Alpha's Replace Bride Ch. 1

Alpha's Replace Bride - Chapter 1

Posted by swarda sonwane • Aug 30, 2026 06:26 PM

वेदा के नजर से..

“माथेरान के जंगलों में ऐसे कई राज छिपे हैं, जिनकी कल्पना इंसान नहीं कर सकता। वहाँ कुछ ऐसे लोग रहते हैं जो दिखते बिल्कुल आम इंसानों जैसे हैं… लेकिन वो आम नहीं हैं।

यह कहानी उन्हीं में से एक पैक की है — और उस रात की, जब सब कुछ हमेशा के लिए बदल गया।

मैं **वेदा बंसल**, बंसल परिवार की सबसे छोटी बेटी, बिल्कुल शांत और गुमसुम रहने वाली। मेरी दुनिया हमेशा मेरी बहन **श्रेया** के चारों ओर ही घूमती रहती थी।

श्रेया – मेरी बड़ी बहन, बेहद खूबसूरत, आत्मविश्वासी और हर किसी का ध्यान खींचने वाली। और मैं उससे बिल्कुल अलग थी।

मैं अपनी बहन से बहुत प्यार करती हूं, लेकिन एक चीज़ ऐसी थी जो मुझे हमेशा चाहिए थी – वह था उसका **कॉन्फिडेंस**, जिसकी वजह से वह लोगों का ध्यान effortlessly अपनी ओर खींच लेती थी। मुझे हमेशा लगता था, काश मैं भी वैसा कर पाती। लेकिन लोगों को देखकर मेरा मुंह खुद-ब-खुद बंद हो जाता था।

श्रेया हमेशा लोगों के बीच रहती थी, हर कोई उसे पसंद करता था।

और कल – उसकी शादी थी। हम लोग शादी के लिए एक खूबसूरत बीच-साइड रिसॉर्ट में आए थे।

**अभय सिंघानिया** – मेरी श्रेया दीदी के होने वाले पति, हमारे पैक का राजा और सबसे शक्तिशाली अल्फा।  बाहर कोई नहीं जानता था कि हम कौन हैं; हम सबके बीच एक आम परिवार की तरह रहते थे।  माथेरान के जंगलों में हमारा पैक रहता था।

श्रेया दीदी पर मुझे थोड़ी जलन होती थी, और अभय की वजह से, क्योंकि चाहकर भी मैं उससे प्यार करना नहीं छोड़ सकती थी। जी हाँ, सच यह था कि मैं भी अभय से बहुत प्यार करती थी। हमेशा से।

लेकिन अभय और श्रेया बचपन से एक-दूसरे के साथ थे, और कल उनकी शादी होने वाली थी।

मैंने खुद को बार-बार समझाया कि उसके बारे में ना सोचूं, दूर रहूं, लेकिन मेरा दिल मेरे बस में नहीं था। जब भी वह सामने आता, मेरा दिल उसे देखकर जोर से धड़कने लगता था।

कल यह सब खत्म हो जाएगा। कल से वह मेरी बहन का पति बन जाएगा, और मैं उसके बारे में सोच भी नहीं सकती। वह मेरा कभी नहीं था, और शायद कभी नहीं होगा। उसे तो  पता भी नहीं होगा कि कोई है जो उसे बेहद प्यार करता है।

आज मेरी मां ने कहा कि मैं श्रेया दीदी के कमरे में जाकर कल के लहंगे की फिटिंग देख लूं। आखिरी मोमेंट पर कोई गड़बड़ न हो। अभय चाहता था कि उसकी होने वाली दुल्हन हर चीज़ में परफेक्ट दिखे और कल सबसे खूबसूरत लगे। वैसे भी, श्रेया दीदी बहुत खूबसूरत थी, फिर भी अभय कोई कमी नहीं रखना चाहता था।

श्रेया ने जितने लहंगे पसंद किए, उसने सब उठा लिए। वह सही मायने में एक राजा की रानी बनने वाली थी। कमरे में हर तरह के कपड़े बिखरे हुए थे। उसके साथ डिज़ाइनर भी थी।

श्रेया एक-एक लहंगा पहनकर आईने में खुद को देख रही थी और खुश हो रही थी। हर चीज़ उसके ऊपर परफेक्ट लग रही थी।

लेकिन जब वह लहंगा बदल रही थी, मेरी नजर अचानक उसकी पेट की तरफ गई। वह थोड़ी फूली हुई लग रही थी। मुझे अजीब लगा। श्रेया हमेशा परफेक्ट रहती थी, उसकी फिगर flawless थी। लेकिन अब पेट पर वह हल्की फूलन साफ़-साफ़ नजर आ रही थी।

मैंने सोचा – शायद यह ड्रेस की कटिंग की वजह से है। मैं अपनी बहन के बारे में गलत नहीं सोच सकती। श्रेया ऐसा नहीं कर सकती।

लेकिन वह अपने आप में खोई हुई थी। खुश दिख रही थी, लेकिन शायद उसकी खुशी मुझे दिखाई नहीं दे रही थी। बीच-बीच में मुस्कुराती, बीच-बीच में खामोश हो जाती। डिज़ाइनर ने बार-बार उसे आवाज दी, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

मैंने धीरे से कहा, “**श्रेया दीदी, आप ठीक हैं ना?””

लेकिन श्रेया ने कोई जवाब नहीं दिया और अपना ड्रेस चेंज करने के लिए उठी।

मुझे श्रेया का बर्ताव अब सामान्य नहीं लग रहा था। वह बार-बार इधर-उधर देख रही थी, अपने नाखून चबा रही थी।

मैं अब उसके पास गई। उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने उसका कंधा पकड़ा और अपनी तरफ खींचना चाहा ही था कि पीछे से **अभय** आकर खड़ा हो गया।

मेरे दिल की धड़कन उसकी आहट से ही तेज़ हो गई। वह बिल्कुल मेरे पीछे खड़ा था। मुझे ऐसा लगा कि शायद मेरा दिल धड़कना ही बंद कर देगा। वह मेरी तरफ देख भी नहीं रहा था। कभी देखा ही नहीं। वह सिर्फ और सिर्फ श्रेया को देख रहा था।

वह उसे कुछ कहना चाहता था, लेकिन श्रेया ने उसकी तरफ भी नहीं देखा और ड्रेसिंग रूम में चली गई।

मैंने अभय की तरफ देखा, लेकिन वह अभी भी श्रेया की तरफ ही देख रहा था।

मैंने अपनी नजरें इधर-उधर घुमाई। मैं दिखाना चाहती थी कि उसके ना देखने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन ऐसा नहीं था। हमेशा क श्रेया और अभय किसी भी छोटी बात को लेकर बहस करते रहते थे, लेकिन उनकी बहस एक मिनट से ज्यादा नहीं टिकती थी।

लेकिन आज कुछ अलग था। पांच- दस मिनट हो गए थे, और फिर भी श्रेया बाहर नहीं आई थी।

मैंने एक नजर अभय पर डाली। वह अभी भी इंतजार कर रहा था। मैं दरवाजे तक गई और खटखटाते हुए बोली, “दीदी, हो गया क्या?”

अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई।

मैंने कान लगाकर सुनने की कोशिश की, लेकिन कुछ सुनाई नहीं दे रहा था।

डिज़ाइनर ने बंद दरवाजे की तरफ देख कर कहा, “मैडम, बाहर क्यों नहीं आ रही हैं?”

मैंने झूठी मुस्कान के साथ कहा, “मुझे भी नहीं पता।”

फिर डिज़ाइनर ने मेरी तरफ देखा और कहा, “यहाँ इतने सारे लहंगे हैं, आप इसमें से कुछ नहीं ट्राई करेंगी?”

मैंने कहा, “नहीं, नहीं मैं क्यों…”

डिज़ाइनर ने मुस्कुराते हुए कहा, “रे, क्यों नहीं। जब तक वह अंदर है, तब तक आप इसमें से कोई पहन लीजिए। वैसे भी आप दुल्हन की बहन हैं, आपको भी तो अच्छी दिखना चाहिए। और आप तो उसकी तरह ही खूबसूरत दिखती हैं।”

उसने जैसे यह अभय के सामने कहा, मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मेरे मन में वह सब ख्याल आने लगे, जो कभी सच नहीं होने वाले थे – क्या होता अगर कल मेरी शादी होती और मैं अभय के सामने दुल्हन बनकर खड़ी होती? उसके हाथ में मेरा हाथ होता, और वह मुझे प्यार से देखता…

वह ख्वाब इतना सुंदर था कि मैं उसमें खो गई।

लेकिन खुद को कंट्रोल करके मैंने उसे ख्वाब से बाहर किया।

डिज़ाइनर ने पूछा, “आप ठीक हैं ना?”

मैंने कहा, “हाँ, मैं ठीक हूँ। और सच में यह लहंगा बहुत अच्छा है।”

लेकिन कल शादी **मेरी दीदी की है**, मेरी नहीं। यह सब ब्राइडल कनेक्शन का हिस्सा है।

उसने मुझे बहुत फोर्स किया फिर मैंने हल्के ऑरेंज कलर का लहंगा अपने ऊपर ट्राई किया। वह लहंगा मुझ पर बहुत अच्छा लग रहा था। डिज़ाइनर ने कहा, “अगर आपकी शादी होती, तो मैं यही लहंगा पहनने की सलाह देती।”

मैंने सिर्फ मुस्कुराते हुए कहा, “थैंक्स।”

थोड़ी देर बाद मैं अपने कमरे की तरफ जा रही थी कि बाहर लॉन में मेरी कानों में कुछ आवाज़ें आईं।

मैंने देखा तो **अभय और श्रेया** किसी बात पर बहस कर रहे थे। मैं ठीक से सुन नहीं पा रही थी, लेकिन इतना समझ में आया कि **अभय बहुत गुस्से में है।**

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कल इनकी शादी है, और आज ये लोग इतनी देर तक बहस क्यों कर रहे हैं।

मैं वहां रुकी नहीं और चुपचाप अपने कमरे में चली गई।

लेकिन आज की रात बहुत लंबी होने वाली थी। अभय अब हमेशा के लिए किसी और का होने वाला था। और इस वजह से मेरे दिल में बहुत तकलीफ थी।

मैं बहुत देर तक सोने की कोशिश करती रही, लेकिन नींद नहीं आ रही थी।

मैं उठी और बीच की तरफ जाने लगी। मुझे थोड़ी शांति चाहिए थी।

मैं बीच पर टहल रही थी, और तभी मेरी नजर गई – **अभय अकेला बैठा था**, समुद्र की तरफ देख रहा था।

उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वह दुखी है।

मैंने सोचा – कल तो उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत दिन है, वह जिसे प्यार करता है, उसके साथ शादी कर रहा है…

लेकिन इन दोनों में क्या चल रहा है, मैं समझ नहीं पा रही थी।

मैं कुछ देर उसे देखती रही और फिर वहां से निकलने लगी।

तभी मेरे फोन में मैसेज आया – **“श्रेया मिसिंग है।”**

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