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Love you my demon
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॥ अधोराय नमः रक्तांश रक्तो संपर्कोऽस्तु पुनर्जीवित
मृत्युसंधि लंघ्य मन्त्रबंधन विमोच्य जीवत प्रतिलभताम
ज्योतिः तमासि परिवर्त्य जागृत राक्षस्य रूपम भवतु॥
रक्त के अंश से बना है एक हैवान एक दानव रक्तांश , रक्त की तरह लाल हमेशा अ...
मृत्युसंधि लंघ्य मन्त्रबंधन विमोच्य जीवत प्रतिलभताम
ज्योतिः तमासि परिवर्त्य जागृत राक्षस्य रूपम भवतु॥
रक्त के अंश से बना है एक हैवान एक दानव रक्तांश , रक्त की तरह लाल हमेशा अ...
॥ अधोराय नमः रक्तांश रक्तो संपर्कोऽस्तु पुनर्जीवित
मृत्युसंधि लंघ्य मन्त्रबंधन विमोच्य जीवत प्रतिलभताम
ज्योतिः तमासि परिवर्त्य जागृत राक्षस्य रूपम भवतु॥
रक्त के अंश से बना है एक हैवान एक दानव रक्तांश , रक्त की तरह लाल हमेशा अपना शिकार ढुंढती हर कोई ऊसका शिकार होता उसके प्रकोप से कोई नही बचा ,ना कोई मनुष्य ना कोई बन्य प्राणी मगर सौ बर्षो में एक बार आती है लाल चांद की वो रात जिस रात रक्तांश की शक्तिया चरम पर होती, उस रात मचता है मौत का तांडव खुन से लाल चांद की रात बेहती है रक्त की नदीया, माटी पे परे रहते हैं मनुष्यों के कटे शीष, बनो में ग्रामों में गुजंती है केबल दो आवाज रक्तांश की दहाड़ और लोगो की दर्दनाक चीख़े ,,
मनुष्य को बचाने के लिए रक्तांश के अंत के रूप में हुआ रूद्राणी देवी का जन्म , समय चक्र फिर घुमा आइ नीले चांद की रात जब आती है होती है रक्तांश की शक्ति निस्तेज कइ प्रयास के बाद नीले चांद की रात हुआ रक्तांश का अंत रूद्राणी देवी के हाथो रक्त के अंश रक्तांश के प्राण को कैद किया रक्त के बंधन से बांध कर पुस्तक के पन्नों में मंत्रों में, इस प्रकार हजारों बर्षों के पुर्व हुआ था रक्तांश का अंत ,,
परन्तु क्या होगा जब समय चक्र फिर बदलेगा आयेगा एक नया समय होगी एक नया तबाही,,
जब वो पुस्तक मिलेगी किसी को? क्या होगा जब मायावी मन्त्र को कोई करेगा उच्चारण ? जब रक्त बंधन को रक्त मिलेगा एंव उसी रक्त से पुनर्जीवित होगा वो हैवान, जब मिलेगा उस हैवान को प्राण एक मनुष्य का शरीर क्या होगा तब? क्या फिर होगी वही तबाही जो बर्षों पहले हुई थी?जब राक्षस को मिलेगा एक मनुष्य का शरीर? आखिर क्या होगा तब?
क्या रक्षिक पे हावी होकर उसी का अंत करेगा उसके अंदर रहता वो राक्षस ? क्या एकाशीं बचा पायेगी रक्षिक?
क्या एक राक्षस की हैवानियत या मन्त्रो ताकत या प्यार की ताकत आखिर कौन जीत पायेगा किसका होगा अंत ?
जानने के लिए पढ़े " Love you my demon "
मृत्युसंधि लंघ्य मन्त्रबंधन विमोच्य जीवत प्रतिलभताम
ज्योतिः तमासि परिवर्त्य जागृत राक्षस्य रूपम भवतु॥
रक्त के अंश से बना है एक हैवान एक दानव रक्तांश , रक्त की तरह लाल हमेशा अपना शिकार ढुंढती हर कोई ऊसका शिकार होता उसके प्रकोप से कोई नही बचा ,ना कोई मनुष्य ना कोई बन्य प्राणी मगर सौ बर्षो में एक बार आती है लाल चांद की वो रात जिस रात रक्तांश की शक्तिया चरम पर होती, उस रात मचता है मौत का तांडव खुन से लाल चांद की रात बेहती है रक्त की नदीया, माटी पे परे रहते हैं मनुष्यों के कटे शीष, बनो में ग्रामों में गुजंती है केबल दो आवाज रक्तांश की दहाड़ और लोगो की दर्दनाक चीख़े ,,
मनुष्य को बचाने के लिए रक्तांश के अंत के रूप में हुआ रूद्राणी देवी का जन्म , समय चक्र फिर घुमा आइ नीले चांद की रात जब आती है होती है रक्तांश की शक्ति निस्तेज कइ प्रयास के बाद नीले चांद की रात हुआ रक्तांश का अंत रूद्राणी देवी के हाथो रक्त के अंश रक्तांश के प्राण को कैद किया रक्त के बंधन से बांध कर पुस्तक के पन्नों में मंत्रों में, इस प्रकार हजारों बर्षों के पुर्व हुआ था रक्तांश का अंत ,,
परन्तु क्या होगा जब समय चक्र फिर बदलेगा आयेगा एक नया समय होगी एक नया तबाही,,
जब वो पुस्तक मिलेगी किसी को? क्या होगा जब मायावी मन्त्र को कोई करेगा उच्चारण ? जब रक्त बंधन को रक्त मिलेगा एंव उसी रक्त से पुनर्जीवित होगा वो हैवान, जब मिलेगा उस हैवान को प्राण एक मनुष्य का शरीर क्या होगा तब? क्या फिर होगी वही तबाही जो बर्षों पहले हुई थी?जब राक्षस को मिलेगा एक मनुष्य का शरीर? आखिर क्या होगा तब?
क्या रक्षिक पे हावी होकर उसी का अंत करेगा उसके अंदर रहता वो राक्षस ? क्या एकाशीं बचा पायेगी रक्षिक?
क्या एक राक्षस की हैवानियत या मन्त्रो ताकत या प्यार की ताकत आखिर कौन जीत पायेगा किसका होगा अंत ?
जानने के लिए पढ़े " Love you my demon "
Chapter
9
Words
9.3K
Updated
15 days ago
Published
Feb 26, 2025
Published Chapters
Love you my demon - Chapter 1
Free
Love you my demon - Chapter 2
Free
Love you my demon - Chapter 3
Free
Love you my demon - Chapter 4
Free
Love you my demon - Chapter 5
Free
Love you my demon - Chapter 6
Free
Love you my demon - Chapter 7
Free
Love you my demon - Chapter 8
Free
Love you my demon - Chapter 9
Free
॥ अधोराय नमः रक्तांश रक्तो संपर्कोऽस्तु पुनर्जीवित
मृत्युसंधि लंघ्य मन्त्रबंधन विमोच्य जीवत प्रतिलभताम
ज्योतिः तमासि परिवर्त्य जागृत राक्षस्य रूपम भवतु॥
रक्त के अंश से बना है एक हैवान एक दानव रक्तांश , रक्त की तरह लाल हमेशा अपना शिकार ढुंढती हर कोई ऊसका शिकार होता उसके प्रकोप से कोई नही बचा ,ना कोई मनुष्य ना कोई बन्य प्राणी मगर सौ बर्षो में एक बार आती है लाल चांद की वो रात जिस रात रक्तांश की शक्तिया चरम पर होती, उस रात मचता है मौत का तांडव खुन से लाल चांद की रात बेहती है रक्त की नदीया, माटी पे परे रहते हैं मनुष्यों के कटे शीष, बनो में ग्रामों में गुजंती है केबल दो आवाज रक्तांश की दहाड़ और लोगो की दर्दनाक चीख़े ,,
मनुष्य को बचाने के लिए रक्तांश के अंत के रूप में हुआ रूद्राणी देवी का जन्म , समय चक्र फिर घुमा आइ नीले चांद की रात जब आती है होती है रक्तांश की शक्ति निस्तेज कइ प्रयास के बाद नीले चांद की रात हुआ रक्तांश का अंत रूद्राणी देवी के हाथो रक्त के अंश रक्तांश के प्राण को कैद किया रक्त के बंधन से बांध कर पुस्तक के पन्नों में मंत्रों में, इस प्रकार हजारों बर्षों के पुर्व हुआ था रक्तांश का अंत ,,
परन्तु क्या होगा जब समय चक्र फिर बदलेगा आयेगा एक नया समय होगी एक नया तबाही,,
जब वो पुस्तक मिलेगी किसी को? क्या होगा जब मायावी मन्त्र को कोई करेगा उच्चारण ? जब रक्त बंधन को रक्त मिलेगा एंव उसी रक्त से पुनर्जीवित होगा वो हैवान, जब मिलेगा उस हैवान को प्राण एक मनुष्य का शरीर क्या होगा तब? क्या फिर होगी वही तबाही जो बर्षों पहले हुई थी?जब राक्षस को मिलेगा एक मनुष्य का शरीर? आखिर क्या होगा तब?
क्या रक्षिक पे हावी होकर उसी का अंत करेगा उसके अंदर रहता वो राक्षस ? क्या एकाशीं बचा पायेगी रक्षिक?
क्या एक राक्षस की हैवानियत या मन्त्रो ताकत या प्यार की ताकत आखिर कौन जीत पायेगा किसका होगा अंत ?
जानने के लिए पढ़े " Love you my demon "
मृत्युसंधि लंघ्य मन्त्रबंधन विमोच्य जीवत प्रतिलभताम
ज्योतिः तमासि परिवर्त्य जागृत राक्षस्य रूपम भवतु॥
रक्त के अंश से बना है एक हैवान एक दानव रक्तांश , रक्त की तरह लाल हमेशा अपना शिकार ढुंढती हर कोई ऊसका शिकार होता उसके प्रकोप से कोई नही बचा ,ना कोई मनुष्य ना कोई बन्य प्राणी मगर सौ बर्षो में एक बार आती है लाल चांद की वो रात जिस रात रक्तांश की शक्तिया चरम पर होती, उस रात मचता है मौत का तांडव खुन से लाल चांद की रात बेहती है रक्त की नदीया, माटी पे परे रहते हैं मनुष्यों के कटे शीष, बनो में ग्रामों में गुजंती है केबल दो आवाज रक्तांश की दहाड़ और लोगो की दर्दनाक चीख़े ,,
मनुष्य को बचाने के लिए रक्तांश के अंत के रूप में हुआ रूद्राणी देवी का जन्म , समय चक्र फिर घुमा आइ नीले चांद की रात जब आती है होती है रक्तांश की शक्ति निस्तेज कइ प्रयास के बाद नीले चांद की रात हुआ रक्तांश का अंत रूद्राणी देवी के हाथो रक्त के अंश रक्तांश के प्राण को कैद किया रक्त के बंधन से बांध कर पुस्तक के पन्नों में मंत्रों में, इस प्रकार हजारों बर्षों के पुर्व हुआ था रक्तांश का अंत ,,
परन्तु क्या होगा जब समय चक्र फिर बदलेगा आयेगा एक नया समय होगी एक नया तबाही,,
जब वो पुस्तक मिलेगी किसी को? क्या होगा जब मायावी मन्त्र को कोई करेगा उच्चारण ? जब रक्त बंधन को रक्त मिलेगा एंव उसी रक्त से पुनर्जीवित होगा वो हैवान, जब मिलेगा उस हैवान को प्राण एक मनुष्य का शरीर क्या होगा तब? क्या फिर होगी वही तबाही जो बर्षों पहले हुई थी?जब राक्षस को मिलेगा एक मनुष्य का शरीर? आखिर क्या होगा तब?
क्या रक्षिक पे हावी होकर उसी का अंत करेगा उसके अंदर रहता वो राक्षस ? क्या एकाशीं बचा पायेगी रक्षिक?
क्या एक राक्षस की हैवानियत या मन्त्रो ताकत या प्यार की ताकत आखिर कौन जीत पायेगा किसका होगा अंत ?
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