Kalyug ka amar sadhak Ch. 2

Kalyug ka amar sadhak - Chapter 2

Posted by Shivansh Pandey • Oct 04, 2026 06:08 PM

अर्जुन ने दुकान का दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा.

बाहर की पुरानी और धूल भरी दुकान देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि इसके अंदर क्या छिपा हुआ है.

अर्जुन ने चारों तरफ नजर दौडाई.

दुकान में पुरानी मूर्तियां, सिक्के, तलवारें, पेंटिंग और कई ऐसी चीजें रखी थीं जिनकी उम्र शायद सैकडों साल थी.

तभी सामने खडी एक लडकी की नजर अर्जुन पर पडी.

उसने अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा.

उसके साधारण कपडे, पुराने जूते और सामान्य- सा हुलिया देखकर उसके चेहरे पर हल्की हैरानी आई.

फिर उसने पूछा,

क्या आप भी उसी काम के लिए आए हैं?

अर्जुन एक पल के लिए चुप रहा.

उसे समझ आ गया कि लडकी Kiss बारे में पूछ रही है.

उसने हल्का- सा सिर हिलाया.

हां.

लडकी ने बिना कुछ और पूछे दुकान के अंदर की तरफ जाने का इशारा किया.

तो मेरे साथ आइए.

अर्जुन उसके पीछे चल पडा.

दुकान के अंदर एक छोटा- सा कमरा था.

लडकी ने वहां रखी एक पुरानी अलमारी के पास जाकर एक गुप्त रास्ता खोला.

नीचे जाने वाली सीढियां दिखाई दीं.

अर्जुन बिना हैरानी दिखाए नीचे उतरने लगा.

कुछ देर बाद दोनों जमीन के नीचे बने एक बडे कमरे में पहुंच गए.

यह कोई साधारण कमरा नहीं था.

वहां शहर के कई बडे व्यापारी बैठे थे.

कुछ लोग महंगे सूट में थे.

कुछ के साथ सुरक्षा गार्ड खडे थे.

कमरे में मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर एक अलग ही रुतबा दिखाई दे रहा था.

लेकिन जैसे ही अर्जुन अंदर आया.

कई लोगों की नजरें उसी पर टिक गईं.

कुछ लोगों ने उसके कपडों को देखा.

फिर एक- दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराने लगे.

किसी के चेहरे पर साफ लिखा था कि वह अर्जुन को यहां देखकर खुश नहीं था.

एक आदमी ने धीरे से अपने साथी के कान में कहा,

ये भी यहां आने लगा?

दूसरे ने उसके कपडों को देखते हुए कहा,

लगता है गलत जगह आ गया है.

अर्जुन ने सब सुन लिया.

लेकिन उसके चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया.

वह सीधा आगे बढा और एक खाली कुर्सी पर बैठ गया.

उसे इन लोगों के विचारों से कोई फर्क नहीं पडता था.

ब्रह्म लोक में हजारों साल तक सम्राट रहने के बाद.

कुछ लोगों के कपडों और पैसों से प्रभावित होना उसके लिए हास्यास्पद था.

थोडी देर बाद वही लडकी आगे आई.

उसने कमरे में मौजूद लोगों की तरफ देखा और बोली,

आज नीलामी में कुल तीन खास items हैं.

कमरे में बैठे लोग तुरंत शांत हो गए.

लडकी ने पहला सामान सामने रखा.

पहला item।

उसने एक छोटी- सी पुरानी वस्तु सबको दिखाई.

इसकी शुरुआती कीमत बीस लाख रुपये है.

कुछ लोगों ने तुरंत बोली लगानी शुरू कर दी.

कुछ ही देर में कीमत ऊपर जाने लगी.

अर्जुन उस वस्तु को ज्यादा ध्यान से नहीं देख रहा था.

उसकी नजर सिर्फ उन चीजों पर थी जिनके बारे में उसे कुछ खास महसूस हो रहा था.

पहली वस्तु आखिरकार बिक गई.

लडकी ने अगली चीज सामने रखी.

अब दूसरी चीज.

इस बार उसके हाथ में एक पुरानी पेंटिंग थी.

ये लगभग दो सौ साल पुरानी painting है.

कमरे में कुछ लोगों ने पेंटिंग को ध्यान से देखा.

तभी पीछे से एक भारी आवाज आई.

साठ लाख.

कमरे में अचानक खामोशी छा गई.

आवाज सुनते ही कई लोग अपनी जगह सीधे होकर बैठ गए.

अर्जुन ने भी पहली बार उस आवाज वाले व्यक्ति की तरफ देखा.

करीब चालीस साल का एक आदमी.

महंगा सूट.

चेहरे पर घमंड.

और उसके आसपास खडे कई सुरक्षाकर्मी.

वह था—

लखबीर सोढी.

शहर के बडे कारोबारियों में उसका नाम था.

लेकिन उसकी असली पहचान उसके business से कहीं ज्यादा खतरनाक थी.

Underworld में भी उसका नाम लिया जाता था.

उसकी एक बोली के बाद बाकी लोगों ने पीछे हटना शुरू कर दिया.

नीलामी चलाने वाली लडकी ने कीमत दोहराई.

साठ लाख.

कोई दूसरी बोली नहीं आई.

साठ लाख में ये painting लखबीर सोढी की हुई.

पेंटिंग उसके आदमियों ने उठाकर उसके पास रख दी.

अब लडकी ने तीसरी चीज सामने रखी.

इस बार एक खूबसूरत necklace था.

कमरे की रोशनी उसमें पडते ही वह चमक उठा.

लडकी ने कहा,

अब तीसरा item।

कमरे में बैठे लोगों की नजर उस necklace पर टिक गई.

ये है Zeonian Necklace।

कई लोग तुरंत आगे झुक गए.

कहा जाता है कि करीब दो सौ साल पहले ब्रिटिश Queen Zubaira ने इसे एक भारतीय राजा को उपहार में दिया था.

कुछ लोगों के चेहरे पर उत्सुकता आ गई.

लडकी ने कहा,

इसकी शुरुआती कीमत पांच करोड रुपये है.

एक आवाज आई,

छह करोड.

फिर दूसरी आवाज आई,

आठ करोड.

सबकी नजरें उस आदमी की तरफ चली गईं.

वह था Vine Industries का founder जसवंत लाल.

उसने आराम से अपनी बोली लगाई थी.

आठ करोड.

लडकी ने बोली दोहराई.

लेकिन तभी लखबीर सोढी ने अपनी कुर्सी पर बैठे- बैठे कहा,

दस करोड.

जसवंत लाल ने उसकी तरफ देखा.

कुछ सेकंड तक दोनों की नजरें मिलीं.

लेकिन जसवंत ने आगे बोली नहीं लगाई.

लडकी ने हथौडा उठाया.

दस करोड.

तभी पीछे से एक आवाज आई.

अब तलवार की बारी है.

कमरे में बैठे लोग फिर से शांत हो गए.

एक कर्मचारी आगे आया.

उसके हाथ में एक पुरानी तलवार थी.

तलवार को देखकर कई लोगों के चेहरे पर निराशा आ गई.

उस पर जंग लगी हुई थी.

म्यान भी पुरानी थी.

किसी ने धीरे से कहा,

ये क्या है?

लडकी ने तलवार को सामने रखते हुए कहा,

ये कोई सामान्य तलवार नहीं है.

कमरे में कुछ लोग फिर ध्यान देने लगे.

कहा जाता है कि ये तलवार सम्राट विक्रमादित्य की तलवार थी.

बस इतना सुनते ही कमरे का माहौल बदल गया.

कुछ लोगों की आंखें चमक उठीं.

कई लोग तलवार को ध्यान से देखने लगे.

अर्जुन भी पहली बार अपनी कुर्सी से थोडा आगे झुका.

उसकी नजर तलवार पर टिक गई.

उसके चेहरे पर एक ऐसा भाव आया जिसे कोई समझ नहीं पाया.

उसने बहुत धीमी आवाज में कहा,

विक्रमादित्य.

उसके दिमाग में अचानक ब्रह्म लोक की एक पुरानी याद चमकी.

हजारों साल पहले.

एक युद्ध.

एक विशाल महल.

और एक तलवार.

अर्जुन ने आंखें थोडी सिकोड लीं.

क्या यह वही तलवार थी?

या सिर्फ उसी नाम से जुडी कोई पुरानी वस्तु?

नीलामी शुरू हुई.

दस करोड.

एक आदमी ने बोली लगाई.

बारह करोड.

दूसरी आवाज आई.

पंद्रह करोड.

कीमत बढती गई.

सत्रह करोड.

फिर—

उन्नीस करोड.

कमरे में खामोशी छा गई.

यह बोली लखबीर सोढी ने लगाई थी.

उसने कुर्सी पर पीछे टिकते हुए चारों तरफ देखा.

मानो उसे पूरा विश्वास था कि अब कोई उसके सामने बोली नहीं लगाएगा.

नीलामी कराने वाली लडकी ने पूछा,

उन्नीस करोड. कोई और?

कुछ सेकंड तक कोई नहीं बोला.

तभी पीछे से एक शांत आवाज आई.

बीस करोड.

कमरे में बैठे सभी लोग अचानक उस दिशा में देखने लगे.

लेकिन यह सिर्फ बोली सुनकर हैरान होने की बात नहीं थी.

सब इसलिए चौंके थे क्योंकि.

जिस आदमी ने बोली लगाई थी, वह अर्जुन था.

वही अर्जुन.

जिसके कपडे देखकर कुछ देर पहले लोग उसका मजाक उडा रहे थे.

कुछ सेकंड की खामोशी के बाद कमरे में हंसी फैल गई.

एक आदमी पेट पकडकर हंसने लगा.

बीस करोड?

दूसरे ने अर्जुन के कपडों की तरफ इशारा किया.

इसके कपडे तो हजार रुपये के भी नहीं होंगे!

एक और आदमी बोला,

इसे अंदर आने किसने दिया?

कई लोग हंसने लगे.

लखबीर सोढी ने हालांकि हंसी नहीं.

वह बस अर्जुन को घूरता रहा.

फिर शांत लेकिन तीखी आवाज में बोला,

छोरे, तेरे पास पैसे भी हैं या बस time pass करने आया है?

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा.

उसकी आवाज बिल्कुल शांत थी.

मेरे पास बीस करोड हैं.

कमरे में हंसी अचानक थोडी धीमी हुई.

अर्जुन ने आगे कहा,

लेकिन एक करोड अभी नहीं है.

कुछ लोग फिर हंसने लगे.

लडकी थोडी असहज हुई.

उसने विनम्रता से कहा,

सर, माफ कीजिए. लेकिन यहां future payment का option नहीं है.

अर्जुन ने उसकी तरफ देखा.

किसने कहा कि मैं future payment करूंगा?

लडकी चुप हो गई.

अर्जुन ने कहा,

मुझे एक call करना है.

पीछे बैठे लखबीर सोढी ने हल्की हंसी के साथ कहा,

तो लगाओ ना.

अर्जुन ने अपनी जेब टटोली.

फिर दूसरी जेब.

फिर कुछ पल चुप रहा.

उसके चेहरे पर हल्का- सा अजीब भाव आया.

उसने लडकी की तरफ देखा.

मेरे पास phone नहीं है.

कमरे में बैठे लोगों ने एक- दूसरे को देखा.

अर्जुन ने बिल्कुल सामान्य तरीके से पूछा,

क्या तुम्हारा phone मिल सकता है?

इस बार किसी के पास हंसने के लिए शब्द नहीं थे.

लोग एक- दूसरे का चेहरा देखने लगे.

इस जमाने में.

जिस आदमी ने अभी बीस करोड की बोली लगाई थी.

उसके पास एक साधारण keypad phone तक नहीं था.

लडकी ने भी कुछ पल अर्जुन को देखा.

फिर अपना फोन निकाला.

आप नंबर बोलिए. मैं call लगा देती हूं.

अर्जुन कुछ पल चुप रहा.

मेरे पास नंबर नहीं है.

लडकी ने हैरानी से उसे देखा.

अर्जुन ने उसकी तरफ देखते हुए कहा,

लेकिन तुम्हारे पास जरूर होगा.

लडकी की भौंहें सिकुड गईं.

मेरे पास?

हां.

किसका?

अर्जुन ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा,

विजय कालरा.

बस नाम सुनते ही लडकी का हाथ कांप गया.

उसके चेहरे का रंग बदल गया.

कमरे में बैठे कई लोग भी एक- दूसरे की तरफ देखने लगे.

विजय कालरा का नाम यहां आम नहीं था.

लडकी विजय को अच्छी तरह जानती थी.

वह एक बडा businessman था.

लेकिन सिर्फ businessman नहीं.

शहर के अंधेरे हिस्से में उसका नाम एक अलग वजह से भी लिया जाता था.

उसके अपने लोग थे.

अपना network था.

और underworld में भी उसका प्रभाव था.

लडकी ने अर्जुन को ध्यान से देखा.

आप सोच- समझकर बोल रहे हैं ना?

अर्जुन ने शांत नजरों से उसे देखा.

हां.

आपको विजय कालरा से बात करनी है?

बस call लगाओ.

लडकी ने कुछ पल सोचा.

फिर विजय का नंबर dial किया.

फोन speaker पर कर दिया गया.

एक ring.

दूसरी ring.

तीसरी ring.

कमरे में मौजूद लोगों को लगा कि शायद विजय busy होगा.

लेकिन तभी—

फोन उठ गया.

दूसरी तरफ से भारी और ठंडी आवाज आई,

कौन है?

कमरे में खामोशी थी.

विजय शायद आगे कुछ कहने वाला था.

लेकिन उससे पहले अर्जुन ने कहा,

मैं हूं. अर्जुन शेखावत.

कुछ पल तक दूसरी तरफ पूरी खामोशी रही.

फिर अचानक—

धडाम!

जैसे कोई भारी चीज नीचे गिरी हो.

कमरे में बैठे लोगों ने एक- दूसरे की तरफ देखा.

फोन के दूसरी तरफ विजय की घबराई हुई आवाज आई.

स. सर?

अर्जुन शांत रहा.

जल्दी आओ.

विजय की सांसें तेज सुनाई दे रही थीं.

स. सर, मैं अभी आता हूं. आप. आप हैं कहां?

अर्जुन ने दुकान का नाम बताया.

Antique Shop, Road Number तीन.

दूसरी तरफ कुछ सेकंड के लिए खामोशी रही.

फिर विजय की आवाज आई,

वायु Antique?

हां.

सर. मैं अभी आता हूं.

Call cut गया.

कमरे में पूरी तरह सन्नाटा छा गया.

लखबीर सोढी भी अब अर्जुन को पहले जैसी नजर से नहीं देख रहा था.

उसकी आंखों में सवाल था.

विजय कालरा.

जिसका नाम सुनकर इतने लोग सोचने लगते थे कि सामने वाला कौन है.

वही विजय इस लडके की आवाज सुनते ही इतना घबरा गया था.

और अर्जुन?

वह बिल्कुल सामान्य तरीके से अपनी कुर्सी पर बैठा था.

मानो अभी कुछ हुआ ही न हो.

लडकी अभी भी फोन हाथ में लिए खडी थी.

उसके दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था—

आखिर ये लडका है कौन?

अर्जुन ने एक बार फिर सामने रखी तलवार की तरफ देखा.

उसकी आंखों में अब पहले जैसी शांति नहीं थी.

वह तलवार उसे बुला रही थी.

या शायद.

उसके भीतर की कोई पुरानी याद उसे पहचान चुकी थी.

लेकिन अभी फैसला बाकी था.

क्योंकि उन्नीस करोड की बोली लखबीर सोढी लगा चुका था.

और बीस करोड की बोली अर्जुन ने.

अर्जुन ने अपनी कुर्सी पर पीछे टिकते हुए आंखें बंद कर लीं.

उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी.

उसे पता था.

असली खेल अब शुरू होने वाला था.

कुछ ही मिनटों में विजय कालरा यहां आने वाला था.

और उसके आने के बाद.

इस underground auction में मौजूद हर व्यक्ति को समझ आने वाला था कि साधारण कपडों में आया यह लडका आखिर Kiss तरह का इंसान है.

कहानी में कुछ नाम चेंज हुए है तो माफ करना लेकिन यकीन मानिए आगे स्टोरी बहुत अच्छी लगने वाली है आपको खासकर 100 एपिसोड के बाद

लेकिन एक सवाल अभी भी बाकी था.

क्या विक्रमादित्य की वह पुरानी तलवार सच में अर्जुन की होगी?

और अगर वह तलवार सच में वही थी.

तो उसके अंदर ऐसी कौन- सी शक्ति छिपी थी जिसे अर्जुन हजारों साल बाद भी पहचान पा रहा था?

साथ ही.

क्या विजय कालरा के आने के बाद अर्जुन का सामना किसी ऐसे इंसान से होने वाला था जिसे वह अपने पिछले जीवन से जानता था?

इन सवालों के जवाब के लिए सुनते रहिए—

कलयुग का अमर साधक.

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