नहीं होने वाली थी।
उधर जब अभिनव सड़क पर बेहोश हो गया था, तब इधर सनी सिंह अपनी गाड़ी में बैठा बेचैन हो रहा था। सनी सिंह की बहन अनन्या सिंह उसके गले का काँटा बन गई थी। सनी अपने दादा हरदेव पाल सिंह की नज़र में आने के लिए और अनन्या को रास्ते से हटाने के लिए कुछ भी कर सकता था और आज वो अपनी गाड़ी में अपने आदमियों के साथ निकल पड़ा था अपनी बहन को सबक़ सिखाने के लिए।
इधर कुछ देर के बाद अभिनव के बग़ल से सनी सिंह की महँगी सी गाड़ी गुज़री। जैसे ही सनी की नज़र अभिनव पर पड़ी तो उसने गाड़ी रुकवाई और नीचे उतरकर अभिनव के पास चला गया। वो अभिनव को मुस्कुराते हुए देख रहा था। सनी के आदमी भी उसके पीछे उतरे। उनमें से एक ने हिचकते हुए कहा,
"Boss यह!"
"हमारे पास time नहीं है। सुबह होने से पहले अगर हमने इसे अनन्या के कमरे में नहीं डाला तो हमें दोबारा इस काम को करने का मौक़ा नहीं मिलेगा!" सनी ने कहा और अभिनव को गाड़ी में डालने का इशारा कर दिया। उन्होंने अभिनव को गाड़ी में डाला और वहाँ से रवाना हो गये।
कुछ देर के बाद सनी की गाड़ी एक बड़े से hotel के बाहर आकर खड़ी हो गई थी। सनी ने अपने आदमियों से कहा,
"इसकी pant उतारो और room number 409 में ले चलो!" सनी के आदमी अभिनव को उठाकर सीधा room number 409 में घुसे और उन्होंने अभिनव को बहुत आहिस्ते से उस बिस्तर पर लेटा दिया। वहाँ पहले से सनी की बहन अनन्या लेटी हुई थी।
सुबह जब अभिनव ने करवट बदली तो उसका हाथ एक नर्म हाथ से टकरा गया। अभिनव की नींद टूटी और उसने देखा कि वो एक अनजान लड़की के बग़ल में बिना pant के लेटा हुआ था। इधर अनन्या की भी नींद खुल गई। अपने आपको इस हाल में पाकर वो ग़ुस्से में आग बबूला हो गई। उसने अभिनव के गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा और बोली,
"यह तुमने मेरे साथ क्या किया? कौन हो तुम और मेरे कमरे में कैसे आये! और यह— यह तुमने pant क्यों नहीं पहनी है?" अनन्या ने खींझते हुए कहा। अभिनव को कुछ समझ नहीं आ रहा था। फिर भी उसने कोशिश की और बोला,
"वो मैं—" इतने में अनन्या के कमरे का दरवाज़ा खुला और सनी अपने आदमियों के साथ अंदर आ गया।
"Shame on you बहना! मुझे तो पहले से ही तुम्हारे character पर doubt था! मैंने कितनी बार दादाजी को समझाया, पर वो हर बार बोले कि , मेरी अनन्या ऐसा नहीं कर सकती। इसीलिए मैंने उन्हें अपनी पोती की रंगरलियों का live telecast दिखाने के लिए यहीं बुला लिया।" सनी के मुँह से दादा जी का नाम सुन अनन्या घबरा गई। वो हाथ जोड़ बोली,
"भाई, मुझे सच में नहीं पता क्या हुआ, कैसे हुआ, मैं तो इस लड़के तक को पहली बार देख रही हूँ!"
"मैं भी! और हम दोनों के बीच ऐसा कुछ नहीं हुआ है जैसा—" इससे पहले कि अभिनव सफ़ाई देता, अनन्या और सनी के दादा, हरदेव पाल सिंह कमरे में पहुँच चुके थे। उनके पहनावे से समझ आ रहा था कि वो बहुत अमीर आदमी थे । अनन्या को इस हाल में देख उनकी आँखें ग़ुस्से में लाल हो गई थी।
"मुझे तुम से यह उम्मीद नहीं थी।"
"दादा जी जैसा आप समझ रहे हैं वैसा बिल्कुल भी नहीं है!"
"अनन्या, तुम्हें अच्छी तरह से पता था नियम क्या है, फिर भी तुमने उसे तोड़ दिया! और तू—" जब अभिनव की नज़र हरदेव से मिली तो उसे लगा वो अपनी आँखों के सामने मौत देख रहा है। हरदेव उसके पास आये और बोले,
"तू मेरी पोती के साथ सोया था ना! हमारे परिवार के क़ानून के हिसाब से आज से तू सिंह परिवार का दामाद है!"
"क्या! लेकिन— लेकिन हम दोनों के बीच तो कुछ हुआ ही नहीं!"
"अच्छा!" हरदेव ने तीखी नज़रों से अभिनव के पैरों को देखा। उसने pant नहीं पहनी थी। यह देख हरदेव ने अभिनव को घूरा और अपने आदमियों से बोले,
"मारो साले को!" इससे पहले कि अभिनव कुछ समझता, हरदेव के आदमियों ने उसे मारना शुरू कर दिया था। अभिनव हरदेव की उम्र का लिहाज़ कर रहा था, इसलिए उसने अपने आपको रोक लिया था। कुछ देर बाद हरदेव ने अपने आदमियों को रुकने का इशारा किया और अनन्या की तरफ़ देखते हुए कहा,
"अनन्या, इसे hospital भेजना, ताकि शाम को यह अकरम की party में आने के लिए ठीक ठाक होकर तैयार हो जाये। याद रखना, मुझे शाम को अकरम की party में तुम्हारे साथ यह ज़रूर नज़र आना चाहिए!" इतना कहते ही हरदेव ग़ुस्से में वहाँ से निकल गया। उसके पीछे सनी भी अनन्या को चिढ़ाने के लिए मुस्कुराते हुए वहाँ से निकल गया। अभिनव दर्द से कराह रहा था। अनन्या उसके पास आयी और बोली,
"तुमने मेरी पूरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी! क्यों?" अभिनव के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।
अनन्या का driver उसी की गाड़ी से अभिनव को पहले hospital ले गया और उसके बाद उसे उसके घर छोड़ दिया। वहाँ जाकर अभिनव शाम को होने वाली party के लिए तैयार होने लगा। उसे हरदेव और उसके आदमियों का डर नहीं था। वो जानता था अनन्या पहले से ही काफ़ी मुश्किल में थी और वो अपनी वजह से उसकी मुश्किलें और नहीं बढ़ाना चाहता था।
अभिनव के पास ले देकर सिर्फ़ एक blazer था, वो भी उसके पापा का। वो जगह-२ से फटा और उधड़ा हुआ था, लेकिन जब अभिनव ने उसे पहना तो उसकी ख़ूबसूरती ने blazer के सारी कमियों को ढक दिया। अभिनव अनन्या के घर जाने के लिए निकल पड़ा।
अभिनव का अंदाज़ा सही था, अनन्या का घर काफ़ी बड़ा था। वो एक अमीर परिवार की लड़की थी। जितना अभिनव महीने का कमाता था, उतने की अनन्या ने sandals पहनी हुई थी। अनन्या गाड़ी में बैठी और दोनों party के लिए निकल पड़े। उसकी आँखों में दिख रहा था कि वो अभिनव से कितनी नफ़रत करती थी। अभिनव भी party में, इतने बड़े लोगों के बीच जाने से घबरा रहा था। उसी घबराहट में उसने कब अपने पापा की अँगूठी को उँगली में गोल-२ घुमाना शुरू कर दिया, उसे पता ही नहीं चला।
जब वो लोग अकरम के घर के बाहर पहुँचे तो अंदर जाने से पहले अनन्या ने अभिनव से पूछा,
"इस अँगूठी को उतार दो please? यह काफ़ी गंदी है!" यह सुनते ही अभिनव ने अनन्या को घूरते हुए देखा और बोला,
"Sorry, लेकिन यह अँगूठी ही मेरी सब कुछ है।" अनन्या खींझ गई और अंदर बढ़ने लगी। अभिनव भी उसके पीछे-२ चलता जा रहा था। अकरम का घर क़िले जैसा था, जिसके चारों तरफ़ bouncers बंदूक़ें लिए खड़े थे। जैसे ही अनन्या और अभिनव अंदर आये तो इतने में उसकी नज़र देवेन से टकरा गई। देवेन वही लड़का था जिसकी वजह से अभिनव को आज यहाँ आना पड़ा। अभिनव के मुक्के की वजह से देवेन की नाक पर bandage लगी हुई थी।
"तू यहाँ क्या कर रहा है साले!" देवेन ने पूछा।
"He is my husband!" अनन्या ने बीच में आते हुए कहा।
"अनन्या तुम पागल हो गई हो? इस फटीचर में ऐसा क्या देखा जो इससे शादी कर ली!" देवेन के मुँह से अभिनव को यह सुन ग़ुस्सा आ गया।
"ज़ुबान सम्भालकर बात कर देवेन!"
"नहीं तो— नहीं तो क्या कर लेगा?" देवेन भी तैश में आ गया। अभिनव उसके ऊपर हाथ उठाने ही वाला था कि इतने में उन दोनों का झगड़ा देख party का organiser अकरम वहाँ पहुँच चुका था। उसने कहा,
"क्या हो रहा है यहाँ!"
"अकरम sir, देखिए इस आदमी को! यह एक criminal है और ज़बरदस्ती आपकी party में घुस आया है!" देवेन के कहने पर अकरम ने अभिनव को ऊपर से नीचे तक देखा और बोला,
"कौन हो तुम? यहाँ कैसे आए?"
"यह मेरे husband हैं!" अनन्या ने अपनी शर्म छुपाते हुए कहा। अकरम को अनन्या की बात पर विश्वास नहीं हुआ। माहौल ख़राब ना हो इसलिए उसने अभिनव से कहा,
"तुम यहाँ invited नहीं हो। इससे पहले कि मैं police को बुलाऊँ, चले जाओ यहाँ से!" अभिनव ने देवेन को ग़ुस्से में देखा, अपना हाथ नीचे किया और वहाँ से निकलने लगा। देवेन भी उसे जाता देख मुस्कुरा रहा था।
"Thank you अकरम sir! और अनन्या, तुम भी इससे दूर रहना, साला गरीब!" देवेन ने जैसे ही अभिनव को गाली दी कि इतने में अकरम ने कहा,
"एक minute रुको!" अभिनव रुका और पलटकर अकरम को देखने लगा। अकरम भागते हुए अभिनव के पास गया और उसकी अँगूठी को देखने लगा। आख़िर में अकरम ने कहा,
"क्या मैं तुम से दो minute बात कर सकता हूँ, अकेले में?"
"मुझसे!"
"हाँ! तुमसे ! आओ मेरे साथ!" अकरम ने कहा और अभिनव का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ अंदर ले जाने लगा। अनन्या, देवेन, सनी और party में मौजूद बाक़ी लोग यह देख हैरान हो गए थे।
कुछ देर बाद जब वो अकरम के कमरे में पहुँचे तो अकरम ने दरवाज़ा बंद किया और अभिनव के पास आकर बोला,
"क्या मैं— क्या मैं तुम्हारी यह अँगूठी देख सकता हूँ?"
"क्यों?" अभिनव ने झेंपते हुए कहा।
"चिंता मत करो, मैं इसे माँग नहीं रहा हूँ, बस मुझे कुछ देखना है! Please!" अभिनव उसकी बात सुन हिचकिचाया और आख़िर में अँगूठी उतारकर उसे दे दी। अकरम ने उसे उलट- पलटकर देखा। उस अँगूठी के अंदरूनी भाग में “T” लिखा हुआ था। उसे पढ़ते ही अकरम के दिल की धड़कनें तेज हो गई और उसने अभिनव के पैरों में गिरते हुए कहा,
"tiger!" अभिनव ने अकरम के मुँह से यह शब्द सुना तो वो हैरान हो गया। उसे अचानक से अपनी पिता के वो आख़िरी शब्द याद आ गये जो उन्होंने अभिनव से विदा लेते हुए कहे थे। लेकिन अभिनव हैरान था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अकरम यह सब कैसे जानता था? इससे पहले कि वो कुछ कहता, अकरम ने कहा,
"आख़िरकार हमने तुम्हें ढूँढ ही लिया tiger!"
"tiger?"
"हाँ, मैं पिछले अट्ठारह सालों से तुम्हें ढूँढ रहा हूँ! तुम हमारे tiger हो, हमारे इस हज़ारों करोड़ के business empire के वारिस जिसे हम तीनों दोस्तों ने मिलकर खड़ा किया था। मैं, तुम्हारे पापा संजय गढ़वाल और राणा— राणा अग्निहोत्री!" इतना कहते ही अकरम ने दीवार पर टंगी एक तस्वीर की तरफ़ इशारा कर दिया, जिसमें संजय, अकरम और राणा, तीनों मौजूद थे। राणा को देख अभिनव को झटका लगा। उसकी आँखों के सामने वो सपना फिर से हरा हो गया जो वो हर सुबह देखकर उठता था। उस रात, अभिनव के पिता को जिस आदमी ने गोली चलाई थी वो राणा था। दोस्त होने के बावजूद राणा ने अभिनव के पिता के साथ ग़द्दारी की थी। अभिनव की आँखें चिंगारी सी लाल हो गई। यह देख अकरम ने पूछा,
"क्या हुआ? तुम इतने ग़ुस्से में क्यों हो?"
"नहीं, मैं ठीक हूँ। आपको मुझसे कुछ बात करनी थी ना?"
"हाँ! मैं तुम्हें हमारी company The Mafia King के बारे में कुछ बताने वाला था। हम तीनों ने मिलकर The Mafia King को खड़ा किया था, जिसके नाम से politician, celebrity और इस देश का बड़े से बड़ा आदमी काँपता था। पर तुम्हारे पापा के जाने के बाद सब बिखर गया। इस बीच हमारे कुछ दुश्मन भी खड़े हो गये । उनमें से सबसे बड़ा दुश्मन है दिगपाल छिंगावत। वो सालों से तुम्हें ढूँढ रहा है। वो तुम्हें मारकर हमारा नामोनिशान मिटा देना चाहता है। फ़िलहाल The Mafia King का सारा काम राणा का बेटा मोंटी सम्भाल रहा है, लेकिन अब से company की बागडोर तुम्हारे हाथों में होगी। अपने पिता के काम को, अब तुम्हें ही आगे बढ़ाना है tiger!" यह सुनते ही अभिनव के कान खड़े हो गये थे। कल तक उसकी जेब में सौ रुपये भी नहीं थे और आज अचानक वो हज़ारों करोड़ की company का मालिक हो गया था।
अब आगे क्या होने वाला था? क्या अभिनव अपने पिता का बदला ले पाएगा? कैसे एक डिलीवरी बॉय संभालेगा अपने पिता की हजारों करोड़ की company The Mafia King को ?
Chapter
5
Words
12.8K
Updated
11 days ago
Published
May 26, 2026
Published Chapters
The Return Of Tiger - Chapter 1
Free
The Return Of Tiger - Chapter 2
Free
The Return Of Tiger - Chapter 3
Free
The Return Of Tiger - Chapter 4
Free
The Return Of Tiger - Chapter 5
Free
Ch 1 - Abhinav Is Tiger
"अभिनव! अभिनव बेटा भाग जा यहाँ से, नहीं तो यह लोग तुझे भी मार डालेंगे!" अभिनव के पिता संजय ने दर्द में कराहते हुए अपने 5 साल के बेटे अभिनव से कहा। उनके हाथ में गोली लगी थी। वो और संजय रात के अंधेरे में एक पतली सी गली में छुपे हुए थे। बाहर सड़क पर उनकी गाड़ी खड़ी थी और उसी गाड़ी के पास खड़े थे वो लोग जिन्होंने संजय को गोली मारी थी।
"नहीं पापा! मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा!"
"जिद्द मत कर tiger! मैं अपनी ज़िंदगी जी चुका, लेकिन तुझे अभी बहुत कुछ देखना है, बहुत कुछ सम्भालना है! अब जा!" संजय ने कहा और अपनी उँगली में से एक सोने की अँगूठी निकालकर अभिनव को थमा दी। उसमें एक हरे रंग का नगीना जड़ा हुआ था। संजय ने अभिनव के माथे को चूमा और अपनी बंदूक़ लेकर उन लोगों का सामना करने के लिए गली से बाहर निकल गये। घबराया हुआ अभिनव अपने पिता को छुपकर देख रहा था। संजय जैसे ही अपनी गाड़ी के पास पहुँचे तो एक आदमी ने संजय पर बंदूक़ तान दी। संजय पर तीन गोलियाँ दाग दी गई थी। टूटती साँसों के बीच संजय ने अभिनव को देख कहा,
"इस कमीने का चेहरा याद रखना tiger!" और संजय जमीन पर ढेर हो गया।
"पापा!" अभिनव चिल्लाया और अचानक से उसकी नींद खुल गई। पसीने में तर-बतर अभिनव अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गया और गहरी साँसें लेने लगा। 18 साल, पिछले 18 सालों से यह सपना इसी तरह से अभिनव को परेशान कर रहा था। अभिनव ने पहले अपनी उँगली में पहनी उस अँगूठी को देखा और फिर bathroom की तरफ़ बढ़ने लगा।
अभिनव गुड़गाँव में रहता था और delivery boy का काम करता था। हालाँकि इस काम में उसका मन नहीं लगता था, लेकिन अनाथाश्रम से निकलने के बाद उसके पास यह करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। 18 साल की उम्र में अनाथाश्रम से निकलने के बाद उसने अपना खर्च ख़ुद उठाना शुरू कर दिया था। उसकी ज़िंदगी में बस एक ही ख़ुशी थी, उसकी girlfriend वैभवी। जब भी वो वैभवी को देखता तो अपने सारे दुख भूल जाता था। और आज तो वैभवी का जन्मदिन था, इसलिए अभिनव जल्द से जल्द उससे मिलना चाहता था।
"भैया, यह cake कितने का है?" शाम को जब अभिनव ने अपना काम ख़त्म किया तो वो एक bakery पर आ गया था।
"600"
"अच्छा! और यह pastry?"
"60"
"ठीक है, एक pastry pack कर दो।" अभिनव ने दुकानदार से कहा। असल में अभिनव और वैभवी ने यह तय किया था कि वो पाई-२ जोड़कर अपने लिए किराए का एक बड़ा घर लेंगे, इसलिए वो पैसा waste नहीं करना चाहते थे। pastry लेकर अभिनव ख़ुशी-२ वहाँ से निकल गया।
कुछ देर के बाद जब वो वैभवी के कमरे के बाहर पहुँचा तो उसने पाया वहाँ काफ़ी रंगीन lights जल रही थी और वहाँ से तेज़ music की आवाज़ आ रही थी।। अभिनव हड़बड़ाते हुए ऊपर पहुँचा और घंटी बजा दी। वैभवी ने कमरे का दरवाज़ा खोला। अभिनव ने जैसे ही वैभवी को देखा तो उसके होश उड़ गये। उसने पूछा,
"यह सब क्या है?" वैभवी ने महँगा सा one piece पहना हुआ था और उसके सिर पर एक छोटा सा ताज था। कमरा चारों तरफ़ से सजा हुआ था, table पर एक बड़ा सा cake, शराब और खाना रखा हुआ था। वहाँ बहुत सारे मेहमान आए हुए थे। उन सभी मेहमानों ने एक के बाद एक अभिनव को देखकर कहा,
"यह कौन है वैभवी?"
"देख नहीं रही, यह delivery boy है, पर हम already cake लाये तो थे, फिर तूने pastry क्यों मँगवाई?"
"अरे तुम ग़लत समझ रहे हो। ये तो वो delivery boy है , जिसको वैभवी date कर रही थी।"
"My god! एक delivery boy को date! वैभवी तेरा standard इतना कैसे गिर गया?", अभिनव को यह सुनकर बुरा लगा, लेकिन इससे पहले कि वो कुछ कहता, इतने में पीछे से आवाज़ आयी,
"Happy Birthday वैभवी!" अभिनव ने पलटकर देखा तो पाया कि वहाँ देवेन suit boot में खड़ा था। अभिनव देवेन को अच्छी तरह से जानता था। वो एक बड़े बाप का लड़का था और हर वक़्त वैभवी के आसपास मंडराता रहता था। इस बात से अभिनव चिढ़ता था और जब आज के दिन देवेन यहाँ आया तो अभिनव का दिमाग़ ख़राब हो गया। उसके हाथ में एक बड़ा सा gift था। उसके आगे अभिनव के हाथ में लटकी pastry की थैली कुछ भी नहीं लग रही थी।
"Happy Birthday Darling!" देवेन ने कहा और अभिनव को बग़ल करके वो वैभवी के पास आ गया। उसने वैभवी को gift दिया और उसे कसकर गले लगा लिया। यह देख अभिनव जल भुन उठा। इतने में वैभवी ने कहा,
"दोस्तों, तुम्हें मेरे standard पर doubt है ना! अब मैं तुम्हें बताती हूँ मेरा standard क्या है!" वैभवी ने इतना कहा और देवेन का हाथ पकड़ लिया। इसके बाद वैभवी उसे देखते हुए बोली,
"मैं तुम से breakup कर रही हूँ अभिनव!"
"क्या!"
"और क्या? अबे कब तक बेचारी तेरे जैसे गरीब के साथ आधी pastry खाती रहेगी? नहीं darling?" इतना कहते ही देवेन ने वैभवी के गालों को चूम लिया। अभिनव की आँखें फटी की फटी रह गई। उसने pastry की थैली फेंकी और देवेन की नाक पर एक ज़ोरदार मुक्का जड़ दिया।
"साले! तेरी इतनी हिम्मत!" देवेन जैसे ही अभिनव को मारने के लिए आगे आया इतने में अभिनव ने उसके पेट में एक लात मारी और वैभवी की तरफ़ देखकर बोला,
"यह तुमने ठीक नहीं किया वैभवी!" और अभिनव वहाँ से निकल गया। वो उन दोनों की शक्ल अब और नहीं देखना चाहता था। उसकी आँखों में आँसू थे और उसका दिल ज़ोरों से दुख रहा था।
वो एक बड़े से hotel के सामने footpath पर ही शराब पीने बैठ गया था। हर घूँट के साथ उसकी आँखों के सामने वो दृश्य आ रहा था, जिसमें वैभवी देवेन के गालों को चूम रही थी। हर घूँट के साथ उसके दिल का दर्द और बढ़ता चला जा रहा था।
"यह तुमने ठीक नहीं किया वैभवी! यह तुमने ठीक नहीं किया!" नशे में धुत्त अभिनव ने शराब की आख़िरी bottle सड़क पर फोड़ते हुए कहा। उसे चक्कर आ रहे थे और वो गश खाकर वहीं सड़क पर लेट गया।
उसका दिल तो बुरी तरह से टूट गया था, लेकिन उसके लिए यह रात यहीं ख़त्म नहीं होने वाली थी।
उधर जब अभिनव सड़क पर बेहोश हो गया था, तब इधर सनी सिंह अपनी गाड़ी में बैठा बेचैन हो रहा था। सनी सिंह की बहन अनन्या सिंह उसके गले का काँटा बन गई थी। सनी अपने दादा हरदेव पाल सिंह की नज़र में आने के लिए और अनन्या को रास्ते से हटाने के लिए कुछ भी कर सकता था और आज वो अपनी गाड़ी में अपने आदमियों के साथ निकल पड़ा था अपनी बहन को सबक़ सिखाने के लिए।
इधर कुछ देर के बाद अभिनव के बग़ल से सनी सिंह की महँगी सी गाड़ी गुज़री। जैसे ही सनी की नज़र अभिनव पर पड़ी तो उसने गाड़ी रुकवाई और नीचे उतरकर अभिनव के पास चला गया। वो अभिनव को मुस्कुराते हुए देख रहा था। सनी के आदमी भी उसके पीछे उतरे। उनमें से एक ने हिचकते हुए कहा,
"Boss यह!"
"हमारे पास time नहीं है। सुबह होने से पहले अगर हमने इसे अनन्या के कमरे में नहीं डाला तो हमें दोबारा इस काम को करने का मौक़ा नहीं मिलेगा!" सनी ने कहा और अभिनव को गाड़ी में डालने का इशारा कर दिया। उन्होंने अभिनव को गाड़ी में डाला और वहाँ से रवाना हो गये।
कुछ देर के बाद सनी की गाड़ी एक बड़े से hotel के बाहर आकर खड़ी हो गई थी। सनी ने अपने आदमियों से कहा,
"इसकी pant उतारो और room number 409 में ले चलो!" सनी के आदमी अभिनव को उठाकर सीधा room number 409 में घुसे और उन्होंने अभिनव को बहुत आहिस्ते से उस बिस्तर पर लेटा दिया। वहाँ पहले से सनी की बहन अनन्या लेटी हुई थी।
सुबह जब अभिनव ने करवट बदली तो उसका हाथ एक नर्म हाथ से टकरा गया। अभिनव की नींद टूटी और उसने देखा कि वो एक अनजान लड़की के बग़ल में बिना pant के लेटा हुआ था। इधर अनन्या की भी नींद खुल गई। अपने आपको इस हाल में पाकर वो ग़ुस्से में आग बबूला हो गई। उसने अभिनव के गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा और बोली,
"यह तुमने मेरे साथ क्या किया? कौन हो तुम और मेरे कमरे में कैसे आये! और यह— यह तुमने pant क्यों नहीं पहनी है?" अनन्या ने खींझते हुए कहा। अभिनव को कुछ समझ नहीं आ रहा था। फिर भी उसने कोशिश की और बोला,
"वो मैं—" इतने में अनन्या के कमरे का दरवाज़ा खुला और सनी अपने आदमियों के साथ अंदर आ गया।
"Shame on you बहना! मुझे तो पहले से ही तुम्हारे character पर doubt था! मैंने कितनी बार दादाजी को समझाया, पर वो हर बार बोले कि , मेरी अनन्या ऐसा नहीं कर सकती। इसीलिए मैंने उन्हें अपनी पोती की रंगरलियों का live telecast दिखाने के लिए यहीं बुला लिया।" सनी के मुँह से दादा जी का नाम सुन अनन्या घबरा गई। वो हाथ जोड़ बोली,
"भाई, मुझे सच में नहीं पता क्या हुआ, कैसे हुआ, मैं तो इस लड़के तक को पहली बार देख रही हूँ!"
"मैं भी! और हम दोनों के बीच ऐसा कुछ नहीं हुआ है जैसा—" इससे पहले कि अभिनव सफ़ाई देता, अनन्या और सनी के दादा, हरदेव पाल सिंह कमरे में पहुँच चुके थे। उनके पहनावे से समझ आ रहा था कि वो बहुत अमीर आदमी थे । अनन्या को इस हाल में देख उनकी आँखें ग़ुस्से में लाल हो गई थी।
"मुझे तुम से यह उम्मीद नहीं थी।"
"दादा जी जैसा आप समझ रहे हैं वैसा बिल्कुल भी नहीं है!"
"अनन्या, तुम्हें अच्छी तरह से पता था नियम क्या है, फिर भी तुमने उसे तोड़ दिया! और तू—" जब अभिनव की नज़र हरदेव से मिली तो उसे लगा वो अपनी आँखों के सामने मौत देख रहा है। हरदेव उसके पास आये और बोले,
"तू मेरी पोती के साथ सोया था ना! हमारे परिवार के क़ानून के हिसाब से आज से तू सिंह परिवार का दामाद है!"
"क्या! लेकिन— लेकिन हम दोनों के बीच तो कुछ हुआ ही नहीं!"
"अच्छा!" हरदेव ने तीखी नज़रों से अभिनव के पैरों को देखा। उसने pant नहीं पहनी थी। यह देख हरदेव ने अभिनव को घूरा और अपने आदमियों से बोले,
"मारो साले को!" इससे पहले कि अभिनव कुछ समझता, हरदेव के आदमियों ने उसे मारना शुरू कर दिया था। अभिनव हरदेव की उम्र का लिहाज़ कर रहा था, इसलिए उसने अपने आपको रोक लिया था। कुछ देर बाद हरदेव ने अपने आदमियों को रुकने का इशारा किया और अनन्या की तरफ़ देखते हुए कहा,
"अनन्या, इसे hospital भेजना, ताकि शाम को यह अकरम की party में आने के लिए ठीक ठाक होकर तैयार हो जाये। याद रखना, मुझे शाम को अकरम की party में तुम्हारे साथ यह ज़रूर नज़र आना चाहिए!" इतना कहते ही हरदेव ग़ुस्से में वहाँ से निकल गया। उसके पीछे सनी भी अनन्या को चिढ़ाने के लिए मुस्कुराते हुए वहाँ से निकल गया। अभिनव दर्द से कराह रहा था। अनन्या उसके पास आयी और बोली,
"तुमने मेरी पूरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी! क्यों?" अभिनव के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।
अनन्या का driver उसी की गाड़ी से अभिनव को पहले hospital ले गया और उसके बाद उसे उसके घर छोड़ दिया। वहाँ जाकर अभिनव शाम को होने वाली party के लिए तैयार होने लगा। उसे हरदेव और उसके आदमियों का डर नहीं था। वो जानता था अनन्या पहले से ही काफ़ी मुश्किल में थी और वो अपनी वजह से उसकी मुश्किलें और नहीं बढ़ाना चाहता था।
अभिनव के पास ले देकर सिर्फ़ एक blazer था, वो भी उसके पापा का। वो जगह-२ से फटा और उधड़ा हुआ था, लेकिन जब अभिनव ने उसे पहना तो उसकी ख़ूबसूरती ने blazer के सारी कमियों को ढक दिया। अभिनव अनन्या के घर जाने के लिए निकल पड़ा।
अभिनव का अंदाज़ा सही था, अनन्या का घर काफ़ी बड़ा था। वो एक अमीर परिवार की लड़की थी। जितना अभिनव महीने का कमाता था, उतने की अनन्या ने sandals पहनी हुई थी। अनन्या गाड़ी में बैठी और दोनों party के लिए निकल पड़े। उसकी आँखों में दिख रहा था कि वो अभिनव से कितनी नफ़रत करती थी। अभिनव भी party में, इतने बड़े लोगों के बीच जाने से घबरा रहा था। उसी घबराहट में उसने कब अपने पापा की अँगूठी को उँगली में गोल-२ घुमाना शुरू कर दिया, उसे पता ही नहीं चला।
जब वो लोग अकरम के घर के बाहर पहुँचे तो अंदर जाने से पहले अनन्या ने अभिनव से पूछा,
"इस अँगूठी को उतार दो please? यह काफ़ी गंदी है!" यह सुनते ही अभिनव ने अनन्या को घूरते हुए देखा और बोला,
"Sorry, लेकिन यह अँगूठी ही मेरी सब कुछ है।" अनन्या खींझ गई और अंदर बढ़ने लगी। अभिनव भी उसके पीछे-२ चलता जा रहा था। अकरम का घर क़िले जैसा था, जिसके चारों तरफ़ bouncers बंदूक़ें लिए खड़े थे। जैसे ही अनन्या और अभिनव अंदर आये तो इतने में उसकी नज़र देवेन से टकरा गई। देवेन वही लड़का था जिसकी वजह से अभिनव को आज यहाँ आना पड़ा। अभिनव के मुक्के की वजह से देवेन की नाक पर bandage लगी हुई थी।
"तू यहाँ क्या कर रहा है साले!" देवेन ने पूछा।
"He is my husband!" अनन्या ने बीच में आते हुए कहा।
"अनन्या तुम पागल हो गई हो? इस फटीचर में ऐसा क्या देखा जो इससे शादी कर ली!" देवेन के मुँह से अभिनव को यह सुन ग़ुस्सा आ गया।
"ज़ुबान सम्भालकर बात कर देवेन!"
"नहीं तो— नहीं तो क्या कर लेगा?" देवेन भी तैश में आ गया। अभिनव उसके ऊपर हाथ उठाने ही वाला था कि इतने में उन दोनों का झगड़ा देख party का organiser अकरम वहाँ पहुँच चुका था। उसने कहा,
"क्या हो रहा है यहाँ!"
"अकरम sir, देखिए इस आदमी को! यह एक criminal है और ज़बरदस्ती आपकी party में घुस आया है!" देवेन के कहने पर अकरम ने अभिनव को ऊपर से नीचे तक देखा और बोला,
"कौन हो तुम? यहाँ कैसे आए?"
"यह मेरे husband हैं!" अनन्या ने अपनी शर्म छुपाते हुए कहा। अकरम को अनन्या की बात पर विश्वास नहीं हुआ। माहौल ख़राब ना हो इसलिए उसने अभिनव से कहा,
"तुम यहाँ invited नहीं हो। इससे पहले कि मैं police को बुलाऊँ, चले जाओ यहाँ से!" अभिनव ने देवेन को ग़ुस्से में देखा, अपना हाथ नीचे किया और वहाँ से निकलने लगा। देवेन भी उसे जाता देख मुस्कुरा रहा था।
"Thank you अकरम sir! और अनन्या, तुम भी इससे दूर रहना, साला गरीब!" देवेन ने जैसे ही अभिनव को गाली दी कि इतने में अकरम ने कहा,
"एक minute रुको!" अभिनव रुका और पलटकर अकरम को देखने लगा। अकरम भागते हुए अभिनव के पास गया और उसकी अँगूठी को देखने लगा। आख़िर में अकरम ने कहा,
"क्या मैं तुम से दो minute बात कर सकता हूँ, अकेले में?"
"मुझसे!"
"हाँ! तुमसे ! आओ मेरे साथ!" अकरम ने कहा और अभिनव का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ अंदर ले जाने लगा। अनन्या, देवेन, सनी और party में मौजूद बाक़ी लोग यह देख हैरान हो गए थे।
कुछ देर बाद जब वो अकरम के कमरे में पहुँचे तो अकरम ने दरवाज़ा बंद किया और अभिनव के पास आकर बोला,
"क्या मैं— क्या मैं तुम्हारी यह अँगूठी देख सकता हूँ?"
"क्यों?" अभिनव ने झेंपते हुए कहा।
"चिंता मत करो, मैं इसे माँग नहीं रहा हूँ, बस मुझे कुछ देखना है! Please!" अभिनव उसकी बात सुन हिचकिचाया और आख़िर में अँगूठी उतारकर उसे दे दी। अकरम ने उसे उलट- पलटकर देखा। उस अँगूठी के अंदरूनी भाग में “T” लिखा हुआ था। उसे पढ़ते ही अकरम के दिल की धड़कनें तेज हो गई और उसने अभिनव के पैरों में गिरते हुए कहा,
"tiger!" अभिनव ने अकरम के मुँह से यह शब्द सुना तो वो हैरान हो गया। उसे अचानक से अपनी पिता के वो आख़िरी शब्द याद आ गये जो उन्होंने अभिनव से विदा लेते हुए कहे थे। लेकिन अभिनव हैरान था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अकरम यह सब कैसे जानता था? इससे पहले कि वो कुछ कहता, अकरम ने कहा,
"आख़िरकार हमने तुम्हें ढूँढ ही लिया tiger!"
"tiger?"
"हाँ, मैं पिछले अट्ठारह सालों से तुम्हें ढूँढ रहा हूँ! तुम हमारे tiger हो, हमारे इस हज़ारों करोड़ के business empire के वारिस जिसे हम तीनों दोस्तों ने मिलकर खड़ा किया था। मैं, तुम्हारे पापा संजय गढ़वाल और राणा— राणा अग्निहोत्री!" इतना कहते ही अकरम ने दीवार पर टंगी एक तस्वीर की तरफ़ इशारा कर दिया, जिसमें संजय, अकरम और राणा, तीनों मौजूद थे। राणा को देख अभिनव को झटका लगा। उसकी आँखों के सामने वो सपना फिर से हरा हो गया जो वो हर सुबह देखकर उठता था। उस रात, अभिनव के पिता को जिस आदमी ने गोली चलाई थी वो राणा था। दोस्त होने के बावजूद राणा ने अभिनव के पिता के साथ ग़द्दारी की थी। अभिनव की आँखें चिंगारी सी लाल हो गई। यह देख अकरम ने पूछा,
"क्या हुआ? तुम इतने ग़ुस्से में क्यों हो?"
"नहीं, मैं ठीक हूँ। आपको मुझसे कुछ बात करनी थी ना?"
"हाँ! मैं तुम्हें हमारी company The Mafia King के बारे में कुछ बताने वाला था। हम तीनों ने मिलकर The Mafia King को खड़ा किया था, जिसके नाम से politician, celebrity और इस देश का बड़े से बड़ा आदमी काँपता था। पर तुम्हारे पापा के जाने के बाद सब बिखर गया। इस बीच हमारे कुछ दुश्मन भी खड़े हो गये । उनमें से सबसे बड़ा दुश्मन है दिगपाल छिंगावत। वो सालों से तुम्हें ढूँढ रहा है। वो तुम्हें मारकर हमारा नामोनिशान मिटा देना चाहता है। फ़िलहाल The Mafia King का सारा काम राणा का बेटा मोंटी सम्भाल रहा है, लेकिन अब से company की बागडोर तुम्हारे हाथों में होगी। अपने पिता के काम को, अब तुम्हें ही आगे बढ़ाना है tiger!" यह सुनते ही अभिनव के कान खड़े हो गये थे। कल तक उसकी जेब में सौ रुपये भी नहीं थे और आज अचानक वो हज़ारों करोड़ की company का मालिक हो गया था।
अब आगे क्या होने वाला था? क्या अभिनव अपने पिता का बदला ले पाएगा? कैसे एक डिलीवरी बॉय संभालेगा अपने पिता की हजारों करोड़ की company The Mafia King को ?
"अभिनव! अभिनव बेटा भाग जा यहाँ से, नहीं तो यह लोग तुझे भी मार डालेंगे!" अभिनव के पिता संजय ने दर्द में कराहते हुए अपने 5 साल के बेटे अभिनव से कहा। उनके हाथ में गोली लगी थी। वो और संजय रात के अंधेरे में एक पतली सी गली में छुपे हुए थे। बाहर सड़क पर उनकी गाड़ी खड़ी थी और उसी गाड़ी के पास खड़े थे वो लोग जिन्होंने संजय को गोली मारी थी।
"नहीं पापा! मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगा!"
"जिद्द मत कर tiger! मैं अपनी ज़िंदगी जी चुका, लेकिन तुझे अभी बहुत कुछ देखना है, बहुत कुछ सम्भालना है! अब जा!" संजय ने कहा और अपनी उँगली में से एक सोने की अँगूठी निकालकर अभिनव को थमा दी। उसमें एक हरे रंग का नगीना जड़ा हुआ था। संजय ने अभिनव के माथे को चूमा और अपनी बंदूक़ लेकर उन लोगों का सामना करने के लिए गली से बाहर निकल गये। घबराया हुआ अभिनव अपने पिता को छुपकर देख रहा था। संजय जैसे ही अपनी गाड़ी के पास पहुँचे तो एक आदमी ने संजय पर बंदूक़ तान दी। संजय पर तीन गोलियाँ दाग दी गई थी। टूटती साँसों के बीच संजय ने अभिनव को देख कहा,
"इस कमीने का चेहरा याद रखना tiger!" और संजय जमीन पर ढेर हो गया।
"पापा!" अभिनव चिल्लाया और अचानक से उसकी नींद खुल गई। पसीने में तर-बतर अभिनव अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गया और गहरी साँसें लेने लगा। 18 साल, पिछले 18 सालों से यह सपना इसी तरह से अभिनव को परेशान कर रहा था। अभिनव ने पहले अपनी उँगली में पहनी उस अँगूठी को देखा और फिर bathroom की तरफ़ बढ़ने लगा।
अभिनव गुड़गाँव में रहता था और delivery boy का काम करता था। हालाँकि इस काम में उसका मन नहीं लगता था, लेकिन अनाथाश्रम से निकलने के बाद उसके पास यह करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। 18 साल की उम्र में अनाथाश्रम से निकलने के बाद उसने अपना खर्च ख़ुद उठाना शुरू कर दिया था। उसकी ज़िंदगी में बस एक ही ख़ुशी थी, उसकी girlfriend वैभवी। जब भी वो वैभवी को देखता तो अपने सारे दुख भूल जाता था। और आज तो वैभवी का जन्मदिन था, इसलिए अभिनव जल्द से जल्द उससे मिलना चाहता था।
"भैया, यह cake कितने का है?" शाम को जब अभिनव ने अपना काम ख़त्म किया तो वो एक bakery पर आ गया था।
"600"
"अच्छा! और यह pastry?"
"60"
"ठीक है, एक pastry pack कर दो।" अभिनव ने दुकानदार से कहा। असल में अभिनव और वैभवी ने यह तय किया था कि वो पाई-२ जोड़कर अपने लिए किराए का एक बड़ा घर लेंगे, इसलिए वो पैसा waste नहीं करना चाहते थे। pastry लेकर अभिनव ख़ुशी-२ वहाँ से निकल गया।
कुछ देर के बाद जब वो वैभवी के कमरे के बाहर पहुँचा तो उसने पाया वहाँ काफ़ी रंगीन lights जल रही थी और वहाँ से तेज़ music की आवाज़ आ रही थी।। अभिनव हड़बड़ाते हुए ऊपर पहुँचा और घंटी बजा दी। वैभवी ने कमरे का दरवाज़ा खोला। अभिनव ने जैसे ही वैभवी को देखा तो उसके होश उड़ गये। उसने पूछा,
"यह सब क्या है?" वैभवी ने महँगा सा one piece पहना हुआ था और उसके सिर पर एक छोटा सा ताज था। कमरा चारों तरफ़ से सजा हुआ था, table पर एक बड़ा सा cake, शराब और खाना रखा हुआ था। वहाँ बहुत सारे मेहमान आए हुए थे। उन सभी मेहमानों ने एक के बाद एक अभिनव को देखकर कहा,
"यह कौन है वैभवी?"
"देख नहीं रही, यह delivery boy है, पर हम already cake लाये तो थे, फिर तूने pastry क्यों मँगवाई?"
"अरे तुम ग़लत समझ रहे हो। ये तो वो delivery boy है , जिसको वैभवी date कर रही थी।"
"My god! एक delivery boy को date! वैभवी तेरा standard इतना कैसे गिर गया?", अभिनव को यह सुनकर बुरा लगा, लेकिन इससे पहले कि वो कुछ कहता, इतने में पीछे से आवाज़ आयी,
"Happy Birthday वैभवी!" अभिनव ने पलटकर देखा तो पाया कि वहाँ देवेन suit boot में खड़ा था। अभिनव देवेन को अच्छी तरह से जानता था। वो एक बड़े बाप का लड़का था और हर वक़्त वैभवी के आसपास मंडराता रहता था। इस बात से अभिनव चिढ़ता था और जब आज के दिन देवेन यहाँ आया तो अभिनव का दिमाग़ ख़राब हो गया। उसके हाथ में एक बड़ा सा gift था। उसके आगे अभिनव के हाथ में लटकी pastry की थैली कुछ भी नहीं लग रही थी।
"Happy Birthday Darling!" देवेन ने कहा और अभिनव को बग़ल करके वो वैभवी के पास आ गया। उसने वैभवी को gift दिया और उसे कसकर गले लगा लिया। यह देख अभिनव जल भुन उठा। इतने में वैभवी ने कहा,
"दोस्तों, तुम्हें मेरे standard पर doubt है ना! अब मैं तुम्हें बताती हूँ मेरा standard क्या है!" वैभवी ने इतना कहा और देवेन का हाथ पकड़ लिया। इसके बाद वैभवी उसे देखते हुए बोली,
"मैं तुम से breakup कर रही हूँ अभिनव!"
"क्या!"
"और क्या? अबे कब तक बेचारी तेरे जैसे गरीब के साथ आधी pastry खाती रहेगी? नहीं darling?" इतना कहते ही देवेन ने वैभवी के गालों को चूम लिया। अभिनव की आँखें फटी की फटी रह गई। उसने pastry की थैली फेंकी और देवेन की नाक पर एक ज़ोरदार मुक्का जड़ दिया।
"साले! तेरी इतनी हिम्मत!" देवेन जैसे ही अभिनव को मारने के लिए आगे आया इतने में अभिनव ने उसके पेट में एक लात मारी और वैभवी की तरफ़ देखकर बोला,
"यह तुमने ठीक नहीं किया वैभवी!" और अभिनव वहाँ से निकल गया। वो उन दोनों की शक्ल अब और नहीं देखना चाहता था। उसकी आँखों में आँसू थे और उसका दिल ज़ोरों से दुख रहा था।
वो एक बड़े से hotel के सामने footpath पर ही शराब पीने बैठ गया था। हर घूँट के साथ उसकी आँखों के सामने वो दृश्य आ रहा था, जिसमें वैभवी देवेन के गालों को चूम रही थी। हर घूँट के साथ उसके दिल का दर्द और बढ़ता चला जा रहा था।
"यह तुमने ठीक नहीं किया वैभवी! यह तुमने ठीक नहीं किया!" नशे में धुत्त अभिनव ने शराब की आख़िरी bottle सड़क पर फोड़ते हुए कहा। उसे चक्कर आ रहे थे और वो गश खाकर वहीं सड़क पर लेट गया।
उसका दिल तो बुरी तरह से टूट गया था, लेकिन उसके लिए यह रात यहीं ख़त्म नहीं होने वाली थी।
उधर जब अभिनव सड़क पर बेहोश हो गया था, तब इधर सनी सिंह अपनी गाड़ी में बैठा बेचैन हो रहा था। सनी सिंह की बहन अनन्या सिंह उसके गले का काँटा बन गई थी। सनी अपने दादा हरदेव पाल सिंह की नज़र में आने के लिए और अनन्या को रास्ते से हटाने के लिए कुछ भी कर सकता था और आज वो अपनी गाड़ी में अपने आदमियों के साथ निकल पड़ा था अपनी बहन को सबक़ सिखाने के लिए।
इधर कुछ देर के बाद अभिनव के बग़ल से सनी सिंह की महँगी सी गाड़ी गुज़री। जैसे ही सनी की नज़र अभिनव पर पड़ी तो उसने गाड़ी रुकवाई और नीचे उतरकर अभिनव के पास चला गया। वो अभिनव को मुस्कुराते हुए देख रहा था। सनी के आदमी भी उसके पीछे उतरे। उनमें से एक ने हिचकते हुए कहा,
"Boss यह!"
"हमारे पास time नहीं है। सुबह होने से पहले अगर हमने इसे अनन्या के कमरे में नहीं डाला तो हमें दोबारा इस काम को करने का मौक़ा नहीं मिलेगा!" सनी ने कहा और अभिनव को गाड़ी में डालने का इशारा कर दिया। उन्होंने अभिनव को गाड़ी में डाला और वहाँ से रवाना हो गये।
कुछ देर के बाद सनी की गाड़ी एक बड़े से hotel के बाहर आकर खड़ी हो गई थी। सनी ने अपने आदमियों से कहा,
"इसकी pant उतारो और room number 409 में ले चलो!" सनी के आदमी अभिनव को उठाकर सीधा room number 409 में घुसे और उन्होंने अभिनव को बहुत आहिस्ते से उस बिस्तर पर लेटा दिया। वहाँ पहले से सनी की बहन अनन्या लेटी हुई थी।
सुबह जब अभिनव ने करवट बदली तो उसका हाथ एक नर्म हाथ से टकरा गया। अभिनव की नींद टूटी और उसने देखा कि वो एक अनजान लड़की के बग़ल में बिना pant के लेटा हुआ था। इधर अनन्या की भी नींद खुल गई। अपने आपको इस हाल में पाकर वो ग़ुस्से में आग बबूला हो गई। उसने अभिनव के गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा और बोली,
"यह तुमने मेरे साथ क्या किया? कौन हो तुम और मेरे कमरे में कैसे आये! और यह— यह तुमने pant क्यों नहीं पहनी है?" अनन्या ने खींझते हुए कहा। अभिनव को कुछ समझ नहीं आ रहा था। फिर भी उसने कोशिश की और बोला,
"वो मैं—" इतने में अनन्या के कमरे का दरवाज़ा खुला और सनी अपने आदमियों के साथ अंदर आ गया।
"Shame on you बहना! मुझे तो पहले से ही तुम्हारे character पर doubt था! मैंने कितनी बार दादाजी को समझाया, पर वो हर बार बोले कि , मेरी अनन्या ऐसा नहीं कर सकती। इसीलिए मैंने उन्हें अपनी पोती की रंगरलियों का live telecast दिखाने के लिए यहीं बुला लिया।" सनी के मुँह से दादा जी का नाम सुन अनन्या घबरा गई। वो हाथ जोड़ बोली,
"भाई, मुझे सच में नहीं पता क्या हुआ, कैसे हुआ, मैं तो इस लड़के तक को पहली बार देख रही हूँ!"
"मैं भी! और हम दोनों के बीच ऐसा कुछ नहीं हुआ है जैसा—" इससे पहले कि अभिनव सफ़ाई देता, अनन्या और सनी के दादा, हरदेव पाल सिंह कमरे में पहुँच चुके थे। उनके पहनावे से समझ आ रहा था कि वो बहुत अमीर आदमी थे । अनन्या को इस हाल में देख उनकी आँखें ग़ुस्से में लाल हो गई थी।
"मुझे तुम से यह उम्मीद नहीं थी।"
"दादा जी जैसा आप समझ रहे हैं वैसा बिल्कुल भी नहीं है!"
"अनन्या, तुम्हें अच्छी तरह से पता था नियम क्या है, फिर भी तुमने उसे तोड़ दिया! और तू—" जब अभिनव की नज़र हरदेव से मिली तो उसे लगा वो अपनी आँखों के सामने मौत देख रहा है। हरदेव उसके पास आये और बोले,
"तू मेरी पोती के साथ सोया था ना! हमारे परिवार के क़ानून के हिसाब से आज से तू सिंह परिवार का दामाद है!"
"क्या! लेकिन— लेकिन हम दोनों के बीच तो कुछ हुआ ही नहीं!"
"अच्छा!" हरदेव ने तीखी नज़रों से अभिनव के पैरों को देखा। उसने pant नहीं पहनी थी। यह देख हरदेव ने अभिनव को घूरा और अपने आदमियों से बोले,
"मारो साले को!" इससे पहले कि अभिनव कुछ समझता, हरदेव के आदमियों ने उसे मारना शुरू कर दिया था। अभिनव हरदेव की उम्र का लिहाज़ कर रहा था, इसलिए उसने अपने आपको रोक लिया था। कुछ देर बाद हरदेव ने अपने आदमियों को रुकने का इशारा किया और अनन्या की तरफ़ देखते हुए कहा,
"अनन्या, इसे hospital भेजना, ताकि शाम को यह अकरम की party में आने के लिए ठीक ठाक होकर तैयार हो जाये। याद रखना, मुझे शाम को अकरम की party में तुम्हारे साथ यह ज़रूर नज़र आना चाहिए!" इतना कहते ही हरदेव ग़ुस्से में वहाँ से निकल गया। उसके पीछे सनी भी अनन्या को चिढ़ाने के लिए मुस्कुराते हुए वहाँ से निकल गया। अभिनव दर्द से कराह रहा था। अनन्या उसके पास आयी और बोली,
"तुमने मेरी पूरी ज़िंदगी बर्बाद कर दी! क्यों?" अभिनव के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।
अनन्या का driver उसी की गाड़ी से अभिनव को पहले hospital ले गया और उसके बाद उसे उसके घर छोड़ दिया। वहाँ जाकर अभिनव शाम को होने वाली party के लिए तैयार होने लगा। उसे हरदेव और उसके आदमियों का डर नहीं था। वो जानता था अनन्या पहले से ही काफ़ी मुश्किल में थी और वो अपनी वजह से उसकी मुश्किलें और नहीं बढ़ाना चाहता था।
अभिनव के पास ले देकर सिर्फ़ एक blazer था, वो भी उसके पापा का। वो जगह-२ से फटा और उधड़ा हुआ था, लेकिन जब अभिनव ने उसे पहना तो उसकी ख़ूबसूरती ने blazer के सारी कमियों को ढक दिया। अभिनव अनन्या के घर जाने के लिए निकल पड़ा।
अभिनव का अंदाज़ा सही था, अनन्या का घर काफ़ी बड़ा था। वो एक अमीर परिवार की लड़की थी। जितना अभिनव महीने का कमाता था, उतने की अनन्या ने sandals पहनी हुई थी। अनन्या गाड़ी में बैठी और दोनों party के लिए निकल पड़े। उसकी आँखों में दिख रहा था कि वो अभिनव से कितनी नफ़रत करती थी। अभिनव भी party में, इतने बड़े लोगों के बीच जाने से घबरा रहा था। उसी घबराहट में उसने कब अपने पापा की अँगूठी को उँगली में गोल-२ घुमाना शुरू कर दिया, उसे पता ही नहीं चला।
जब वो लोग अकरम के घर के बाहर पहुँचे तो अंदर जाने से पहले अनन्या ने अभिनव से पूछा,
"इस अँगूठी को उतार दो please? यह काफ़ी गंदी है!" यह सुनते ही अभिनव ने अनन्या को घूरते हुए देखा और बोला,
"Sorry, लेकिन यह अँगूठी ही मेरी सब कुछ है।" अनन्या खींझ गई और अंदर बढ़ने लगी। अभिनव भी उसके पीछे-२ चलता जा रहा था। अकरम का घर क़िले जैसा था, जिसके चारों तरफ़ bouncers बंदूक़ें लिए खड़े थे। जैसे ही अनन्या और अभिनव अंदर आये तो इतने में उसकी नज़र देवेन से टकरा गई। देवेन वही लड़का था जिसकी वजह से अभिनव को आज यहाँ आना पड़ा। अभिनव के मुक्के की वजह से देवेन की नाक पर bandage लगी हुई थी।
"तू यहाँ क्या कर रहा है साले!" देवेन ने पूछा।
"He is my husband!" अनन्या ने बीच में आते हुए कहा।
"अनन्या तुम पागल हो गई हो? इस फटीचर में ऐसा क्या देखा जो इससे शादी कर ली!" देवेन के मुँह से अभिनव को यह सुन ग़ुस्सा आ गया।
"ज़ुबान सम्भालकर बात कर देवेन!"
"नहीं तो— नहीं तो क्या कर लेगा?" देवेन भी तैश में आ गया। अभिनव उसके ऊपर हाथ उठाने ही वाला था कि इतने में उन दोनों का झगड़ा देख party का organiser अकरम वहाँ पहुँच चुका था। उसने कहा,
"क्या हो रहा है यहाँ!"
"अकरम sir, देखिए इस आदमी को! यह एक criminal है और ज़बरदस्ती आपकी party में घुस आया है!" देवेन के कहने पर अकरम ने अभिनव को ऊपर से नीचे तक देखा और बोला,
"कौन हो तुम? यहाँ कैसे आए?"
"यह मेरे husband हैं!" अनन्या ने अपनी शर्म छुपाते हुए कहा। अकरम को अनन्या की बात पर विश्वास नहीं हुआ। माहौल ख़राब ना हो इसलिए उसने अभिनव से कहा,
"तुम यहाँ invited नहीं हो। इससे पहले कि मैं police को बुलाऊँ, चले जाओ यहाँ से!" अभिनव ने देवेन को ग़ुस्से में देखा, अपना हाथ नीचे किया और वहाँ से निकलने लगा। देवेन भी उसे जाता देख मुस्कुरा रहा था।
"Thank you अकरम sir! और अनन्या, तुम भी इससे दूर रहना, साला गरीब!" देवेन ने जैसे ही अभिनव को गाली दी कि इतने में अकरम ने कहा,
"एक minute रुको!" अभिनव रुका और पलटकर अकरम को देखने लगा। अकरम भागते हुए अभिनव के पास गया और उसकी अँगूठी को देखने लगा। आख़िर में अकरम ने कहा,
"क्या मैं तुम से दो minute बात कर सकता हूँ, अकेले में?"
"मुझसे!"
"हाँ! तुमसे ! आओ मेरे साथ!" अकरम ने कहा और अभिनव का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ अंदर ले जाने लगा। अनन्या, देवेन, सनी और party में मौजूद बाक़ी लोग यह देख हैरान हो गए थे।
कुछ देर बाद जब वो अकरम के कमरे में पहुँचे तो अकरम ने दरवाज़ा बंद किया और अभिनव के पास आकर बोला,
"क्या मैं— क्या मैं तुम्हारी यह अँगूठी देख सकता हूँ?"
"क्यों?" अभिनव ने झेंपते हुए कहा।
"चिंता मत करो, मैं इसे माँग नहीं रहा हूँ, बस मुझे कुछ देखना है! Please!" अभिनव उसकी बात सुन हिचकिचाया और आख़िर में अँगूठी उतारकर उसे दे दी। अकरम ने उसे उलट- पलटकर देखा। उस अँगूठी के अंदरूनी भाग में “T” लिखा हुआ था। उसे पढ़ते ही अकरम के दिल की धड़कनें तेज हो गई और उसने अभिनव के पैरों में गिरते हुए कहा,
"tiger!" अभिनव ने अकरम के मुँह से यह शब्द सुना तो वो हैरान हो गया। उसे अचानक से अपनी पिता के वो आख़िरी शब्द याद आ गये जो उन्होंने अभिनव से विदा लेते हुए कहे थे। लेकिन अभिनव हैरान था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अकरम यह सब कैसे जानता था? इससे पहले कि वो कुछ कहता, अकरम ने कहा,
"आख़िरकार हमने तुम्हें ढूँढ ही लिया tiger!"
"tiger?"
"हाँ, मैं पिछले अट्ठारह सालों से तुम्हें ढूँढ रहा हूँ! तुम हमारे tiger हो, हमारे इस हज़ारों करोड़ के business empire के वारिस जिसे हम तीनों दोस्तों ने मिलकर खड़ा किया था। मैं, तुम्हारे पापा संजय गढ़वाल और राणा— राणा अग्निहोत्री!" इतना कहते ही अकरम ने दीवार पर टंगी एक तस्वीर की तरफ़ इशारा कर दिया, जिसमें संजय, अकरम और राणा, तीनों मौजूद थे। राणा को देख अभिनव को झटका लगा। उसकी आँखों के सामने वो सपना फिर से हरा हो गया जो वो हर सुबह देखकर उठता था। उस रात, अभिनव के पिता को जिस आदमी ने गोली चलाई थी वो राणा था। दोस्त होने के बावजूद राणा ने अभिनव के पिता के साथ ग़द्दारी की थी। अभिनव की आँखें चिंगारी सी लाल हो गई। यह देख अकरम ने पूछा,
"क्या हुआ? तुम इतने ग़ुस्से में क्यों हो?"
"नहीं, मैं ठीक हूँ। आपको मुझसे कुछ बात करनी थी ना?"
"हाँ! मैं तुम्हें हमारी company The Mafia King के बारे में कुछ बताने वाला था। हम तीनों ने मिलकर The Mafia King को खड़ा किया था, जिसके नाम से politician, celebrity और इस देश का बड़े से बड़ा आदमी काँपता था। पर तुम्हारे पापा के जाने के बाद सब बिखर गया। इस बीच हमारे कुछ दुश्मन भी खड़े हो गये । उनमें से सबसे बड़ा दुश्मन है दिगपाल छिंगावत। वो सालों से तुम्हें ढूँढ रहा है। वो तुम्हें मारकर हमारा नामोनिशान मिटा देना चाहता है। फ़िलहाल The Mafia King का सारा काम राणा का बेटा मोंटी सम्भाल रहा है, लेकिन अब से company की बागडोर तुम्हारे हाथों में होगी। अपने पिता के काम को, अब तुम्हें ही आगे बढ़ाना है tiger!" यह सुनते ही अभिनव के कान खड़े हो गये थे। कल तक उसकी जेब में सौ रुपये भी नहीं थे और आज अचानक वो हज़ारों करोड़ की company का मालिक हो गया था।
अब आगे क्या होने वाला था? क्या अभिनव अपने पिता का बदला ले पाएगा? कैसे एक डिलीवरी बॉय संभालेगा अपने पिता की हजारों करोड़ की company The Mafia King को ?
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