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By Divya Verma Ongoing
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यह कहानी है प्राचीन नगरी वाराणसी की, जहाँ एक होनहार युवा सर्जन, ऋषभ मेहता की एक भयानक सड़क हादसे में मौत हो जाती है। पर क्या वो सिर्फ एक इत्तफाक था? शायद नहीं।
मौत के बाद, जीवन और मृत्यु के बीच के एक खौफनाक सफर से गुज़रते हुए, ऋषभ की आत्मा वापस इंसानी दुनि...
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यह कहानी है प्राचीन नगरी वाराणसी की, जहाँ एक होनहार युवा सर्जन, ऋषभ मेहता की एक भयानक सड़क हादसे में मौत हो जाती है। पर क्या वो सिर्फ एक इत्तफाक था? शायद नहीं।
मौत के बाद, जीवन और मृत्यु के बीच के एक खौफनाक सफर से गुज़रते हुए, ऋषभ की आत्मा वापस इंसानी दुनिया में वापस लौटती है—उसके पास बस कुछ ही मिनट हैं, वरना वो हमेशा के लिए मिट जाएगा।
ज़िंदा रहने की जद्दोजहद में, ऋषभ की आत्मा एक अजनबी के शरीर में समा जाती है: मीत वर्मा, जो 'द लास्ट पेज' नाम की एक छोटी सी गुमनाम बुकस्टोर चलाता है। लेकिन इस नई ज़िंदगी की कीमत बहुत भारी है। यहाँ ऋषभ को वो रुतबा और सम्मान नहीं मिलता जो उसे पहले हासिल था। इसके उलट, उसे मिलती है जिल्लत—एक 'घर-जमाई' की ज़िंदगी, एक नफरत करने वाला परिवार, और एक डूबता हुआ कारोबार। उसकी पत्नी उससे प्यार नहीं करती और उसके ससुराल वालों से सिर्फ़ जिल्लत मिलती है।
जैसे-जैसे ऋषभ इस नई पहचान में खुद को ढालने की कोशिश करता है, उसके अंदर कुछ अजीब शक्तियाँ जागने लगती हैं—अंधेरी शक्तियाँ, जिनका संबंध पाताल के उस रहस्यमयी सफर से है जिसे वो पार कर आया था। साथ ही, उसके सामने उसकी अपनी मौत से जुड़े सच आने लगते हैं: उसे मारने की साज़िश रची गई थी, और उन साज़िशों के तार उस शरीर से जुड़े हैं जिसमें वो अभी रह रहा है।
अपनों और परायों, और ज़िंदा और मुर्दा दुनिया के बीच फँसा ऋषभ, क्या अपनी मौत का बदला ले पाएगा? या फिर वो रूहानी ताकतें, जो भटकती आत्माओं का शिकार करती हैं, उसे वापस उस अंधेरे में खींच ले जाएँगी जहाँ से वो बचकर निकला था?
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