Romance Romantic Suspense
ये इश्क बड़ा बेदर्दी है
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हाँ वो इंसान नहीं शैतान है लेकिन
तू उसकी दवा
ऐशा, एक मासूम और होशियार कॉलेज स्टूडेंट, जिसकी ज़िंदगी अब तक किताबों, सपनों और छोटी-छोटी खुशियों में सिमटी थी, अचानक एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी होती है जहाँ उससे एक ऐसा फ़ैसला लिया जाता है जो उसक...
तू उसकी दवा
ऐशा, एक मासूम और होशियार कॉलेज स्टूडेंट, जिसकी ज़िंदगी अब तक किताबों, सपनों और छोटी-छोटी खुशियों में सिमटी थी, अचानक एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी होती है जहाँ उससे एक ऐसा फ़ैसला लिया जाता है जो उसक...
हाँ वो इंसान नहीं शैतान है लेकिन
तू उसकी दवा
ऐशा, एक मासूम और होशियार कॉलेज स्टूडेंट, जिसकी ज़िंदगी अब तक किताबों, सपनों और छोटी-छोटी खुशियों में सिमटी थी, अचानक एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी होती है जहाँ उससे एक ऐसा फ़ैसला लिया जाता है जो उसकी पूरी दुनिया बदल देता है। एक टूटी हुई माँ उसके सामने हाथ जोड़ती है—"तू ही उसकी दवा है..."—और ऐशा को शादी का प्रस्ताव दिया जाता है, लेकिन ये शादी कोई प्रेम-भरा बंधन नहीं, बल्कि एक ठोस समझौता है। रिश्ता... उस इंसान से, जिसे कॉलेज वाले " प्रोफेसर" कहते हैं—अर्जुन कपूर । जिसके दो रूप है एक अच्छा दूसरा क्रूल,
वह एक ऐसा पुरुष है जो दिल से नहीं, जख्मों से सोचता है; जिसकी आंखों में प्यार नहीं, अतीत की राख जलती है; और जो अपनी ही परछाई से डरता है क्योंकि उसका अंधेरा खुद उसकी रूह को खा चुका है।
ऐशा इस रिश्ते को स्वीकार करती है—but not out of love, बल्कि एक माँ के आंसुओं की लाचार पुकार के आगे झुककर। लेकिन क्या यह समझौता कभी एक रिश्ता बन पाएगा? क्या एक मासूम लड़की एक ऐसे मानसिक रूप से घायल इंसान को ठीक कर सकती है, जो लोगों की भावनाओं से नहीं, उनके खून से खेलता है? क्या प्यार वहाँ पनप सकता है जहाँ हर दीवार डर और हर खामोशी एक चीख बन चुकी है?
यह एक ऐसी कहानी है जहाँ रिश्ते दस्तखत से शुरू होते हैं, और तड़प की आग में तपकर असली इम्तिहान में बदलते हैं। जहाँ एक लड़की अपनी मासूमियत से एक रूह की राख को छुने की कोशिश करती है, और एक आदमी अपने अंदर के दानव से लड़ते हुए इंसान बनने की चाह में तड़पता है।
यह कहानी है एक समझौते की, जो मोहब्बत की सबसे मुश्किल इब्तिदा बनती है। एक ऐसे रिश्ते की, जहाँ हर दिन एक जंग है... और हर जंग के बाद एक उम्मीद।
तू उसकी दवा
ऐशा, एक मासूम और होशियार कॉलेज स्टूडेंट, जिसकी ज़िंदगी अब तक किताबों, सपनों और छोटी-छोटी खुशियों में सिमटी थी, अचानक एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी होती है जहाँ उससे एक ऐसा फ़ैसला लिया जाता है जो उसकी पूरी दुनिया बदल देता है। एक टूटी हुई माँ उसके सामने हाथ जोड़ती है—"तू ही उसकी दवा है..."—और ऐशा को शादी का प्रस्ताव दिया जाता है, लेकिन ये शादी कोई प्रेम-भरा बंधन नहीं, बल्कि एक ठोस समझौता है। रिश्ता... उस इंसान से, जिसे कॉलेज वाले " प्रोफेसर" कहते हैं—अर्जुन कपूर । जिसके दो रूप है एक अच्छा दूसरा क्रूल,
वह एक ऐसा पुरुष है जो दिल से नहीं, जख्मों से सोचता है; जिसकी आंखों में प्यार नहीं, अतीत की राख जलती है; और जो अपनी ही परछाई से डरता है क्योंकि उसका अंधेरा खुद उसकी रूह को खा चुका है।
ऐशा इस रिश्ते को स्वीकार करती है—but not out of love, बल्कि एक माँ के आंसुओं की लाचार पुकार के आगे झुककर। लेकिन क्या यह समझौता कभी एक रिश्ता बन पाएगा? क्या एक मासूम लड़की एक ऐसे मानसिक रूप से घायल इंसान को ठीक कर सकती है, जो लोगों की भावनाओं से नहीं, उनके खून से खेलता है? क्या प्यार वहाँ पनप सकता है जहाँ हर दीवार डर और हर खामोशी एक चीख बन चुकी है?
यह एक ऐसी कहानी है जहाँ रिश्ते दस्तखत से शुरू होते हैं, और तड़प की आग में तपकर असली इम्तिहान में बदलते हैं। जहाँ एक लड़की अपनी मासूमियत से एक रूह की राख को छुने की कोशिश करती है, और एक आदमी अपने अंदर के दानव से लड़ते हुए इंसान बनने की चाह में तड़पता है।
यह कहानी है एक समझौते की, जो मोहब्बत की सबसे मुश्किल इब्तिदा बनती है। एक ऐसे रिश्ते की, जहाँ हर दिन एक जंग है... और हर जंग के बाद एक उम्मीद।
Chapter
216
Words
210.1K
Updated
5 days ago
Published
Apr 28, 2025
Published Chapters
यह इश्क बड़ा बेदर्दी है Chapter 1 ( Inti*mate)
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यह इश्क बड़ा बेदर्दी है - Chapter 2
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यह इश्क बड़ा बेदर्दी है - Chapter 3
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A kiss before the kill - Chapter 11
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A kiss before the kill - Chapter 12
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A kiss before the kill - Chapter 13
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A kiss before the kill - Chapter 14
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A kiss before the kill - Chapter 15
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A kiss before the kill - Chapter 17
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A kiss before the kill - Chapter 18
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A kiss before the kill - Chapter 19
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A kiss before the kill - Chapter 20
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A kiss before the kill - Chapter 21
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A kiss before the kill - Chapter 22
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A kiss before the kill - Chapter 23
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A kiss before the kill - Chapter 24
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A kiss before the kill - Chapter 25
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A kiss before the kill - Chapter 26
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A kiss before the kill - Chapter 27
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A kiss before the kill - Chapter 28
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A kiss before the kill - Chapter 29
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A kiss before the kill - Chapter 30
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A kiss before the kill - Chapter 31
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A kiss before the kill - Chapter 32
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A kiss before the kill - Chapter 33
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A kiss before the kill - Chapter 34
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A kiss before the kill - Chapter 35
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A kiss before the kill - Chapter 36
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A kiss before the kill - Chapter 37
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A kiss before the kill - Chapter 38
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A kiss before the kill - Chapter 39
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A kiss before the kill - Chapter 40
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हाँ वो इंसान नहीं शैतान है लेकिन
तू उसकी दवा
ऐशा, एक मासूम और होशियार कॉलेज स्टूडेंट, जिसकी ज़िंदगी अब तक किताबों, सपनों और छोटी-छोटी खुशियों में सिमटी थी, अचानक एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी होती है जहाँ उससे एक ऐसा फ़ैसला लिया जाता है जो उसकी पूरी दुनिया बदल देता है। एक टूटी हुई माँ उसके सामने हाथ जोड़ती है—"तू ही उसकी दवा है..."—और ऐशा को शादी का प्रस्ताव दिया जाता है, लेकिन ये शादी कोई प्रेम-भरा बंधन नहीं, बल्कि एक ठोस समझौता है। रिश्ता... उस इंसान से, जिसे कॉलेज वाले " प्रोफेसर" कहते हैं—अर्जुन कपूर । जिसके दो रूप है एक अच्छा दूसरा क्रूल,
वह एक ऐसा पुरुष है जो दिल से नहीं, जख्मों से सोचता है; जिसकी आंखों में प्यार नहीं, अतीत की राख जलती है; और जो अपनी ही परछाई से डरता है क्योंकि उसका अंधेरा खुद उसकी रूह को खा चुका है।
ऐशा इस रिश्ते को स्वीकार करती है—but not out of love, बल्कि एक माँ के आंसुओं की लाचार पुकार के आगे झुककर। लेकिन क्या यह समझौता कभी एक रिश्ता बन पाएगा? क्या एक मासूम लड़की एक ऐसे मानसिक रूप से घायल इंसान को ठीक कर सकती है, जो लोगों की भावनाओं से नहीं, उनके खून से खेलता है? क्या प्यार वहाँ पनप सकता है जहाँ हर दीवार डर और हर खामोशी एक चीख बन चुकी है?
यह एक ऐसी कहानी है जहाँ रिश्ते दस्तखत से शुरू होते हैं, और तड़प की आग में तपकर असली इम्तिहान में बदलते हैं। जहाँ एक लड़की अपनी मासूमियत से एक रूह की राख को छुने की कोशिश करती है, और एक आदमी अपने अंदर के दानव से लड़ते हुए इंसान बनने की चाह में तड़पता है।
यह कहानी है एक समझौते की, जो मोहब्बत की सबसे मुश्किल इब्तिदा बनती है। एक ऐसे रिश्ते की, जहाँ हर दिन एक जंग है... और हर जंग के बाद एक उम्मीद।
तू उसकी दवा
ऐशा, एक मासूम और होशियार कॉलेज स्टूडेंट, जिसकी ज़िंदगी अब तक किताबों, सपनों और छोटी-छोटी खुशियों में सिमटी थी, अचानक एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी होती है जहाँ उससे एक ऐसा फ़ैसला लिया जाता है जो उसकी पूरी दुनिया बदल देता है। एक टूटी हुई माँ उसके सामने हाथ जोड़ती है—"तू ही उसकी दवा है..."—और ऐशा को शादी का प्रस्ताव दिया जाता है, लेकिन ये शादी कोई प्रेम-भरा बंधन नहीं, बल्कि एक ठोस समझौता है। रिश्ता... उस इंसान से, जिसे कॉलेज वाले " प्रोफेसर" कहते हैं—अर्जुन कपूर । जिसके दो रूप है एक अच्छा दूसरा क्रूल,
वह एक ऐसा पुरुष है जो दिल से नहीं, जख्मों से सोचता है; जिसकी आंखों में प्यार नहीं, अतीत की राख जलती है; और जो अपनी ही परछाई से डरता है क्योंकि उसका अंधेरा खुद उसकी रूह को खा चुका है।
ऐशा इस रिश्ते को स्वीकार करती है—but not out of love, बल्कि एक माँ के आंसुओं की लाचार पुकार के आगे झुककर। लेकिन क्या यह समझौता कभी एक रिश्ता बन पाएगा? क्या एक मासूम लड़की एक ऐसे मानसिक रूप से घायल इंसान को ठीक कर सकती है, जो लोगों की भावनाओं से नहीं, उनके खून से खेलता है? क्या प्यार वहाँ पनप सकता है जहाँ हर दीवार डर और हर खामोशी एक चीख बन चुकी है?
यह एक ऐसी कहानी है जहाँ रिश्ते दस्तखत से शुरू होते हैं, और तड़प की आग में तपकर असली इम्तिहान में बदलते हैं। जहाँ एक लड़की अपनी मासूमियत से एक रूह की राख को छुने की कोशिश करती है, और एक आदमी अपने अंदर के दानव से लड़ते हुए इंसान बनने की चाह में तड़पता है।
यह कहानी है एक समझौते की, जो मोहब्बत की सबसे मुश्किल इब्तिदा बनती है। एक ऐसे रिश्ते की, जहाँ हर दिन एक जंग है... और हर जंग के बाद एक उम्मीद।
Rajni Devi
चाहत -ए- तपिश - Chapter 6 • 3 months ago
Rajni Devi
चाहत -ए- तपिश - Chapter 5 • 3 months ago
Rajni Devi
हमें कौन सा इससे मुजरा करवाना है।” • 3 months ago
Kishori Soniya
6 months ago
Such a great story, I’m totally invested. 💖
0 likes • A kiss before the kill - Chapter 75
Kishori Soniya
6 months ago
Such a great story, I’m totally invested. 💖
0 likes • A kiss before the kill - Chapter 63No fan art available for this story yet.
very very very nice story writer
0 likes • A kiss before the kill - Chapter 105