A Blank Book ,Attempt:07 - Chapter 3
Part:3 Devil on Hunt.
बाकी सबको कुछ समझ नहीं आता और वो भी उसके पीछे बस के अंदर जाने लगते है।
अंदर से सब लेडीज यह सब देख रही थी।
वो औरत दौड़कर अंदर आईं…श्याम, शशि, नेहाल भी पैसेंजर साइड से बस की तरफ दौड़े और रघु ड्राइवर साइड से चढ़ने के लिए दौड़ा…
तभी ही उनके ऊपर से एक बड़ा सा काला पंछी गुजरा…लेकिन किसीको भी ठीक से दिखाई नहीं दिया।
रघु जैसे ही बस में चढ़ने के लिए ऊपर चढ़ा वैसे ही वो जानवर अपने पंजों से उसे पीछे से पकड़कर झाड़ियों में घसीटता हुआ ले गया।
रघु चिल्लाता रहा…लेकिन कोई कुछ नहीं कर पाया…उस जानवर को कोई ठीक से देख पाए उससे पहले ही वो अंधेरे में रघु को लेकर गायब हो गया…सब की सांसे एकदम से अटक गई…सबको मानो अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था की जो भी उन्होंने देखा वो सच में हुआ है…
श्याम रघु का नाम चिल्लाता रह गया…लेकिन खुद की जान बचाने के लिए सभी के सभी जल्दी से जल्दी बस में बैठ गए।
रघु की चिल्लाने की आवाज अचानक से बंद हुई और फिर से बारिश की आवाज चारों तरफ फैल गई।
“ये…ये…क्या था?” स्वीटी उस औरत से पूछती है।
“ये एक वक्ष है…हर १०० सालों में ये एक ही बार खाने के लिए बाहर निकलता है…. और बदकिस्मती से आज वो ही दिन है” वो औरत डर डर के कहती है।
सब लोग एक दूसरे की तरफ देखने लगे…
“हमें इस जंगल से जल्दी से जल्दी बाहर निकलाना होगा”
“लेकिन अब निकले कैसे?हमारा ड्राइवर तो मारा गया” रमा कहती है।
“में.. में मुझे चलाना आती है बस..” अमर कहता है।
बंटी और नेहा अमर को मजबूती से पकड़े हुए थे…ये जो भी हुआ ये सब उनके लिए तो ज़्यादा ही डरवाना था।
“ नहीं पापा.. नहीं पापा” बंटी एक मिनिट के लिए भी अमर से दूर नहीं होना चाहता था।
“बेटा…यही मम्मी के पास रहना.. मम्मी का हाथ बिल्कुल नहीं छोड़ना” अमर तुरंत उठकर ड्राइवर सीट पर बैठ जाता है….
सब खिड़कियों को पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है..
रमा की नानी की तो सांस बहुत फूल चुकी थी…रमा उन्हें इन्हेलर देकर आंख बंद ही रखने को कहती है।
कला भी इस बीच काफी डरी हुई थी लेकिन अभी भी सबसे पीछे ही थी।
सब लोग अपनी सीट पर एक दूसरे के नजदीक बैठ गए…नेहाल ने अपनी हॉकी निकालकर शशि को दे दी थी।
स्वीटी भी अपना आर्चरी वाला बो लेकर ही बैठी थी ताकि कभी भी वो हमले के लिए तैयार रहे।
अमर ने बस स्टार्ट की और तेजी से उसे रस्ते पर दौड़ाने लगा।
श्याम इस वक्त तक तो पूरा ही टूट चुका था…उसके अभी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था।
सभी लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी भी तरीके से वो यहां से जिंदा निकल जाएं।
तभी बस की छत पर धड़ामसे कुछ गिरने की आवाज आई…सब लोग चिल्ला उठे…
नेहाल और शशि ने कस कर हॉकी स्टीक को पकड़ लिया ताकि जरूरत पड़ने पर वो वार कर सकें…स्वीटी ने भी बो को पीछे खींच लिया।
वो औरत के पास भी एक बड़ा चाकू था, उसने वो निकालकर खिड़की के सामने कर दिया।
बस के ऊपर से जोर जोर से किसी की चलने की आवाज आ रही थी… और अजीब तरीके से चिल्लाने के भी…
कलाने अपनी छोटी सी बैग में उस किताब को रखकर उसने बिल्कुल अपने सीने से लगा कर रखा था।
अमर गाड़ी इधर उधर कर रहा था ताकि वो जानवर ऊपर से गिर जाएं…इसकी वजह से बस में लोग इधर से उधर हो रहे थे…पूरा सामान नीचे गिर रहा था।
(पुलिस वैन)
इंस्पेक्टर का फोन बजता है…
“हैलो सावंत…क्या पता चला?”
वो तुरंत पूछते है।
“सर हमे एक ट्रांसलेटर मिल गई है…और ये वही ट्रांसलेटर जिनसे कला जी वो लैंग्वेज सीखी है…लेकिन उन्होंने उस किताब के पन्ने को ट्रांसलेट करने से मना कर रही है”
“क्यों?”
“वो कह रही है कि ये किताब श्रापित है…और लैंग्वेज भी इसलिए”
“ठीक है जल्दी से मुझे उनका नाम पता मैसेज करो, में उनसे बात करता हु”
(जंगल में)
बस तेजी से रस्ते पर दौड़ी जा रही थी…और अब तो उपर से आने वाली आवाज भी नहीं आ रही थीं।
लेकिन तभी ही वो जानवर बस के उस खिड़की के सामने उड़ने लगता है…और उस तरफ आ जाता है जहां पर श्याम और स्वीटी बैठे थे।
स्वीटी अपने बो को जानवर की तरफ करती है लेकिन उतनी ही देर में वो खिड़की को अपने पंजों से उखाड़कर श्याम को बस के अंदर से खींचकर कर लेकर चला जाता है।
स्वीटी ने तीर तो छोड़ा लेकिन वो श्याम को ही जाकर लगा।
वो तीर उसके छाती के पार हो गया…और जानवर उसे भी घसीट कर ले गया।
अमर लेकिन गाड़ी नहीं रोकता…सब लोग घबराकर रोने लगे थे…उनके इतने सामने से वो चीज श्याम को लेकर गई है तो वो किसी को भी ले जा सकती है।
स्वीटी बुरी तरह टूट गई…उसके तीर की वजह से श्याम मारा गया उसके दिमाग में यही ख्याल आया।
“हे..हे.. तुमने नहीं मारा उसे…तुमतो उसे बचाने की कोशिश कर रही थी” नेहाल उसे समझाकर कहता है।
लेकिन स्वीटी को अब तक इस चीज का गहरा सदमा लग चुका था।
तभी ही वो जानवर एकदम से बस के सामने आ गया…जिससे कि अमर उससे बचाने के चक्कर में बस का बैलेंस चला गया और बस रास्ते से उतर गई और सीधा पेड़ से बुरी तरह से टकरा गई।
बस की सब लाइट बंद हो गई…बस में धुआं फैलने लगा…बस अब बिल्कुल नहीं चल सकती थी…
शशि को पहले होश आया…उसने तुरन्त माधुरी को जगाया जिसके सर पर चोट लग चुकी थी लेकिन वो फिर भी होश में आई।
नेहाल और रमा भी होश में आकर बाकी लोगों को उठा रहे थे…
नेहाल आगे जाकर देखता है तो अमर के सिने में पेड़ की लकड़ी घुसकर आरपार हो चुकी थी…जिससे कि वो जगह पर ही मारा गया था।
नेहाल ने अपने मुंह पर हाथ लगाकर खुदको रोने से रोका…
शीतल अपने बच्चों को दोनों हाथों से दबाकर रखा था ताकि इस एक्सीडेंट से उन्हें बचा सके।
नेहाल बस से निकलने का रास्ता ढूंढ लेता है और तुरन्त सबको बारी बारी बाहर निकालने लगता है।
“नानी…नानी चलो उठो जल्दी” रमा अपनी नानी को बाहर निकालने में कामयाब होती है।
लेकिन जब शीतल अमर को मरा हुआ देखती है तो वो जोर से चीख पड़ती है…और उसके बच्चे भी…
शशि और रमा दोनों शीतल को समझाते हैं कि वो अब भी अपने बच्चों को बचा सकती है…वो जानवर आता ही होगा, अगर हम नहीं भागे तो वो हमें भी मार डालेगा।
शीतल अपने बच्चों को लेकर बाकियों के साथ दौड़ने लगती है।
रमा की नानी बिल्कुल भी नहीं दौड़ पा रही थी जिसकी वजह से रमा सबसे पीछे थी।
वो रुक जाती है।
“नहीं…नहीं.. में नहीं भाग सकती” वो कहती है।
“ नहीं नानी…थोड़ी हिम्मत कीजिए” रमा रोते हुए उससे कहती है।
“बेटा…मेरी वजह से तुम भाग नहीं पाओगी…जाओ जल्दी जाओ यहां से” नानी रमा से कहती है।
“ नहीं नानी.. में आपको छोड़कर नहीं जाऊंगी” रमा उन्हें छोड़ने के लिए ना कहती है।
“मुझे जितना जीना था मैने जी लिया है…अब मेरे लिए कुछ भी बाकी नहीं है…लेकिन तुम्हारी तो पूरी जिंदगी है…तुम मेरे लिए मत रुको” वो कहती है।
तभी पीछे से नेहाल वापिस उनके पास आता है…..
“रमा?” वो उससे पूछता है।
“आप लोग रुक क्यों गए?” वो पूछता है।
“बेटा इसे यहां से लेकर जाओ…” नानी ये कहकर पीछे मुड़ने गई।
जहां पेड़ पर वोही जानवर था जो अमर की लाश को नौंच नौंच कर खा रहा था।
“चलो रमा…प्लीज…” नेहाल उसका हाथ पकड़कर पीछे खींचने लगता है।
“नहीं…नहीं…नानी…नानी…”
“हे…बड़े से काले कौवे” वो उस जानवर पर चिल्लाती है।
“तेरी मां तुझे खाने को नहीं देती?” वो चिल्ला चिल्ला कर उसका ध्यान अपने तरफ करने लगती है.. वो आसमान में एक ऊंची छलांग लेता है..... तभी
नेहाल वहां से रमा को लेकर चला जाता है….
अब जंगल में सब लोग बिखर चुके थे…
कला, माधुरी और शशि एक साथ थे तो दूसरी और स्वीटी, वो औरत, शीतल और उसके बच्चे…नेहाल और रमा भी बिलकुल उन्हीं के पीछे थे।
लेकिन बिल्कुल उन्हीं के सामने वो जानवर फिर से आगया, शीतल अपने बच्चों के आगे खड़ी रह गई, उस औरत ने भी चाकू निकालकर उस जानवर के सामने धर दिया…लेकिन सबसे आगे खड़ी थी स्वीटी अपने हाथ अपना बो लेकर।
इस बार हम उस जानवर को ठीक से देख पाते है…
उसका बड़ा सा मुंह बिलकुल चमगादड़ जैसा था…उसकी ऊंचाई करीब १० से १२ फीट तक की थी उसका काला शरीर जिसे वो रात में अदृश्य था…उसके बड़े बड़े पैरों के पंजे थे और उसके पंख बिल्कुल चमगादड़ जैसे ही थे…. उसका मुंह खून से सना हुआ था और उसकी आँखें भी लाल थी।
“आगे नहीं आना नहीं तो तुम्हारी आंखे फोड़ दूंगी” स्वीटी उसे कहती है।
पीछे से नेहाल और रमा भी उन तक पहुंच गए….
वो जानवर धीरे धीरे आगे आने लगा और उतने ही कदम ये लोग पीछे लेने लगे।
“स्वीटी…पीछे आओ” नेहाल उसे धीरे से पीछे बुलाने लगा।
तभी उसने एक ऊंची छलांग ली और उड़ते हुए तेजी से स्वीटी की तरफ आने लगा….
लेकिन स्वीटी अपनी जगह से हिली नहीं और निशाना सीधा उसकी आंख को बनाया और तीर छोड़ा….
तीर सीधा उसके आंख में जाकर लगी और वो चिल्ला उठा…. और आसमान में ऊपर जाने लगा…तभी एक बिजली उसके शरीर पर गिरी और वो जलकर सीधा नीचे गिर पड़ा।
एकदम से वहां सन्नाटा छा गया…स्वीटी ने फिर से एक तीर निकालकर उस पर वार किया…
नेहाल रमा का हाथ छोड़ देता है और धीरे धीरे उस जानवर के पास जाता है।
स्वीटी भी ऐसा ही करती है…और वहां तक पहुंचती है।
नेहाल हॉकी स्टीक से मारकर वो मरा है कि नहीं देखता है।
उसका पूरा शरीर जल चुका था…उसकी जीभ तक बाहर आ चुकी थी।
“मर गया है…” नेहाल कहता है।
(ट्रांसलेटर का घर)
एक ५० साल के करीब औरत…इंस्पेक्टर के सामने खड़ी थीं।
“आपने पहले पुलिस को इनफॉर्म क्यों नहीं किया?” इंस्पेक्टर उसे डांट रहे थे।
“ में बहुत डर गई थी…जब मैने सुना कि वो उसी दिन से ही लापता है जिस दिन मुझे मिलने आई थी” वो डरकर कहती है।
“आप अगर पहले ही पुलिस तक पहुंचती तो शायद हम अब तक उन्हें ढूंढ चुके होते” वो फिर से कहता है।
“ अच्छा उन्होंने आप से क्या कहा था? उन्होंने आपको कुछ ट्रांसलेट करने को दिया था कोई अननोन लेंगेज का?” वो पूछते है।
“हां…लेकिन वो सब ठीक नहीं है…वो भाषा अच्छे लोगों की नहीं थे…वो सब तंत्र मंत्र और जादू टोना वाले लोग थे…मैने कला को भी बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी” वो डरकर कहती है।
(जंगल में)
“तुमने इसे मार दिया…तुमने इसे मार दिया…” नेहाल खुश होकर स्वीटी के गले लग जाता है।
शीतल और रमा भी बहुत खुश होते है कि ये जानवर मारा गया।
लेकिन वो औरत ध्यान से उस जानवर के शरीर को देखती है।
“ ये वो नहीं है…” वो कहती है।
“क्या?.. क्या वो नहीं है?” शीतल पूछती है।
“मुझपर जिसने पहले हमला किया था वो इससे थोड़ा अलग था” वो कहती है।
“तो ये कौन है?” रमा पूछती है।
वो औरत उसे ध्यान से देखती है…
“यह एक नर वक्ष है…” वो कहती है।
“ तो इसकी क्या इसकी बीवी भी है?” नेहाल चिढ़कर पूछता है।
“ तो इसका मतलब अबतक हम पर दो वक्ष हमला कर रहे थे?” रमा भी अपने सर पर हाथ लगा कर कहती है।
(To be continued)