Anime Romance Anime
खाई ए डीप एनिमिटी-1
12K
Views
0
Likes
8
Bookmarks
68
Ratings
प्रेस कांफ्रेंस के बाद हॉल से देश के प्रतिष्ठित धनी व्यक्ति आर डी जयवर्धन और उनका बड़ा बेटा बॉडीगार्ड से घिरे हुए बाहर निकल रहे थे फिर भी मीडिया के सवाल खतम नहीं हो रहे थे। वो उन दोनों के पीछे अपने माइक और कैमरा लिए आ रहे थे। एक तरफ उनके फोटो खाचाखच खींची ज...
प्रेस कांफ्रेंस के बाद हॉल से देश के प्रतिष्ठित धनी व्यक्ति आर डी जयवर्धन और उनका बड़ा बेटा बॉडीगार्ड से घिरे हुए बाहर निकल रहे थे फिर भी मीडिया के सवाल खतम नहीं हो रहे थे। वो उन दोनों के पीछे अपने माइक और कैमरा लिए आ रहे थे। एक तरफ उनके फोटो खाचाखच खींची जा रही थी तो दूसरी तरफ से मीडिया के सवाल जारी थे।
“सर….सर….मिस्टर श्वेत आपके बड़े बेटे आपसे अलग रहे हैं इसकी कोई खास वजह?” रिपोर्टर ने सवाल किया।
"सर प्लीज एक लास्ट सवाल! अब आपका एम्पायर दो हिस्सों में बंट जाएगा या मिस्टर श्वेत के लिए कुछ अलग सोचा है?" एक संवाददाता ने पूछा।
"मैने सुना है मिस्टर श्वेत ने किसी फॉरेनर के साथ रिलेशनशिप में है।" दूसरे ने पूछा।
"सर अर्थ सर हाल ही में एक डील साइन की है जिसमें श्वेत शामिल नहीं थे। इसका मतलब यह है कि वो अलग होने की कोशिश में है।" तीसरे ने मिसाइल की तरह सवाल छोड़ा।
"अग्रता जी की हिस्सेदारी रहेगी क्या?" चौथे की जुबान से निकला।
मीडिया के सवालों के बौछार उन पर लगातर जारी थी लेकिन आरडी जयवर्धन ने किसी भी सवाल का जवाब देना उचित नहीं समझा और इग्नोर कर आगे बढ़ गए। आरडी जयवर्धन अपनी गाड़ी में बैठ गए जबकि श्वेत अपनी गाड़ी में बैठ गया। बॉडीगार्ड्स ने अपनी पोजिशन संभाल ली थी और अन दोनों की गाड़ियों को प्रोटेक्ट करते हुऎ बहार निकालने का प्रयास कर रहे थे।
आर डी जयवर्धन की गाड़ी आगे निकल गई फिर उसके पीछे बॉडीगार्ड्स की एक गाड़ी उसके बाद श्वेत की गाड़ी।
श्वेत जयवर्धन की गाड़ी धीरे-धीरे निकल ही रही थी कि एक बॉडीगार्ड् ने श्वेत की गाड़ी का गेट खोलकर कुछ कहा और जैसे एक गाड़ी का गेट बंद करने लगा वैसे ही एक लड़की चेहरा ढके हुए उसकी गाड़ी में आ बैठी। अब श्वेत की गाड़ी को रोकना मीडिया के चक्कर में फसना था। तिल का ताड़ बनाना कोई इनसे सीखे इसलिए गाड़ी अपने गंतव्य की ओर बढ़ गई।
श्वेत फॉरेन से पढ़ाई करके आया था। वह बचपन से बाहर ही था। मीडिया ने जानने की कोशिश की थी लेकिन श्वेत की कोई इन्फॉर्मेशन नहीं मिली। जेडी ग्रुप का दूसरा वारिस आने वाले समय में क्या इसे ऊंचाई पर ले जाएगा और उसकी पॉलिसी,एथिक्स को किस तरह लागू करेगा? एम्पलाइज के साथ रिलेशनशिप, डील्स में श्वेत की क्या भूमिका रहेगी बस मीडिया यही जानने के लिए उतावली थी।
मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत का छोटा सा परिचय देकर शार्ट में बता दिया था कि रियल एस्टेट इंडस्ट्रीज में श्वेत आ चुका है किंतु श्वेत का नेचर उन्हे डरा रहा था। मिस्टर जयवर्धन एक छोटी कमी के कारण अपने ऊपर उंगली नहीं उठने देना चाहते थे।
मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत को यहां बुला तो लिया था लेकिन वो दादाजी की तबीयत के ठीक होते ही वो चला जाएगा?
*****
खाई दरार का ही दूसरा रूप है। खाई गहरी होती है जिसे पाट पाना मुश्किल होता है। चाहे धरातलीय हो या मानवीय….. खाई…..सबको दो हिस्सों में बांट देती है। श्वेत और रक्तिमा के परिवार के बीच बनी पुरानी खाई भर पाएगी या दोनों को दुश्मनी की खाई लील जाएगी।
श्वेत की गाड़ी सड़कों पर दौड़ रही थी। श्वेत के पास कोई लड़की बैठी है उसे कोई मतलब नहीं था। वह मौत सी ठंडी नजर लिए भारत की सड़कों और भीड़ को पहली बार देख रहा था। श्वेत को पता था कि उसके पास कोई आकर बैठ गया है लेकिन जब तक उसे कोई नुकसान न पहुंचाए तब तक उस पर ध्यान नहीं देता था उसके लिए सब नगण्य... शून्य.....था बस वहां कोई था तो उसके लिए अपना वजूद....
कुछ देर बाद उसकी गाड़ी एक बहुत बड़े घर के आगे रुकी। जिस पर जयवर्धन शांति कुंज लिखा था। श्वेत गाड़ी से बाहर निकला और कुछ पल उसके आगे खड़ा रहा और फिर व्यंग्य से मुस्कुराकर उस पर हाथ फेरा और अंदर की जाने लगा तो ड्राइवर ने गाड़ी में बैठने का आग्रह किया लेकिन वो इग्नोर कर आगे बढा और हर एक चीज को गहराई से देखते हुए अंदर की जा रहा था।
घर के बाहर की साइड बना बड़ा सा लॉन एरिया जिसमें बड़े- बड़े पेड़ लगे थे और अलग-अलग वैरायटी के फूल, चैक्स में घास की कटिंग की गई थी। लॉन एरिया में एक साइड टेबल चेेयर लगी थी तो दूसरी साइड झूला लगा हुआ था। लॉन एरिया के चारों कोनों पर पत्थरों पर डिजाइन किए गए वाटर फांउंटेन लगे हुए थे। उनके अंदर से आती रोशनी पानी में चमक पैदा कर रही थी।
श्वेत अभी देख ही रहा था कि मिस्टर जयवर्धन की आवाज सुनाई दी।
" अरे तुम अभी तक यहीं पहुंचे हो। ड्राइवर भी ना कोई काम ढंग से नहीं कर सकते।" मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत के कंधे पर हाथ रखा तो उसकी भंवे सिकुड़ गई। मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत के चेहरे के हाव-भाव देखकर तुरंत अपना हाथ हटा लिया और उसके साथ चलने लगे। कुछ देर बाद दोनों बात करते हुए में गेट तक पहुंचे दोनों से मतलब मिस्टर जयवर्धन ही बात कर रहे थे जब की श्वेत चुपचाप सुनता हुआ चल रहा था।
मैन गेट पर एक औरत लगभग पैंतालीस साल होगी जो मिस्टर जयवर्धन से दिखने में छोटी थी। अरुणा हाथ में कांस्य की थाल लिए खड़ी जिसमें पूजा का सामान रखा हुआ था,सामने का दृश्य देखकर श्वेत के जबड़े कस गए।
"चलो श्वेत तुम्हारी मां...." श्वेत की लाल आंखे देखकर मिस्टर जयवर्धन की बात गले में अटक गई।
श्वेत ने गुस्से में उस थाल के नीचे की साइड से हाथ मारा तो वह उछल कर दूर जा गिरी और मैन गेट के एरिया में सामान बिखर गया। श्वेत गुस्से में आगे बढा तो अग्रता काउच पर बैठी मैग्जीन पढ रही थी।
"वावो दैट्स ग्रेट एंट्री बिग ब्रो" अग्रता ने मैग्जीन टेबल पर एक साइड छोड़कर ताली बजाते हुए कहा।
"मॉम खुशी में चार चांद लगा दिए ना बिग ब्रो ने।" अग्रता चिढ़कर बोली।
"अग्रता तुम चुप रहोगी।" मिस्टर जयवर्धन नाराजगी से बोले।
"हां आपका जोर मुझ पर ही चलेगा ना आपने उन्हे तो कुछ नहीं कहा। मॉम के साथ जो किया है। सुबह से उन्हे हर्टली विश करने के लिए सब प्रीपरेशन में लगी है लेकिन नहीं आप उनकी बजाय मुझे ही चुप करवा रहे हैं।" अग्रता गुस्से में बोली जबकि श्वेत इधर-उधर देख रहा था।
मिसेज जयवर्धन ने अग्रता को आंखो से ही शांत रहने को कहा। मिस्टर जयवर्धन श्वेत के पास आए।
"इधर से लिफ्ट तुम जाकर डैड से मिलो।" मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत को लिफ्ट की ओर इशारा करके बताया।
श्वेत चुपचाप लिफ्ट की ओर बढ गया। श्वेत लिफ्ट में खड़ा हुआ तो उसी का हम उम्र लड़का आया और उसके बराबर खड़ा हो गया। श्वेत ने सवालिया नजरों से देखा तो उसने हल्का सा हंसकर "सर आई एम विशेष गुप्ता! आपका पीए। मिस्टर जयवर्धन सर ने एपांइट किया है।"
श्वेत ने टेढ़ा मुस्कुराकर गर्दन हिला दी।
विशेष आंखे बंद कर के मन में "चलो एक भगवान ने बहुत अच्छा किया ये बाकी तरह बोलते नहीं है। (यह सोचकर विशेष मन में चौंककर) कहीं गूंगे तो नहीं। ये भी अच्छा है।"
"दादा जी का रूम" कड़क आवाज सुनकर विशेष का सपना चकनाचूर हुआ था।
विशेष ने दो उंगली उठाकर इशारा किया तो श्वेत ने लिफ्ट के कॉल बटन की ओर इशारा किया। विशेष ने सर पीट लिया।
लिफ्ट फोर्थ फ्लोर पर पहुंच चुकी थी। विशेष ने फटाफट बटन दबाकर सेकेंड फ्लोर सेट किया और चुपचाप खड़ा हो गया।
दोनों सेकेंड फ्लोर पर आए और विशेष आगे चलकर दादाजी के रूम की ओर बढ गया। श्वेत रूम में आया तो दादाजी कुछ मशीनों के सहारे लेटे थे। उनके रूम में एक नर्स थी जो इस वक्त युरिन बैग खाली कर रही थी।
विशेष ने डोर नोक कर नर्स से अंदर आने के लिए कहा तो उसने गर्दन हिलाई और वॉशरूम की तरफ चली गई।
श्वेत शांत सा उनके पास बैठ गया और उन्हे देखने लगा। वो दवा के नशे में सो रहे थे। करीब दस मिनट बैठने के बाद श्वेत
बाहर निकल गया।
"सर नीचे डिनर...." विशेष आगे कुछ बोलता श्वेत ने मुड़कर उसे देखा तो चुप हो गया।
"तुम्हे लगता है कि मुझे यहां डिनर करना चाहिए?" श्वेत ने शांत सी आवाज में कहा।
"बार किधर है?" श्वेत
"व्हाट " विशेष
"कल ओटोलरींगोलॉजिस्ट, या ईएनटी के पास हो आना जितना खर्च हो मुझसे ले लेना।" श्वेत यहां आने के बाद पहली बार इतना बोला था।
विशेष झेंप कर "सर इसी फ्लोर पर है।"
विशेष ने दादाजी के कमरे के अपोजिट साइड में लिफ्ट का क्रास कर बार एरिया में आ गया। बार एरिया बड़ा था शायद यहां पार्टियां होती हो।
विशेष थोड़ा दूर खड़ा हो गया। श्वेत आगे बढ़कर टेबल के पास रखी चेयर पर बैठ गया और वाइन रैक को घूरने लगा।
क्रमशः*****
“सर….सर….मिस्टर श्वेत आपके बड़े बेटे आपसे अलग रहे हैं इसकी कोई खास वजह?” रिपोर्टर ने सवाल किया।
"सर प्लीज एक लास्ट सवाल! अब आपका एम्पायर दो हिस्सों में बंट जाएगा या मिस्टर श्वेत के लिए कुछ अलग सोचा है?" एक संवाददाता ने पूछा।
"मैने सुना है मिस्टर श्वेत ने किसी फॉरेनर के साथ रिलेशनशिप में है।" दूसरे ने पूछा।
"सर अर्थ सर हाल ही में एक डील साइन की है जिसमें श्वेत शामिल नहीं थे। इसका मतलब यह है कि वो अलग होने की कोशिश में है।" तीसरे ने मिसाइल की तरह सवाल छोड़ा।
"अग्रता जी की हिस्सेदारी रहेगी क्या?" चौथे की जुबान से निकला।
मीडिया के सवालों के बौछार उन पर लगातर जारी थी लेकिन आरडी जयवर्धन ने किसी भी सवाल का जवाब देना उचित नहीं समझा और इग्नोर कर आगे बढ़ गए। आरडी जयवर्धन अपनी गाड़ी में बैठ गए जबकि श्वेत अपनी गाड़ी में बैठ गया। बॉडीगार्ड्स ने अपनी पोजिशन संभाल ली थी और अन दोनों की गाड़ियों को प्रोटेक्ट करते हुऎ बहार निकालने का प्रयास कर रहे थे।
आर डी जयवर्धन की गाड़ी आगे निकल गई फिर उसके पीछे बॉडीगार्ड्स की एक गाड़ी उसके बाद श्वेत की गाड़ी।
श्वेत जयवर्धन की गाड़ी धीरे-धीरे निकल ही रही थी कि एक बॉडीगार्ड् ने श्वेत की गाड़ी का गेट खोलकर कुछ कहा और जैसे एक गाड़ी का गेट बंद करने लगा वैसे ही एक लड़की चेहरा ढके हुए उसकी गाड़ी में आ बैठी। अब श्वेत की गाड़ी को रोकना मीडिया के चक्कर में फसना था। तिल का ताड़ बनाना कोई इनसे सीखे इसलिए गाड़ी अपने गंतव्य की ओर बढ़ गई।
श्वेत फॉरेन से पढ़ाई करके आया था। वह बचपन से बाहर ही था। मीडिया ने जानने की कोशिश की थी लेकिन श्वेत की कोई इन्फॉर्मेशन नहीं मिली। जेडी ग्रुप का दूसरा वारिस आने वाले समय में क्या इसे ऊंचाई पर ले जाएगा और उसकी पॉलिसी,एथिक्स को किस तरह लागू करेगा? एम्पलाइज के साथ रिलेशनशिप, डील्स में श्वेत की क्या भूमिका रहेगी बस मीडिया यही जानने के लिए उतावली थी।
मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत का छोटा सा परिचय देकर शार्ट में बता दिया था कि रियल एस्टेट इंडस्ट्रीज में श्वेत आ चुका है किंतु श्वेत का नेचर उन्हे डरा रहा था। मिस्टर जयवर्धन एक छोटी कमी के कारण अपने ऊपर उंगली नहीं उठने देना चाहते थे।
मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत को यहां बुला तो लिया था लेकिन वो दादाजी की तबीयत के ठीक होते ही वो चला जाएगा?
*****
खाई दरार का ही दूसरा रूप है। खाई गहरी होती है जिसे पाट पाना मुश्किल होता है। चाहे धरातलीय हो या मानवीय….. खाई…..सबको दो हिस्सों में बांट देती है। श्वेत और रक्तिमा के परिवार के बीच बनी पुरानी खाई भर पाएगी या दोनों को दुश्मनी की खाई लील जाएगी।
श्वेत की गाड़ी सड़कों पर दौड़ रही थी। श्वेत के पास कोई लड़की बैठी है उसे कोई मतलब नहीं था। वह मौत सी ठंडी नजर लिए भारत की सड़कों और भीड़ को पहली बार देख रहा था। श्वेत को पता था कि उसके पास कोई आकर बैठ गया है लेकिन जब तक उसे कोई नुकसान न पहुंचाए तब तक उस पर ध्यान नहीं देता था उसके लिए सब नगण्य... शून्य.....था बस वहां कोई था तो उसके लिए अपना वजूद....
कुछ देर बाद उसकी गाड़ी एक बहुत बड़े घर के आगे रुकी। जिस पर जयवर्धन शांति कुंज लिखा था। श्वेत गाड़ी से बाहर निकला और कुछ पल उसके आगे खड़ा रहा और फिर व्यंग्य से मुस्कुराकर उस पर हाथ फेरा और अंदर की जाने लगा तो ड्राइवर ने गाड़ी में बैठने का आग्रह किया लेकिन वो इग्नोर कर आगे बढा और हर एक चीज को गहराई से देखते हुए अंदर की जा रहा था।
घर के बाहर की साइड बना बड़ा सा लॉन एरिया जिसमें बड़े- बड़े पेड़ लगे थे और अलग-अलग वैरायटी के फूल, चैक्स में घास की कटिंग की गई थी। लॉन एरिया में एक साइड टेबल चेेयर लगी थी तो दूसरी साइड झूला लगा हुआ था। लॉन एरिया के चारों कोनों पर पत्थरों पर डिजाइन किए गए वाटर फांउंटेन लगे हुए थे। उनके अंदर से आती रोशनी पानी में चमक पैदा कर रही थी।
श्वेत अभी देख ही रहा था कि मिस्टर जयवर्धन की आवाज सुनाई दी।
" अरे तुम अभी तक यहीं पहुंचे हो। ड्राइवर भी ना कोई काम ढंग से नहीं कर सकते।" मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत के कंधे पर हाथ रखा तो उसकी भंवे सिकुड़ गई। मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत के चेहरे के हाव-भाव देखकर तुरंत अपना हाथ हटा लिया और उसके साथ चलने लगे। कुछ देर बाद दोनों बात करते हुए में गेट तक पहुंचे दोनों से मतलब मिस्टर जयवर्धन ही बात कर रहे थे जब की श्वेत चुपचाप सुनता हुआ चल रहा था।
मैन गेट पर एक औरत लगभग पैंतालीस साल होगी जो मिस्टर जयवर्धन से दिखने में छोटी थी। अरुणा हाथ में कांस्य की थाल लिए खड़ी जिसमें पूजा का सामान रखा हुआ था,सामने का दृश्य देखकर श्वेत के जबड़े कस गए।
"चलो श्वेत तुम्हारी मां...." श्वेत की लाल आंखे देखकर मिस्टर जयवर्धन की बात गले में अटक गई।
श्वेत ने गुस्से में उस थाल के नीचे की साइड से हाथ मारा तो वह उछल कर दूर जा गिरी और मैन गेट के एरिया में सामान बिखर गया। श्वेत गुस्से में आगे बढा तो अग्रता काउच पर बैठी मैग्जीन पढ रही थी।
"वावो दैट्स ग्रेट एंट्री बिग ब्रो" अग्रता ने मैग्जीन टेबल पर एक साइड छोड़कर ताली बजाते हुए कहा।
"मॉम खुशी में चार चांद लगा दिए ना बिग ब्रो ने।" अग्रता चिढ़कर बोली।
"अग्रता तुम चुप रहोगी।" मिस्टर जयवर्धन नाराजगी से बोले।
"हां आपका जोर मुझ पर ही चलेगा ना आपने उन्हे तो कुछ नहीं कहा। मॉम के साथ जो किया है। सुबह से उन्हे हर्टली विश करने के लिए सब प्रीपरेशन में लगी है लेकिन नहीं आप उनकी बजाय मुझे ही चुप करवा रहे हैं।" अग्रता गुस्से में बोली जबकि श्वेत इधर-उधर देख रहा था।
मिसेज जयवर्धन ने अग्रता को आंखो से ही शांत रहने को कहा। मिस्टर जयवर्धन श्वेत के पास आए।
"इधर से लिफ्ट तुम जाकर डैड से मिलो।" मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत को लिफ्ट की ओर इशारा करके बताया।
श्वेत चुपचाप लिफ्ट की ओर बढ गया। श्वेत लिफ्ट में खड़ा हुआ तो उसी का हम उम्र लड़का आया और उसके बराबर खड़ा हो गया। श्वेत ने सवालिया नजरों से देखा तो उसने हल्का सा हंसकर "सर आई एम विशेष गुप्ता! आपका पीए। मिस्टर जयवर्धन सर ने एपांइट किया है।"
श्वेत ने टेढ़ा मुस्कुराकर गर्दन हिला दी।
विशेष आंखे बंद कर के मन में "चलो एक भगवान ने बहुत अच्छा किया ये बाकी तरह बोलते नहीं है। (यह सोचकर विशेष मन में चौंककर) कहीं गूंगे तो नहीं। ये भी अच्छा है।"
"दादा जी का रूम" कड़क आवाज सुनकर विशेष का सपना चकनाचूर हुआ था।
विशेष ने दो उंगली उठाकर इशारा किया तो श्वेत ने लिफ्ट के कॉल बटन की ओर इशारा किया। विशेष ने सर पीट लिया।
लिफ्ट फोर्थ फ्लोर पर पहुंच चुकी थी। विशेष ने फटाफट बटन दबाकर सेकेंड फ्लोर सेट किया और चुपचाप खड़ा हो गया।
दोनों सेकेंड फ्लोर पर आए और विशेष आगे चलकर दादाजी के रूम की ओर बढ गया। श्वेत रूम में आया तो दादाजी कुछ मशीनों के सहारे लेटे थे। उनके रूम में एक नर्स थी जो इस वक्त युरिन बैग खाली कर रही थी।
विशेष ने डोर नोक कर नर्स से अंदर आने के लिए कहा तो उसने गर्दन हिलाई और वॉशरूम की तरफ चली गई।
श्वेत शांत सा उनके पास बैठ गया और उन्हे देखने लगा। वो दवा के नशे में सो रहे थे। करीब दस मिनट बैठने के बाद श्वेत
बाहर निकल गया।
"सर नीचे डिनर...." विशेष आगे कुछ बोलता श्वेत ने मुड़कर उसे देखा तो चुप हो गया।
"तुम्हे लगता है कि मुझे यहां डिनर करना चाहिए?" श्वेत ने शांत सी आवाज में कहा।
"बार किधर है?" श्वेत
"व्हाट " विशेष
"कल ओटोलरींगोलॉजिस्ट, या ईएनटी के पास हो आना जितना खर्च हो मुझसे ले लेना।" श्वेत यहां आने के बाद पहली बार इतना बोला था।
विशेष झेंप कर "सर इसी फ्लोर पर है।"
विशेष ने दादाजी के कमरे के अपोजिट साइड में लिफ्ट का क्रास कर बार एरिया में आ गया। बार एरिया बड़ा था शायद यहां पार्टियां होती हो।
विशेष थोड़ा दूर खड़ा हो गया। श्वेत आगे बढ़कर टेबल के पास रखी चेयर पर बैठ गया और वाइन रैक को घूरने लगा।
क्रमशः*****
Chapter
152
Words
163.8K
Updated
2 months ago
Published
Mar 03, 2025
Published Chapters
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 1
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 2
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 3
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 4
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 5
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 7
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 8
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 9
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 10
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 11
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 12
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 14
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 15
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 16
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 17
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 18
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 19
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 20
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 21
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 22
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 23
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 24
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 25
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 26
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 27
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 28
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 29
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 30
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 31
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 32
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 33
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 34
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 35
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 36
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 37
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 38
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 39
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 40
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 41
Free
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 42
Free
प्रेस कांफ्रेंस के बाद हॉल से देश के प्रतिष्ठित धनी व्यक्ति आर डी जयवर्धन और उनका बड़ा बेटा बॉडीगार्ड से घिरे हुए बाहर निकल रहे थे फिर भी मीडिया के सवाल खतम नहीं हो रहे थे। वो उन दोनों के पीछे अपने माइक और कैमरा लिए आ रहे थे। एक तरफ उनके फोटो खाचाखच खींची जा रही थी तो दूसरी तरफ से मीडिया के सवाल जारी थे।
“सर….सर….मिस्टर श्वेत आपके बड़े बेटे आपसे अलग रहे हैं इसकी कोई खास वजह?” रिपोर्टर ने सवाल किया।
"सर प्लीज एक लास्ट सवाल! अब आपका एम्पायर दो हिस्सों में बंट जाएगा या मिस्टर श्वेत के लिए कुछ अलग सोचा है?" एक संवाददाता ने पूछा।
"मैने सुना है मिस्टर श्वेत ने किसी फॉरेनर के साथ रिलेशनशिप में है।" दूसरे ने पूछा।
"सर अर्थ सर हाल ही में एक डील साइन की है जिसमें श्वेत शामिल नहीं थे। इसका मतलब यह है कि वो अलग होने की कोशिश में है।" तीसरे ने मिसाइल की तरह सवाल छोड़ा।
"अग्रता जी की हिस्सेदारी रहेगी क्या?" चौथे की जुबान से निकला।
मीडिया के सवालों के बौछार उन पर लगातर जारी थी लेकिन आरडी जयवर्धन ने किसी भी सवाल का जवाब देना उचित नहीं समझा और इग्नोर कर आगे बढ़ गए। आरडी जयवर्धन अपनी गाड़ी में बैठ गए जबकि श्वेत अपनी गाड़ी में बैठ गया। बॉडीगार्ड्स ने अपनी पोजिशन संभाल ली थी और अन दोनों की गाड़ियों को प्रोटेक्ट करते हुऎ बहार निकालने का प्रयास कर रहे थे।
आर डी जयवर्धन की गाड़ी आगे निकल गई फिर उसके पीछे बॉडीगार्ड्स की एक गाड़ी उसके बाद श्वेत की गाड़ी।
श्वेत जयवर्धन की गाड़ी धीरे-धीरे निकल ही रही थी कि एक बॉडीगार्ड् ने श्वेत की गाड़ी का गेट खोलकर कुछ कहा और जैसे एक गाड़ी का गेट बंद करने लगा वैसे ही एक लड़की चेहरा ढके हुए उसकी गाड़ी में आ बैठी। अब श्वेत की गाड़ी को रोकना मीडिया के चक्कर में फसना था। तिल का ताड़ बनाना कोई इनसे सीखे इसलिए गाड़ी अपने गंतव्य की ओर बढ़ गई।
श्वेत फॉरेन से पढ़ाई करके आया था। वह बचपन से बाहर ही था। मीडिया ने जानने की कोशिश की थी लेकिन श्वेत की कोई इन्फॉर्मेशन नहीं मिली। जेडी ग्रुप का दूसरा वारिस आने वाले समय में क्या इसे ऊंचाई पर ले जाएगा और उसकी पॉलिसी,एथिक्स को किस तरह लागू करेगा? एम्पलाइज के साथ रिलेशनशिप, डील्स में श्वेत की क्या भूमिका रहेगी बस मीडिया यही जानने के लिए उतावली थी।
मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत का छोटा सा परिचय देकर शार्ट में बता दिया था कि रियल एस्टेट इंडस्ट्रीज में श्वेत आ चुका है किंतु श्वेत का नेचर उन्हे डरा रहा था। मिस्टर जयवर्धन एक छोटी कमी के कारण अपने ऊपर उंगली नहीं उठने देना चाहते थे।
मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत को यहां बुला तो लिया था लेकिन वो दादाजी की तबीयत के ठीक होते ही वो चला जाएगा?
*****
खाई दरार का ही दूसरा रूप है। खाई गहरी होती है जिसे पाट पाना मुश्किल होता है। चाहे धरातलीय हो या मानवीय….. खाई…..सबको दो हिस्सों में बांट देती है। श्वेत और रक्तिमा के परिवार के बीच बनी पुरानी खाई भर पाएगी या दोनों को दुश्मनी की खाई लील जाएगी।
श्वेत की गाड़ी सड़कों पर दौड़ रही थी। श्वेत के पास कोई लड़की बैठी है उसे कोई मतलब नहीं था। वह मौत सी ठंडी नजर लिए भारत की सड़कों और भीड़ को पहली बार देख रहा था। श्वेत को पता था कि उसके पास कोई आकर बैठ गया है लेकिन जब तक उसे कोई नुकसान न पहुंचाए तब तक उस पर ध्यान नहीं देता था उसके लिए सब नगण्य... शून्य.....था बस वहां कोई था तो उसके लिए अपना वजूद....
कुछ देर बाद उसकी गाड़ी एक बहुत बड़े घर के आगे रुकी। जिस पर जयवर्धन शांति कुंज लिखा था। श्वेत गाड़ी से बाहर निकला और कुछ पल उसके आगे खड़ा रहा और फिर व्यंग्य से मुस्कुराकर उस पर हाथ फेरा और अंदर की जाने लगा तो ड्राइवर ने गाड़ी में बैठने का आग्रह किया लेकिन वो इग्नोर कर आगे बढा और हर एक चीज को गहराई से देखते हुए अंदर की जा रहा था।
घर के बाहर की साइड बना बड़ा सा लॉन एरिया जिसमें बड़े- बड़े पेड़ लगे थे और अलग-अलग वैरायटी के फूल, चैक्स में घास की कटिंग की गई थी। लॉन एरिया में एक साइड टेबल चेेयर लगी थी तो दूसरी साइड झूला लगा हुआ था। लॉन एरिया के चारों कोनों पर पत्थरों पर डिजाइन किए गए वाटर फांउंटेन लगे हुए थे। उनके अंदर से आती रोशनी पानी में चमक पैदा कर रही थी।
श्वेत अभी देख ही रहा था कि मिस्टर जयवर्धन की आवाज सुनाई दी।
" अरे तुम अभी तक यहीं पहुंचे हो। ड्राइवर भी ना कोई काम ढंग से नहीं कर सकते।" मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत के कंधे पर हाथ रखा तो उसकी भंवे सिकुड़ गई। मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत के चेहरे के हाव-भाव देखकर तुरंत अपना हाथ हटा लिया और उसके साथ चलने लगे। कुछ देर बाद दोनों बात करते हुए में गेट तक पहुंचे दोनों से मतलब मिस्टर जयवर्धन ही बात कर रहे थे जब की श्वेत चुपचाप सुनता हुआ चल रहा था।
मैन गेट पर एक औरत लगभग पैंतालीस साल होगी जो मिस्टर जयवर्धन से दिखने में छोटी थी। अरुणा हाथ में कांस्य की थाल लिए खड़ी जिसमें पूजा का सामान रखा हुआ था,सामने का दृश्य देखकर श्वेत के जबड़े कस गए।
"चलो श्वेत तुम्हारी मां...." श्वेत की लाल आंखे देखकर मिस्टर जयवर्धन की बात गले में अटक गई।
श्वेत ने गुस्से में उस थाल के नीचे की साइड से हाथ मारा तो वह उछल कर दूर जा गिरी और मैन गेट के एरिया में सामान बिखर गया। श्वेत गुस्से में आगे बढा तो अग्रता काउच पर बैठी मैग्जीन पढ रही थी।
"वावो दैट्स ग्रेट एंट्री बिग ब्रो" अग्रता ने मैग्जीन टेबल पर एक साइड छोड़कर ताली बजाते हुए कहा।
"मॉम खुशी में चार चांद लगा दिए ना बिग ब्रो ने।" अग्रता चिढ़कर बोली।
"अग्रता तुम चुप रहोगी।" मिस्टर जयवर्धन नाराजगी से बोले।
"हां आपका जोर मुझ पर ही चलेगा ना आपने उन्हे तो कुछ नहीं कहा। मॉम के साथ जो किया है। सुबह से उन्हे हर्टली विश करने के लिए सब प्रीपरेशन में लगी है लेकिन नहीं आप उनकी बजाय मुझे ही चुप करवा रहे हैं।" अग्रता गुस्से में बोली जबकि श्वेत इधर-उधर देख रहा था।
मिसेज जयवर्धन ने अग्रता को आंखो से ही शांत रहने को कहा। मिस्टर जयवर्धन श्वेत के पास आए।
"इधर से लिफ्ट तुम जाकर डैड से मिलो।" मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत को लिफ्ट की ओर इशारा करके बताया।
श्वेत चुपचाप लिफ्ट की ओर बढ गया। श्वेत लिफ्ट में खड़ा हुआ तो उसी का हम उम्र लड़का आया और उसके बराबर खड़ा हो गया। श्वेत ने सवालिया नजरों से देखा तो उसने हल्का सा हंसकर "सर आई एम विशेष गुप्ता! आपका पीए। मिस्टर जयवर्धन सर ने एपांइट किया है।"
श्वेत ने टेढ़ा मुस्कुराकर गर्दन हिला दी।
विशेष आंखे बंद कर के मन में "चलो एक भगवान ने बहुत अच्छा किया ये बाकी तरह बोलते नहीं है। (यह सोचकर विशेष मन में चौंककर) कहीं गूंगे तो नहीं। ये भी अच्छा है।"
"दादा जी का रूम" कड़क आवाज सुनकर विशेष का सपना चकनाचूर हुआ था।
विशेष ने दो उंगली उठाकर इशारा किया तो श्वेत ने लिफ्ट के कॉल बटन की ओर इशारा किया। विशेष ने सर पीट लिया।
लिफ्ट फोर्थ फ्लोर पर पहुंच चुकी थी। विशेष ने फटाफट बटन दबाकर सेकेंड फ्लोर सेट किया और चुपचाप खड़ा हो गया।
दोनों सेकेंड फ्लोर पर आए और विशेष आगे चलकर दादाजी के रूम की ओर बढ गया। श्वेत रूम में आया तो दादाजी कुछ मशीनों के सहारे लेटे थे। उनके रूम में एक नर्स थी जो इस वक्त युरिन बैग खाली कर रही थी।
विशेष ने डोर नोक कर नर्स से अंदर आने के लिए कहा तो उसने गर्दन हिलाई और वॉशरूम की तरफ चली गई।
श्वेत शांत सा उनके पास बैठ गया और उन्हे देखने लगा। वो दवा के नशे में सो रहे थे। करीब दस मिनट बैठने के बाद श्वेत
बाहर निकल गया।
"सर नीचे डिनर...." विशेष आगे कुछ बोलता श्वेत ने मुड़कर उसे देखा तो चुप हो गया।
"तुम्हे लगता है कि मुझे यहां डिनर करना चाहिए?" श्वेत ने शांत सी आवाज में कहा।
"बार किधर है?" श्वेत
"व्हाट " विशेष
"कल ओटोलरींगोलॉजिस्ट, या ईएनटी के पास हो आना जितना खर्च हो मुझसे ले लेना।" श्वेत यहां आने के बाद पहली बार इतना बोला था।
विशेष झेंप कर "सर इसी फ्लोर पर है।"
विशेष ने दादाजी के कमरे के अपोजिट साइड में लिफ्ट का क्रास कर बार एरिया में आ गया। बार एरिया बड़ा था शायद यहां पार्टियां होती हो।
विशेष थोड़ा दूर खड़ा हो गया। श्वेत आगे बढ़कर टेबल के पास रखी चेयर पर बैठ गया और वाइन रैक को घूरने लगा।
क्रमशः*****
“सर….सर….मिस्टर श्वेत आपके बड़े बेटे आपसे अलग रहे हैं इसकी कोई खास वजह?” रिपोर्टर ने सवाल किया।
"सर प्लीज एक लास्ट सवाल! अब आपका एम्पायर दो हिस्सों में बंट जाएगा या मिस्टर श्वेत के लिए कुछ अलग सोचा है?" एक संवाददाता ने पूछा।
"मैने सुना है मिस्टर श्वेत ने किसी फॉरेनर के साथ रिलेशनशिप में है।" दूसरे ने पूछा।
"सर अर्थ सर हाल ही में एक डील साइन की है जिसमें श्वेत शामिल नहीं थे। इसका मतलब यह है कि वो अलग होने की कोशिश में है।" तीसरे ने मिसाइल की तरह सवाल छोड़ा।
"अग्रता जी की हिस्सेदारी रहेगी क्या?" चौथे की जुबान से निकला।
मीडिया के सवालों के बौछार उन पर लगातर जारी थी लेकिन आरडी जयवर्धन ने किसी भी सवाल का जवाब देना उचित नहीं समझा और इग्नोर कर आगे बढ़ गए। आरडी जयवर्धन अपनी गाड़ी में बैठ गए जबकि श्वेत अपनी गाड़ी में बैठ गया। बॉडीगार्ड्स ने अपनी पोजिशन संभाल ली थी और अन दोनों की गाड़ियों को प्रोटेक्ट करते हुऎ बहार निकालने का प्रयास कर रहे थे।
आर डी जयवर्धन की गाड़ी आगे निकल गई फिर उसके पीछे बॉडीगार्ड्स की एक गाड़ी उसके बाद श्वेत की गाड़ी।
श्वेत जयवर्धन की गाड़ी धीरे-धीरे निकल ही रही थी कि एक बॉडीगार्ड् ने श्वेत की गाड़ी का गेट खोलकर कुछ कहा और जैसे एक गाड़ी का गेट बंद करने लगा वैसे ही एक लड़की चेहरा ढके हुए उसकी गाड़ी में आ बैठी। अब श्वेत की गाड़ी को रोकना मीडिया के चक्कर में फसना था। तिल का ताड़ बनाना कोई इनसे सीखे इसलिए गाड़ी अपने गंतव्य की ओर बढ़ गई।
श्वेत फॉरेन से पढ़ाई करके आया था। वह बचपन से बाहर ही था। मीडिया ने जानने की कोशिश की थी लेकिन श्वेत की कोई इन्फॉर्मेशन नहीं मिली। जेडी ग्रुप का दूसरा वारिस आने वाले समय में क्या इसे ऊंचाई पर ले जाएगा और उसकी पॉलिसी,एथिक्स को किस तरह लागू करेगा? एम्पलाइज के साथ रिलेशनशिप, डील्स में श्वेत की क्या भूमिका रहेगी बस मीडिया यही जानने के लिए उतावली थी।
मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत का छोटा सा परिचय देकर शार्ट में बता दिया था कि रियल एस्टेट इंडस्ट्रीज में श्वेत आ चुका है किंतु श्वेत का नेचर उन्हे डरा रहा था। मिस्टर जयवर्धन एक छोटी कमी के कारण अपने ऊपर उंगली नहीं उठने देना चाहते थे।
मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत को यहां बुला तो लिया था लेकिन वो दादाजी की तबीयत के ठीक होते ही वो चला जाएगा?
*****
खाई दरार का ही दूसरा रूप है। खाई गहरी होती है जिसे पाट पाना मुश्किल होता है। चाहे धरातलीय हो या मानवीय….. खाई…..सबको दो हिस्सों में बांट देती है। श्वेत और रक्तिमा के परिवार के बीच बनी पुरानी खाई भर पाएगी या दोनों को दुश्मनी की खाई लील जाएगी।
श्वेत की गाड़ी सड़कों पर दौड़ रही थी। श्वेत के पास कोई लड़की बैठी है उसे कोई मतलब नहीं था। वह मौत सी ठंडी नजर लिए भारत की सड़कों और भीड़ को पहली बार देख रहा था। श्वेत को पता था कि उसके पास कोई आकर बैठ गया है लेकिन जब तक उसे कोई नुकसान न पहुंचाए तब तक उस पर ध्यान नहीं देता था उसके लिए सब नगण्य... शून्य.....था बस वहां कोई था तो उसके लिए अपना वजूद....
कुछ देर बाद उसकी गाड़ी एक बहुत बड़े घर के आगे रुकी। जिस पर जयवर्धन शांति कुंज लिखा था। श्वेत गाड़ी से बाहर निकला और कुछ पल उसके आगे खड़ा रहा और फिर व्यंग्य से मुस्कुराकर उस पर हाथ फेरा और अंदर की जाने लगा तो ड्राइवर ने गाड़ी में बैठने का आग्रह किया लेकिन वो इग्नोर कर आगे बढा और हर एक चीज को गहराई से देखते हुए अंदर की जा रहा था।
घर के बाहर की साइड बना बड़ा सा लॉन एरिया जिसमें बड़े- बड़े पेड़ लगे थे और अलग-अलग वैरायटी के फूल, चैक्स में घास की कटिंग की गई थी। लॉन एरिया में एक साइड टेबल चेेयर लगी थी तो दूसरी साइड झूला लगा हुआ था। लॉन एरिया के चारों कोनों पर पत्थरों पर डिजाइन किए गए वाटर फांउंटेन लगे हुए थे। उनके अंदर से आती रोशनी पानी में चमक पैदा कर रही थी।
श्वेत अभी देख ही रहा था कि मिस्टर जयवर्धन की आवाज सुनाई दी।
" अरे तुम अभी तक यहीं पहुंचे हो। ड्राइवर भी ना कोई काम ढंग से नहीं कर सकते।" मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत के कंधे पर हाथ रखा तो उसकी भंवे सिकुड़ गई। मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत के चेहरे के हाव-भाव देखकर तुरंत अपना हाथ हटा लिया और उसके साथ चलने लगे। कुछ देर बाद दोनों बात करते हुए में गेट तक पहुंचे दोनों से मतलब मिस्टर जयवर्धन ही बात कर रहे थे जब की श्वेत चुपचाप सुनता हुआ चल रहा था।
मैन गेट पर एक औरत लगभग पैंतालीस साल होगी जो मिस्टर जयवर्धन से दिखने में छोटी थी। अरुणा हाथ में कांस्य की थाल लिए खड़ी जिसमें पूजा का सामान रखा हुआ था,सामने का दृश्य देखकर श्वेत के जबड़े कस गए।
"चलो श्वेत तुम्हारी मां...." श्वेत की लाल आंखे देखकर मिस्टर जयवर्धन की बात गले में अटक गई।
श्वेत ने गुस्से में उस थाल के नीचे की साइड से हाथ मारा तो वह उछल कर दूर जा गिरी और मैन गेट के एरिया में सामान बिखर गया। श्वेत गुस्से में आगे बढा तो अग्रता काउच पर बैठी मैग्जीन पढ रही थी।
"वावो दैट्स ग्रेट एंट्री बिग ब्रो" अग्रता ने मैग्जीन टेबल पर एक साइड छोड़कर ताली बजाते हुए कहा।
"मॉम खुशी में चार चांद लगा दिए ना बिग ब्रो ने।" अग्रता चिढ़कर बोली।
"अग्रता तुम चुप रहोगी।" मिस्टर जयवर्धन नाराजगी से बोले।
"हां आपका जोर मुझ पर ही चलेगा ना आपने उन्हे तो कुछ नहीं कहा। मॉम के साथ जो किया है। सुबह से उन्हे हर्टली विश करने के लिए सब प्रीपरेशन में लगी है लेकिन नहीं आप उनकी बजाय मुझे ही चुप करवा रहे हैं।" अग्रता गुस्से में बोली जबकि श्वेत इधर-उधर देख रहा था।
मिसेज जयवर्धन ने अग्रता को आंखो से ही शांत रहने को कहा। मिस्टर जयवर्धन श्वेत के पास आए।
"इधर से लिफ्ट तुम जाकर डैड से मिलो।" मिस्टर जयवर्धन ने श्वेत को लिफ्ट की ओर इशारा करके बताया।
श्वेत चुपचाप लिफ्ट की ओर बढ गया। श्वेत लिफ्ट में खड़ा हुआ तो उसी का हम उम्र लड़का आया और उसके बराबर खड़ा हो गया। श्वेत ने सवालिया नजरों से देखा तो उसने हल्का सा हंसकर "सर आई एम विशेष गुप्ता! आपका पीए। मिस्टर जयवर्धन सर ने एपांइट किया है।"
श्वेत ने टेढ़ा मुस्कुराकर गर्दन हिला दी।
विशेष आंखे बंद कर के मन में "चलो एक भगवान ने बहुत अच्छा किया ये बाकी तरह बोलते नहीं है। (यह सोचकर विशेष मन में चौंककर) कहीं गूंगे तो नहीं। ये भी अच्छा है।"
"दादा जी का रूम" कड़क आवाज सुनकर विशेष का सपना चकनाचूर हुआ था।
विशेष ने दो उंगली उठाकर इशारा किया तो श्वेत ने लिफ्ट के कॉल बटन की ओर इशारा किया। विशेष ने सर पीट लिया।
लिफ्ट फोर्थ फ्लोर पर पहुंच चुकी थी। विशेष ने फटाफट बटन दबाकर सेकेंड फ्लोर सेट किया और चुपचाप खड़ा हो गया।
दोनों सेकेंड फ्लोर पर आए और विशेष आगे चलकर दादाजी के रूम की ओर बढ गया। श्वेत रूम में आया तो दादाजी कुछ मशीनों के सहारे लेटे थे। उनके रूम में एक नर्स थी जो इस वक्त युरिन बैग खाली कर रही थी।
विशेष ने डोर नोक कर नर्स से अंदर आने के लिए कहा तो उसने गर्दन हिलाई और वॉशरूम की तरफ चली गई।
श्वेत शांत सा उनके पास बैठ गया और उन्हे देखने लगा। वो दवा के नशे में सो रहे थे। करीब दस मिनट बैठने के बाद श्वेत
बाहर निकल गया।
"सर नीचे डिनर...." विशेष आगे कुछ बोलता श्वेत ने मुड़कर उसे देखा तो चुप हो गया।
"तुम्हे लगता है कि मुझे यहां डिनर करना चाहिए?" श्वेत ने शांत सी आवाज में कहा।
"बार किधर है?" श्वेत
"व्हाट " विशेष
"कल ओटोलरींगोलॉजिस्ट, या ईएनटी के पास हो आना जितना खर्च हो मुझसे ले लेना।" श्वेत यहां आने के बाद पहली बार इतना बोला था।
विशेष झेंप कर "सर इसी फ्लोर पर है।"
विशेष ने दादाजी के कमरे के अपोजिट साइड में लिफ्ट का क्रास कर बार एरिया में आ गया। बार एरिया बड़ा था शायद यहां पार्टियां होती हो।
विशेष थोड़ा दूर खड़ा हो गया। श्वेत आगे बढ़कर टेबल के पास रखी चेयर पर बैठ गया और वाइन रैक को घूरने लगा।
क्रमशः*****
Angel
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 11 • 12 months ago
Angel
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 10 • 12 months ago
Angel
खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 9 • 12 months ago
Kailash Sundaram
1 year ago
Great pacing, didn’t feel rushed at all.
0 likes • खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 65
Madhu Rajiv
1 year ago
The characters are so well written!
0 likes • खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 65No fan art available for this story yet.
Keep writing, this is gold!
0 likes • खाई ए डीप एनिमिटी-1 - Chapter 65