Thriller Supernatural Thriller
The Vampire - a new era of deep love
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एकदम ठंडी बर्फीली हवाएँ हड्डियों तक को चुभ रही थीं। चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछी थी, और तेज बर्फबारी के साथ घना कोहरा छाया हुआ था। कुदरत का ये कहर था या रहमत, कुछ भी मानो समझ ही नहीं आ रहा था। फिर भी, ऐसे खतरनाक मौसम में भी ईरा अपनी साँसें फुलाते हुए बेत...
एकदम ठंडी बर्फीली हवाएँ हड्डियों तक को चुभ रही थीं। चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछी थी, और तेज बर्फबारी के साथ घना कोहरा छाया हुआ था। कुदरत का ये कहर था या रहमत, कुछ भी मानो समझ ही नहीं आ रहा था। फिर भी, ऐसे खतरनाक मौसम में भी ईरा अपनी साँसें फुलाते हुए बेतहाशा भागे जा रही थी। उसकी हर साँस हवा में भाप बनकर उड़ रही थी। उसका पूरा शरीर ठंड से बुरी तरह काँप रहा था, फिर भी वह नॉन-स्टॉप दौड़े जा रही थी। भागते हुए उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, मानो सीने में कोई ढोल पीट रहा हो। उसकी सहमी हुई नजर बार-बार पीछे जा रही थी, जहाँ अंधेरे में कुछ फटे-पुराने, मटमैले कपड़े पहने साए उसके पीछे पड़े थे। वे सभी दिखने में बेहद खौफनाक लग रहे थे। उनके हाथ-पाँव चलते हुए अजीब तरह से हिल रहे थे। उनकी चाल भी इतनी डरावनी थी कि सामने वाले की जान ही निकल जाए। वे सभी कोई और नहीं, बल्कि भूखे-प्यासे ज़ॉम्बीज़ थे, जिनके थिरकन भरे कदमों की चरमराहट बर्फ पर बुरी तरह से गूँज रही थी। "ओह गॉड, ये सब क्या हो रहा है हां? ये सब ख़ौफनाक प्राणी ऐसे मेरे पीछे क्यों पड़ गए हैं? आखिर इन्हें मुझ फूल सी बच्ची से क्या चाहिए, मैं तो इतने लोगों की भूख भी नहीं मिटा पाऊँगी। नहीं नहीं ईरा तू ये क्या बकवास सोच रही है। तुझे मदद के लिए किसी को बुलाना चाहिए, तू अकेली नन्हीं सी जान इन खूंखार ज़ॉम्बीज़ का मुकाबला बिल्कुल भी नहीं कर सकती।" उन्हें तिरछी नजरों से देखते हुए ईरा के होंठों से काँपती हुई बुदबुदाहट निकली। ठंड और डर से उसकी आवाज बैठ गई थी। तभी अचानक उसने अपने नेक पर पहना लॉकेट कसकर पकड़ा और मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया—” हेलो क्या कोई मुझे सुन सकता है… प्लीज मेरी मदद करो कोई तो मुझे इन खतरनाक ज़ॉम्बीज़ से बचाओ प्लीज!" लेकिन चारों ओर सिर्फ सन्नाटा था, और उस सन्नाटे को चीरती हुई सिर्फ एक भयानक आवाज थी—ज़ॉम्बीज़ के कदमों की चरमराहट। चलते हुए ईरा के नन्हें कदम बर्फ में धँस रहे थे। उसके जूते कदमों से कहीं पहले ही बर्फ के अंदर छूट गए थे, इसीलिए हर कदम पर ठंडी बर्फ उसके तलवों को इस तरह चुभ रही थी, जैसे हजारों सुइयाँ एक साथ चुभो दी गई हों। लेकिन फिर भी, वह रुकी नहीं। रुकना मतलब मौत थी, यह बात उसके दिमाग में डमरू की तरह बज रही थी। इसी बीच पीछे से एक डरावनी, गुर्राती-सी आवाज आई, "हाआा... हाआा..." ये ज़ॉम्बीज़ की भूखी सिसकियाँ थीं। ईरा ने डरते हुए पीछे मुड़कर देखा। इस वक्त उनके बीच की दूरी काफी कम हो गई थी। इतना कि अंधेरे में उनकी डरावनी आकृतियाँ अब साफ दिख रही थीं—लंबे, टेढ़े-मेढ़े हाथ, चेहरों पर सड़ी-गली त्वचा, और आँखें जो सफेद, बेजान और भयानक थीं। "नहीं! नहीं! मेरे पास मत आओ! जय हनुमान गुन ज्ञान सागर … अरे यार बजरंग बली मुझे हनुमान चालीसा भी अभी भूलना था।" ईरा तेज आवाज में चीखी। लेकिन हर बार
Chapter
3
Words
7.8K
Updated
15 days ago
Published
Mar 28, 2026
एकदम ठंडी बर्फीली हवाएँ हड्डियों तक को चुभ रही थीं। चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछी थी, और तेज बर्फबारी के साथ घना कोहरा छाया हुआ था। कुदरत का ये कहर था या रहमत, कुछ भी मानो समझ ही नहीं आ रहा था। फिर भी, ऐसे खतरनाक मौसम में भी ईरा अपनी साँसें फुलाते हुए बेतहाशा भागे जा रही थी। उसकी हर साँस हवा में भाप बनकर उड़ रही थी। उसका पूरा शरीर ठंड से बुरी तरह काँप रहा था, फिर भी वह नॉन-स्टॉप दौड़े जा रही थी। भागते हुए उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, मानो सीने में कोई ढोल पीट रहा हो। उसकी सहमी हुई नजर बार-बार पीछे जा रही थी, जहाँ अंधेरे में कुछ फटे-पुराने, मटमैले कपड़े पहने साए उसके पीछे पड़े थे। वे सभी दिखने में बेहद खौफनाक लग रहे थे। उनके हाथ-पाँव चलते हुए अजीब तरह से हिल रहे थे। उनकी चाल भी इतनी डरावनी थी कि सामने वाले की जान ही निकल जाए। वे सभी कोई और नहीं, बल्कि भूखे-प्यासे ज़ॉम्बीज़ थे, जिनके थिरकन भरे कदमों की चरमराहट बर्फ पर बुरी तरह से गूँज रही थी। "ओह गॉड, ये सब क्या हो रहा है हां? ये सब ख़ौफनाक प्राणी ऐसे मेरे पीछे क्यों पड़ गए हैं? आखिर इन्हें मुझ फूल सी बच्ची से क्या चाहिए, मैं तो इतने लोगों की भूख भी नहीं मिटा पाऊँगी। नहीं नहीं ईरा तू ये क्या बकवास सोच रही है। तुझे मदद के लिए किसी को बुलाना चाहिए, तू अकेली नन्हीं सी जान इन खूंखार ज़ॉम्बीज़ का मुकाबला बिल्कुल भी नहीं कर सकती।" उन्हें तिरछी नजरों से देखते हुए ईरा के होंठों से काँपती हुई बुदबुदाहट निकली। ठंड और डर से उसकी आवाज बैठ गई थी। तभी अचानक उसने अपने नेक पर पहना लॉकेट कसकर पकड़ा और मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया—” हेलो क्या कोई मुझे सुन सकता है… प्लीज मेरी मदद करो कोई तो मुझे इन खतरनाक ज़ॉम्बीज़ से बचाओ प्लीज!" लेकिन चारों ओर सिर्फ सन्नाटा था, और उस सन्नाटे को चीरती हुई सिर्फ एक भयानक आवाज थी—ज़ॉम्बीज़ के कदमों की चरमराहट। चलते हुए ईरा के नन्हें कदम बर्फ में धँस रहे थे। उसके जूते कदमों से कहीं पहले ही बर्फ के अंदर छूट गए थे, इसीलिए हर कदम पर ठंडी बर्फ उसके तलवों को इस तरह चुभ रही थी, जैसे हजारों सुइयाँ एक साथ चुभो दी गई हों। लेकिन फिर भी, वह रुकी नहीं। रुकना मतलब मौत थी, यह बात उसके दिमाग में डमरू की तरह बज रही थी। इसी बीच पीछे से एक डरावनी, गुर्राती-सी आवाज आई, "हाआा... हाआा..." ये ज़ॉम्बीज़ की भूखी सिसकियाँ थीं। ईरा ने डरते हुए पीछे मुड़कर देखा। इस वक्त उनके बीच की दूरी काफी कम हो गई थी। इतना कि अंधेरे में उनकी डरावनी आकृतियाँ अब साफ दिख रही थीं—लंबे, टेढ़े-मेढ़े हाथ, चेहरों पर सड़ी-गली त्वचा, और आँखें जो सफेद, बेजान और भयानक थीं। "नहीं! नहीं! मेरे पास मत आओ! जय हनुमान गुन ज्ञान सागर … अरे यार बजरंग बली मुझे हनुमान चालीसा भी अभी भूलना था।" ईरा तेज आवाज में चीखी। लेकिन हर बार
K Jeshtha
Siyan Rathor 👹 • 3 months ago
K Jeshtha
Or Vo Vampire... • 3 months ago
K Jeshtha
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