बिलेनियर बहू......मज़बूरी की शादी से मोहब्बत तक मंडप सजा था, शहनाइयाँ गूँज रही थी फेरे शुरू पहले दुल्हन शादी छोड़कर चली गई , मेहमानों की भीड़ में सन्नाटा छा गया लड़के वालों का गुस्सा आसमान छूने लगा—इज़्ज़त का सवाल था, समाज क्या कहेगा? चाचा की बेटी पचुपचाप कोने में खड़ी सब देख रही थी। हीरो के पापा ने चाचा से कहा, “भाई साहब, शादी रुकनी नहीं चाहिए। पआप की बेटी को दुल्हन बना दो। बस यही एक रास्ता है।” चाचा ने साफ़ मना कर दिया। “मैं अपनी बेटी की ज़िन्दगी इज़्ज़त के नाम पर बर्बाद नहीं करूँगा। मेरी बेटी की शादी उसकी मर्ज़ी ओर पसंद से से होगी, जबरदस्ती नहीं।” अब क्या होगा
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Chapter 1
टूटा रिश्ता और अनजानी मुलाकात - Chapter 1 -
Chapter 2
मैं गुंडा हूँ - Chapter 2 -
Chapter 3
अग्नि साक्षी और विदाई का दर्द- Chapter 3 -
Chapter 4
रात की साइलेंट जर्नी - Chapter 4 -
Chapter 5
इंट्रोडक्शन- Chapter 5 -
Chapter 6
मैं नहीं करवाने वाला पूजा - Chapter 6 -
Chapter 7
मैं आप दोनों का सर फोड़ दूंगी - Chapter 7 -
Chapter 8
नील कमल और अनजाना नाम - Chapter 8 -
Chapter 9
नाम पर बहस - Chapter 9 -
Chapter 10
आज बहुत मजा आया - Chapter 10 -
Chapter 11
खामोशी के पीछे छिपी बेचैनी- Chapter 11 -
Chapter 12
तुम उस को लेने जाओगे - Chapter 12 -
Chapter 13
वकील बन कर - Chapter 13 -
Chapter 14
मैं... सोचूँगा - Chapter 14 -
Chapter 15
दादी की सीखा - Chapter 15 -
Chapter 18
Black magic - Chapter 18 -
Chapter 19
दरवाज़े पे नोक झोक - Chapter 19 -
Chapter 20
मुस्कानों के पीछे छिपी शरारत - Chapter 20 -
Chapter 21
कुछ गड़बड़ तो नहीं - Chapter 21 -
Chapter 22
नीम, करेला और मेथी - Chapter 22 -
Chapter 23
इंटरव्यू - Chapter 23 -
Chapter 24
मैं हूँ ना परफेक्ट एक्टर - Chapter 24 -
Chapter 25
I won - Chapter 25 -
Chapter 26
मिसेज़ पांडा... - Chapter 26 -
Chapter 27
K- drama - Chapter 27 -
Chapter 28
माँ की साड़ी- Chapter 28 -
Chapter 29
उफ्फ्फ ये कमर - Chapter 29 -
Chapter 30
एक बेटी की विदाई - Chapter 30 -
Chapter 31
इसे मैं ही चलाऊँगी - Chapter 31 -
Chapter 32
Harshvardhan is won - Chapter 32 -
Chapter 33
I can hear you, boys. - Chapter 33 -
Chapter 34
हवा का रुख बादल रहा है - Chapter 34 -
Chapter 35
सबसे अनमोल तोहफा - Chapter 35 -
Chapter 36
C3 का राज - Chapter 36 -
Chapter 37
अपनी आँखों को मत सेक - Chapter 37 -
Chapter 38
कमरे तक का सफर - Chapter 38 -
Chapter 39
एक कमरा, दो जिद्दी लोग - Chapter 39 -
Chapter 40
डिमोशन पर डिमोशन - Chapter 40 -
Chapter 41
कब बताओगे उसे?"- Chapter 41 -
Chapter 42
वापस रॉय मेंशन में शिफ्ट हो जाएँ।...- Chapter 42