मूमल, एक कहानी संग्रह Ch. 3

आत्मा को शांति

Posted by Mamta Meena • Sep 05, 2026 02:16 PM

अंजलि (परिवर्तित नाम) मेरी बचपन की बेस्ट फ्रेंड थी हम दोनों में उम्र का 10 -11 महीने का अंतर था,,,,,, अंजली मुझसे 10 -11 महीने बड़ी थी,,,,,,,

लेकिन दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे बचपन से ही साथ साथ खेले कूदे थे दोनों का घर भी पास में था ऐसे में दोनों अच्छी सहेली भी थे,,,,,,,,

अंजलि छह भाई-बहनों में पांचवें नंबर की थी सबसे बड़ी उसकी बहन उससे छोटा भाई और उस से छोटी 2 बहीने और उनसे छोटी थी अंजलि और सबसे छोटा एक भाई था,,,,,,,

अंजलि के माता-पिता खेती बाड़ी का काम करते थे घर की आर्थिक स्थिति ठीक-ठाक थी,,,,,,

अंजलि पढ़ने लिखने में बहुत अच्छी थी हमेशा क्लास में प्रथम आती थी,,,,,,,

स्कूल के सारे टीचर उसकी काफी तारीफें करते थे सब यही कहते कि अंजलि बड़ी होकर जरूर कोई बड़ी अफसर बनेगी,,,,,,, बह खेलने कूदने हर चीज में आगे रहती थी,,,,,,,

हम दोनों हमेशा से ही साथ रहे थे क्लास में साथ बैठना उठना खेलना हम दोनों का साथ होता था,,,,,,

नौवीं क्लास तक हम दोनों साथ साथ पढ़े लेकिन उसके बाद अंजलि अपने बड़े भाई के साथ शहर चली गई जहां पर उसका भाई प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहा था,,,,,,,

और शहर में अब अंजलि आगे की पढ़ाई करने लगी, उसके बाद धीरे-धीरे हम दोनों की मुलाकात बहुत कम हो गई,,,,,,,

अंजली के परिवार में उसी समय एक हादसा हुआ, हादसा यह था कि अंजलि की बड़ी बहन जो कि उस समय मात्र सोलह 17 साल की थी,,,,,,,

एक लड़के के बहकावे में आकर उसके साथ घर छोड़कर भाग गई,,,,,,

बाद में उसके घर वालों ने उसे ढूंढा और उसका विवाह भी कर दिया,,,,,,

उस हादसे के बाद अंजलि के घर वाले गांव में लोगों से बहुत कम बातें करते थे,,,,,,

अंजलि भी लोगों से ज्यादा बात ही नहीं करती थी बह कभी कबार गांव आती,,,,,,,

धीरे-धीरे समय गुजरता गया अंजली और मेरी कभी कबार ही साल में मुलाकात हो पाती थी, हम दोनों अपनी अपनी पढ़ाई में व्यस्त थे,,,,,,,

12वीं क्लास के बाद अंजली का कम उम्र में ही उसके माता-पिता ने यह सोचकर विवाह कर दिया कि जो हरकत इसकी बड़ी बहन ने की है कहीं इसने भी कर दी तो,,,,,,

ऐसे में अंजली का 12वीं क्लास के बाद में विवाह कर दिया गया और अंजलि बहुत कम उम्र में ही जब बह ठीक से 18 साल की भी नहीं हुई थी अपनी ससुराल चली गई,,,,,,,

गांव में किसी से भी उसके परिवार की बोलचाल ज्यादा नहीं थी इस वजह से अंजलि के विवाह में भी किसी को नहीं बुलाया गया,,,,,,,

धीरे-धीरे समय गुजरने लगा जब अंजली का विवाह हुआ था उस समय अंजलि के घर वाले अंजलि के ससुराल वालों की काफी तारीफ करते थे कि उसके ससुर एक सरकारी नौकरी से रिटायर थे जेठ एक सरकारी कॉन्स्टेबल था और अंजली का पति जो कि अभी प्रतियोगिताओं की ही तैयारी कर रहा था,,,,,,,,

अंजलि के ससुराल वालों ने विवाह के समय कहा था कि वे लोग अंजलि को बिल्कुल बेटी की तरह रखेंगे उसकी आगे की पढ़ाई भी करवाएंगे अंजलि इस बात से काफी खुश थी,,,,,,

लेकिन धीरे-धीरे उसके ससुराल वालों ने अंजलि को दहेज लाने के लिए परेशान करना शुरू कर दिया,,,,,,

शादी के लगभग डेढ़ साल बाद ही अंजलि ने एक बेटे को जन्म दिया,,,,,,,

उस समय परंपरा के हिसाब से जब अंजलि के माता-पिता ने अंजलि के भाई को उसके बच्चे और ससुराल वालों के लिए कपड़े और कुछ उपहार देकर भेजा,,,,,,,,,

तब उसके ससुराल वालों ने ₹100000 और काफी कुछ उपहारों की मांग कर उसे वापस बेइज्जत कर लौटा दिया,,,,,,,,

वे लोग अंजलि को दिनोंदिन परेशान करते गए अंजलि किसी से अपना दर्द कह नहीं पाती,,,,,,,

क्योंकि बह अपने माता-पिता से कुछ कह कर उन्हें परेशान करना नहीं चाहती थी बह अपनी मायके भी बहुत कम आती,,,,,,,

उसके ससुराल वाले उसके साथ मारपीट करते थे यहां तक कि उसके मायके वालों ने उसकी शादी में जो सोने चांदी के गहने दिए थे बह भी उसके ससुराल वालों ने हड़प लिए,,,,,,,

अंजलि के माता-पिता को इन सब के बारे में पता चल गया लेकिन यह सोचकर बे लोग कुछ नहीं कर सके कि धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा,,,,,,,

अंजली का पति अंजली के साथ मारपीट करता उसकी जेठानी उसे काफी परेशान करती,,,,,, अंजलि के सास नहीं थी उसकी सास की काफी वर्षों पहले ही मौत हो चुकी थी,,,,,,,

अंजलि के ससुर और पति दोनों ही उसकी जेठानी का पक्ष लेते लेकिन अंजली का जेठ गांव बहुत कम आता था अधिकतर अपनी नौकरी के कारण शहर में ही रहता था वह अंजलि से कुछ नहीं कहता था,,,,,

धीरे-धीरे अंजलि को जो सच्चाई पता चली उसे जानकर तो वह काफी हैरान रह गई है,,,,,,

उसके जेठ तो अधिकतर अपनी नौकरी के सिलसिले में बाहर रहते थे जेठानी दोनों बच्चों के साथ गांव में ही रहती,,,,,,,

अंजली का विवाह हुआ था उस समय कुछ औरतों ने उससे इस बारे में कहा लेकिन अंजलि ने कभी किसी की बात पर यकीन नहीं किया,,,,,,,

लेकिन अपनी ससुराल में रहते हुए उसे भी सच्चाई मालूम हो गई की अंजली की जेठाने के उसके ससुर और अपने देवर यानी अंजलि के पति के साथ नाजायज संबंध थे,,,,,,,,

जिसकी वजह से अंजलि की जेठानी के भड़काने पर अंजलि का पति अंजलि के साथ मारपीट करता था,,,,,,

कोई भी अंजलि का साथ देने वाला नहीं था अंजलि के ससुर की अंजलि पर भी गलत नजर थी,,,,,,,

जब अंजलि का विवाह हुआ तो उसके ससुर ने उसे पढ़ने के लिए शहर में एक हॉस्टल में रख दिया उसे कभी किसी चीज की कमी नहीं होने देता था,,,,,,

अंजलि अपने ससुर का अपने पिता की तरह मान देती थी लेकिन उसके ससुर कि इसके पीछे एक गलत नियत थी,,,,,,

जब उसके ससुर को एहसास हुआ कि अंजलि कभी भी उसकी झांसे में आने वाली नहीं है क्योंकि अंजलि एक संस्कारी लड़की थी,,,,,,,

तब उसके ससुर ने उसकी जेठानी का साथ देकर अंजलि को परेशान करना शुरू कर दिया जिससे अंजलि उसकी गलत इच्छा को पूरी करें,,,,,,

अपने ससुर के गलत इरादों को भाप कर भी अंजलि  अपने आप की इज्जत को बचाए रखना चाहती थी,,,,,,

बह अपनी मां से हमेशा कहती की मां जब मेरा बेटा थोड़ा बड़ा हो जाएगा तुम इसे अपने पास रख लेना क्योंकि तब पढ़ाई मैं दिन-रात मेहनत करूंगी और देखना मैं एक दिन अपने पैरों पर खड़ी हो जाऊंगी जिससे मेरा और मेरे बेटे का जीवन सुधर जाएगा,,,,,,,

अंजलि सब कुछ सहन करके भी अपने बेटे के कारण जिंदा थी, वह चाह कर भी कोई फैसला नहीं ले पा रही थी,,,,,,,

क्योंकि उसकी बड़ी बहन ने जो हरकत की थी उसकी वजह से उसके परिवार को काफी कुछ सहना पड़ा था लोग उनकी इज्जत पर कीचड़ उछाल देते उन्हें बोलने नहीं देते थे,,,,,,,

अंजली सोचती कि अगर बह भी अपने पति से तलाक लेने के बारे में सोचेगी या उनके खिलाफ शिकायत करेगी तो उसके परिवार पर फिर लोग कीचड़ उछाल देगे,,,,,,,

पहले ही उसकी बहन की वजह से उसके परिवार को काफी कुछ सहन करना पड़ा था ऐसे में वह अपने परिवार को और तकलीफ नहीं दे सकती,,,,,, यह सोच कर भी कुछ नहीं कर पाती थी,,,,,,

एक बार अंजलि के ससुराल वालों ने दहेज के कारण उसके साथ मारपीट की और उसके बाद अंजलि अपने मायके में आ गई,,,,,,

उसने अपने घर वालों को इस बार इस बारे में बताया लेकिन उसके घर वालों ने उसे समाज की दुहाई देकर चुप करवा दिया,,,,,,,

तब एक दिन जब मैं मंदिर जा रही थी सुबह के टाइम तब अंजलि मुझे मिली,,,,,,

गांव में लोगों को मुझे किसी को नहीं पता था कि अंजलि को उसके ससुराल वाले इतना परेशान करते हैं,,,,,,

तब मैंने उससे उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा तब उसने कहा कि जब मेरा बेटा थोड़ा बड़ा हो जाएगा तो मैं अच्छे से पढ़ाई करूंगी,,,,,,,

मैंने उससे पूछा कि अपनी ससुराल कब जाओगी तो उसने बताया कि बस आज ही जा रही हूं,,,,,,, हम दोनों के बीच बस इतनी सी ही बातचीत हुई थी,,,,,,

लेकिन अगले दिन ही दोपहर के वक्त जो खबर मैंने सुनी उसके बाद तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई कि मुझसे मिलने के बाद ही अंजली अपनी ससुराल चली गई थी,,,,,,,

और उसके ससुराल वालों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और उसे जिंदा जला दिया,,,,,,

रात के अंधेरे में शायद कोई उसकी चीख सुनने वाला भी नहीं था, पता नहीं कैसे उन लोगों ने उसके साथ मारपीट की थी क्या अत्याचार किए थे उसके साथ,,,,,,,

लेकिन सुबह जब बे लोग अंजलि को अंजलि अध्दजली हालत में शहर दिखाने के लिए लेकर जाने लगे यह सोचकर की अंजलि बचने से तो रही लेकिन लोगों के सामने वे लोग बेकसूर साबित हो जाएंगे,,,,,,,

क्योंकि अंजलि के ससुराल वाले घर के चारों तरफ एक काफी ऊंची चारदीवारी थी जिसकी वजह से अंदर की आवाज बाहर के लोगों को कम सुनाई देती लेकिन फिर भी रात के समय अंजली की आती आवाजों को सुनकर आसपास के लोगों को कुछ शक हुआ था,,,,,,

जिसकी वजह से वे लोग उसे शहर दिखाने लेकर जाने लगे आसपास के लोगों से उन्होंने कहा कि अंजलि ने रात को खुद के ही आग लगाकर अपनी जान देने की कोशिश की है,,,,,,,,

जब बे लोग अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल में भर्ती करते ही अंजलि की मौत हो गई,,,,,,,

तब डॉक्टर ने अंजलि की जली लास को जब देखा तो उसके ससुराल वालों को लाश देने से साफ इंकार कर दिया और तुरंत इस बात की सूचना पुलिस को दी,,,,,,

तब पुलिस आई अंजलि के घर वालों को भी इस बारे में सूचना दी गई,,,,,,

जब अंजली के मायके वालों ने यह खबर सुनी तो सब का रो रो कर बुरा हाल था,,,,,,,

उनके रोने की आवाज सुनकर जब मैंने उनके घर की तरफ देखा तो किसी ने इस बारे में मुझे बताया,,,,,,

तब मेरी आंखों में आंसू आ गए कि अचानक यह सब कुछ कैसे हो गया कल ही तो अंजलि मुझे मिली थी,,,,,,,

आस-पड़ोस के लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था कि अंजली अब इस दुनिया में नहीं है,,,,,,,,

अंजलि के माता-पिता भाई भाभी सब अस्पताल पहुंच चुके थे,,,,,,

अंजलि की लाश को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता था कि अंजलि ने सुसाइड करने की कोशिश नहीं की थी उसकी हत्या करने की कोशिश की गई है,,,,,,

क्योंकि अंजली का आगे का हिस्सा जला हुआ था जबकि उसके बाल जले हुए कम थे,,,,,

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह साफ जाहिर हो गया था कि अंजलि के साथ पहले बेरहमी से मारपीट की गई है और फिर उसे जलाया गया है,,,,,,

अंजलि की लाश को उसके घर वालों को दिया गया अंजली की मौत के बाद अंजली की जेठानी अंजलि के बेटे को लेकर और अपने बच्चों को लेकर कहीं भाग गई,,,,,,,,

पहले तो अंजलि के ससुराल वाले अपने आप को बेकसूर बताते रहे,,,,,,

लेकिन जब अंजली के भाई ने अपने मोबाइल रिकॉर्डिंग में अंजली के ससुराल वालों द्वारा अंजली के मायके वालों को दी गई धमकी उनके द्वारा की गई दहेज की मांग की रिकॉर्डिंग सुनाई तो पुलिस ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया,,,,,,

अंजली के माता पिता ने उसके ससुराल में जाकर उसका अंतिम संस्कार किया,,,,,,

धीरे-धीरे पुलिस कार्रवाई शुरू हुई अंजलि के ससुराल वालों ने अंजलि के मायके वालों को काफी कोशिश की रिश्वत देने की,,,,,,

लेकिन एक बेटी एक जाने का गम क्या होता है यह उसके माता-पिता भी समझते थे,,,,,,,

अंजलि के बेटे की किसी को कोई खोज खबर नहीं थी कि वह जिंदा है या मर गया,,,,,,

धीरे-धीरे समय गुजरा और अंजलि को न्याय मिला लेकिन अंजलि के पति ने सारा कसूर अपने ऊपर ले लिया और उसे ही सजा हुई,,,,,,

उस घटना के बाद अंजलि के ससुराल वालों की कभी हिम्मत नहीं हुई गांव में आकर उस घर में रहने की बह घर हमेशा के लिए बंद हो गया और कुछ ही समय में एक भूतिया घर यानी एक खंडहर में तब्दील हो गया,,,,,,,

कई बार सुनने को आया कि अंजली का बेटा आज भी जिंदा है अंजलि के मायके वालों से कभी वह मिला नहीं है,,,,,,,

अंजलि के ससुराल वाले घर में अब कोई नहीं रहता है अंजलि की मौत के बाद बे लोग शहर में जाकर रहने लग गए थे अंजली का पति जेल में था,,,,,,,

ऐसे में अंजलि के ससुराल के बंद पड़े घर के बारे में काफी कुछ बातें सुनने को मिली,,,,,,

एक बार हमारी ही गांव में रिश्ते में हमारी दादी लगने वाली एक औरत अपने मायके गई,,,,,,

अपने मायके में उसके रिश्ते में उसकी एक भाभी लगती थी जो कि अंजलि के ससुराल की थी,,,,,,

उसकी उस भाभी का मायका अंजलि के ससुराल वाले घर के बिल्कुल पास के घर में था,,,,,,

उसने उस औरत को जो हमारी दादी लगती थी उसे बताया कि आज भी हर रात को उस घर में चीखने चिल्लाने की आवाज आती है,,,,,,

बह घर जो कि चारों तरफ काफी ऊंची चारदीवारी से घिरा हुआ है पूरी तरह बंद है डर की वजह से कोई उसके आसपास भटकता भी नहीं है,,,,,,

उस घर में रात के समय आज भी कभी बर्तन फेंकने की रोने की चीखने चिल्लाने की आवाज आती है जैसे कोई अपने आपको बचाने की गुहार लगा रहा हो,,,,,,,

सब लोगों का कहना है कि आज भी हर रात अंजली की आत्मा अपने आप को बचाने के लिए चिल्लाती है,,,,,

शायद जो कुछ उसकी आत्मा की साथ हुआ उसके बाद उसकी आत्मा को शांति नहीं मिल पाई है बह अभी मुक्त नहीं हुई है,,,,,,,

यह बात उस दादी ने गांव में सब को आकर बताई कुछ लोगों को इस पर विश्वास हुआ और कुछ लोगों को नहीं,,,,,,,,

लेकिन फिर भी धीरे-धीरे कई लोगों के मुंह से हमने यही बात सुनी, आज भी शायद अंजलि की आत्मा उसी घर में कैद है वह अपने न्याय के लिए अपनी आत्मा की शांति के लिए आज भी चिल्ला रही है,,,,,,,

क्योंकि उसके पति को तो सजा मिल गई लेकिन उसकी जेठानी जो कि मुख्य दोषी थी उसे सजा नहीं मिल पाई है,,,,,,,

अंजली की मां अपनी बेटी के जाने के गम में काफी टूट गई थी,,,,,,

जब अंजलि जिंदा थी तो मेरे सपनों में बहुत कम आती थी लेकिन आज भी अंजलि मेरे सपनों में आती है हमारी बचपन की बातें हमें दिखाई देती है,,,,,,

कई बार सपनों में मैंने उससे पूछा कि लोग तो कहते हैं तुम मर गई लेकिन तुम तो जिंदा हो तो वह कहती है लोग झूठ बोलते हैं देखो मैं तो जिंदा हूं,,,,,,,

मैंने जब इस बारे में अपने घरवालों से कहा अपने कुछ जानकारों से कहा,,,,,,

तब हमारी जाने वाली एक ब्राह्मण आंटी ने कहा कि यह अच्छा संकेत नहीं है बह तुम्हारी बचपन की सहेली थी अगर बह इसी तरह तुम्हारे सपनों में आएगी तो कहीं ऐसा ना हो कि मैं तुम्हारे साथ फिर से रहने की चाह करें और तुम्हें अपने साथ ले जाए,,,,,,,

तब उसकी इस बात से मुझे डर लगा एक बार मैंने हाथ जोड़कर मन में ही कहा कि मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूं अंजलि मुझे डर लगता है प्लीज मुझे सपनों में मत दिखाई दिया करो,,,,,,

मैं जानती हूं इस बात पर आप लोग यकीन करोगे या नहीं लेकिन अंजली मुझे उसके बाद कुछ दिन तक दिखाई नहीं दी,,,,,,

लेकिन उसके बाद फिर से दिखाई देने लग गई लेकिन अब बह सपनों में मुझे ज्यादा दिखाई नहीं देती थी वह तभी मुझे दिखाई देती जब मुझे उसकी याद नहीं रहती मैं अपने दिलो-दिमाग से उसकी बातें निकाल चुकी होती है थोड़ी भूल गई होती तो शायद सब कुछ याद दिलाने के लिए बह उसी रात मुझे दिखाई दे जाती,,,,,,,

एक बार उसकी मां जब अंजलि के बारे में मुझसे बात कर रही थी तो मैंने इस बारे में उसकी मां से कहा तो उसकी मां ने कहा बेटा हमारी बेटी हमें आज तक दिखाई नहीं दी,,,,,,,

बेटा आज भी हमें अपनी बेटी के जाने का इतना गम है कि पूछो मत यह कहते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए,,,,,,

वह बोली अगर भगवान को हमसे हमारी बेटी को छीना था तो छीन लेता हम यह सोच लेते कि शायद भगवान ने उसे इतनी ही उम्र दी है,,,,,,

लेकिन उन दरिंदों ने उसे किस बेरहमी से मारा है कितना तड़पी होगी वह यह सोच कर आज भी रात को नींद नहीं आती है कैसे हमारी बेटी तड़प तड़प कर मरी है,,,,,,

अंजलि के जाने का दुख आज भी सबको है मैं आज भी अपनी उस प्यारी सी सहेली को याद करती हूं तो आंखें भर आती है,,,,,,

चाहे अंजलि इस दुनिया में नहीं है लेकिन मैं कभी उसे नहीं भूल पाऊंगी आज भी उसकी भी प्यारी सी मुस्कान मेरी आंखों में है,,,,,,

जहां एक नाजायज रिश्ते और एक दहेज की मांग ने एक मासूम से उसकी जिंदगी छीन ली,,,,,,

अंजलि और मैं बचपन की सहेलियां थी लेकिन शायद उसके साथ एक अटूट रिश्ता था तभी तो बह आज भी बह मुझे मेरे सपनों में दिखाई देती है,,,,,,

मैं आज भी अपने घर वालों से कहती हूं कि नौवीं क्लास तक हम अच्छी सहेलियां थी लेकिन उसके बाद तो हमारे बीच ना ज्यादा बोलचाल थी ना कभी ज्यादा मुलाकात हुई ना ज्यादा ऐसा कोई घनिष्ठ रिश्ता था,,,,,,

लेकिन यह बचपन कि दोस्ती का प्रभाव है कि आज भी वह मुझे हमेशा दिखाई देती हैं,,,,,

मैं नहीं जानती उसका मुझे सपनों में दिखाई देना शुभ है या अशुभ है लेकिन अब मुझे ना कोई डर लगता है अब मैं बस यही भगवान से प्रार्थना करती हूं कि अगर मेरी उस प्यारी सी सहेली की आत्मा को शांति ना मिली हो तो भगवान अब तो उसकी आत्मा को शांति दे उसे सकुन दे जो शायद उसे जीते जी नहीं मिला था,,,,,,

मेरी प्यार सहेली तुम हमेशा मुझे याद आती रहोगी, इस जन्म में तो तुम कभी मुझे मिल नहीं सकती लेकिन शायद अगले जन्म में तुम मुझे जरुर मिलोगी आज भी मेरा दिल  उठता है,,,,,,

यह कोई रचना नहीं मेरे जीवन की हकीकत है बस गोपनीयता बनाए रखने की दृष्टि से मैंने अपनी बेस्ट फ्रेंड का नाम बदल दिया है,,,,,,इस रचना को पढ़कर आपको कैसा लगा मुझे जरूर बताएं,,,,, 🙏🙏

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