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नाजायज (Complete)
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नाजायज एक ऐसा शब्द है जिसके साथ भी जुड़ जाता है उसकी मौत के बाद भी उसके नाम से अलग नहीं हो पाता,,,,,,
इस शब्द में कितनी तकलीफे कितने आंसू और लोगों की कितनी नफरतें छुपी होती है यह हर कोई जानता है,,,,,,
जिस किसी के नाम के साथ हैं श...
इस शब्द में कितनी तकलीफे कितने आंसू और लोगों की कितनी नफरतें छुपी होती है यह हर कोई जानता है,,,,,,
जिस किसी के नाम के साथ हैं श...
नाजायज एक ऐसा शब्द है जिसके साथ भी जुड़ जाता है उसकी मौत के बाद भी उसके नाम से अलग नहीं हो पाता,,,,,,
इस शब्द में कितनी तकलीफे कितने आंसू और लोगों की कितनी नफरतें छुपी होती है यह हर कोई जानता है,,,,,,
जिस किसी के नाम के साथ हैं शब्द जुड़ जाता है उसकी जिंदगी नरक से भी बदतर हो जाती है हर कदम पर लोगों के ताने उनकी घृणा उसे चैन से जीने नहीं देते,,,,,,
ऐसी ही एक कहानी है कनिका की जिसके जन्म से ही उसके नाम के साथ जुड़ा हुआ है नाजायज शब्द,,,,,,
इस शब्द की आड़ में उसकी सारी खुशियां उसके सपने उसकी भावनाएं जैसे कई दबकर रह गए हैं,,,,,,
बचपन से लेकर आज तक इस शब्द ने उसकी हर खुशी को छीन लिया उसके हर सपने को उससे दूर कर दिया लोगों के ताने उनकी घृणा उनकी नफरत कितना कुछ नहीं सहन करना पड़ा कनिका को,,,,,,
यह नहीं की इसे सिर्फ कनिका को ही तकलीफ हुई इससे भी ज्यादा तकलीफ हुई उसकी मां नंदिता को,,,,,,
यह कहानी है कनिका और उसकी मां नंदिता की दोनों मां बेटी एक दूसरे की दुनिया है एक दूसरे की सुख दुख की साथी एक दूसरे की हमदर्द और एक दूसरी का सब कुछ,,,,,,,
लेकिन लोगों की नफरत और लोगों के तानों ने जैसे दोनों मां बेटी की सारी खुशियों को छीन लिया है,,,,,
अब लोगों की बातों का उनके दिलो-दिमाग पर इस तरह जख्म पड़ चुका है कि उसकी तकलीफ हर पल तड़पाती रहती है,,,,,,
जहां लोग कनिका को नाजायज तो बही उसकी मां को बदचलन के नाम से जानते हैं,,,,,,
अब तो गांव में रहने वाला हर व्यक्ति यहां तक कि खुद नंदिता के पति सास ससुर और उसकी खुद की बड़ी बेटी श्वेता भी उसे इसी नाम से जानते हैं,,,,,,
जैसे सभी लोग उनका असली नाम तो भूल ही चुके हैं नंदिता बदचलन और कनिका लोगों के लिए नाजायज बन गई है,,,,,,,
क्या नंदिता एक बदचलन औरत है क्या कनिका अपनी मां की एक नाजायज औलाद है यह सब कुछ जानने के लिए आपको जुड़ा रहना होगा मेरी इस रचना नाजायज के साथ,,,,,,
जिससे आपके हर सवाल का जवाब आपको मिलेगा मेरी यह रचना समाज की ऐसी कई अच्छी बुरी सच्चाइयों से आपको रूबरू कराएगी जो अधिकतर छुपी हुई रहती है,,,,,,
आखिर मेरी इस कहानी को लिखने का उद्देश्य और इसके पीछे की सारी सच्चाई क्या है यह जानने के लिए पढ़िए मेरी इस रचना को,,,,,
इस शब्द में कितनी तकलीफे कितने आंसू और लोगों की कितनी नफरतें छुपी होती है यह हर कोई जानता है,,,,,,
जिस किसी के नाम के साथ हैं शब्द जुड़ जाता है उसकी जिंदगी नरक से भी बदतर हो जाती है हर कदम पर लोगों के ताने उनकी घृणा उसे चैन से जीने नहीं देते,,,,,,
ऐसी ही एक कहानी है कनिका की जिसके जन्म से ही उसके नाम के साथ जुड़ा हुआ है नाजायज शब्द,,,,,,
इस शब्द की आड़ में उसकी सारी खुशियां उसके सपने उसकी भावनाएं जैसे कई दबकर रह गए हैं,,,,,,
बचपन से लेकर आज तक इस शब्द ने उसकी हर खुशी को छीन लिया उसके हर सपने को उससे दूर कर दिया लोगों के ताने उनकी घृणा उनकी नफरत कितना कुछ नहीं सहन करना पड़ा कनिका को,,,,,,
यह नहीं की इसे सिर्फ कनिका को ही तकलीफ हुई इससे भी ज्यादा तकलीफ हुई उसकी मां नंदिता को,,,,,,
यह कहानी है कनिका और उसकी मां नंदिता की दोनों मां बेटी एक दूसरे की दुनिया है एक दूसरे की सुख दुख की साथी एक दूसरे की हमदर्द और एक दूसरी का सब कुछ,,,,,,,
लेकिन लोगों की नफरत और लोगों के तानों ने जैसे दोनों मां बेटी की सारी खुशियों को छीन लिया है,,,,,
अब लोगों की बातों का उनके दिलो-दिमाग पर इस तरह जख्म पड़ चुका है कि उसकी तकलीफ हर पल तड़पाती रहती है,,,,,,
जहां लोग कनिका को नाजायज तो बही उसकी मां को बदचलन के नाम से जानते हैं,,,,,,
अब तो गांव में रहने वाला हर व्यक्ति यहां तक कि खुद नंदिता के पति सास ससुर और उसकी खुद की बड़ी बेटी श्वेता भी उसे इसी नाम से जानते हैं,,,,,,
जैसे सभी लोग उनका असली नाम तो भूल ही चुके हैं नंदिता बदचलन और कनिका लोगों के लिए नाजायज बन गई है,,,,,,,
क्या नंदिता एक बदचलन औरत है क्या कनिका अपनी मां की एक नाजायज औलाद है यह सब कुछ जानने के लिए आपको जुड़ा रहना होगा मेरी इस रचना नाजायज के साथ,,,,,,
जिससे आपके हर सवाल का जवाब आपको मिलेगा मेरी यह रचना समाज की ऐसी कई अच्छी बुरी सच्चाइयों से आपको रूबरू कराएगी जो अधिकतर छुपी हुई रहती है,,,,,,
आखिर मेरी इस कहानी को लिखने का उद्देश्य और इसके पीछे की सारी सच्चाई क्या है यह जानने के लिए पढ़िए मेरी इस रचना को,,,,,
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नाजायज एक ऐसा शब्द है जिसके साथ भी जुड़ जाता है उसकी मौत के बाद भी उसके नाम से अलग नहीं हो पाता,,,,,,
इस शब्द में कितनी तकलीफे कितने आंसू और लोगों की कितनी नफरतें छुपी होती है यह हर कोई जानता है,,,,,,
जिस किसी के नाम के साथ हैं शब्द जुड़ जाता है उसकी जिंदगी नरक से भी बदतर हो जाती है हर कदम पर लोगों के ताने उनकी घृणा उसे चैन से जीने नहीं देते,,,,,,
ऐसी ही एक कहानी है कनिका की जिसके जन्म से ही उसके नाम के साथ जुड़ा हुआ है नाजायज शब्द,,,,,,
इस शब्द की आड़ में उसकी सारी खुशियां उसके सपने उसकी भावनाएं जैसे कई दबकर रह गए हैं,,,,,,
बचपन से लेकर आज तक इस शब्द ने उसकी हर खुशी को छीन लिया उसके हर सपने को उससे दूर कर दिया लोगों के ताने उनकी घृणा उनकी नफरत कितना कुछ नहीं सहन करना पड़ा कनिका को,,,,,,
यह नहीं की इसे सिर्फ कनिका को ही तकलीफ हुई इससे भी ज्यादा तकलीफ हुई उसकी मां नंदिता को,,,,,,
यह कहानी है कनिका और उसकी मां नंदिता की दोनों मां बेटी एक दूसरे की दुनिया है एक दूसरे की सुख दुख की साथी एक दूसरे की हमदर्द और एक दूसरी का सब कुछ,,,,,,,
लेकिन लोगों की नफरत और लोगों के तानों ने जैसे दोनों मां बेटी की सारी खुशियों को छीन लिया है,,,,,
अब लोगों की बातों का उनके दिलो-दिमाग पर इस तरह जख्म पड़ चुका है कि उसकी तकलीफ हर पल तड़पाती रहती है,,,,,,
जहां लोग कनिका को नाजायज तो बही उसकी मां को बदचलन के नाम से जानते हैं,,,,,,
अब तो गांव में रहने वाला हर व्यक्ति यहां तक कि खुद नंदिता के पति सास ससुर और उसकी खुद की बड़ी बेटी श्वेता भी उसे इसी नाम से जानते हैं,,,,,,
जैसे सभी लोग उनका असली नाम तो भूल ही चुके हैं नंदिता बदचलन और कनिका लोगों के लिए नाजायज बन गई है,,,,,,,
क्या नंदिता एक बदचलन औरत है क्या कनिका अपनी मां की एक नाजायज औलाद है यह सब कुछ जानने के लिए आपको जुड़ा रहना होगा मेरी इस रचना नाजायज के साथ,,,,,,
जिससे आपके हर सवाल का जवाब आपको मिलेगा मेरी यह रचना समाज की ऐसी कई अच्छी बुरी सच्चाइयों से आपको रूबरू कराएगी जो अधिकतर छुपी हुई रहती है,,,,,,
आखिर मेरी इस कहानी को लिखने का उद्देश्य और इसके पीछे की सारी सच्चाई क्या है यह जानने के लिए पढ़िए मेरी इस रचना को,,,,,
इस शब्द में कितनी तकलीफे कितने आंसू और लोगों की कितनी नफरतें छुपी होती है यह हर कोई जानता है,,,,,,
जिस किसी के नाम के साथ हैं शब्द जुड़ जाता है उसकी जिंदगी नरक से भी बदतर हो जाती है हर कदम पर लोगों के ताने उनकी घृणा उसे चैन से जीने नहीं देते,,,,,,
ऐसी ही एक कहानी है कनिका की जिसके जन्म से ही उसके नाम के साथ जुड़ा हुआ है नाजायज शब्द,,,,,,
इस शब्द की आड़ में उसकी सारी खुशियां उसके सपने उसकी भावनाएं जैसे कई दबकर रह गए हैं,,,,,,
बचपन से लेकर आज तक इस शब्द ने उसकी हर खुशी को छीन लिया उसके हर सपने को उससे दूर कर दिया लोगों के ताने उनकी घृणा उनकी नफरत कितना कुछ नहीं सहन करना पड़ा कनिका को,,,,,,
यह नहीं की इसे सिर्फ कनिका को ही तकलीफ हुई इससे भी ज्यादा तकलीफ हुई उसकी मां नंदिता को,,,,,,
यह कहानी है कनिका और उसकी मां नंदिता की दोनों मां बेटी एक दूसरे की दुनिया है एक दूसरे की सुख दुख की साथी एक दूसरे की हमदर्द और एक दूसरी का सब कुछ,,,,,,,
लेकिन लोगों की नफरत और लोगों के तानों ने जैसे दोनों मां बेटी की सारी खुशियों को छीन लिया है,,,,,
अब लोगों की बातों का उनके दिलो-दिमाग पर इस तरह जख्म पड़ चुका है कि उसकी तकलीफ हर पल तड़पाती रहती है,,,,,,
जहां लोग कनिका को नाजायज तो बही उसकी मां को बदचलन के नाम से जानते हैं,,,,,,
अब तो गांव में रहने वाला हर व्यक्ति यहां तक कि खुद नंदिता के पति सास ससुर और उसकी खुद की बड़ी बेटी श्वेता भी उसे इसी नाम से जानते हैं,,,,,,
जैसे सभी लोग उनका असली नाम तो भूल ही चुके हैं नंदिता बदचलन और कनिका लोगों के लिए नाजायज बन गई है,,,,,,,
क्या नंदिता एक बदचलन औरत है क्या कनिका अपनी मां की एक नाजायज औलाद है यह सब कुछ जानने के लिए आपको जुड़ा रहना होगा मेरी इस रचना नाजायज के साथ,,,,,,
जिससे आपके हर सवाल का जवाब आपको मिलेगा मेरी यह रचना समाज की ऐसी कई अच्छी बुरी सच्चाइयों से आपको रूबरू कराएगी जो अधिकतर छुपी हुई रहती है,,,,,,
आखिर मेरी इस कहानी को लिखने का उद्देश्य और इसके पीछे की सारी सच्चाई क्या है यह जानने के लिए पढ़िए मेरी इस रचना को,,,,,
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