junu niyat tere pyar ki - Chapter 3
जुनूनियत तेरे प्यार की — अगला भाग
आखिर आद्विक ऐसा क्यों है?
उसे प्यार पर भरोसा क्यों नहीं है?
फिर भी वह काश्वी के पीछे क्यों है?
इन सारे सवालों के जवाब आपको आगे धीरे-धीरे मिलेंगे। ❤️🔥
आद्विक की रोबदार आवाज़ काश्वी को अंदर तक हिला देती है।
“काश्वी वर्मा… मेरी परमिशन के बिना इस कमरे से एक कदम भी बाहर नहीं जा सकती हो। वरना अंजाम क्या होगा, इसका तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं है।”
काश्वी के कदम वहीं रुक जाते हैं।
वह अपने डर को कंट्रोल करने की कोशिश करती है और हकलाते हुए बोलती है—
“क-क्या कर लेंगे आप? मैं इस कंपनी में काम नहीं करूँगी। मैं अभी के अभी ये जॉब छोड़कर जा रही हूँ।”
इतना कहकर जैसे ही काश्वी दरवाज़े की तरफ बढ़ती है, आद्विक की आवाज़ फिर उसके कदम रोक देती है।
“तुमने टर्म एंड कंडीशन ठीक से पढ़े नहीं थे, काश्वी?”
काश्वी को कुछ समझ नहीं आता।
वह उलझन में बोलती है—
“मैंने पढ़े थे। उसमें कहीं नहीं लिखा था कि मैं अपनी मर्ज़ी से कमरे से बाहर नहीं जा सकती।”
आद्विक हल्की-सी मुस्कान के साथ अपनी टेबल पर रखा वही फॉर्म उठा लेता है, जिस पर काश्वी ने बिना ठीक से पढ़े साइन कर दिए थे।
वह पेपर उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहता है—
“रियली? यहाँ देखो।”
काश्वी काँपते हाथों से पेपर लेती है।
उसमें एक ऐसी शर्त लिखी थी, जिसे उसने साइन करने से पहले पढ़ा ही नहीं था।
कंपनी छोड़ने के लिए तीन साल की अवधि पूरी करनी होगी, या फिर कंपनी के नियमों के अनुसार भारी आर्थिक क्षतिपूर्ति देनी होगी।
और वह रकम थी—
पाँच करोड़ रुपये।
काश्वी की आँखें फैल जाती हैं।
“प-पाँच करोड़?”
उसके तो पूरे खानदान में इतने पैसे की कल्पना भी नहीं की गई थी।
उसके कान जैसे सुन्न पड़ने लगे।
वह जल्दी से पेपर दोबारा पढ़ती है।
“ये कैसे हो सकता है? ये नहीं लिखा हुआ था… ये नहीं लिखा था!”
आद्विक शांत स्वर में कहता है—
“काश्वी, अपनी आँखों से पढ़ो। लिखा है।”
काश्वी दो-तीन बार उस लाइन को पढ़ती है।
फिर उसके चेहरे पर पछतावा साफ दिखाई देने लगता है।
“ये मैंने क्या कर दिया…”
उसकी आँखों में आँसू आने लगते हैं।
“ये धोखा है… आपने मेरे साथ धोखा किया।”
आद्विक उसकी तरफ देखता है और बेहद शांत स्वर में कहता है—
“दो आँखें भगवान ने दी हैं… ऊपर से दिमाग भी। दिमाग का इस्तेमाल नहीं करना था तो कम से कम आँखों का इस्तेमाल कर लेतीं।”
उसने कम शब्दों में मजाक उड़ाया था।
काश्वी को बुरा लगता है
आद्विक अपनी कुर्सी से उठता है और रोबदार कदमों से उसकी तरफ बढ़ता है।
काश्वी उसे अपनी तरफ आता देखकर सहम जाती है।
आद्विक उसके सामने रुकता है और धीमी आवाज़ में कहता है—
“Welcome to my world, काश्वी।”
काश्वी कुछ नहीं बोलती।
वह बस अपनी आँखें बंद कर लेती है।
आद्विक कुछ पल तक उसे देखता रहता है। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।
फिर वह वापस अपनी जगह जाते हुए कहता है—
“ओके, मिस काश्वी। अब आप कल से आ जाइए। वैसे आपकी हालत कुछ ठीक नहीं लग रही।”
काश्वी अपना बोरिया बिस्तरा यानी कि फाइल अपने सीने से लगाती है और दरवाज़े की तरफ बढ़ती है।
लेकिन—
दरवाज़ा खुलता ही नहीं।
काश्वी घबराकर उसे खोलने की कोशिश करती है।
एक बार…
दो बार…
लेकिन दरवाज़ा नहीं खुलता।
पीछे से आद्विक उसे देख रहा था।
उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी।
वह धीरे-धीरे काश्वी की तरफ आता है।
काश्वी की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं।
तभी आद्विक उसके पास पहुँचकर स्क्रीन पर अपना एक्सेस देता है।इस बिच अद्विक काश्वी के काफी करीब आ चुका था।
बीप! के आवाज़ से काश्वी अद्विक से दूर हो जाती है । (अद्विक को यह चीज कुछ खाश पसंद नहीं आती है)
दरवाज़ा खुल जाता है।
काश्वी कुछ पल के लिए हैरान होकर दरवाज़े को देखती रह जाती है।
फिर उसे समझ आता है कि इस पूरे फ्लोर का कंट्रोल आद्विक के पास है।
वह तुरंत उससे दूरी बनाती है।
“मैं जा रही हूँ।”
इतना कहकर वह बाहर निकल जाती है।
आद्विक बस उसे जाते हुए देखता रहता है।
(आद्विक का कंट्रोल
BLACKSTONE CROWN INDUSTRIES की पूरी कंपनी पर आद्विक का नियंत्रण था, लेकिन 33वें से 35वें फ्लोर तक की सिक्योरिटी और भी खास थी।
इन तीनों फ्लोर को आद्विक ने अपने वॉइस कमांड और स्क्रीन सिस्टम से कंट्रोल कर रखा था।)
वह वापस अपनी किंग-साइज़ चेयर पर आकर बैठता है।
सामने लगी बड़ी LED स्क्रीन पर काश्वी दिखाई दे रही थी, जो बाहर जाते हुए खुद से ही कुछ बड़बड़ा रही थी।
आद्विक बहुत ध्यान से उसके चेहरे को देखता है।
फिर उसके होंठों पर एक हल्की-सी मुस्कान आती है।
🖤❤️“जिससे दूर जाने की ठानी थी कभी… वही कब दिल के सबसे करीब आ गई, पता ही नहीं चला।”🖤❤️
काश्वी का दर्द
दूसरी तरफ काश्वी अभी भी सदमे में थी।
वह सोच रही थी—
“मैं अपनी जॉब मिलने की खुशी मनाऊँ… या अपने अतीत से दोबारा मिलने का दुख?”
तीन साल पहले की सारी बातें उसके दिमाग में घूमने लगीं।
उसकी आँखों में आँसू भर आए।
वह आसमान की तरफ देखते हुए बड़बड़ाई—
“भगवान… आप बहुत बुरे हो। आपने मुझे पहले भी रुलाया था और अब भी वही कर रहे हो।”
उधर स्क्रीन पर काश्वी को रोता देखकर आद्विक के हाथ मुट्ठियों में बंध गए।
उसकी आँखें गुस्से और बेचैनी से लाल हो उठीं।
वह कुछ नहीं बोला।
बस स्क्रीन को देखता रहा।
नीचे लिफ्ट से आती है सीधा बाहर चली जाती है।
काश्वी ने सड़क पर एक ऑटो रुकवाया और उसमें बैठ गई।
अब तक वह खुद को रोने से रोक रही थी।
लेकिन जैसे ही ऑटो आगे बढ़ा—
उसका सब्र टूट गया।
वह फूट-फूटकर रोने लगी।
ऑटोवाला घबरा गया।
“मैडम, क्या हुआ? आप ऐसे क्यों रो रही हैं? प्लीज़ चुप हो जाइए… लोग मुझे ही गलत समझेंगे!”
लेकिन उसकी बात सुनकर काश्वी और ज्यादा रोने लगी।
आँसू पोंछते हुए वह बड़बड़ाने लगी—
“ऐसा नहीं करना चाहिए था… उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?”
ऑटोवाला बेचारा सोचने लगा—
“पता नहीं क्या हुआ है इनके साथ। जल्दी से घर पहुँचा देता हूँ। इतनी प्यारी लड़की को आखिर किसने रुलाया होगा?”
कुछ देर बाद काश्वी ने अपने घर के पास ऑटो रुकवाया।
उसने रोते-रोते पैसे दिए और अंदर चली गई।
ऑटोवाला भी जाते-जाते मन ही मन उस अनजान इंसान को कोसता हुआ अपना ऑटो लेकर निकल गया जिसने काश्वी को इतना दुख दिया था।
घर में माँ का प्यार ❤️
घर में घुसते ही काश्वी अपनी माँ अंजनी से लिपट गई और रोते हुए बोली—
“मम्मा… मुझे भूख लगी है। मुझे खाना है। जल्दी से खाना लगवा दो।”
अंजनी जी घबरा गईं।
“बेटा, क्या हुआ? तुम्हारा इंटरव्यू कैसा गया?”
यह सुनते ही काश्वी फिर रोने लगी।
“मम्मा… पहले खाना दो ना।”
काश्वी का एक अलग ही नियम था।
वह दुखी होती तो खाना खाती थी।🍲🥘🍝
खुश होती तो भी खाना खाती थी।🥪🧆🌭🌯
उसका मानना था—
“सुख-दुख तो लगा रहता है… लेकिन खाने में कोई समझौता नहीं होना चाहिए!”🍦🍰🍨
वह जल्दी से टेबल पर रखा सेब उठाकर खाने लगी।
तभी अंजनी जी किचन से उसकी पसंद का मूंग दाल का हलवा लेकर आईं।
उन्हें पहले से पता था कि रिजल्ट चाहे जैसा हो, काश्वी को हलवा तो चाहिए ही।
अंजनी जी ने हलवा उसके सामने रखा।
काश्वी ने तुरंत सेब छोड़ दिया और हलवा खाने लगी।
आँसू अभी भी उसकी आँखों में थे।
वह हलवा खाते हुए बोली—
“मम्मा… बहुत टेस्टी है।”
तभी माधव जी भी वहाँ आ गए।
उन्होंने अंजनी जी की तरफ सवालिया नज़रों से देखा—
“क्या हुआ?”
अंजनी जी भी बस काश्वी की तरफ देखकर सिर हिला देती हैं।
दोनों परेशान थे।
तभी पीछे से अन्वी भी ऑफिस से घर आ गई।
उसे अभी नौकरी शुरू किए सिर्फ एक महीना ही हुआ था।
काश्वी को हलवा खाते और रोते देखकर वह हैरान रह गई।
“काश्वी! क्या हुआ तुम्हें? और मैं तुम्हें ऑफिस के बाहर कॉल कर रही थी। रिसेप्शनिस्ट से पूछा तो पता चला कि तुम तो चली गई! कम से कम मुझे बता तो देती।”
अन्वी ने सवालों की झड़ी लगा दी।
काश्वी फिर रोने लगी।
अन्वी ने परेशान होकर कहा—
“ओफ्फो यार, तुम भी ना! अच्छा ये बताओ… सिलेक्ट हुई या नहीं?”
काश्वी ने आँसू पोंछे।
“हाँ…”
अन्वी खुशी से चिल्ला उठी—
“सच में?!”
अंजनी जी और माधव जी के चेहरे पर भी खुशी आ गई।
“अरे, ये तो खुशी की बात है!”
माधव जी बोले—
“सिलेक्ट नहीं भी होती तो कोई बात नहीं… लेकिन आज तो अच्छी खबर है। अंजनी, आज अच्छा खाना बनाना।”
काश्वी अपने माता-पिता को देखती रही।
उनके चेहरों पर खुशी देखकर उसने सोचा—
“अगर मैंने सब कुछ बता दिया तो ये लोग परेशान हो जाएंगे। अभी इन्हें कुछ नहीं बताना चाहिए।”
फिर वह तुरंत बोली—
“मम्मा, मुझे आलू के पराठे चाहिए।”
अन्वी भी तुरंत बोली—
“और मुझे पूरियाँ और पनीर की सब्ज़ी!”
अंजनी जी हँसते हुए बोलीं—
“हाँ-हाँ, ठीक है। अब तुम दोनों पहले फ्रेश हो जाओ। फिर मेरी मदद करने आ जाना।”
माँ की बात सुनकर दोनों वहाँ से चली गईं।
अंजनी जी ने माधव जी की तरफ देखा।
माधव जी मुस्कुराकर बोले—
“मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।”
अंजनी जी के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
रात का समय 🌙
खाना खाने के बाद काश्वी ,अन्वी कमरे में आ गई।
कमरा बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन बेहद प्यारा और आरामदायक था।
काश्वी आते ही बिस्तर पर लेट गई।
वहीं अन्वी को सोने से पहले किताब पढ़ने की आदत थी।
कुछ देर बाद काश्वी की आँखें लग गईं।
और तभी उसे एक अजीब-सा सपना आया…
सपने में आद्विक उसके सामने खड़ा था।
काश्वी उसे देखकर चौंक गई।
लेकिन इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती, अद्विक उसके पास आ कर उसके लबों को अपनी गिरफ्त में ले चुका था उसे गहराई तक किस 😘 किए जा रहा था ।
अगले ही पल—
“काश्वी… काश्वी!”
अन्वी उसे हिला रही थी।
काश्वी हड़बड़ाकर उठ बैठी।
वह घबराकर अपने आसपास देखने लगी।
फिर उसे समझ आया—
“ये… सपना था!”
अन्वी उसे देखकर मुस्कुराने लगी।
“मैडम, सपने में भी बड़ी खोई हुई थीं आप!”
काश्वी शर्मिंदा होकर बोली—
“ऐसा-वैसा कुछ नहीं था। आप ना… रोमांटिक किताबें पढ़ते-पढ़ते हर चीज़ को रोमांटिक बना देती हैं।”
अन्वी हँसते हुए बोली—
“अच्छा? फिर तुम इतनी घबराकर क्यों उठीं?”
काश्वी झुंझलाकर बोली—
“आप बहुत गंदी-गंदी बातें करती रहती हैं। अब सो जाइए और मुझे भी सोने दीजिए।”
इतना कहकर काश्वी ने अपना सिर चादर से ढक लिया।मन में बोलती है क्या यार आज भी ऐसे सपने आते है। मैं उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती हूं।😤 बिल्कुल भी नहीं😡
अन्वी मुस्कुराकर फिर अपनी किताब पढ़ने लगी।
उधर आद्विक का महल…
BLACKSTONE CROWN INDUSTRIES के मालिक आद्विक सेखावत का घर सिर्फ बंगला कहना शायद कम था।
वह किसी महल से कम नहीं था।
उसकी तीसरी मंज़िल लगभग पूरी तरह निजी थी।
वहाँ उसका अपना जिम एरिया था, ऑफिस एरिया था और एक अलग कमरा भी था, जिसे देखकर उसके व्यक्तित्व की गंभीरता साफ झलकती थी।
कमरे में डार्क ब्लैक और व्हाइट का कॉम्बिनेशन था।
हर चीज़ बेहद व्यवस्थित और शांत थी।
आद्विक अपने किंग-साइज़ बेड पर लेटा हुआ था।
लेकिन उसकी आँखों में नींद नहीं थी।
उसके दिमाग में बस एक ही चेहरा घूम रहा था—
काश्वी।
तीन साल पहले की सारी यादें तैर रही थी ।काश्वी…
आद्विक की आँखों में एक अजीब-सी गंभीरता थी। जैसे उसके दिमाग में आगे की पूरी कहानी पहले से लिखी जा चुकी हो। उसे पता था कि अब उसे क्या करना है… और कैसे करना है।
काश्वी का उसकी जिंदगी में वापस आना महज़ एक इत्तेफाक नहीं था। इसके पीछे आद्विक की एक सोच थी, जिसे वह अभी किसी के सामने जाहिर नहीं करना चाहता था।
उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था, लेकिन उसकी आँखों में छिपी बेचैनी कुछ और ही कहानी कह रही थी। काश्वी को पाने की चाहत उसके अंदर कब जुनून बन चुकी थी, शायद इसका एहसास खुद आद्विक को भी नहीं था।
दूसरी तरफ काश्वी।
और इन दोनों के बीच छिपा था एक ऐसा राज़—
जिसके सामने आने के बाद काश्वी की पूरी जिंदगी बदलने वाली थी।
अगली सुबह काश्वी की ज़िंदगी कौन-सा नया मोड़ लेने वाली है?
पढ़ते रहिए… “जुनूनियत तेरे प्यार की” ❤️📖✨
अगर आपको काश्वी और आद्विक की ये कहानी पसंद आई हो, तो अपना प्यार कमेंट में ज़रूर बताना 🥰❤️
आपको दोनों में से किसका किरदार सबसे ज़्यादा पसंद आया? 💕✨
अगले चैप्टर में क्या होने वाला है, इसका अंदाज़ा है आपको? 👀💫
अपना अनुमान कमेंट में ज़रूर बताना 😍👇
आपके प्यारे-प्यारे कमेंट्स ही मुझे आगे लिखने के लिए मोटिवेट करते हैं 🫶🌸
मिलते हैं अगले चैप्टर में… तब तक कहानी से जुड़े रहिए! ❤️📖✨