The Sheikh unwanted wife' Ch. 1

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Posted by iskibutterfly iskibutterfly • Sep 15, 2026 07:04 PM

एपिसोड 1 — पहली मुलाकात

रात काफी गहरी हो चुकी थी।

पूरी विला में सन्नाटा पसरा हुआ था। बाहर दुबई की चमकती हुई रात थी, लेकिन इस आलीशान कमरे के अंदर जैसे वक्त ठहर गया था।

कमरे में मौजूद दोनों सर्वेंट्स ने डाइनिंग टेबल पर खाना सजा दिया था।

“गुड नाइट, मैडम।”

दोनों ने हल्की आवाज में कहा और कमरे से बाहर निकल गए।

दरवाजा बंद हुआ।

कुछ सेकंड बाद बाहर से लॉक होने की आवाज आई।

लड़की की नजर दरवाजे पर टिक गई।

वह कुछ देर तक उसी तरफ देखती रही।

फिर धीरे-धीरे बेड से उठी।

उसने पिछली रात से कुछ नहीं खाया था। भूख अब इतनी बढ़ चुकी थी कि उसके पेट में दर्द होने लगा था।

वह डाइनिंग टेबल तक पहुंची।

लेकिन अगले ही पल उसके कदम रुक गए।

टेबल पर तरह-तरह के पकवान रखे थे।

लेकिन हर प्लेट में नॉनवेज था।

उसका चेहरा उतर गया।

वह वेजिटेरियन थी।

उसने तुरंत नजरें फेर लीं।

“मुझे यहां लाकर इन्हें इतना भी नहीं पता कि मैं क्या खाती हूं?”

उसकी आवाज में नाराजगी थी।

वह वापस बेड की तरफ जाने लगी, लेकिन बीच रास्ते में रुक गई।

उसे अचानक अपने पुराने घर की याद आ गई।

मां के हाथ का खाना...

वह कुछ पल के लिए आंखें बंद करके खड़ी रही।

फिर खुद को संभालते हुए बाथरूम में चली गई।

शावर ऑन हुआ।

पानी की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी।

करीब आधे घंटे बाद वह बाहर आई।

उसने अपने बाल सुखाए और फिर कमरे में रखे उस बैग को खोला जिसे कुछ देर पहले सर्वेंट छोड़कर गया था।

अंदर कई महंगे कपड़े थे।

वह हर ड्रेस को कुछ सेकंड देखती रही।

फिर उसने एक सिंपल ग्रीन ड्रेस निकाली।

“कम से कम ये तो मेरी पसंद की है।”

वह ड्रेस पहनकर आईने के सामने खड़ी हुई।

चेहरे पर थकान साफ दिखाई दे रही थी।

लेकिन आंखों में एक अजीब-सा सवाल था—

आखिर उसे यहां लाया क्यों गया था?

उसे अभी तक इस घर के मालिक से ठीक से मिलने का मौका भी नहीं मिला था।

सिर्फ उसका नाम सुना था।

रियाज़ अल-फारिस।

दुबई के सबसे ताकतवर परिवारों में से एक का वारिस।

लोग उसके बारे में तरह-तरह की बातें करते थे।

कुछ उसे बिजनेस जीनियस कहते थे।

कुछ उसे बेरहम।

और कुछ कहते थे कि रियाज़ अल-फारिस के सामने अपनी बात रखने की हिम्मत बहुत कम लोगों में थी।

लड़की ने उन बातों को हमेशा अफवाह समझा था।

लेकिन आज...

उसे यकीन होने लगा था कि शायद उनमें कुछ सच्चाई थी।

रात के करीब एक बज चुके थे।

कमरे की सारी लाइटें बंद थीं।

लड़की गहरी नींद में थी।

तभी—

क्लिक।

दरवाजा खुला।

एक लंबा आदमी कमरे में दाखिल हुआ।

उसकी चाल में ऐसी ठंडक थी जैसे इस घर में उसके लिए कोई चीज अनजान न हो।

वह सीधे बाथरूम की तरफ चला गया।

कुछ देर बाद शावर की आवाज सुनाई दी।

करीब आधे घंटे बाद वह बाहर आया।

उसने कमरे की लाइट ऑन की।

उसकी नजर सबसे पहले कमरे के कोने पर गई।

फिर सोफे पर।

फिर डाइनिंग टेबल पर।

और आखिर में...

बेड पर।

वह कुछ सेकंड वहीं खड़ा रहा।

बेड पर सोई लड़की उसके लिए पूरी तरह अनजान थी।

रियाज़ की भौंहें सिकुड़ गईं।

“तो यही है वो लड़की...”

उसने बेहद धीमी आवाज में कहा।

वह कुछ कदम आगे बढ़ा।

उसके गीले बालों से पानी की एक बूंद नीचे गिरी।

लड़की के चेहरे पर पानी की हल्की ठंडक महसूस हुई।

उसकी आंखें खुल गईं।

और अगले ही पल वह घबराकर उठ बैठी।

सामने एक अजनबी आदमी खड़ा था।

लंबा कद।

सख्त चेहरा।

भीगे बाल।

और आंखों में ऐसा ठंडा भाव कि लड़की कुछ सेकंड तक बोल ही नहीं पाई।

रियाज़ ने उसे देखा।

“तुम।”

लड़की ने तुरंत बेड से नीचे उतरते हुए पूछा,

“आप कौन हैं?”

रियाज़ की भौंह उठी।

“मेरे घर में मेरे ही कमरे में खड़ी होकर तुम मुझसे पूछ रही हो कि मैं कौन हूं?”

लड़की कुछ पल उसे देखती रही।

फिर उसे समझ आया।

“रियाज़...?”

“कम से कम नाम तो याद है।”

लड़की ने तुरंत दरवाजे की तरफ देखा।

रियाज़ ने उसकी नजर समझ ली।

“दरवाजा बाहर से लॉक है।”

लड़की की आंखों में गुस्सा आ गया।

“क्यों?”

“क्योंकि इस घर में नियम हैं।”

“और अगर मुझे ये नियम पसंद नहीं?”

रियाज़ उसके सामने आकर रुक गया।

“तो तुम्हें यहां रहना मुश्किल लगेगा।”

लड़की ने उसकी आंखों में सीधा देखते हुए कहा,

“मुझे यहां रहना पहले से ही पसंद नहीं है।”

कमरे में अचानक खामोशी छा गई।

रियाज़ को शायद ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी।

उसने सोफे की तरफ जाकर बैठते हुए कहा,

“तुम्हें अपने हालात समझने चाहिए।”

“मैं अपने हालात अच्छी तरह समझती हूं।”

“फिर डर नहीं लग रहा?”

लड़की ने कुछ पल उसे देखा।

उसकी आवाज धीमी थी, लेकिन शब्द मजबूत थे।

“डर लग रहा है।”

रियाज़ ने भौंहें सिकोड़ लीं।

“फिर भी इतनी हिम्मत?”

“डरने का मतलब ये नहीं कि मैं अपनी बात कहना छोड़ दूंगी।”

रियाज़ चुप हो गया।

वह उसे ध्यान से देखने लगा।

लड़की भी अब समझ चुकी थी कि सामने वाला आदमी आसानी से प्रभावित होने वालों में से नहीं है।

रियाज़ ने टेबल पर रखा गिलास उठाया।

“तुमने खाना क्यों नहीं खाया?”

लड़की ने तुरंत जवाब दिया,

“क्योंकि मैं वेजिटेरियन हूं।”

रियाज़ की नजर डाइनिंग टेबल पर गई।

उसने एक पल के लिए कुछ नहीं कहा।

फिर फोन निकाला।

“शेफ को अभी बुलाओ।”

लड़की चौंकी।

“क्यों?”

रियाज़ ने उसकी तरफ देखे बिना कहा,

“तुम्हारे लिए खाना बनवाना है।”

लड़की कुछ पल शांत रही।

उसे उम्मीद नहीं थी कि वह उसकी बात सुनेगा।

लेकिन फिर रियाज़ ने फोन रखते हुए कहा,

“इसका मतलब ये मत समझना कि मैं तुम्हारी परवाह करता हूं।”

लड़की के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आई।

“मैंने ऐसा सोचा भी नहीं।”

रियाज़ ने पहली बार उसे गौर से देखा।

उसकी आंखों में डर था।

थकान थी।

लेकिन उसके बावजूद वह उसके सामने झुक नहीं रही थी।

रियाज़ सोफे से उठ गया।

“सो जाओ।”

वह दरवाजे की तरफ बढ़ा।

लड़की ने पीछे से पूछा,

“और सुबह?”

रियाज़ रुक गया।

“सुबह तुम्हें इस घर के सारे नियम बताए जाएंगे।”

“और अगर मैंने नियम मानने से मना कर दिया?”

रियाज़ ने पीछे मुड़कर देखा।

उसकी आंखों में वही ठंडा आत्मविश्वास था।

“तो फिर हम दोनों के बीच असली समस्या वहीं से शुरू होगी।”

दरवाजा खुला।

रियाज़ बाहर चला गया।

दरवाजा फिर बंद हो गया।

लड़की कुछ देर तक उसी दरवाजे को देखती रही।

उसने धीमे से खुद से कहा—

“रियाज़ अल-फारिस... तुम जितने बेरहम दिखते हो, शायद उससे भी ज्यादा हो।”

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