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ताकती निगाहें: इंतजार
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प्रोमों... "ताकती निगाहें - इंतजार" राजकुमारी प्रियदर्शिनी राठौड़, जोधपुर की शान और गौरव, एक ऐसा नाम है जिसे हर कोई जानता है। लेकिन उसके भीतर का सन्नाटा और आंसू उस भव्यता के पीछे छिपे हैं। आज, दस साल बाद भी, उसकी आंखों में छिपे दर्द की गहराई ने उसे एक अनदेख...
प्रोमों... "ताकती निगाहें - इंतजार" राजकुमारी प्रियदर्शिनी राठौड़, जोधपुर की शान और गौरव, एक ऐसा नाम है जिसे हर कोई जानता है। लेकिन उसके भीतर का सन्नाटा और आंसू उस भव्यता के पीछे छिपे हैं। आज, दस साल बाद भी, उसकी आंखों में छिपे दर्द की गहराई ने उसे एक अनदेखे अंधेरे में कैद कर रखा है। एक ऐसी लड़की, जिसने कभी खुलकर हंसने-बोलने का मजा लिया था, आज खुद को उन बेड़ियों में जकड़ लिया है जो उसके ही परिवार ने उसके सपनों को तोड़ने के लिए बनाई हैं। उसकी चंचलता और मासूमियत अब एक खामोशी की चादर में ढक गई है। प्रियदर्शिनी को परिवार के प्यार और समर्थन की ख्वाहिश में इतना बिखेरा गया कि उसने अपनी भावनाओं को छुपाने का निर्णय लिया। खामोश और कठोर बन चुकी प्रियदर्शिनी, मुस्कराने की कोशिश में लगी रही, लेकिन वह जानती थी कि 10 साल पहले का तूफान उसे पूरी तरह बिखेर चुका है। उसके भीतर का खालीपन, जैसे एक खोखला महल हो, हर पल उसकी आत्मा को चीरता रहता है। परिवार की कड़वी बातें, निराशाजनक ताने और अनदेखी निगाहें, प्रियदर्शिनी को हर रोज एक नए संघर्ष का सामना करने पर मजबूर करती हैं। वह अकेलेपन में झरोखें पर बैठकर आंसू बहाने में गुजरे समय को याद करती है, जैसे उस समय के साथ ही उसका भी अस्तित्व मिट गया हो। लेकिन, इस गहरे सन्नाटे के बीच, दो युवा आत्माओं की कहानी उभरती है। अयंक जिंदल, एक महत्वाकांक्षी लेखक, अपने सपनों की तलाश में अपने परिवार के खिलाफ जा रहा है। वह प्रियदर्शिनी के अतीत को उजागर करने की जिद में है, ताकि वह अपनी कहानी को जीवंत बना सके। लेकिन प्रियदर्शिनी के बारे में जानकारी जुटाना उसके लिए आसान नहीं है। हर कोशिश उसके हाथ से निकल जाती है, और उसके हर प्रयास में उसे निराशा का सामना करना पड़ता है। फिर, शंशिता, एक उत्साही रिपोर्टर, अयंक की राहों में जुड़ती है। प्रियदर्शिनी के बारे में जानने की उसकी जिज्ञासा और अयंक की मेहनत उन्हें एक नई दिशा में ले जाती है। दोनों मिलकर प्रियदर्शिनी के रहस्यों को जानने और समझने की ठान लेते हैं। क्या अयंक और शंशिता प्रियदर्शिनी के दिल की गहराइयों को छू पाएंगे? क्या वे उसे अपने सपनों के पंख लगाने में मदद कर सकेंगे, या राठौड़ परिवार की जटिलताएं और परिवार के दबाव उनके प्रयासों को विफल कर देंगे? “ताकती निगाहें - इंतजार” एक ऐसी कहानी है, जो प्यार, संघर्ष, दोस्ती और उम्मीद की एक गहरी यात्रा को बयां करती है। यह कहानी न केवल प्रियदर्शिनी के दर्द और खामोशी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सच्ची दोस्ती और सहयोग की शक्ति हर अंधेरे को मिटा सकती है। महल की दीवारों में छिपे राज़ और उन राज़ों को जानने की चाह में, क्या अयंक और शंशिता प्रियदर्शिनी के अंदर की रानी को फिर से जिंदा कर पाएंगे? क्या हुआ था दस साल पहले ..... जो इतनी खामोश रहने लगी हैं प्रियदर्शिनी जारी हैं ....... प्यारे रिडर्स , इस कहानी के 10 पार्ट्स आॅलरेडी आ चुके हैं जिन्हें आप मेरी प्रोफाइल पर
Chapter
15
Words
18.9K
Updated
2 months ago
Published
Jun 17, 2025
Published Chapters
ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 2
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 3
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 4
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 5
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 6
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 7
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 9
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 10
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 11
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 12
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 13
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 14
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 15
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ताकती निगाहें: इंतजार - Chapter 16
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प्रोमों... "ताकती निगाहें - इंतजार" राजकुमारी प्रियदर्शिनी राठौड़, जोधपुर की शान और गौरव, एक ऐसा नाम है जिसे हर कोई जानता है। लेकिन उसके भीतर का सन्नाटा और आंसू उस भव्यता के पीछे छिपे हैं। आज, दस साल बाद भी, उसकी आंखों में छिपे दर्द की गहराई ने उसे एक अनदेखे अंधेरे में कैद कर रखा है। एक ऐसी लड़की, जिसने कभी खुलकर हंसने-बोलने का मजा लिया था, आज खुद को उन बेड़ियों में जकड़ लिया है जो उसके ही परिवार ने उसके सपनों को तोड़ने के लिए बनाई हैं। उसकी चंचलता और मासूमियत अब एक खामोशी की चादर में ढक गई है। प्रियदर्शिनी को परिवार के प्यार और समर्थन की ख्वाहिश में इतना बिखेरा गया कि उसने अपनी भावनाओं को छुपाने का निर्णय लिया। खामोश और कठोर बन चुकी प्रियदर्शिनी, मुस्कराने की कोशिश में लगी रही, लेकिन वह जानती थी कि 10 साल पहले का तूफान उसे पूरी तरह बिखेर चुका है। उसके भीतर का खालीपन, जैसे एक खोखला महल हो, हर पल उसकी आत्मा को चीरता रहता है। परिवार की कड़वी बातें, निराशाजनक ताने और अनदेखी निगाहें, प्रियदर्शिनी को हर रोज एक नए संघर्ष का सामना करने पर मजबूर करती हैं। वह अकेलेपन में झरोखें पर बैठकर आंसू बहाने में गुजरे समय को याद करती है, जैसे उस समय के साथ ही उसका भी अस्तित्व मिट गया हो। लेकिन, इस गहरे सन्नाटे के बीच, दो युवा आत्माओं की कहानी उभरती है। अयंक जिंदल, एक महत्वाकांक्षी लेखक, अपने सपनों की तलाश में अपने परिवार के खिलाफ जा रहा है। वह प्रियदर्शिनी के अतीत को उजागर करने की जिद में है, ताकि वह अपनी कहानी को जीवंत बना सके। लेकिन प्रियदर्शिनी के बारे में जानकारी जुटाना उसके लिए आसान नहीं है। हर कोशिश उसके हाथ से निकल जाती है, और उसके हर प्रयास में उसे निराशा का सामना करना पड़ता है। फिर, शंशिता, एक उत्साही रिपोर्टर, अयंक की राहों में जुड़ती है। प्रियदर्शिनी के बारे में जानने की उसकी जिज्ञासा और अयंक की मेहनत उन्हें एक नई दिशा में ले जाती है। दोनों मिलकर प्रियदर्शिनी के रहस्यों को जानने और समझने की ठान लेते हैं। क्या अयंक और शंशिता प्रियदर्शिनी के दिल की गहराइयों को छू पाएंगे? क्या वे उसे अपने सपनों के पंख लगाने में मदद कर सकेंगे, या राठौड़ परिवार की जटिलताएं और परिवार के दबाव उनके प्रयासों को विफल कर देंगे? “ताकती निगाहें - इंतजार” एक ऐसी कहानी है, जो प्यार, संघर्ष, दोस्ती और उम्मीद की एक गहरी यात्रा को बयां करती है। यह कहानी न केवल प्रियदर्शिनी के दर्द और खामोशी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सच्ची दोस्ती और सहयोग की शक्ति हर अंधेरे को मिटा सकती है। महल की दीवारों में छिपे राज़ और उन राज़ों को जानने की चाह में, क्या अयंक और शंशिता प्रियदर्शिनी के अंदर की रानी को फिर से जिंदा कर पाएंगे? क्या हुआ था दस साल पहले ..... जो इतनी खामोश रहने लगी हैं प्रियदर्शिनी जारी हैं ....... प्यारे रिडर्स , इस कहानी के 10 पार्ट्स आॅलरेडी आ चुके हैं जिन्हें आप मेरी प्रोफाइल पर
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