गुरु के कानून में माफी मतलब मौत
चलती हुई ट्रेन में एक 18 साल की लड़की अपने पापा से जिद कर रही थी ।।"पापा प्लीज दिला दीजिए ना "।।
वही उसके पापा उसकी जिद के आगे हार मानते हुए ट्रेन पर बेच रहा है कॉटन कैंडी को खरीद कर उसे दिल दिया।।
तभी उसकी मां मुंह बनाते हुए कही " बताओ यह भी कोई बात हुई ,लड़की 18 साल की हो गई ।।फिर भी बच्चों जैसी हरकतें करती रहती है ।।
तभी उस लड़की के पापा उसकी मां को चुप करते हुए कहे "बस भी करो हमारी बिटिया ही तो हमारी जान बसती है और इसकी कोई डिमांड हम पूरी न करें ऐसा हो ही नहीं सकता है" ।।
वह लड़की मुस्कुराते हुए कैंडी खाने लगी ।।
वही उसकी मां ना में आप सर हिलाते हुए कहीं "बस करो जी आप ही की वजह से लड़की बिगड़ गई है वक्त रहते काबू न किया ना तो बहुत मुश्किल हो जाएगी"।।
वही वह लड़की कैंडी खाते हुए अपने पापा से शिकायत करते हुए कही " पापा आप सच-सच बताना यह हमारी सच्ची में अम्मा है ना हमें तो लगता है ना कहीं सड़क से उठाकर लाइए ।।यह हमारी सगी अम्मा जैसी नहीं लगती है .....जब देखो तब हमें रोक-टोक करते रहती है" ।।
वही उसे लड़की की मां अपने मुंह पर हाथ रखते हुए कही "हे भगवान क्या बोल रही है तू मैं तेरी सगी मां ही हूं इसलिए थारे को इतना समझ रही हूं ।।यह बचपन ना कर अब थारी शादी ब्याह का समय हो गया है"।।
वह लड़की अपनी मां के बात सुनकर दांत दिखाने लगी यह लड़की है इस कहानी की हीरोइन रीवा बंसल ,उमर 18 साल, देखने में बला की खूबसूरत जैसे परि जमी पर उतर आई हो ,गोरा रंग जैसे सूरज की सुबह की पहली किरण, पतले कमर ,हार्टशेप होठ उसके ऊपर राइट साइड में एक तिल जैसे वो इस खूबसूरत चेहरे की पहरेदारी कर रहा हो ,डार्क ब्लैक आई , लंबे काले घने बाल जो कमर तक लहरा रहे थे ,छोटी की तीखी नाक।। कूल मिलकर रेवा का कोई जवाब नहीं था... खूबसूरती में।।
रेवा अपनी मां बाप का एकलौती ओलांद थी ।।उसकी मां का नाम शकुंतला बंसल और पिता का नाम राजेश बंसल।।
वही दूसरी तरह बनारस में ,
एक लड़का सड़क के बीचों बीच जीप के बोनट पर आंख बंद कर लेटा हुआ था ।।
तभी उसके सामने दो लड़के एक लड़के को पकड़ कर लेकर आए और बोले "भैया जी ले आए इसे "!!
उन लड़कों की आवाज सुनकर वह लड़का अपनी आंखे खोलता है और जीप के बोनट से छलांगा मार कर उन लोगों के सामने खड़ा हो गया।।
जिस लड़के को वो दोनों लड़कों ने पकड़ कर लाया था वह लड़का तुरंत जमीन पर बैठकर माफी मांगते हुए कहा "भैया जी हमें माफ कर दीजिए अगली बार से हम आपके साथ कोई गद्दारी नहीं करेंगे ,हम लालच में आ गए थे ।।भैया जी माफ कर दीजिए हमें"।।
सामने खड़ा लड़का अपनी पैनी नजरों से उसे लड़के को देखने लगा और फिर देखते हुए कहा "क्यों बे तेरे को मालूम नहीं है गुरु राठौर के कानून में माफी का मतलब मौत होता है वो भी बहुत बेरहम "।।
गुरु की आवाज सुनकर वह लड़का डर से कांपने लगा।।। अगर उन दोनों लड़कों ने उसे नहीं पड़ा होता तो अभी वह गिर पड़ता।।
गुरु वापस से बोनट पर बैठ पोस्टल को अपने हाथ में नाचते हुए दोनों लड़कों की तरफ देखते हुए कहा "बंटी राघव तो इसकी मौत की सजा सुनाई जाए और इसकी सजा यह है कि इसके दोनों हाथों में रसिया बांधकर पथरीले रस्ते पर कम से कम 10 राउंड घसीटा जाए"।।
बंटी नाराज होते हुए कहा" का भैया जी एक तो इसको पकड़ने में इतना मेहनत किया है और बस 10 राउंड ही आपको नहीं लगता है थोड़ा काम है कहे राघव" ।।
राघवी बंटी के हा में हा मिलते हुए कहा "हां गुरु भैया साला बहुत भगाया है"।।
गुरु अपने हाथ में पिस्टल नाचते हुए कहा अच्छा "ऐसा बात है एक काम करो उसके दोनों हाथ को रसि से बांध के पीछे बुलेट में बांध लो और जितना राउंड हो सके उतना घसीटो तुम लोग ....जब तक मर न जाए ये कमीना"।।
बंटी अपना हाथ जोड़ते हुए कहा "वाह भैया धन्य है आप क्या इंसाफ करते हैं..."!!"इंसान दोबारा उठकर आपसे कोनो शिकायत भी नहीं कर सकता है"।।
वह लड़का चीखे मार मार के अपनी माफी की गुहार कर रहा था ।।लेकिन उन तीनों में से किसी का भी दिल उसके लिए नहीं पिघला ।।
बल्कि वह तीनों उसे लड़की को देखकर हंस रहे थे...!!
तो यह है हमारे कहानी के हीरो गुरु राठौर,उमर 30 साल,रंग गोरा जैसे ग्रीक गोद हो , मस्कुलर कसा हुआ शरीर जैसे ना जाने जिम में कितने पसीने बहाए गए हो , ब्रॉड चेस्ट , काले बाल जो सलीके से कॉम्ब किए हुए ,v शेप्ड अट्रैक्टिव कमर , एट एप्स...,!!
गुरु की सजा के अनुसार उसके दोनों दोस्त बंटी और राघव उसे लड़के को वहां से खींचते हुए ले गए ।।।गुरु भी वहां से जीप में बैठकर हवेली की तरफ निकलगया।।
राठौर हवेली ,
राठौर हवेली के आसपास इतनी ज्यादा मात्रा में सिक्योरिटी थी कि कोई कोई पंछी भी पर मर ना सके इंसान तो बहुत दूर की बात।।
राठौर हवेली में सबसे बड़ी थी दुर्गावती राठौर जिसे लोग अम्मा जी भी बुलाते है ।। अम्मा जी पुराने खयाले वाली औरत है ।।लेकिन उन्होंने राठौर परिवार को एक फूलों की माला की तरह संजोकर रखा था ।।
वह बाहर से दिखने में बहुत सख्त है , लेकिन अंदर से दिल उतना ही उनका नरम है ।। वह अपने परिवार को हर चीज से ऊपर रखती हैं.... लेकिन संस्कारों और परंपरा के मामलों में वह किसी तरह की कोई गलती बर्दाश्त नहीं कर सकती है ।।
दुर्गावती राठौर के दो बेटे एक का नाम अविनाश और दूसरा का नाम पुष्कर।। दुर्गावती राठौर के पति कई वर्ष पहले ही गुजर गए....उन्होंने अकेले अपने दोनों बेटों को संभाल कभी उन्हें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी ....इतना ही नहीं उन्होंने बनारस के अपना सीका अपने पति के गुजरने के कायम रखा ।।
आप सब अपना कॉमेंट जरूर दीजिए जिसे मैं सेकंड चैप्टर अपडेट करूं।।