18+ Young Adult Romance
जिस्म की चाहत
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सुंदरता औरतों का गहना हे पर क्या हो जब सुंदरता ही अभिशाप बन जाए
इसे पे आधारित मेरी ये कहानी तृषा नाम की लड़की की हे
कृपया इसे 18+ ही पढ़ें
झलक
तुम मेरे हो बस मेरे हो मेरे हो
पूछ लो हवाओ से पूछ लो घटाओ से
बारिश...
इसे पे आधारित मेरी ये कहानी तृषा नाम की लड़की की हे
कृपया इसे 18+ ही पढ़ें
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तुम मेरे हो बस मेरे हो मेरे हो
पूछ लो हवाओ से पूछ लो घटाओ से
बारिश...
सुंदरता औरतों का गहना हे पर क्या हो जब सुंदरता ही अभिशाप बन जाए
इसे पे आधारित मेरी ये कहानी तृषा नाम की लड़की की हे
कृपया इसे 18+ ही पढ़ें
झलक
तुम मेरे हो बस मेरे हो मेरे हो
पूछ लो हवाओ से पूछ लो घटाओ से
बारिशों के पानी से पूछो नदैया दीवानी से
तुम मेरे हो
बस मेरे हो मेरे हो
अंगद उसके हाथ उसकी कमर पे थे वो उसके ऊपर था उसे ऐसा लग रहा था की वो किसी सॉफ्ट टॉय पे हो इस वक्त वो मदहोश हो चुका था
अंगद ने उसकी कमर पीठ पर दाग दिए थे
और अब उसने उसे पलटा पिछली बार वो बेचैन रह गया था इस बार बार नही
सामने त्रिशा का सीना जिसके उभार एकदम परफेक्ट थे
बेचैन होगा अंगद
वो बेखुद हो चुका था
वो उसके पूरे जिस्म को चूमता हुआ दाग दे रहा था काट रहा ता
ना चाह कर भी अंगद वाइल्ड हो चुका था
अब वो उसकी कमर पे लीक करके बीते कर रहा था
धीरे धीरे नीचे जा रहा था कमरे में बालकनी से अति चांदनी और हवा माहोल और दिलकश बना रही थी
म्यूजिक भी
इसे पे आधारित मेरी ये कहानी तृषा नाम की लड़की की हे
कृपया इसे 18+ ही पढ़ें
झलक
तुम मेरे हो बस मेरे हो मेरे हो
पूछ लो हवाओ से पूछ लो घटाओ से
बारिशों के पानी से पूछो नदैया दीवानी से
तुम मेरे हो
बस मेरे हो मेरे हो
अंगद उसके हाथ उसकी कमर पे थे वो उसके ऊपर था उसे ऐसा लग रहा था की वो किसी सॉफ्ट टॉय पे हो इस वक्त वो मदहोश हो चुका था
अंगद ने उसकी कमर पीठ पर दाग दिए थे
और अब उसने उसे पलटा पिछली बार वो बेचैन रह गया था इस बार बार नही
सामने त्रिशा का सीना जिसके उभार एकदम परफेक्ट थे
बेचैन होगा अंगद
वो बेखुद हो चुका था
वो उसके पूरे जिस्म को चूमता हुआ दाग दे रहा था काट रहा ता
ना चाह कर भी अंगद वाइल्ड हो चुका था
अब वो उसकी कमर पे लीक करके बीते कर रहा था
धीरे धीरे नीचे जा रहा था कमरे में बालकनी से अति चांदनी और हवा माहोल और दिलकश बना रही थी
म्यूजिक भी
Chapter
149
Words
162.8K
Updated
1 day ago
Published
Feb 21, 2026
Published Chapters
जिस्म की चाहत - Chapter 1
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 2
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 3
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 4
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 5
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 6
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 7
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 8
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 9
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 10
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 11
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 12
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 13
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 14
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 15
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 16
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 17
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 18
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 19
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 20
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 21
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 22
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 23
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 24
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 25
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 26
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 27
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 28
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 29
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 30
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 31
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 32
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 33
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 34
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 35
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 36
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 37
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 38
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 39
Free
जिस्म की चाहत - Chapter 40
Free
सुंदरता औरतों का गहना हे पर क्या हो जब सुंदरता ही अभिशाप बन जाए
इसे पे आधारित मेरी ये कहानी तृषा नाम की लड़की की हे
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झलक
तुम मेरे हो बस मेरे हो मेरे हो
पूछ लो हवाओ से पूछ लो घटाओ से
बारिशों के पानी से पूछो नदैया दीवानी से
तुम मेरे हो
बस मेरे हो मेरे हो
अंगद उसके हाथ उसकी कमर पे थे वो उसके ऊपर था उसे ऐसा लग रहा था की वो किसी सॉफ्ट टॉय पे हो इस वक्त वो मदहोश हो चुका था
अंगद ने उसकी कमर पीठ पर दाग दिए थे
और अब उसने उसे पलटा पिछली बार वो बेचैन रह गया था इस बार बार नही
सामने त्रिशा का सीना जिसके उभार एकदम परफेक्ट थे
बेचैन होगा अंगद
वो बेखुद हो चुका था
वो उसके पूरे जिस्म को चूमता हुआ दाग दे रहा था काट रहा ता
ना चाह कर भी अंगद वाइल्ड हो चुका था
अब वो उसकी कमर पे लीक करके बीते कर रहा था
धीरे धीरे नीचे जा रहा था कमरे में बालकनी से अति चांदनी और हवा माहोल और दिलकश बना रही थी
म्यूजिक भी
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तुम मेरे हो बस मेरे हो मेरे हो
पूछ लो हवाओ से पूछ लो घटाओ से
बारिशों के पानी से पूछो नदैया दीवानी से
तुम मेरे हो
बस मेरे हो मेरे हो
अंगद उसके हाथ उसकी कमर पे थे वो उसके ऊपर था उसे ऐसा लग रहा था की वो किसी सॉफ्ट टॉय पे हो इस वक्त वो मदहोश हो चुका था
अंगद ने उसकी कमर पीठ पर दाग दिए थे
और अब उसने उसे पलटा पिछली बार वो बेचैन रह गया था इस बार बार नही
सामने त्रिशा का सीना जिसके उभार एकदम परफेक्ट थे
बेचैन होगा अंगद
वो बेखुद हो चुका था
वो उसके पूरे जिस्म को चूमता हुआ दाग दे रहा था काट रहा ता
ना चाह कर भी अंगद वाइल्ड हो चुका था
अब वो उसकी कमर पे लीक करके बीते कर रहा था
धीरे धीरे नीचे जा रहा था कमरे में बालकनी से अति चांदनी और हवा माहोल और दिलकश बना रही थी
म्यूजिक भी
Ararti Kumari
जिस्म की चाहत - Chapter 5 • 2 months ago
Ararti Kumari
जिस्म की चाहत - Chapter 4 • 2 months ago
Anju Tiwari
जिस्म की चाहत - Chapter 149 • 2 months ago
Soniya Kishori
2 months ago
very very nice story
0 likes • जिस्म की चाहत - Chapter 148
Soniya Kishori
2 months ago
nice story 👌
0 likes • जिस्म की चाहत - Chapter 145No fan art available for this story yet.
jaldi upload kar
0 likes • जिस्म की चाहत - Chapter 148