Write
Story Creator Story Creator Author
← Back to Explore
Microdrama power satta
Science Fiction High Fantasy

Microdrama power satta

By Shayna choudhary Verified Ongoing
0.0 Total rating
61 Views
0 Likes
0 Bookmarks
0 Ratings
एक कंस्ट्रक्शन साइड पर हथौड़े की आवाज़ें, मशीनों की गूँज)
मज़दूर दौड़ता हुआ आता है
मज़दूर: राघव भैया! आपकी बीवी का फोन है... चार्जर फिर हमारे वाले पर लगाया है न आपने? अब जब तक आप फोन नहीं उठाते, हम दौड़ते रहते हैं!
राघव (घबराकर): दे फोन यार... (धीरे से ...
Chapter 0
Words 0
Updated Recently
Published Unscheduled
No chapters available yet.
एक कंस्ट्रक्शन साइड पर हथौड़े की आवाज़ें, मशीनों की गूँज)
मज़दूर दौड़ता हुआ आता है
मज़दूर: राघव भैया! आपकी बीवी का फोन है... चार्जर फिर हमारे वाले पर लगाया है न आपने? अब जब तक आप फोन नहीं उठाते, हम दौड़ते रहते हैं!
राघव (घबराकर): दे फोन यार... (धीरे से फोन कान पर लगाता है)

सरिता (चिल्लाते हुए): कहाँ मर गए हो? फोन क्यों नहीं उठाते? आते वक्त समोसे, कचोरी, जलेबी लेकर आना — और बहाने मत बनाना!

राघव (धीरे से): पर सरिता... जेब में सिर्फ दो सौ हैं—

सरिता: अरे फटीचर आदमी! मैंने पहले ही बच्चे को पाँच सौ देकर भेजा है, अब बस जा और सामान लेकर आ!


Cycle की चेन घूमने की आवाज़, तेज़ साँसें ।
राघव थका था, मगर डर उससे बड़ा था। उसने साइकिल हवा में उड़ाई और समोसे लेकर घर पहुँचा।

(दरवाज़ा खुलता है)
सरिता: इतना टाइम लगा दिया? मर गए थे क्या रास्ते में?
राघव (काँपते हुए): मैं तो... सीधा यहीं आ रहा था।

सरिता: चुप! मेहमान इंतज़ार कर रहे हैं। जल्दी दे खाना!

राघव रसोई में पानी पीते हुए खुद से)
राघव (धीरे से): इतने साल में कोई मेहमान नहीं... आज इतना सत्कार किसके लिए?
रसोई की खिड़की से झाँकते हुए)
राघव ने जैसे ही उसने खिड़की से देखा... वहाँ बैठा था राहुल, सरिता का पुराना प्यार।
वही राहुल... जिसकी हँसी में अब सरिता खोई जा रही थी।
राघव की आँखें भर आती हैं
रात का सीन: घड़ी की टिक-टिक
रात के दो बजे... राघव को फिर आवाज़ आई।
वह उठा, देखा — सरिता बिस्तर पर नहीं थी।
स्टोर रूम की लाइट जल रही थी
राघव धीरे से खुद से): यह आवाज़... कैसी है ये...?
वह स्टूल रखकर झाँकता है... और जम जाता है)
: अंदर सरिता थी... राहुल के साथ...
दोनों बिना किसी शर्म के एक-दूसरे में खोए हुए।
स्टूल गिरने की आवाज़)
सरिता और राहुल दरवाज़ा खोलते हैं
राघव की सास गुस्से में: बेवकूफ! बेडरूम में नहीं कर सकती थी ये सब?
राघव (हैरान): माँजी... आप...?
राहुल (हँसते हुए): चलो सरिता, अब बेडरूम में मज़ा जारी रखते हैं।
दोनों राघव को लांघकर जाते हैं
सास तंज कसते हुये: अब तलाक के पेपर पर साइन कर और निकल जा।
सुबह तक तेरी शक्ल ना देखूँ मैं,
रात, सड़क पर चलता राघव –
वो चल पड़ा... कीचड़ में लथपथ...
हर कदम पर टूटा हुआ, हर साँस में ज़िल्लत का ज़हर।
आज उसने ठान लिया था — या तो सब खत्म... या वो खुद।
अचानक गाड़ियों की हेडलाइटें उस पर पड़ती हैं
लेकिन तभी... पंद्रह-बीस गाड़ियाँ उसे घेर लेती हैं...
आख़िर कौन था उनमें?
No ratings yet.
No comments yet.
No fan art available for this story yet.