Romance Erotic Romance
Broken Seams
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रात का आसमान गहरा नीला था,
और घर के अंदर टीवी की रोशनी हर चेहरे पर पड़ रही थी।
आज वर्ल्ड कप फ़ाइनल था—
India vs Australia।
सोफे के बीचों-बीच बैठी थी निवी।
सिर्फ 17 साल की,
पर दिल में करोड़ों दुआएँ।
उसके एक हाथ में तकिया था,
द...
और घर के अंदर टीवी की रोशनी हर चेहरे पर पड़ रही थी।
आज वर्ल्ड कप फ़ाइनल था—
India vs Australia।
सोफे के बीचों-बीच बैठी थी निवी।
सिर्फ 17 साल की,
पर दिल में करोड़ों दुआएँ।
उसके एक हाथ में तकिया था,
द...
रात का आसमान गहरा नीला था,
और घर के अंदर टीवी की रोशनी हर चेहरे पर पड़ रही थी।
आज वर्ल्ड कप फ़ाइनल था—
India vs Australia।
सोफे के बीचों-बीच बैठी थी निवी।
सिर्फ 17 साल की,
पर दिल में करोड़ों दुआएँ।
उसके एक हाथ में तकिया था,
दूसरा हाथ कसकर मुट्ठी बना हुआ।
पापा (विनोद जी) गंभीर आवाज़ में बोले—
“आज मैच आसान नहीं है… ऑस्ट्रेलिया मज़बूत टीम है।”
मम्मी (रीता जी) ने भगवान की तरफ देखते हुए कहा—
“बस इंडिया जीत जाए… आज दिल नहीं संभलेगा।”
भाई आरव मुस्कुराकर बोला—
“अरे मम्मी, टेंशन मत लो।
फ़ाइनल है, कुछ भी हो सकता है!”
निवी कुछ नहीं बोली।
उसकी आँखें सिर्फ़ स्क्रीन पर थीं।
अध्याय 2 : जब उम्मीद डगमगाने लगी
मैदान पर गेंद तेज़ी से घूम रही थी।
स्कोरबोर्ड देख कर दिल बैठ रहा था।
अचानक—
कमेंटेटर की तेज़ आवाज़:
“और ये क्या!
भारत के बेहतरीन खिलाड़ी विहान आउट!”
घर में सन्नाटा छा गया।
पापा (धीरे से):
“ये विकेट बहुत भारी पड़ सकती है…”
निवी की साँस थोड़ी तेज़ हो गई।
कुछ ही देर बाद—
कमेंटेटर:
“ओह नो!
कप्तान राजेश भी आउट!”
आरव ने निराश होकर सिर पकड़ लिया—
“अब तो मुश्किल है… इंडिया हार जाएगी।”
मम्मी ने तुरंत निवी की तरफ देखा।
मम्मी:
“निवी… सब ठीक है न बेटा?”
निवी की आँखें नम थीं,
पर आवाज़ में अब भी उम्मीद थी।
निवी:
“अभी मैच खत्म नहीं हुआ है, मम्मी…”
अध्याय 3 : Idol का नाम
पापा ने हैरानी से पूछा—
“इतना भरोसा किस पर है?”
निवी ने धीरे से सिर उठाया।
उसकी आँखों में चमक थी।
निवी:
“सिव्यान्स अरोड़ा…”
आरव हँसा—
“अरे! तुम्हारा idol!”
निवी हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली—
“वो अकेले मैच जिता सकता है।”
टीवी पर सिव्यान्स मैदान में उतरा।
पूरा स्टेडियम तालियों से गूँज उठा।
निवी ने आँखें बंद कर लीं।
निवी (मन में):
“प्लीज़ भगवान…
बस आज उसे ताक़त दे देना…”
अध्याय 4 : 15 रन का दर्द
पहली गेंद— सिंगल।
निवी की साँस लौटी।
दूसरी गेंद— चौका।
निवी (खुशी से):
“देखा!
मैंने कहा था ना!”
आरव भी जोश में आ गया—
“हाँ! अब मैच पलटेगा!”
लेकिन फिर…
एक तेज़ गेंद।
थोड़ी-सी चूक।
और—
कमेंटेटर (उदास आवाज़ में):
“ओह!
सिव्यान्स अरोड़ा 15 रन बनाकर आउट!”
निवी के चेहरे से रंग उड़ गया।
टीवी की आवाज़ धीमी लगने लगी।
आँखों से आँसू अपने-आप बह निकले।
अध्याय 5 : हार की ख़ामोशी
कुछ मिनटों में मैच खत्म हो गया।
ऑस्ट्रेलिया जीत गया।
घर में कोई कुछ नहीं बोल रहा था।
मम्मी ने खाना मेज़ पर रखा।
मम्मी:
“आओ बेटा… थोड़ा खा लो।”
निवी ने धीरे से सिर हिला दिया।
निवी:
“मुझे भूख नहीं है…”
वो उठकर अपने कमरे में चली गई।
अध्याय 6 : आँसू और समझाना
पापा उसके पीछे-पीछे आए।
पापा:
“बेटा… ये सिर्फ़ एक मैच है।”
निवी फूट-फूट कर रो पड़ी।
निवी:
“नहीं पापा…
वो सिर्फ़ मैच नहीं था…
वो मेरा सपना था…”
आरव भी आ गया।
आरव:
“अरे… वो फिर खेलेगा।
और अगली बार ज़रूर जीतेगा।”
निवी सिसकते हुए बोली—
“लेकिन आज…
आज बहुत दर्द हो रहा है…”
और घर के अंदर टीवी की रोशनी हर चेहरे पर पड़ रही थी।
आज वर्ल्ड कप फ़ाइनल था—
India vs Australia।
सोफे के बीचों-बीच बैठी थी निवी।
सिर्फ 17 साल की,
पर दिल में करोड़ों दुआएँ।
उसके एक हाथ में तकिया था,
दूसरा हाथ कसकर मुट्ठी बना हुआ।
पापा (विनोद जी) गंभीर आवाज़ में बोले—
“आज मैच आसान नहीं है… ऑस्ट्रेलिया मज़बूत टीम है।”
मम्मी (रीता जी) ने भगवान की तरफ देखते हुए कहा—
“बस इंडिया जीत जाए… आज दिल नहीं संभलेगा।”
भाई आरव मुस्कुराकर बोला—
“अरे मम्मी, टेंशन मत लो।
फ़ाइनल है, कुछ भी हो सकता है!”
निवी कुछ नहीं बोली।
उसकी आँखें सिर्फ़ स्क्रीन पर थीं।
अध्याय 2 : जब उम्मीद डगमगाने लगी
मैदान पर गेंद तेज़ी से घूम रही थी।
स्कोरबोर्ड देख कर दिल बैठ रहा था।
अचानक—
कमेंटेटर की तेज़ आवाज़:
“और ये क्या!
भारत के बेहतरीन खिलाड़ी विहान आउट!”
घर में सन्नाटा छा गया।
पापा (धीरे से):
“ये विकेट बहुत भारी पड़ सकती है…”
निवी की साँस थोड़ी तेज़ हो गई।
कुछ ही देर बाद—
कमेंटेटर:
“ओह नो!
कप्तान राजेश भी आउट!”
आरव ने निराश होकर सिर पकड़ लिया—
“अब तो मुश्किल है… इंडिया हार जाएगी।”
मम्मी ने तुरंत निवी की तरफ देखा।
मम्मी:
“निवी… सब ठीक है न बेटा?”
निवी की आँखें नम थीं,
पर आवाज़ में अब भी उम्मीद थी।
निवी:
“अभी मैच खत्म नहीं हुआ है, मम्मी…”
अध्याय 3 : Idol का नाम
पापा ने हैरानी से पूछा—
“इतना भरोसा किस पर है?”
निवी ने धीरे से सिर उठाया।
उसकी आँखों में चमक थी।
निवी:
“सिव्यान्स अरोड़ा…”
आरव हँसा—
“अरे! तुम्हारा idol!”
निवी हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली—
“वो अकेले मैच जिता सकता है।”
टीवी पर सिव्यान्स मैदान में उतरा।
पूरा स्टेडियम तालियों से गूँज उठा।
निवी ने आँखें बंद कर लीं।
निवी (मन में):
“प्लीज़ भगवान…
बस आज उसे ताक़त दे देना…”
अध्याय 4 : 15 रन का दर्द
पहली गेंद— सिंगल।
निवी की साँस लौटी।
दूसरी गेंद— चौका।
निवी (खुशी से):
“देखा!
मैंने कहा था ना!”
आरव भी जोश में आ गया—
“हाँ! अब मैच पलटेगा!”
लेकिन फिर…
एक तेज़ गेंद।
थोड़ी-सी चूक।
और—
कमेंटेटर (उदास आवाज़ में):
“ओह!
सिव्यान्स अरोड़ा 15 रन बनाकर आउट!”
निवी के चेहरे से रंग उड़ गया।
टीवी की आवाज़ धीमी लगने लगी।
आँखों से आँसू अपने-आप बह निकले।
अध्याय 5 : हार की ख़ामोशी
कुछ मिनटों में मैच खत्म हो गया।
ऑस्ट्रेलिया जीत गया।
घर में कोई कुछ नहीं बोल रहा था।
मम्मी ने खाना मेज़ पर रखा।
मम्मी:
“आओ बेटा… थोड़ा खा लो।”
निवी ने धीरे से सिर हिला दिया।
निवी:
“मुझे भूख नहीं है…”
वो उठकर अपने कमरे में चली गई।
अध्याय 6 : आँसू और समझाना
पापा उसके पीछे-पीछे आए।
पापा:
“बेटा… ये सिर्फ़ एक मैच है।”
निवी फूट-फूट कर रो पड़ी।
निवी:
“नहीं पापा…
वो सिर्फ़ मैच नहीं था…
वो मेरा सपना था…”
आरव भी आ गया।
आरव:
“अरे… वो फिर खेलेगा।
और अगली बार ज़रूर जीतेगा।”
निवी सिसकते हुए बोली—
“लेकिन आज…
आज बहुत दर्द हो रहा है…”
Chapter
36
Words
41.9K
Updated
10 days ago
Published
Feb 10, 2026
Published Chapters
Some love is painfull - Chapter 1
Free
Some love is painfull - Chapter 2
Free
Broken Seams - Chapter 3
Free
Broken Seams - Chapter 4
Free
Broken Seams - Chapter 5
Free
Broken Seams - Chapter 6
Free
Broken Seams - Chapter 7
Free
Broken Seams - Chapter 8
Free
Broken Seams - Chapter 9
Free
Broken Seams - Chapter 10
Free
Broken Seams - Chapter 11
Free
Broken Seams - Chapter 12
Free
Broken Seams - Chapter 13
Free
Broken Seams - Chapter 14
Free
Broken Seams - Chapter 15
Free
Broken Seams - Chapter 16
Free
Broken Seams - Chapter 17
Free
Broken Seams - Chapter 18
Free
Broken Seams - Chapter 19
Free
Broken Seams - Chapter 20
Free
Broken Seams - Chapter 21
Free
Broken Seams - Chapter 22
Free
Broken Seams - Chapter 23
Free
Broken Seams - Chapter 24
Free
Broken Seams - Chapter 25
Free
Broken Seams - Chapter 26
Free
Broken Seams - Chapter 27
Free
Broken Seams - Chapter 28
Free
Broken Seams - Chapter 29
Free
Broken Seams - Chapter 30
Free
Broken Seams - Chapter 31
Free
Broken Seams - Chapter 32
Free
Broken Seams - Chapter 33
Free
Broken Seams - Chapter 34
Free
Broken Seams - Chapter 35
Free
Broken Seams - Chapter 37
Free
रात का आसमान गहरा नीला था,
और घर के अंदर टीवी की रोशनी हर चेहरे पर पड़ रही थी।
आज वर्ल्ड कप फ़ाइनल था—
India vs Australia।
सोफे के बीचों-बीच बैठी थी निवी।
सिर्फ 17 साल की,
पर दिल में करोड़ों दुआएँ।
उसके एक हाथ में तकिया था,
दूसरा हाथ कसकर मुट्ठी बना हुआ।
पापा (विनोद जी) गंभीर आवाज़ में बोले—
“आज मैच आसान नहीं है… ऑस्ट्रेलिया मज़बूत टीम है।”
मम्मी (रीता जी) ने भगवान की तरफ देखते हुए कहा—
“बस इंडिया जीत जाए… आज दिल नहीं संभलेगा।”
भाई आरव मुस्कुराकर बोला—
“अरे मम्मी, टेंशन मत लो।
फ़ाइनल है, कुछ भी हो सकता है!”
निवी कुछ नहीं बोली।
उसकी आँखें सिर्फ़ स्क्रीन पर थीं।
अध्याय 2 : जब उम्मीद डगमगाने लगी
मैदान पर गेंद तेज़ी से घूम रही थी।
स्कोरबोर्ड देख कर दिल बैठ रहा था।
अचानक—
कमेंटेटर की तेज़ आवाज़:
“और ये क्या!
भारत के बेहतरीन खिलाड़ी विहान आउट!”
घर में सन्नाटा छा गया।
पापा (धीरे से):
“ये विकेट बहुत भारी पड़ सकती है…”
निवी की साँस थोड़ी तेज़ हो गई।
कुछ ही देर बाद—
कमेंटेटर:
“ओह नो!
कप्तान राजेश भी आउट!”
आरव ने निराश होकर सिर पकड़ लिया—
“अब तो मुश्किल है… इंडिया हार जाएगी।”
मम्मी ने तुरंत निवी की तरफ देखा।
मम्मी:
“निवी… सब ठीक है न बेटा?”
निवी की आँखें नम थीं,
पर आवाज़ में अब भी उम्मीद थी।
निवी:
“अभी मैच खत्म नहीं हुआ है, मम्मी…”
अध्याय 3 : Idol का नाम
पापा ने हैरानी से पूछा—
“इतना भरोसा किस पर है?”
निवी ने धीरे से सिर उठाया।
उसकी आँखों में चमक थी।
निवी:
“सिव्यान्स अरोड़ा…”
आरव हँसा—
“अरे! तुम्हारा idol!”
निवी हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली—
“वो अकेले मैच जिता सकता है।”
टीवी पर सिव्यान्स मैदान में उतरा।
पूरा स्टेडियम तालियों से गूँज उठा।
निवी ने आँखें बंद कर लीं।
निवी (मन में):
“प्लीज़ भगवान…
बस आज उसे ताक़त दे देना…”
अध्याय 4 : 15 रन का दर्द
पहली गेंद— सिंगल।
निवी की साँस लौटी।
दूसरी गेंद— चौका।
निवी (खुशी से):
“देखा!
मैंने कहा था ना!”
आरव भी जोश में आ गया—
“हाँ! अब मैच पलटेगा!”
लेकिन फिर…
एक तेज़ गेंद।
थोड़ी-सी चूक।
और—
कमेंटेटर (उदास आवाज़ में):
“ओह!
सिव्यान्स अरोड़ा 15 रन बनाकर आउट!”
निवी के चेहरे से रंग उड़ गया।
टीवी की आवाज़ धीमी लगने लगी।
आँखों से आँसू अपने-आप बह निकले।
अध्याय 5 : हार की ख़ामोशी
कुछ मिनटों में मैच खत्म हो गया।
ऑस्ट्रेलिया जीत गया।
घर में कोई कुछ नहीं बोल रहा था।
मम्मी ने खाना मेज़ पर रखा।
मम्मी:
“आओ बेटा… थोड़ा खा लो।”
निवी ने धीरे से सिर हिला दिया।
निवी:
“मुझे भूख नहीं है…”
वो उठकर अपने कमरे में चली गई।
अध्याय 6 : आँसू और समझाना
पापा उसके पीछे-पीछे आए।
पापा:
“बेटा… ये सिर्फ़ एक मैच है।”
निवी फूट-फूट कर रो पड़ी।
निवी:
“नहीं पापा…
वो सिर्फ़ मैच नहीं था…
वो मेरा सपना था…”
आरव भी आ गया।
आरव:
“अरे… वो फिर खेलेगा।
और अगली बार ज़रूर जीतेगा।”
निवी सिसकते हुए बोली—
“लेकिन आज…
आज बहुत दर्द हो रहा है…”
और घर के अंदर टीवी की रोशनी हर चेहरे पर पड़ रही थी।
आज वर्ल्ड कप फ़ाइनल था—
India vs Australia।
सोफे के बीचों-बीच बैठी थी निवी।
सिर्फ 17 साल की,
पर दिल में करोड़ों दुआएँ।
उसके एक हाथ में तकिया था,
दूसरा हाथ कसकर मुट्ठी बना हुआ।
पापा (विनोद जी) गंभीर आवाज़ में बोले—
“आज मैच आसान नहीं है… ऑस्ट्रेलिया मज़बूत टीम है।”
मम्मी (रीता जी) ने भगवान की तरफ देखते हुए कहा—
“बस इंडिया जीत जाए… आज दिल नहीं संभलेगा।”
भाई आरव मुस्कुराकर बोला—
“अरे मम्मी, टेंशन मत लो।
फ़ाइनल है, कुछ भी हो सकता है!”
निवी कुछ नहीं बोली।
उसकी आँखें सिर्फ़ स्क्रीन पर थीं।
अध्याय 2 : जब उम्मीद डगमगाने लगी
मैदान पर गेंद तेज़ी से घूम रही थी।
स्कोरबोर्ड देख कर दिल बैठ रहा था।
अचानक—
कमेंटेटर की तेज़ आवाज़:
“और ये क्या!
भारत के बेहतरीन खिलाड़ी विहान आउट!”
घर में सन्नाटा छा गया।
पापा (धीरे से):
“ये विकेट बहुत भारी पड़ सकती है…”
निवी की साँस थोड़ी तेज़ हो गई।
कुछ ही देर बाद—
कमेंटेटर:
“ओह नो!
कप्तान राजेश भी आउट!”
आरव ने निराश होकर सिर पकड़ लिया—
“अब तो मुश्किल है… इंडिया हार जाएगी।”
मम्मी ने तुरंत निवी की तरफ देखा।
मम्मी:
“निवी… सब ठीक है न बेटा?”
निवी की आँखें नम थीं,
पर आवाज़ में अब भी उम्मीद थी।
निवी:
“अभी मैच खत्म नहीं हुआ है, मम्मी…”
अध्याय 3 : Idol का नाम
पापा ने हैरानी से पूछा—
“इतना भरोसा किस पर है?”
निवी ने धीरे से सिर उठाया।
उसकी आँखों में चमक थी।
निवी:
“सिव्यान्स अरोड़ा…”
आरव हँसा—
“अरे! तुम्हारा idol!”
निवी हल्की-सी मुस्कान के साथ बोली—
“वो अकेले मैच जिता सकता है।”
टीवी पर सिव्यान्स मैदान में उतरा।
पूरा स्टेडियम तालियों से गूँज उठा।
निवी ने आँखें बंद कर लीं।
निवी (मन में):
“प्लीज़ भगवान…
बस आज उसे ताक़त दे देना…”
अध्याय 4 : 15 रन का दर्द
पहली गेंद— सिंगल।
निवी की साँस लौटी।
दूसरी गेंद— चौका।
निवी (खुशी से):
“देखा!
मैंने कहा था ना!”
आरव भी जोश में आ गया—
“हाँ! अब मैच पलटेगा!”
लेकिन फिर…
एक तेज़ गेंद।
थोड़ी-सी चूक।
और—
कमेंटेटर (उदास आवाज़ में):
“ओह!
सिव्यान्स अरोड़ा 15 रन बनाकर आउट!”
निवी के चेहरे से रंग उड़ गया।
टीवी की आवाज़ धीमी लगने लगी।
आँखों से आँसू अपने-आप बह निकले।
अध्याय 5 : हार की ख़ामोशी
कुछ मिनटों में मैच खत्म हो गया।
ऑस्ट्रेलिया जीत गया।
घर में कोई कुछ नहीं बोल रहा था।
मम्मी ने खाना मेज़ पर रखा।
मम्मी:
“आओ बेटा… थोड़ा खा लो।”
निवी ने धीरे से सिर हिला दिया।
निवी:
“मुझे भूख नहीं है…”
वो उठकर अपने कमरे में चली गई।
अध्याय 6 : आँसू और समझाना
पापा उसके पीछे-पीछे आए।
पापा:
“बेटा… ये सिर्फ़ एक मैच है।”
निवी फूट-फूट कर रो पड़ी।
निवी:
“नहीं पापा…
वो सिर्फ़ मैच नहीं था…
वो मेरा सपना था…”
आरव भी आ गया।
आरव:
“अरे… वो फिर खेलेगा।
और अगली बार ज़रूर जीतेगा।”
निवी सिसकते हुए बोली—
“लेकिन आज…
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