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माँ के पैरों में जन्नत"
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"माँ के पैरों में जन्नत" 🩷 कहते हैं कि जन्नत आसमानों में है, लेकिन असल मायने में जन्नत तो माँ के पैरों में छिपी है। माँ वो हस्ती है, जो अपने बच्चे के लिए खुद भूखी रहकर उसे खिलाती है, खुद थककर भी उसके चेहरे पर मुस्कान देखना चाहती है। जब बच्चा गिरता है, तो सब...
"माँ के पैरों में जन्नत" 🩷 कहते हैं कि जन्नत आसमानों में है, लेकिन असल मायने में जन्नत तो माँ के पैरों में छिपी है। माँ वो हस्ती है, जो अपने बच्चे के लिए खुद भूखी रहकर उसे खिलाती है, खुद थककर भी उसके चेहरे पर मुस्कान देखना चाहती है। जब बच्चा गिरता है, तो सबसे पहले माँ का हाथ उसे उठाने आता है। जब दुनिया से दर्द मिलता है, तो माँ की गोद ही सबसे सुकून देती है। उसके पैरों की ठंडी ठंडी छाँव में सुकून है, दुआएँ हैं और वो रहमतें हैं जिन्हें कोई और नहीं दे सकता। माँ के पैरों तले वो बरकत है, जो इंसान को बुलंदियों तक पहुँचा देती है। माँ का हाथ सिर पर हो तो मुश्किलें भी आसान लगती हैं, और जब माँ दुआ करती है तो किस्मत की हर बंद राह खुल जाती है। इसीलिए कहा गया है: 👉 "माँ के पैरों तले जन्नत है।" क्योंकि जो माँ की इज्ज़त करता है, उसकी ज़िन्दगी में रहमतें बरसती हैं।रहमान एक गरीब लड़का था। छोटे से गाँव में उसकी परवरिश हुई थी। पिता जल्दी ही गुजर गए थे और माँ ने अकेले ही उसे पाला। सिलाई करके, लोगों के घरों में काम करके माँ ने रहमान को पढ़ाया। माँ अक्सर कहा करती थी – "बेटा, मेहनत करना, लेकिन कभी दूसरों का हक मत मारना। और याद रखना, माँ के पैरों तले जन्नत है।" रहमान कभी-कभी सोचता – "जन्नत? वो तो ऊपर आसमान में होगी, माँ के पैरों में कैसे?" लेकिन वह माँ से बहस नहीं करता। --- कठिन दौर रहमान बड़ा हुआ, पढ़ाई पूरी की और शहर चला गया। नौकरी मिली, लेकिन शहर की चमक-दमक ने उसे बदल दिया। दोस्तों की बातें, पैसा और शौक... इन सब में वो इतना खो गया कि माँ की फोन कॉल्स तक अनसुनी करने लगा। एक दिन माँ गाँव से शहर आई। थकी हुई, पसीने से लथपथ, लेकिन बेटे को देखने की खुशी में आँखों में चमक थी। रहमान ने माँ को देखा, लेकिन दोस्तों के सामने शर्मिंदगी महसूस की। उसने कहा – "अम्मा, आप ऐसे कपड़ों में क्यों आई हैं? यहाँ शहर है, लोग हँसेंगे।" माँ ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। --- सबक समय बदला। कंपनी से रहमान को धोखे में निकाल दिया गया। पैसे खत्म हो गए, दोस्त भी छोड़ गए। तब उसे याद आया कि दुनिया में सच में कोई उसका नहीं। थका-हारा जब घर पहुँचा, तो दरवाज़ा माँ ने खोला। माँ ने बिना कुछ पूछे उसे गले से लगा लिया। "बेटा, तू चाहे जहाँ जाए, तेरी जगह मेरी गोद में हमेशा है।" उस पल रहमान रो पड़ा। उसने माँ के पैरों को पकड़ लिया और कहा – "अम्मा, अब समझ आया... जन्नत सच में आपके पैरों में है।" माँ ने दुआओं भरा हाथ उसके सिर पर रखा और बोली – "अब तेरा हर कदम आसान होगा, क्योंकि माँ की दुआ तेरे साथ है।" --- उस दिन से रहमान ने माँ को अपना सबसे बड़ा सहारा माना। और सच में, उसकी ज़िन्दगी बदल गई। जहाँ भी गया, सफलता मिली...
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"माँ के पैरों में जन्नत" 🩷 कहते हैं कि जन्नत आसमानों में है, लेकिन असल मायने में जन्नत तो माँ के पैरों में छिपी है। माँ वो हस्ती है, जो अपने बच्चे के लिए खुद भूखी रहकर उसे खिलाती है, खुद थककर भी उसके चेहरे पर मुस्कान देखना चाहती है। जब बच्चा गिरता है, तो सबसे पहले माँ का हाथ उसे उठाने आता है। जब दुनिया से दर्द मिलता है, तो माँ की गोद ही सबसे सुकून देती है। उसके पैरों की ठंडी ठंडी छाँव में सुकून है, दुआएँ हैं और वो रहमतें हैं जिन्हें कोई और नहीं दे सकता। माँ के पैरों तले वो बरकत है, जो इंसान को बुलंदियों तक पहुँचा देती है। माँ का हाथ सिर पर हो तो मुश्किलें भी आसान लगती हैं, और जब माँ दुआ करती है तो किस्मत की हर बंद राह खुल जाती है। इसीलिए कहा गया है: 👉 "माँ के पैरों तले जन्नत है।" क्योंकि जो माँ की इज्ज़त करता है, उसकी ज़िन्दगी में रहमतें बरसती हैं।रहमान एक गरीब लड़का था। छोटे से गाँव में उसकी परवरिश हुई थी। पिता जल्दी ही गुजर गए थे और माँ ने अकेले ही उसे पाला। सिलाई करके, लोगों के घरों में काम करके माँ ने रहमान को पढ़ाया। माँ अक्सर कहा करती थी – "बेटा, मेहनत करना, लेकिन कभी दूसरों का हक मत मारना। और याद रखना, माँ के पैरों तले जन्नत है।" रहमान कभी-कभी सोचता – "जन्नत? वो तो ऊपर आसमान में होगी, माँ के पैरों में कैसे?" लेकिन वह माँ से बहस नहीं करता। --- कठिन दौर रहमान बड़ा हुआ, पढ़ाई पूरी की और शहर चला गया। नौकरी मिली, लेकिन शहर की चमक-दमक ने उसे बदल दिया। दोस्तों की बातें, पैसा और शौक... इन सब में वो इतना खो गया कि माँ की फोन कॉल्स तक अनसुनी करने लगा। एक दिन माँ गाँव से शहर आई। थकी हुई, पसीने से लथपथ, लेकिन बेटे को देखने की खुशी में आँखों में चमक थी। रहमान ने माँ को देखा, लेकिन दोस्तों के सामने शर्मिंदगी महसूस की। उसने कहा – "अम्मा, आप ऐसे कपड़ों में क्यों आई हैं? यहाँ शहर है, लोग हँसेंगे।" माँ ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। --- सबक समय बदला। कंपनी से रहमान को धोखे में निकाल दिया गया। पैसे खत्म हो गए, दोस्त भी छोड़ गए। तब उसे याद आया कि दुनिया में सच में कोई उसका नहीं। थका-हारा जब घर पहुँचा, तो दरवाज़ा माँ ने खोला। माँ ने बिना कुछ पूछे उसे गले से लगा लिया। "बेटा, तू चाहे जहाँ जाए, तेरी जगह मेरी गोद में हमेशा है।" उस पल रहमान रो पड़ा। उसने माँ के पैरों को पकड़ लिया और कहा – "अम्मा, अब समझ आया... जन्नत सच में आपके पैरों में है।" माँ ने दुआओं भरा हाथ उसके सिर पर रखा और बोली – "अब तेरा हर कदम आसान होगा, क्योंकि माँ की दुआ तेरे साथ है।" --- उस दिन से रहमान ने माँ को अपना सबसे बड़ा सहारा माना। और सच में, उसकी ज़िन्दगी बदल गई। जहाँ भी गया, सफलता मिली...
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