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साया-ए-राज़👌
Adventure Historical Adventure

साया-ए-राज़👌

By Sadia khanam Ongoing
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साया-ए-राज़👌आर्या एक छोटे कस्बे की मासूम लड़की थी, जो हमेशा अपने सपनों की दुनिया में जीती थी। लेकिन उसके सपनों में अक्सर एक अजीब सा साया दिखाई देता था — कभी उसके कमरे की खिड़की पर, कभी अंधेरी गलियों में। वह साया उससे कुछ कहना चाहता था, पर उसकी आवाज़ हमेशा ...
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साया-ए-राज़👌आर्या एक छोटे कस्बे की मासूम लड़की थी, जो हमेशा अपने सपनों की दुनिया में जीती थी। लेकिन उसके सपनों में अक्सर एक अजीब सा साया दिखाई देता था — कभी उसके कमरे की खिड़की पर, कभी अंधेरी गलियों में। वह साया उससे कुछ कहना चाहता था, पर उसकी आवाज़ हमेशा दब जाती थी। एक रात, जब आर्या देर तक पढ़ाई कर रही थी, खिड़की पर दस्तक हुई। उसने बाहर झाँका, पर कोई नहीं था। तभी पीछे से एक ठंडी हवा का झोंका आया और दीवार पर वही साया उभर आया। साया बोला— "आर्या… सच जानने का वक्त आ गया है…" आर्या घबरा गई, पर उसने हिम्मत जुटाकर पूछा— "कौन हो तुम? और मेरे पीछे क्यों पड़े हो?" साया ने जवाब दिया— "मैं वही हूँ जिसे तुम्हारे परिवार ने धोखा देकर मौत के हवाले कर दिया था। तुम्हारे घर की नींव में सिर्फ ईंटें नहीं, बल्कि मेरे खून के धब्बे भी हैं।" आर्या को विश्वास नहीं हुआ। उसने अपने दादा से पूछताछ की। बहुत दबाव देने के बाद, दादा ने स्वीकार किया कि उनके पुरखों ने ज़मीन हड़पने के लिए एक निर्दोष आदमी की हत्या की थी। वही आत्मा आज भी न्याय की तलाश में भटक रही थी। आर्या के सामने अब दो रास्ते थे — . साया को नज़रअंदाज़ कर, सामान्य ज़िंदगी जीना। या फिर सच को सामने लाकर, उस आत्मा को शांति देना। आर्या ने दूसरा रास्ता चुना। उसने गाँववालों के सामने पुरानी सच्चाई उजागर की, और उसी जगह उस आत्मा के लिए दीप जलाए जहाँ उसका खून बहा था। उस रात पहली बार आर्या ने अपने सपने में साए को मुस्कुराते हुए देखा। वह धीरे-धीरे मिट गया, जैसे किसी को आखिरकार सुकून मिल गया हो। --- कभी-कभी हमारे आसपास दिखने वाले साए डराने नहीं, बल्कि सच्चाई का आईना दिखाने आते हैं।हर गाँव की अपनी एक दास्तान होती है। कुछ कहानियाँ लोग ज़ोर-ज़ोर से सुनाते हैं, तो कुछ कहानियाँ दबी रह जाती हैं—जैसे किसी पुरानी दीवार की दरारों में कैद होकर। आर्या का गाँव भी एक ऐसी ही दास्तान को छुपाए हुए था। --- अजीब सपने आर्या, जो शहर में पढ़ाई करने गई थी, गर्मियों की छुट्टियों में गाँव लौटी। रात को जब वह अपने कमरे की खिड़की से बाहर देखती, तो उसे अक्सर एक परछाई नज़र आती। शुरुआत में उसने सोचा, ये उसका वहम है। लेकिन जब बार-बार वही साया दिखाई देने लगा, तो डर धीरे-धीरे हकीकत में बदलने लगा। सपनों में वही साया उसके सामने खड़ा होता, लेकिन उसकी आवाज़ जैसे घुटी हुई होती। वह कुछ कहना चाहता था, लेकिन शब्द हमेशा अधूरे रह जाते। --- साए की चेतावनी एक रात अचानक खिड़की पर दस्तक हुई। आर्या ने झाँका—सन्नाटा। लेकिन तभी कमरे में अंधेरा फैल गया और दीवार पर वही साया उभर आया। "आर्या… सच छुपा है… और ताले की चाबी तुम्हारे पास है…", साए ने फुसफुसाते हुए कहा। आर्या का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। वह कांपते हुए बोली— "कौन हो तुम? और मुझसे क्यों मिलते हो?" साया धीरे-धीरे बोला— "मैं वो हूँ… जिसे तुम्हारे घर की दीवारों ?
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