Drive Me Crazy Ch. 1

Drive Me Crazy - Chapter 1

Posted by The Dark Quill • Sep 18, 2026 02:39 PM

अध्याय 2: द लायंस डेन (The Lion’s Den)

सेंट जूड यूनिवर्सिटी के सबसे एकांत और सुरक्षित हिस्से में मौजूद था—'द एपेक्स गैरेज'। यह कोई साधारण गैरेज नहीं था। यह करोड़ों की लागत से बना एक हाई-टेक अंडरग्राउंड बंकर था, जिसकी दीवारें साउंडप्रूफ थीं और एंट्री केवल बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट से होती थी। यह वो जगह थी जहाँ आम स्टूडेंट्स का आना सख्त मना था। यह एपेक्स क्लब का अपना साम्राज्य था।

दोपहर के तीन बज रहे थे। तारा देसाई गैरेज के भारी, काले मैटेलिक दरवाज़े के सामने खड़ी थी। उसकी हथेलियों में पसीना आ रहा था। कल डीन के ऑफिस में कबीर सिंघानिया को खुलेआम चुनौती देने के बाद, उसे पता था कि आज का दिन उसके लिए किसी नर्क से कम नहीं होने वाला है। लेकिन उसने खुद से वादा किया था कि वह इन अमीरज़ादों के सामने कभी कमज़ोर नहीं पड़ेगी।

उसने गहरी सांस ली और डीन द्वारा दिए गए अस्थायी एक्सेस कार्ड को स्वाइप किया।

एक भारी 'क्लिक' की आवाज़ के साथ दरवाज़ा खुला और तारा अंदर दाखिल हुई। अंदर का नज़ारा किसी हॉलीवुड फिल्म के सेट जैसा था। नीली और लाल नियॉन लाइट्स गैरेज को एक डार्क, क्लब जैसी वाइब दे रही थीं। हवा में हाई-ऑक्टेन पेट्रोल, रबर, और एक अजीब सी महंगी मर्दाना परफ्यूम की महक घुली हुई थी। बीचों-बीच तीन चमचमाती फॉर्मूला रेसिंग कारें खड़ी थीं, जिनके इर्द-गिर्द दुनिया के सबसे बेहतरीन और महंगे टूल्स रखे थे।

लेकिन तारा का ध्यान कारों पर नहीं, बल्कि गैरेज के दूसरे हिस्से में मौजूद उन चार लड़कों पर गया।

बैकग्राउंड में कोई डार्क, बेस-हैवी इंग्लिश हिप-हॉप ट्रैक बज रहा था।

नील आहूजा एक कस्टम-मेड पूल टेबल पर खेल रहा था। उसकी शर्ट के बटन आधे खुले हुए थे, और वो एक हाथ में रेड बुल का कैन पकड़े हुए था।

देव सिंह गैरेज के एक कोने में रखे बेंच प्रेस पर भारी वेट्स उठा रहा था। उसकी बाहों की नसें तनी हुई थीं और उसके चेहरे पर हमेशा की तरह एक खूंखार भाव था।

आर्यन खन्ना कई सारी स्क्रीन वाले एक हाई-टेक कंप्यूटर सेटअप के सामने बैठा, अपनी ठंडी आँखों से कुछ डेटा पढ़ रहा था।

और फिर... कबीर।

कबीर सिंघानिया सेंटर में खड़ी अपनी ब्लड-रेड फेरारी के बोनट पर झुका हुआ था। उसने शर्ट नहीं पहनी थी। केवल एक ब्लैक लेदर की पैंट और हाथों में ग्रीस से सने हुए ग्लव्स। उसकी चौड़ी, मस्कुलर पीठ पर पसीने की बूंदें नियॉन रोशनी में चमक रही थीं। उसके शरीर पर बने कुछ डार्क टैटूज़ उसकी खतरनाक पर्सनालिटी को और भी ज़्यादा इंटेंस बना रहे थे।

तारा की सांसें एक पल के लिए गले में अटक गईं। वो जितना एरोगेंट और बदतमीज़ था, शारीरिक रूप से वो उतना ही... परफेक्ट था।

जैसे ही तारा के कदमों की आवाज़ गैरेज में गूंजी, म्यूज़िक अचानक बंद हो गया। चारों लड़कों की नज़रें एक साथ उस पर आकर टिक गईं। गैरेज का तापमान मानो अचानक बर्फ जैसा ठंडा हो गया।

नील ने अपनी पूल स्टिक टेबल पर रखी और एक तिरछी, खतरनाक मुस्कान के साथ उसकी तरफ देखा। "वेल, वेल, वेल। तो फाइनली ट्रैश (कचरा) हमारे महल में आ ही गया।"

देव ने डंबल ज़मीन पर पटका, जिसकी तेज़ आवाज़ से तारा हल्की सी चौंकी, लेकिन उसने अपनी जगह नहीं छोड़ी। "मुझे लगा था कल की बेइज़्ज़ती के बाद ये लड़की कैंपस छोड़कर भाग गई होगी," देव गुर्राया।

आर्यन ने अपनी स्क्रीन से नज़रें हटाए बिना, अपनी शांत और सर्द आवाज़ में कहा, "उसका हार्ट रेट इस वक्त 110 बीट्स प्रति मिनट है। वो डरी हुई है, लेकिन वो इसे छुपाने की कोशिश कर रही है।"

तारा ने अपनी मुट्ठियां भींच लीं। ये लड़के इंसान थे या कोई साइकोपैथ?

तभी कबीर धीरे से कार के बोनट से उठा। उसने एक गंदा कपड़ा उठाया और अपने हाथों से ग्रीस पोंछते हुए तारा की तरफ घूमा। उसके बाल माथे पर बिखरे हुए थे, और चेहरे पर कहीं-कहीं इंजन का काला ऑयल लगा हुआ था। लेकिन उसकी वो तूफानी, गहरी काली आँखें... वो सीधे तारा की रूह को चीर रही थीं।

वो धीमी, शिकारी जैसी चाल से चलते हुए तारा के करीब आया। हर एक कदम के साथ तारा को अपने दिल की धड़कन तेज़ होती हुई महसूस हो रही थी। कबीर उसके ठीक सामने आकर रुका। उसकी लंबाई इतनी ज़्यादा थी कि तारा को उसे देखने के लिए अपनी गर्दन काफी उठानी पड़ी।

"तो तुम सच में आ गई," कबीर की आवाज़ में वो खुरदरापन और डार्क टोन था जो किसी को भी कांपने पर मजबूर कर दे। "मुझे लगा था मिडिल-क्लास लोगों में थोड़ी बहुत सेल्फ-रिस्पेक्ट होती है।"

"मेरी सेल्फ-रिस्पेक्ट मेरे काम से आती है, कबीर, तुम्हारे बैंक बैलेंस से नहीं," तारा ने उसकी आँखों में आँखें डालते हुए जवाब दिया। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी दृढ़ता थी। "डीन ने मुझे कार की टेलीमेट्री (Telemetry) और डेटा एनालाइज़ करने के लिए भेजा है। मुझे पिछले महीने की रेस का सारा डेटा चाहिए।"

कबीर के होठों पर एक क्रूर, खौफनाक मुस्कान तैर गई। उसने नील और देव की तरफ देखा, और फिर वापस तारा की तरफ मुड़ा।

"डेटा?" कबीर ने एक कदम और आगे बढ़ाया, अब उनके बीच बमुश्किल कुछ इंच का फासला था। तारा को उसके शरीर की गर्मी और पसीने में मिले हुए उस इंटेंस परफ्यूम की खुशबू महसूस हो रही थी। कबीर ने अपना चेहरा तारा के कान के पास झुकाया और फुसफुसाया, "तुम मेरी टीम में नहीं हो, स्वीटहार्ट। तुम डीन की थोपी हुई एक मजबूरी हो। और इस गैरेज में... मेरे नियम चलते हैं।"

कबीर पीछे हटा और उसने गैरेज के सबसे अंधेरे कोने की तरफ इशारा किया। वहाँ फर्श पर इंजन के पुराने, जंग खाए, और बेहद गंदे भारी-भरकम पार्ट्स का एक बड़ा सा ढेर लगा हुआ था। वो पार्ट्स ग्रीस, कीचड़ और जले हुए ऑयल से सने हुए थे।

"अगर तुम्हें मेरी कार के डेटा तक पहुंचना है, तो तुम्हें खुद को साबित करना होगा," कबीर ने हुक्म देने वाले अंदाज़ में कहा। "वो सारे पार्ट्स कल रात खराब हुए इंजन के हैं। मुझे वो सारे पार्ट्स एकदम चमचमाते हुए चाहिए। उन्हें केमिकल से साफ करो, रगड़ो, पॉलिश करो और उनका इन्वेंट्री रजिस्टर बनाओ।"

तारा ने हैरानी से उस पहाड़ जितने बड़े कचरे के ढेर को देखा। "ये एक मैकेनिक या क्लीनर का काम है, डेटा स्ट्रैटेजिस्ट का नहीं! इसमें कम से कम आठ घंटे लगेंगे।"

"दस घंटे भी लग सकते हैं," आर्यन ने अपनी कुर्सी से बिना हिले, रोबोटिक आवाज़ में कहा। "अगर वो बिना किसी मशीन के सिर्फ अपने हाथों से करे।"

"एग्ज़ैक्टली," कबीर की आँखों में एक शैतानी चमक थी। "और तुम्हें ये काम अपने हाथों से करना है। बिना किसी मशीन के। अगर तुमने एक भी पार्ट गंदा छोड़ा, या काम बीच में छोड़ कर गई, तो मैं कल ही डीन के मुंह पर तुम्हारा रेजिग्नेशन लेटर मारूंगा। अब चुनो—यहाँ फर्श पर बैठकर मेरी कार का कचरा साफ करोगी, या रोते हुए अपने हॉस्टल वापस जाओगी?"

यह एक सीधा-सीधा टॉर्चर था। कबीर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ना चाहता था। वो चाहता था कि तारा रोए, गिड़गिड़ाए, और हार मान ले।

लेकिन वो तारा को नहीं जानता था।

तारा ने एक लंबी सांस ली। उसने अपना बैकपैक ज़मीन पर रखा। अपनी चेकर्ड शर्ट की आस्तीनें ऊपर चढ़ाईं, अपने बालों को एक सख्त जूड़े (bun) में बांधा, और बिना एक शब्द कहे, उस ग्रीस से सने ढेर के पास जाकर ज़मीन पर बैठ गई।

कबीर की मुस्कान उसके होठों पर ही जम गई। उसके चेहरे की नसें तन गईं। उसे लगा था वो लड़की नखरे करेगी, लेकिन वो चुपचाप काम पर लग गई थी।

अगले तीन घंटों तक गैरेज में एक अजीब सी खामोशी और टेंशन छाई रही।

तारा के हाथ काले हो चुके थे। इंजन का गाढ़ा, बदबूदार ऑयल उसके नाखूनों में घुस गया था। भारी पार्ट्स को उठाने की वजह से उसकी कलाइयों में भयंकर दर्द हो रहा था। उसके गोरे चेहरे पर ग्रीस के काले निशान लग गए थे। पसीने की बूंदें उसकी गर्दन से होते हुए उसकी शर्ट के कॉलर को भिगो रही थीं।

लड़कों ने उसे नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। नील और देव ने जानबूझकर उसके बिल्कुल पास बैठकर मंहगा इटैलियन पिज़्ज़ा खाया।

"भूख लगी है, ट्रैश?" नील ने पिज़्ज़ा का एक स्लाइस उसकी तरफ बढ़ाते हुए मज़ाक उड़ाया। जैसे ही तारा ने कुछ बोलने के लिए सिर उठाया, नील ने वो स्लाइस खुद खा लिया। "ऊप्स, मुझे लगा तुम्हें सिर्फ कचरा खाने की आदत होगी।"

देव ज़ोर से हंसा। आर्यन बस उसे चुपचाप एनालाइज़ कर रहा था, जैसे वो कोई अजीब सा साइंस प्रोजेक्ट हो।

और कबीर... कबीर अपनी कार के पास खड़ा होकर लगातार तारा को घूर रहा था। उसका गुस्सा कम होने के बजाय बढ़ रहा था। वो लड़की टूट क्यों नहीं रही थी? उसकी आँखों में अभी भी वो विद्रोही चमक क्यों थी? वो दर्द से अपनी उंगलियां चटका रही थी, लेकिन उसने एक बार भी मदद नहीं मांगी।

रात के आठ बज चुके थे। तारा पूरी तरह से थक चुकी थी। उसकी पीठ दर्द से अकड़ गई थी, लेकिन वो आखिरी पार्ट को एक सख्त ब्रश से रगड़ रही थी। तभी, उसके हाथ में मौजूद उस भारी गियरबॉक्स के एक टुकड़े को देखते हुए, उसकी आँखें अचानक सिकुड़ गईं।

उसने उस ग्रीस लगे टुकड़े को आंखों के करीब किया। फिर उसने पास रखे दूसरे टुकड़े को उठाया और दोनों को जोड़कर देखा। तारा का दिमाग तेज़ी से दौड़ने लगा। वो दर्द और थकान भूल गई।

तभी भारी कदमों की आवाज़ उसके करीब आई।

कबीर उसके सिर पर आकर खड़ा हो गया। उसका साया तारा के ऊपर पड़ रहा था। कबीर ने ब्लैक टी-शर्ट पहन ली थी और अब वो और भी ज़्यादा खतरनाक लग रहा था।

"काफी हो गया तुम्हारा ये ड्रामा," कबीर ने सर्द लहज़े में कहा। "मुझे पता है तुम थक चुकी हो। तुम्हारे हाथ कांप रहे हैं। एक्सेप्ट करो कि तुम इस दुनिया के लिए नहीं बनी हो। हार मान लो, तारा। मैं तुम्हें इसी वक्त यहाँ से जाने दूंगा।"

तारा ने धीरे से अपना चेहरा उठाया। उसकी आँखों में आंसू नहीं थे, बल्कि एक ऐसी आग थी जिसने कबीर को एक सेकंड के लिए पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

बिना कुछ कहे, तारा खड़ी हुई। वो कबीर के इतने करीब आ गई कि उसके कपड़ों से आती ऑयल की बदबू कबीर की महंगी परफ्यूम से टकराने लगी।

"तुम एक बात जानते हो, कबीर?" तारा की आवाज़ धीमी, लेकिन धारदार थी। "तुम सिर्फ एक बिगड़े हुए, घमंडी रईसज़ादे हो जिसे लगता है कि वो दुनिया का सबसे बेहतरीन रेसर है। लेकिन असलियत ये है कि तुम बेवकूफ हो।"

गैरेज में अचानक सन्नाटा छा गया। नील के हाथ से पिज़्ज़ा छूट गया। देव गुस्से से आगे बढ़ा, "तूने क्या कहा..."

"शांत!" कबीर ने अपना हाथ उठाकर देव को रोका, लेकिन उसकी आँखें तारा पर गड़ी थीं। कबीर का जबड़ा इतना सख्त हो गया था कि जैसे वो अभी किसी की जान ले लेगा। "तुम अपनी हद पार कर रही हो।"

"और तुम अपनी कार की लिमिट्स को इग्नोर कर रहे हो," तारा ने वो गियरबॉक्स का भारी, ग्रीस लगा टुकड़ा सीधा कबीर के सीने पर दे मारा।

कबीर ने झटके से उसे कैच किया। उसका ब्लैक टी-शर्ट ग्रीस से गंदा हो गया, लेकिन तारा को इसकी कोई परवाह नहीं थी।

"तुम्हें लगता है तुम्हारी कार का इंजन इसलिए फेल हुआ क्योंकि वो पुराना था?" तारा ने अपनी उंगली कबीर के सीने पर सख्त अंदाज़ में रखते हुए कहा। ये पहली बार था जब उसने कबीर को छुआ था। दोनों के बीच एक इलेक्ट्रिक करंट सा दौड़ा। कबीर की सांसें अचानक भारी हो गईं।

तारा उसके और करीब आई, उनका चेहरा बस कुछ इंच की दूरी पर था।

"ये इंजन फेल नहीं हुआ, कबीर। तुमने इसे मारा है," तारा की आँखें कबीर की आँखों में गहराई से झांक रही थीं। "मैंने इन पार्ट्स को सिर्फ साफ नहीं किया, मैंने इन्हें पढ़ा है। तुम्हारे थर्ड गियर का शाफ्ट (shaft) मुड़ा हुआ है। तुम्हारी क्लच प्लेट्स घिस कर आधी रह गई हैं। तुम टर्न्स पर कार को गियर डाउन करके स्मूदली मोड़ने के बजाय, थर्ड गियर में ही एक्सिलरेटर को रेडलाइन (redline) तक पुश करते हो। तुम मशीन के साथ ज़बरदस्ती करते हो, कबीर। तुम उसे टॉर्चर करते हो। और तुम्हारा ये अंधा, बेवकूफाना गुस्सा ट्रैक पर तुम्हारी जान लेगा।"

आर्यन खन्ना, जो अब तक शांत था, उसकी उंगलियां कीबोर्ड पर तेज़ी से चलने लगीं। कुछ सेकंड बाद, उसने अपनी स्क्रीन की तरफ देखा और उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।

"कबीर..." आर्यन की आवाज़ में पहली बार हैरानी थी। "वो सही कह रही है। पिछले दो क्रैश का टेलीमेट्री डेटा बता रहा है कि टर्न-4 पर तुमने हर बार गियर शिफ्ट मिस किया था और इंजन पर 120% स्ट्रेस डाला था। ओवरहीटिंग की वजह वही थी।"

नील और देव ने एक-दूसरे को शॉक में देखा।

कबीर के हाथ में वो भारी गियरबॉक्स का टुकड़ा था। उसने धीरे-धीरे अपनी नज़रें आर्यन की स्क्रीन से हटाकर वापस तारा के चेहरे पर डालीं।

तारा अभी भी वहीं खड़ी थी, निडर, बेखौफ, और बेहद खूबसूरत—हाँ, उस ग्रीस और पसीने में भी, वो कबीर को अपनी ज़िंदगी में देखी गई किसी भी लड़की से ज़्यादा खूबसूरत और खतरनाक लग रही थी।

कबीर के अंदर एक अजीब सी हलचल मच गई। नफरत? हाँ। गुस्सा? बहुत ज़्यादा। लेकिन इसके साथ ही एक ऐसा डार्क, इंटेंस अट्रैक्शन पैदा हो रहा था जिसे वो दबा नहीं पा रहा था।

उसने गियरबॉक्स को ज़मीन पर फेंक दिया। वो एक कदम और आगे बढ़ा, जिससे तारा को मजबूरन पीछे हटना पड़ा। कबीर तब तक आगे बढ़ता रहा जब तक तारा की पीठ गैरेज की ठंडी दीवार से नहीं टकरा गई।

कबीर ने अपने दोनों हाथ तारा के सिर के दोनों तरफ दीवार पर टिका दिए, उसे पूरी तरह से अपने घेरे में कैद कर लिया। तारा की सांसें तेज़ हो गईं। कबीर का चेहरा उसके चेहरे के इतने करीब था कि वो उसकी धड़कन महसूस कर सकती थी।

"तुम्हें लगता है तुम मुझे पढ़ सकती हो?" कबीर की आवाज़ एक खतरनाक फुसफुसाहट में बदल गई, जो सीधे तारा के कानों में जा रही थी। उसकी गर्म सांसें तारा के गालों को जला रही थीं। "तुम्हें लगता है तुम मेरे इंजन और मेरी ड्राइविंग के बारे में जानती हो?"

"डेटा कभी झूठ नहीं बोलता," तारा ने अपनी कांपती आवाज़ को कंट्रोल करते हुए कहा, लेकिन उसकी नज़रें कबीर के होठों पर जाकर अटक गईं।

कबीर ने उसकी उस नज़र को नोटिस किया और उसकी आँखों में एक डार्क, प्रीडेटर (शिकारी) वाली चमक आ गई।

"तो फिर कल ट्रैक पर आओ, स्ट्रैटेजिस्ट," कबीर ने अपनी आवाज़ और भी भारी करते हुए कहा। "कल रात अंडरग्राउंड स्ट्रीट रेस है। तुम मेरी कार में, पैसेंजर सीट पर बैठोगी। मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि जब मैं एक्सिलरेटर को रेडलाइन तक पुश करता हूँ... तो कैसा महसूस होता है। अगर तुम डर के मारे रो पड़ीं, तो तुम खुद ये टीम छोड़ दोगी।"

तारा ने अपनी ठुड्डी उठाई, कबीर के इस खतरनाक चैलेंज को सीधा स्वीकार करते हुए।

"और अगर मैं नहीं डरी तो?" तारा ने पूछा।

कबीर के होठों पर वो कातिलाना, एरोगेंट मुस्कान वापस लौट आई। उसने अपना चेहरा तारा के कान के पास लाया और ऐसी आवाज़ में बोला जिससे तारा के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

"तो मैं तुम्हें जो चाहोगी, वो दूंगा, तारा देसाई। लेकिन याद रखना... मेरी कार में बैठने के बाद, कोई वापस नॉर्मल होकर नहीं लौटता।"

कबीर पीछे हटा, उसने एक गहरी नज़र तारा पर डाली, और फिर मुड़कर गैरेज से बाहर निकल गया।

तारा दीवार से टिकी, लंबी-लंबी सांसें ले रही थी। उसका दिल सीने से बाहर आने को हो रहा था। उसे नहीं पता था कि कल रात की वो रेस उसे कबीर के कितने करीब ले जाने वाली थी—या कितनी बुरी तरह तबाह करने वाली थी।

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