The Billionaire I Couldn’t Hate Ch. 1

The Billionaire I Couldn’t Hate - Chapter 1

Posted by The Dark Quill • Sep 22, 2026 06:03 PM

Chapter 1

The Man Who Stopped Believing

मुंबई की रात हमेशा की तरह खूबसूरत थी।

आसमान पर बिखरी शहर की रोशनियाँ दूर से सितारों जैसी लग रही थीं, लेकिन ओबेरॉय मेंशन की तीसरी मंजिल पर खड़ी वह लड़की उन रोशनियों को देख भी नहीं रही थी।

उसकी छोटी-सी मुट्ठी खिड़की के शीशे पर टिकी थी।

चार साल की रूही ओबेरॉय अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से बाहर देख रही थी।

उसके हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी।

तस्वीर में एक खूबसूरत औरत उसे गोद में लिए मुस्कुरा रही थी।

रूही ने तस्वीर को अपने सीने से लगाया।

“मम्मा कब आएंगी?”

कमरे के दरवाजे पर खड़ा आदमी कुछ पल के लिए बिल्कुल स्थिर हो गया।

रुद्र ओबेरॉय।

शहर के सबसे बड़े बिजनेसमैन में से एक।

लोग उसके नाम से डरते थे।

उसकी एक नजर सामने वाले को चुप कराने के लिए काफी थी।

काले रंग की शर्ट, सलीके से पीछे किए हुए बाल, चेहरे पर हमेशा रहने वाली कठोरता और आंखों में ऐसी ठंडक, जैसे उसने अपने अंदर की हर भावना को सालों पहले दफना दिया हो।

लेकिन अपनी बेटी के सामने...

वह आदमी थोड़ा अलग था।

रुद्र धीरे-धीरे कमरे में आया।

“रूही।”

बच्ची ने पलटकर उसे देखा।

“पापा...”

रुद्र उसके पास जाकर घुटनों के बल बैठ गया।

उसने तस्वीर उसके हाथ से लेने की कोशिश नहीं की।

बस पूछा—

“फिर से मम्मा की याद आ रही है?”

रूही ने सिर हिला दिया।

“सबके स्कूल में मम्मा आती हैं।”

रुद्र का चेहरा कठोर हो गया।

“तुम्हारे स्कूल में पापा आते हैं।”

रूही ने उसकी तरफ देखा।

“लेकिन मुझे मम्मा भी चाहिए।”

एक पल के लिए कमरे की हवा जैसे रुक गई।

रुद्र के पास इस सवाल का जवाब था।

लेकिन वह जवाब उसकी बेटी के लिए बहुत कड़वा था।

उसने रूही के बालों पर हाथ फेरा।

“हर बच्ची को जो चाहिए होता है, वो हमेशा नहीं मिलता।”

रूही की आंखें भर आईं।

“क्या मम्मा ने मुझे छोड़ दिया?”

रुद्र की उंगलियां वहीं रुक गईं।

उसने अपनी बेटी को सीने से लगा लिया।

“नहीं।”

उसका जवाब बहुत धीमा था।

“तुम्हें किसी ने नहीं छोड़ा।”

लेकिन यह झूठ बोलते हुए उसकी अपनी आंखों में एक पुराना दर्द उतर आया था।

---

चार साल पहले।

एक शानदार शादी।

एक खूबसूरत पत्नी।

एक ऐसा घर जिसमें प्यार की कोई कमी नहीं थी।

और रुद्र को पूरा विश्वास था कि उसकी जिंदगी में सबकुछ सही है।

जब तक उसे एक रात वह सच नहीं मिला था।

उसकी पत्नी संजना सिर्फ उसे धोखा नहीं दे रही थी।

वह उसके भरोसे, उसके नाम और उसके पैसों का इस्तेमाल कर रही थी।

रुद्र ने उसे एक होटल के कमरे में किसी दूसरे आदमी के साथ देखा था।

उस रात उसने कोई तमाशा नहीं किया।

कोई सवाल नहीं पूछा।

सिर्फ एक बात कही थी—

“आज के बाद मेरे लिए तुम मर चुकी हो।”

संजना ने उसे रोकने की कोशिश की थी।

रोई थी।

कसम खाई थी।

लेकिन रुद्र ने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उस दिन उसने एक फैसला किया था।

उसे प्यार पर भरोसा नहीं करना है।

और औरतों पर तो बिल्कुल नहीं।

---

“पापा?”

रूही की आवाज ने रुद्र को वर्तमान में वापस ला दिया।

“हम्म?”

“आप मुझसे प्यार करते हो ना?”

इस बार रुद्र के चेहरे की सारी कठोरता पिघल गई।

उसने रूही को अपनी बाहों में उठा लिया।

“दुनिया में सबसे ज्यादा।”

रूही ने उसके गले में बाहें डाल दीं।

“फिर आप मुझे कभी छोड़कर नहीं जाओगे?”

रुद्र ने आंखें बंद कर लीं।

“कभी नहीं।”

उसने यह वादा पूरी दुनिया से लड़कर निभाने का फैसला कर लिया था।

लेकिन उसे नहीं पता था...

बहुत जल्द उसकी जिंदगी में कोई ऐसा आने वाला था, जो उसकी बनाई हुई हर दीवार को चुनौती देने वाली थी।

---

उधर शहर के दूसरे कोने में—

एक छोटे से दो कमरे के फ्लैट में आरोही अपने सामने रखे कागजों को देख रही थी।

उसके सामने सिर्फ तीन चीजें थीं—

एक रिज्यूमे।

एक खाली बैंक बैलेंस का मैसेज।

और एक ठंडी हो चुकी चाय।

आरोही ने मोबाइल उठाया।

उसकी स्क्रीन पर कई unanswered calls थे।

उसने एक लंबी सांस ली और खुद से कहा—

“बस एक नौकरी चाहिए... कोई एहसान नहीं।”

वह कमजोर नहीं थी।

हालात मुश्किल थे, लेकिन उसे किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं था।

आरोही ने अपने बालों को बांधा, रिज्यूमे उठाया और आईने के सामने खड़ी हो गई।

“आज नौकरी लेकर ही वापस आऊंगी।”

उसने खुद से कहा।

फिर उसकी नजर अपने चेहरे पर पड़ी।

थकान साफ दिखाई दे रही थी।

लेकिन आंखों में हार नहीं थी।

“और अगर उन्होंने attitude दिखाया…”

उसने अपना बैग उठाया।

“…तो attitude वापस मिलेगा।”

---

कुछ घंटे बाद।

शहर की सबसे ऊंची commercial buildings में से एक।

Oberoi Group Headquarters.

आरोही reception पर खड़ी थी।

“Mr. Rudra Oberoi से मिलना है।”

Receptionist ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा।

“Appointment?”

“Interview है।”

“Name?”

“आरोही शर्मा।”

Receptionist ने computer में कुछ check किया।

“Twenty-third floor.”

आरोही ने सिर हिलाया।

“Thank you.”

वह elevator की तरफ बढ़ी।

उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस नौकरी के लिए वह जा रही है...

उसका मालिक वही आदमी था, जिससे उसकी किस्मत कुछ घंटे बाद ऐसी टकराने वाली थी कि दोनों एक-दूसरे को भूल नहीं पाएंगे।

---

उसी समय—

Twenty-third floor.

रुद्र अपने office में बैठा था।

उसके सामने एक contract खुला हुआ था।

“Sir.”

उसका assistant कबीर अंदर आया।

“हाँ?”

“मैडम आरोही शर्मा interview के लिए आ चुकी हैं।”

रुद्र ने बिना ऊपर देखे पूछा—

“Qualifications?”

“Psychology background है। बच्चों के साथ काम करने का experience भी है।”

रुद्र ने पहली बार नजर उठाई।

“और?”

कबीर थोड़ा रुका।

“Financially... शायद उसे नौकरी की जरूरत है।”

रुद्र की आंखों में हल्की ठंडक उतर आई।

“जरूरत?”

“जी।”

रुद्र कुर्सी से पीछे टिक गया।

“Perfect.”

कबीर ने उसे देखा।

“Sir?”

रुद्र ने फाइल बंद कर दी।

“जिन्हें पैसों की जरूरत होती है, वे अक्सर बहुत जल्दी compromises करना सीख जाते हैं।”

कबीर कुछ कहने ही वाला था कि रुद्र ने हाथ उठा दिया।

“Send her in.”

---

दरवाजा खुला।

आरोही अंदर आई।

हल्के नीले रंग का कुर्ता, खुले बाल, हाथ में फाइल और चेहरे पर confidence।

वह कुछ कदम आगे आई।

“Good morning, Mr. Oberoi.”

रुद्र ने फाइल से नजर उठाई।

और अगले ही सेकंड...

उसकी भौंहें सिकुड़ गईं।

आरोही भी वहीं रुक गई।

दोनों कुछ पल तक एक-दूसरे को देखते रहे।

पहचान की एक चमक दोनों की आंखों में आई।

रुद्र की आवाज बर्फ जैसी ठंडी थी।

“तुम?”

आरोही ने भी आंखें थोड़ी संकरी कर लीं।

“लगता है आपको भी खुशी नहीं हुई।”

रुद्र कुर्सी से उठ गया।

“मेरे office में आने की हिम्मत कैसे हुई?”

आरोही ने उसकी तरफ देखा।

“Interview के लिए बुलाया गया था।”

“मैंने नहीं बुलाया।”

“आपकी HR team ने बुलाया है।”

“तो उन्हें गलती सुधारनी होगी।”

आरोही ने फाइल टेबल पर रख दी।

“अगर आप interview नहीं लेना चाहते, साफ कह दीजिए। लेकिन मुझे insult करने के लिए बुलाया है तो मेरा समय भी कीमती है।”

रुद्र की आंखों में गुस्सा चमका।

“तुम्हें शायद पता नहीं कि तुम किससे बात कर रही हो।”

आरोही ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया—

“कल भी आपने यही कहा था।”

एक पल की खामोशी।

फिर रुद्र उसके करीब आया।

“और कल तुम्हें मेरी बात समझ नहीं आई थी।”

आरोही ने एक कदम भी पीछे नहीं लिया।

“क्योंकि आपकी बात में logic नहीं था।”

रुद्र का जबड़ा कस गया।

“तुम्हारा attitude तुम्हें बहुत महंगा पड़ सकता है।”

आरोही हल्का-सा मुस्कुराई।

“और आपका ego आपको कितना महंगा पड़ चुका है, उसका हिसाब है आपके पास?”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

कबीर, जो बाहर खड़ा था, अंदर आने की हिम्मत तक नहीं कर रहा था।

रुद्र ने पहली बार इस लड़की को ध्यान से देखा।

वह डरी नहीं थी।

बिल्कुल नहीं।

उसकी आंखों में कोई लालच नहीं था।

कोई चापलूसी नहीं।

सिर्फ गुस्सा और आत्मसम्मान था।

रुद्र ने धीमे स्वर में कहा—

“तुम्हें नौकरी चाहिए।”

“हाँ।”

“बहुत जरूरत है?”

आरोही के चेहरे पर एक पल के लिए तनाव आया।

लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाल लिया।

“जरूरत है। भीख नहीं।”

रुद्र कुछ सेकंड उसे देखता रहा।

फिर उसने फाइल उठाई।

“तुम्हारी qualifications अच्छी हैं।”

आरोही चुप रही।

“मेरी बेटी के लिए caretaker और tutor चाहिए।”

वह चौंकी।

“आपकी बेटी?”

“चार साल की है।”

“और आप चाहते हैं कि मैं...?”

“उसके साथ रहो। पढ़ाओ। उसकी देखभाल करो।”

आरोही ने कुछ पल सोचा।

“Salary?”

रुद्र ने रकम बताई।

आरोही की आंखें एक पल के लिए फैल गईं।

रकम उसकी उम्मीद से कहीं ज्यादा थी।

रुद्र ने उसकी reaction देख ली।

“यही तो चाहती हो न?”

आरोही की आंखों में तुरंत कठोरता लौट आई।

“नहीं।”

वह अपनी फाइल उठाने लगी।

“तो?”

आरोही ने दरवाजे की तरफ कदम बढ़ाया।

“मुझे नौकरी चाहिए, लेकिन अपनी इज्जत बेचकर नहीं।”

रुद्र की आवाज उसके पीछे गूंजी—

“रुको।”

आरोही रुक गई।

“मेरी बेटी आसान बच्ची नहीं है।”

आरोही ने पलटकर देखा।

“तो मैं भी आसान लड़की नहीं हूं।”

रुद्र की आंखों में पहली बार कुछ बदला।

गुस्सा?

चुनौती?

या सिर्फ जिज्ञासा?

वह खुद भी नहीं समझ पाया।

उसने contract उसकी तरफ बढ़ा दिया।

“कल सुबह आठ बजे।”

आरोही ने contract लिया।

“मैं आठ बजे आ जाऊंगी।”

वह दरवाजे तक पहुंची।

रुद्र ने आखिरी वार किया—

“और मेरे घर में मेरी शर्तें चलेंगी।”

आरोही ने पीछे मुड़कर देखा।

हल्की मुस्कान उसके चेहरे पर थी।

“देखते हैं, Mr. Oberoi।”

दरवाजा बंद हो गया।

रुद्र कुछ देर उसी दरवाजे को देखता रहा।

फिर उसकी नजर contract पर गई।

और पहली बार उसके मन में एक अनचाहा सवाल उठा—

“आखिर ये लड़की है कौन?”

उसे नहीं पता था...

कि अगले दिन से वही लड़की उसके घर में कदम रखने वाली थी।

और उसके साथ...

रुद्र ओबेरॉय की उस जिंदगी में भी, जिसमें उसने सालों पहले प्यार के लिए दरवाजा बंद कर दिया था।

लेकिन कुछ दरवाजे ऐसे होते हैं जिन्हें हम चाहे जितनी मजबूती से बंद कर लें...

किस्मत उन्हें खोलने का रास्ता ढूंढ ही लेती है।

— Chapter 1 Ends —

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