देवकीनन्दन खत्री का 1899 में प्रकाशित मौलिक हिंदी रहस्य-रोमांच उपन्यास। रनबीरसिंह और कुसुम कुमारी की कथा प्रेम, षड्यंत्र, बंदीगृह, गुप्त रास्तों, राजसत्ता और साहस से होकर गुजरती है। 33-बयान का यह पाठ दो पूर्ण online witnesses से अध्याय-दर-अध्याय सत्यापित है और मूल रचना भारत में public domain में है।
Hindi
Romance
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Chapter 1
पहला बयान -
Chapter 2
दूसरा बयान -
Chapter 3
तीसरा बयान -
Chapter 4
चौथा बयान -
Chapter 5
पांचवां बयान -
Chapter 6
छठा बयान -
Chapter 7
सातवां बयान -
Chapter 8
आठवां बयान -
Chapter 9
नौवां बयान -
Chapter 10
दसवां बयान -
Chapter 11
ग्यारहवां बयान -
Chapter 12
बारहवां बयान -
Chapter 13
तेरहवां बयान -
Chapter 14
चौदहवां बयान -
Chapter 15
पंद्रहवां बयान -
Chapter 16
सोलहवां बयान -
Chapter 17
सत्रहवां बयान -
Chapter 18
अठारहवां बयान -
Chapter 19
उन्नीसवां बयान -
Chapter 20
बीसवां बयान -
Chapter 21
इक्कीसवां बयान -
Chapter 22
बाईसवां बयान -
Chapter 23
तेईसवां बयान -
Chapter 24
चौबीसवां बयान -
Chapter 25
पचीसवां बयान -
Chapter 26
छब्बीसवां बयान -
Chapter 27
सत्ताईसवां बयान -
Chapter 28
अट्ठाईसवां बयान -
Chapter 29
उनतीसवां बयान -
Chapter 30
तीसवां बयान -
Chapter 31
इकतीसवां बयान -
Chapter 32
बत्तीसवां बयान -
Chapter 33
तैंतीसवां बयान