Tere Sang Tere Rang - Chapter 1
ये कहानी है 21 साल की अननु की, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई में अपने कुछ सपने लेकर आई है, अपनी दोस्त आरती के साथ।
अननु अनाथ है। वो एक अनाथ आश्रम में पली-बढ़ी है। स्कूल में अच्छे अंक प्राप्त करने की वजह से उसे स्कॉलरशिप मिली थी, जिसकी मदद से उसे एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल गया। वहीं उसे अपनी जिंदगी की एक अच्छी दोस्त भी मिल गई—आरती।
अननु बिल्कुल निडर लड़की है। आरती और वो दोनों अपनी बदमाशियों की वजह से पूरे कॉलेज में फेमस थीं। कॉलेज में अगर कोई लड़का किसी लड़की को परेशान करता, तो अननु और आरती मिलकर उसकी अच्छे से बैंड बजा देती थीं।
दोनों की दोस्ती भी ऐसी थी, जिसमें लड़ाई कम और एक-दूसरे की टांग खींचना ज्यादा था। लेकिन जरूरत पड़ने पर दोनों एक-दूसरे के लिए किसी भी हद तक खड़ी हो जाती थीं।
आज अननु और आरती का एक कंपनी में इंटरव्यू था। अननु का इंटरव्यू चौहान कंपनी में और आरती का डालमिया कंपनी में था। दोनों ही कंपनियां बहुत फेमस थीं। चौहान कंपनी और डालमिया कंपनी अपनी ज्वेलरी डिजाइनिंग के लिए जानी जाती थीं और दोनों कंपनियों के बीच सालों से कट्टर दुश्मनी थी।
अननु को चौहान कंपनी के डिजाइन पसंद थे, जबकि आरती को डालमिया कंपनी के डिजाइन पसंद थे। इसलिए दोनों ने अपनी-अपनी पसंद की कंपनी में जॉब के लिए अप्लाई किया था।
आरती को अपनी चाची के घर से निकलकर अननु के साथ अपना खुद का घर बसाने की जल्दी थी, वहीं अननु के लिए ये नौकरी सिर्फ नौकरी नहीं थी। उसके लिए ये उसकी मेहनत से बनाए गए उस भविष्य की पहली सीढ़ी थी, जिसे उसने अकेले अपने दम पर देखा था।
अननु: अगर आज इंटरव्यू अच्छे से हो गया, तो आज की पार्टी मेरी तरफ से... वो भी पाव-भाजी की!
आरती: रहने दे, कंजूस। तेरे से मुझे किसी पार्टी की उम्मीद नहीं है। बस गणेश जी से प्रार्थना कर कि हम दोनों की जॉब लग जाए और हम अपना खुद का एक घर रेंट पर ले लें। मुझे अपनी चाची के घर बिल्कुल नहीं रहना। तू समझ रही है ना? हर रोज घर का काम करो और ऊपर से खाने के साथ उनके ताने भी सुनो।
आरती की आवाज में हंसी थी, लेकिन उसकी बातों के पीछे छिपी परेशानी अननु अच्छी तरह समझती थी। वो जानती थी कि आरती अपने घर से निकलकर सिर्फ आजादी नहीं, बल्कि सुकून भी चाहती थी।
अननु: इतना मत सोच, नहीं तो तेरे दिमाग का फ्यूज उड़ जाएगा और तू उड़े हुए फ्यूज से इंटरव्यू कैसे पास करेगी?
आरती: तू चुप कर और जल्दी चल, वरना लेट हो जाएंगे। वैसे भी सुना है दोनों कंपनियों के बॉस एक नंबर के खड़ूस और गुस्सैल हैं और टाइम के काफी पाबंद हैं। कहीं पहले दिन ही हमें टाइम पर लेक्चर देकर बाहर न कर दें।
अननु: तू भी ना... चल जल्दी।
दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराती हैं और अपने सपनों की तरफ कदम बढ़ा देती हैं।
चौहान कंपनी...
अननु कंपनी के बाहर खड़ी होकर उसकी ऊंची बिल्डिंग को देखती है। उसकी आंखों में चमक थी।
अननु: यार, कितनी बड़ी कंपनी है। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि मैं इस कंपनी में इंटरव्यू देने आई हूं।
वो कुछ पल के लिए उस इमारत को देखती रही। शायद उसे अपनी पुरानी जिंदगी याद आ गई थी—वो अनाथ आश्रम, वो छोटे-छोटे सपने और वो दिन जब उसके पास सिर्फ मेहनत थी और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की जिद।
फिर उसने ऊपर देखकर हाथ जोड़ लिए।
अननु: ऐ गणेश जी, सुन लो मेरी पुकार और इस इंटरव्यू में पास करवा दो। मैं आपको पहली सैलरी से मोदक का **** लगाऊंगी।
आरती: हो गई तेरी रिश्वतखोरी वाली प्रार्थना? अब चल। तू अपने सपनों की दुनिया में कदम रख और मैं अपने सपनों की दुनिया में कदम रखती हूं।
अननु: हां, ठीक है। जब तेरा इंटरव्यू हो जाए तो मुझे मैसेज कर देना। दोनों साथ में चलेंगे।
आरती: ठीक है। अब मैं जा रही हूं। और अपना ध्यान रखना। कोई ज्यादा बोले तो सुनना मत... सुनाना देना। जा, मेरा आशीर्वाद हमेशा तेरे साथ है।
अननु: अच्छा बेटा, ये सही है। चल ठीक है, अब तू भी अपना ध्यान रखना। मेरा आशीर्वाद भी हमेशा तेरे साथ है।
दोनों एक-दूसरे की तरफ देखकर कुछ पल चुप रहती हैं और फिर एक साथ ताली मारकर हंस देती हैं।
उनकी हंसी में दोस्ती की वो गर्माहट थी, जो खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि साथ निभाने से पैदा होती है।
फिर दोनों अपने-अपने इंटरव्यू के लिए चली जाती हैं।
चौहान कंपनी...
अननु रिसेप्शन पर पहुंचकर वहां बैठी लड़की से पूछती है।
अननु: हेलो, एक्सक्यूज़ मी। क्या आप बता सकती हैं कि आज का इंटरव्यू कहां हो रहा है?
लड़की: मैम, आप यहां से... (दाईं तरफ इशारा करते हुए) सीधा आठवें फ्लोर पर चली जाइए।
अननु: ओके, थैंक यू।
अननु जल्दी से लिफ्ट में जाती है और आठवें फ्लोर पर पहुंच जाती है।
वहां दो इंटरव्यू हो रहे थे। पहला बॉस की पर्सनल असिस्टेंट का और दूसरा HR के लिए।
अननु का इंटरव्यू HR के लिए था, लेकिन वहां के मैनेजर से एक गलती हो गई और उसने अननु को पर्सनल असिस्टेंट के इंटरव्यू वाले एरिया में बैठा दिया।
अननु को इस गलती का जरा भी अंदाजा नहीं था।
दूसरी तरफ...
डालमिया कंपनी...
जैसे ही आरती अंदर जाती है, वो अपने फोन में आया मेल दिखाते हुए एक एम्प्लॉई से पूछती है।
आरती: एक्सक्यूज़ मी, ये इंटरव्यू कहां हो रहा है?
एम्प्लॉई: मैम, ये पांचवें फ्लोर पर चल रहा है। प्लीज़ आप जल्दी जाइए, नहीं तो मिस हो जाएगा।
आरती: लेकिन इंटरव्यू का टाइम तो दस बजे का दिया हुआ है। और अभी तो नौ बजकर तीस मिनट हुए हैं। इतनी जल्दी कैसे शुरू हो गया?
एम्प्लॉई: मैम, आई डोंट नो कि बॉस के दिमाग में क्या चल रहा है।
आरती: ठीक है, मैं जाकर देखती हूं क्या बात है।
एम्प्लॉई: ठीक है मैम। आप लेफ्ट साइड से लिफ्ट से चली जाइए।
आरती: ओके।
आरती जल्दी से लिफ्ट की तरफ बढ़ जाती है।
चौहान कंपनी...
अननु ने सारे टेस्ट पास कर लिए थे। अब सिर्फ एक आखिरी पार्ट बाकी था, जिसमें उसे अपने बॉस के लिए कॉफी बनानी थी।
उसके साथ दो और लड़कियां भी थीं।
अननु मन ही मन सोचती है।
अननु: यार, ये HR की पोस्ट के लिए कॉफी क्यों बनवा रहे हैं? कहने को तो ये इस सिटी की टॉप ज्वेलरी डिजाइनर कंपनी में आती है, लेकिन यहां इन्हें इंटरव्यू लेना भी नहीं आता। अच्छा है, यहां मैं आ गई। इसी बहाने इस कंपनी का कल्याण हो जाएगा।
वो अपने मन में ही मुस्कुरा देती है।
कुछ देर बाद अननु अंकित चौहान के सामने बैठी थी।
अंकित चौहान दिखने में काफी हैंडसम और अट्रैक्टिव था। ग्रे आईज, मस्कुलर बॉडी और चेहरे पर ऐसा चार्म कि एक बार कोई उसे देख ले, तो कुछ पल के लिए उसकी नजरें वहीं ठहर जाएं।
अननु के साथ जो दो लड़कियां थीं, वो लगातार अंकित को घूर रही थीं।
ये देखकर अंकित ने बिना किसी भाव के कहा—
अंकित: गेट आउट।
दोनों लड़कियां एक पल के लिए सकपका गईं और फिर तुरंत वहां से बाहर चली गईं।
ये देखकर अननु के मन में तो जैसे लड्डू फूटने लगे।
अननु मन ही मन: वाह! अब तो पक्का मेरा सिलेक्शन हो गया। यहां तो अब सिर्फ मैं ही बची हूं।
अंकित ने उसकी तरफ देखा।
अंकित: कल से तुम मेरी पर्सनल असिस्टेंट हो। आगे की प्रोसेस और रूल्स तुम्हें सार्थक समझा देगा।
अंकित ने अपने टेबल पर रखी बेल बजाई।
कुछ ही सेकंड में सार्थक अंदर आया। उसके हाथ में एक फाइल थी।
अंकित: ये फाइल यहां रखो और मिस अननु को उनका काम समझा दो।
फिर अंकित ने अननु की तरफ देखा।
अंकित: और एक बात याद रखना। मुझे लेट आने वाले एम्प्लॉई बिल्कुल पसंद नहीं हैं। इसलिए मुझे तुम यहां नौ बजे हर हाल में चाहिए। अब तुम जा सकती हो।
अननु: जी सर।
अननु सार्थक के साथ अंकित के केबिन से बाहर आती है और सार्थक के केबिन में चली जाती है।
अननु: सर, मुझे एक बात समझ नहीं आई। HR की पोस्ट के लिए कॉफी क्यों बनानी थी हमें?
सार्थक ने उसकी तरफ हैरानी से देखा।
सार्थक: एक मिनट... तुम यहां PA की पोस्ट के लिए आई थी या HR की पोस्ट के लिए?
अननु: क्या सर जी, आप भी! मैंने आपसे पूछा था कि HR की पोस्ट के लिए इंटरव्यू कहां हो रहा है। आपने ही तो मुझे रास्ता बताया था।
सार्थक: क्या? तुम HR के इंटरव्यू के लिए आई थी?
अननु: हां सर। क्योंकि मैं फ्रेशर हूं, तो मुझे PA की पोस्ट कैसे मिल सकती थी?
सार्थक कुछ पल के लिए चुप रह गया।
सार्थक: ये तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई।
अननु: कैसी गड़बड़, सर?
सार्थक: तुमने PA की पोस्ट का इंटरव्यू क्लियर किया है। क्या तुम बॉस की PA बन पाओगी?
अननु: ये आप कैसी बात कर रहे हैं, सर? मुझे सिर्फ अपने लिए अपनी पसंद की कॉफी बनानी आती है। जहां तक मैं जानती हूं, एक PA को अपने बॉस के लिए अच्छी कॉफी बनानी आनी चाहिए। और सच कहूं तो मुझे अच्छी कॉफी बनानी बिल्कुल नहीं आती। इसलिए मैंने PA का इंटरव्यू देने का सोचा ही नहीं था।
सार्थक: कॉफी की प्रॉब्लम है ना? बस! वो मैं तुम्हें अभी बनानी सिखा दूंगा, बॉस की पसंद की। पर प्लीज़, इस पोस्ट के लिए ना मत कहना।
सार्थक की आवाज में अचानक घबराहट आ गई थी।
सार्थक: अगर बॉस को पता चला कि ये मिस्टेक मैंने की है, तो मेरी जॉब पक्की चली जाएगी। प्लीज़ अननु, ऐसा मत करना। मुझे अपनी और अपनी बहन की शादी भी करनी है। यहां से जो सैलरी मिलती है, उससे मेरी और मेरी बहन की शादी अच्छे से हो जाएगी। और इस कंपनी से निकालने के बाद जल्दी कोई जॉब भी नहीं मिलती है।
अननु ने सार्थक को ध्यान से देखा।
उसकी बातों में डर साफ नजर आ रहा था। अननु खुद भी जिंदगी में अकेली पली-बढ़ी थी, इसलिए किसी के परिवार और जिम्मेदारियों का दर्द वो बाकी लोगों से थोड़ा ज्यादा समझती थी।
अननु: अरे सर, प्लीज़ आप इतना पैनिक मत होइए। और मुझे जल्दी से सारा काम समझाइए। साथ में प्रॉमिस करिए कि जब भी मैं बॉस के काम में फंसूंगी, आप मेरी हेल्प करेंगे।
सार्थक ने राहत की सांस ली।
सार्थक: पक्का प्रॉमिस। आज से हम दोनों फ्रेंड हुए, ठीक है?
अननु: अरे बोस!
सार्थक: अब हम दोस्त हैं, तो एक-दूसरे को नाम से बुलाएंगे।
अननु कुछ पल उसे देखती है और फिर मुस्कुराकर अपना हाथ आगे बढ़ा देती है।
अननु: ठीक है, सार्थक। अब मुझे काम समझाओ। और पहले तो कॉफी बनाना सिखाओ।
सार्थक: चलो मैडम, आज से आपकी PA की ट्रेनिंग शुरू।
अननु: और याद रखना, अगर मैंने बॉस की कॉफी खराब कर दी ना, तो सबसे पहले तुम्हारी क्लास लगेगी।
सार्थक: अब ये तो तुम्हारी कॉफी पर निर्भर करता है।
दोनों एक-दूसरे को देखते हैं और हंस पड़ते हैं।
अननु को अभी तक नहीं पता था कि जिस गलती को वो सिर्फ एक छोटी-सी गड़बड़ समझ रही है, वही गलती उसकी जिंदगी को एक ऐसे इंसान से जोड़ने वाली थी, जिसकी दुनिया उसके बिल्कुल उलट थी।