A Blank Book ,Attempt:07 - Chapter 1
Part:1 Beginning of Attempt Seven
(पुलिस स्टेशन)
(रात का वक्त)
एक आदमी पुलिस स्टेशन में चुपचाप बैठ कर पुलिस इंस्पेक्टर का इंतेज़ार कर रहा था।
पीछे से इंस्पेक्टर आते है उस आदमी से बातचीत शुरू करते है।
“हैलो Mr. अली आप यहां इस वक्त पर?” वो पूछते है।
“सर में पिछले तीन दिन से पुलिस के चक्कर काट रहा हु अभी तक आपके हाथ कोई सुराग कैसे नहीं लगा?”
अली कहता है।
“हम लोगों ने अपने तरफ से काफी कोशिश की है, हमें अभी तक आपकी वाइफ के बारे में कोई लीड ही नहीं मिली है..”इंस्पेक्टर कहता है।
अली की आंख हल्के आंसू आने लगे…
“ पिछले सात दिन से कला मिसिंग है, उसका कोई सुराख नहीं है…वो एक वर्ल्ड फेमस राइटर है इंस्पेक्टर… अगर वो नहीं मिल सकती तो आम लोगों क्या होगा?” वो गुस्से में कहता है।
“सर हम खुद हैरान है…वो अपना सामान तक लेकर नहीं गई है, ना मोबाइल फोन और नहीं वॉलेट…उनको ट्रेस करना हमारे लिए बहुत ज्यादा डिफिकल्ट हो रहा है…” इंस्पेक्टर कहते है।
तभी इंस्पेक्टर का फोन बजता है….
“हैलो सर” इंस्पेक्टर कहता है।
“इंस्पेक्टर ये आप क्या कर रहे हो?... कला अग्रवाल के मिसिंग केस पर कुछ इन्वेस्टिगेट किया की नहीं आपने?” कमिश्नर दूसरी साइड से चिल्ला रहे थे।
“अरे मीडिया का प्रेशर हम पर बढ़ते जा रहा है…वो लोग कह रहे है कि उन्होंने गवर्मेंट को क्रिटिसाइज किया इसीलिए गवर्मेंट ने ही उन्हें गायब कर दिया है”
“नो सर…हम इसको कैलरिफाई कर सकते है…वो पहले भी २ बार इस तरह जा चुकी है…” इंस्पेक्टर को रोक कर अली कहने लगा।
“लेकिन वो तब किसी न किसी तरीके से हमें कॉन्टैक्ट करती थी” अली चिल्लाकर कहता है।
“देखो इंस्पेक्टर…मुझे कल सुबह तक उनके बारे में कोई पक्की खबर चाहिए नहीं तो रूलिंग पार्टी वाले और मीडिया वाले हमारा दिमाग खराब करके रख देंगे…थोड़े दिनों में ही इलेक्शन है.. ऑपोजिशन इसको एक मुद्दा बना सकता है”
“येस सर….”इंस्पेक्टर फोन रख देता है।
“उम्मीद है अब आप मेरी बीवी को ढूंढने में थोड़ी मेहनत करेंगे” अली वहां से उठकर चला जाता है।
(अली का घर)
अली कला के स्टडी रूम में भी उसके फोटोज देख रहा था…. उसके आंख में आंसू थे लेकिन वो खुलकर रो भी नहीं पा रहा था…
वो उन दोनों के बिताए पलो को अपने आंखों के सामने देख पा रहा था….
तभी उसे अली को कला के टेबल पर कुछ कागज दिखते है….
यह कागज कला और उसके डाइवोर्स के थे…
अली रोने लगता है और फिर शराब पीते पीते अपनी हथेली को कांट देता है…..
(किसी पहाड़ी वाले रस्ते पर एक बस में)
बस एक झटके के कारण नेहाल की आंख खुली…वो अपनी आंखों को उंगलियों से मसलता है और बस के जलते उस रोशनी के बीच वो धीरे धीरे साफ देखने लगता है….
बस बहोत ही बड़े बड़े पहाड़ों के बीच से गुजर रही थी…बाहर कब से जोर की बारिश हो रही थी और बिजलियां भी कड़क रही थी…
नेहाल अपनी घड़ी की तरफ देखता है जिसमें अभी 12:03AM का वक्त दिखा रहा था।
“कहा तक पहुंचे हम?” वो अपनी बहन से पूछता है।
“पता नहीं लेकिन हम अभी भी घाट में ही फंसे है…बारिश तो बंद होने का नाम ही नहीं ले रही है…और बाहर तो ठीक से दिखा भी नहीं रहा” स्वीटी(नेहाल की बड़ी बहन) चिढ़कर कहती है।
नेहाल अपनी बॉटल से एक घुट मारता है और पूरी बस की तरफ एक नजर घुमाता है।
हम उसकी नजरों से बाकी सब पैसेंजर्स को देख पाते है
बस ड्राइवर का नाम था रघु…
उसके बाद बैठा हुआ था बस कंडक्टर श्याम उसके ठीक पीछे शशि और माधुरी… जिनकी बस अभी अभी शादी हुई थी।
उनके पीछे नेहाल और स्वीटी..
नेहाल बिल्कुल बगल में ही एक बूढ़ी औरत और उनकी पोती रमा बैठी हुई थी।
उनके पीछे दो बच्चे नेहा जो कि 11 साल की थी और बंटी जो कि 7 साल का था।
उन बच्चों के पीछे उनके पेरेंट्स शीतल और अमर बैठे हुए थे…
और सबसे पीछे एक औरत बैठी हुई थी जो कि कोई और नहीं बल्कि कला थी हो पिछले सात दिनों से दुनिया के लिए गायब थी…. नेहाल उसे अपनी किताब में कुछ लिखते हुए देख पा रहा था।
सबकी तरफ एक नजर घुमाने के बाद नेहाल बैग में कुछ खाने के लिए ढूंढने लगता है…
कुछ ना मिलने पर वो स्वीटी से पूछता है।
“क्या तुम्हारे पास खाने के लिए कुछ है?”
“जो था पहले ही तुमको दे चुकी हु..अभी मेरा सिर्फ सर खाना बाकी है” स्वीटी उस पर गुस्सा होकर कहती है।
“ गाड़ी थोड़ा अंदर से चला रघु…आगे तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है…”श्याम पीछे से रघु को कहता है।
“आज तो बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही है…” रघु बस चलाते हुए कहता है।
तभी दूर जोर जोर से बिजली कड़कने लगी…
“ मम्मी मुझे बहुत ज्यादा भूख लगी है…”नेहा पीछे मुड़कर अपनी मम्मी से कहती है।
शीतल तुरंत बैग से एक बिस्किट निकालकर नेहा को देती है…बंटी जो अभी भी सो रहा था वो भी भूख के कारण उठ जाता है और वो भी कुछ खाने के लिए मांगता है।
अब यह आखिरी बिस्किट का पैकेट था इसीलिए शीतल नेहा को बिस्किट बंटी के साथ बांटने को कहती है।
“यह बस न जाने कितने वक्त से चले ही जा रही है…अब तो बच्चों को भी भूख लग गई है…ड्राइवर कही पर तो रोकना चाहिए” शीतल अमर से कहती है।
अमर उठकर कंडक्टर के पास पूछने के लिए जाता है…”कंडक्टर साहेब आप बस को आगे किसी होटल पर खड़ी करो…बस निकली है तबसे बच्चोंने कुछ भी खाया नहीं है”
“हां…हां…में भी जानता हु…लेकिन हम अभी घाट के बीचोबीच है यहां कही पर होटल नहीं मिलेगी…थोड़ा वक्त और रुक जाइए…जैसे ही हम नीचे उतर जायेंगे तुरंत किसी होटल पर रॉक देंगे”
“लेकिन साहेब अभी तो घाट खत्म होने में 2 घंटे लगेंगे..और बारिश के टाइम पर तो और ज्यादा समय लगेगा..कही चाय की टपरी पर भी रोक दोगे तो अच्छा रहेगा” शशि कहता है।
लेकिन कंडक्टर कुछ सुनने के मूड में नहीं था..वो अपना मुंह फेरकर आगे के तरफ देखने लग जाता है।
“नानी…नानी..” रमा अपनी सोई हुई दादी को जगाती है।
“क्या हुआ? हम पहुंच गए क्या?” वो पूछती है।
“नहीं..नहीं अभी तो बहुत वक्त है..यह लो थोड़ा पानी पीलो” रमा उनको पानी पिलाती है।
रमा और नेहाल बिल्कुल एक दूसरे के बगल वाली सीट पर बैठे थे…और नेहाल रमा में थोड़ा इंटरस्टेड भी था।
“आपकी नानी है?” वो रमा से पूछता है।
रमा उसके तरफ देखकर कहती है..”हां..”
“उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही है..चेहरा कुछ कुछ सुझा हुआ है” नेहाल कहता है।
“नहीं..नहीं..वो सो कर उठी है इसीलिए ऐसे दिख रही है…otherwise she is fine..” रमा नेहाल से कहती है।
“अच्छा…मुझे तो ऐसा नहीं लग रहा है” नेहाल फिर से कहता है।
“एक्चुअली में एक मेडिकल स्टूडेंट हु,इसलिए इस बारे में जानती हु” रमा नेहाल से कहती है।
नेहाल अब एकदम चुप हो गया था…वो अपनी बहन की तरफ शर्मिंदगी से देखने लगा।
“और बोल..यह ठीक नहीं है…वो ठीक नहीं है..”स्वीटी उसे थोड़ा डांटकर कहती है।
नेहाल उसे कोई जवाब नहीं देता और फिर से रमा से बातचीत करने लगता है.. “में भी एक हॉकी प्लेयर हु..” ऊपर रखी अपनी हॉकी किट के तरफ इशारा करते हुए वो कहता है।
लेकिन बीच में ही स्वीटी रमा से कहने लगती है…
“हा.. जिसकी टीम आज एक ही मैच में बाहर हो गई”
“हे.. बाहर नहीं हुई. वो तो हम लोगों के साथ चीटिंग हुई है” नेहाल उसे करेक्ट करता है।
रमा नेहाल की नादानियों पर हंस पड़ती है…और स्वीटी भी हंस देती है।
और नेहाल मुंह फुलाकर बैठ जाता है।
“वैसे तुम भी तो हार गई..” वो तुरन्त कहता है।
“में आर्चरी में सिर्फ 2 प्वाइंट से हारी हु…वो भी फाइनल में…” स्वीटी भी कहती है।
तभी बस एक जोर के ब्रेक से रुक जाती है…सभी पैसेंजर जोर से आगे के तरफ धकेले जाते है…कुछ सामान भी उनके ऊपर गिरने लगता है।
“क्या हुआ रघु?...इतने जो से ब्रेक क्यों मारा?” कंडक्टर थोड़ा संभलता है और पूछता है।
रघु उसे उंगली से बाहर इशारा करता है।
जहां पर कुछ जंगली भैंसों का झुंड जंगल से बाहर इस रस्ते पर घाट से नीचे उतर रहा था।
“अचानक ही मेरे सामने आ गए..” रघु कहता है।
लेकिन यहां पीछे..पैसेंजर्स की तो हालत खराब हो चुकी थी….सबको झटके ने एकदम अपनी जगह से उठा कर आगे कर दिया था।
“यह किस तरह की गाड़ी चला रहे हो?” शशि गुस्से में कहता है।
बंटी और नेहा तो रोने लगे थे…क्योंकि उनपर एक बैग भी गिर गई थी…
रमा अपनी नानी को झटके से बाल बाल बचा पाई थी…
नेहाल और स्वीटी को भी ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था..
नेहाल पीछे कला की तरफ देखता है…जिसे भी झटके के कारण ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था…लेकिन वो अभी भी किताब में लिखे ही जा रही थी..
परंतु अमर इस झटके में अपनी नाक तुड़वा बैठा था…और उसकी नाक से खून निकल रहा था..थोड़े ही समय में उसका शर्ट पूरा लाल हो चुका था..लेकिन उसे इसके बारे में कुछ पता ही नहीं चला था।
“आपकी नाक से तो खून निकल रहा है..”शीतल डरकर अमर से कहने लगी..
रमा ने भी अमर की तरफ देखा और उसे भी अमर की खून बहता हुआ दिखा।
“फर्स्ट एड है आपके पास?” उसने तुरंत बस कंडक्टर से पूछा।
कंडक्टर ने ऊपर की पेटी से फर्स्ट एड की कीट निकालकर रमा के पास दे दी।
वो कीट कुछ इतने अच्छी हालत में नहीं थी लेकिन काम चले ऐसी थी।
रमा तुरंत उसमें से कॉटन और कुछ बैंडेज निकालती है और अमर को अपनी नाक ऊपर ही रखने को कहती है।
“डोंट वरी guys…हमारे बीच यहां पर डॉक्टर भी है” नेहाल सबको कहता है।
स्वीटी उसके तरफ गुस्से में देखती है… और रमा भी..
स्वीटी नेहा को अपने पास लेती है क्योंकि दोनों बच्चे झटके की वजह से और अब अपने पापा का खून बहता देख काफी ज्यादा डर गए थे…
बंटी को माधुरी चुप करने की कोशिश करती है….
लेकिन इस बीच कला अपनी जगह से हिलती भी नहीं है…वो अपनी किताब में लिखते ही जा रही थी।
“कैसी औरत है?... यहां हम लोगों का एक्सीडेंट होते होते बचा लेकिन यह औरत तो लिखे ही जा रही है” नेहाल स्वीटी से कहाता है।
स्वीटी जो इस वक्त नेहा को चुप कर रही थी…वो नेहाल की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देती।
(पुलिस स्टेशन)
(उसी रात का समय)
“सर…हमे कला जी के गायब होने के दिन के मोबाइल ट्रेस रिकॉर्ड्स और कॉल रिकॉर्ड्स मिल चुके है” एक हवलदार इंस्पेक्टर से कहता है।
“तो उसमें से कुछ लीड मिला?” वो पूछते है।
“यस सर….कला जी नॉर्मली जहां सिटी में जाती है…यह सब जगाए उससे काफी अलग अलग है…और उन्होंने उस दिन काफी unknown नंबर्स के साथ बातचीत की है”
“तो कौन है वो लोग?...वो इनफॉर्मेशन निकाली तुमने?” वो फिर से पूछते है।
“yes सर…सिटी म्यूजियम में काम करने वाली Ms. kajal का यह मोबाइल नंबर है..” हवलदार कहता है।
“Ok चलो उनके घर, हम बिल्कुल भी टाइम वेस्ट नहीं कर सकते” इंस्पेक्टर तुरंत काजल से मिलने निकल पड़ते है।
(बस में)
अमर का खून बहना रुक चुका था और भैंसों का झुंड भी निकल चुका था।
“ ओह हो कितने सारे थे” नेहाल कहता है।
तभी शशि कंडक्टर से कहता है “साहेब अभी तो आप कही छोटी सी जगह पर गाड़ी खड़ी करो”
“हा…हां” सब लोग एक सुर में कहने लगते है।
“ठीक है.. ठीक है.. रघु आगे कही भी चाय की टपरी दिखे तो रोक लेना…”
और फिर बस आगे की और बढ़ने लगती है।
“अब आप ठीक है?..” शीतल अमर से पूछती है।
वो बस हां में इशारा करता है।
बस उस तूफानी बारिश और रात के उस भयानक से अंधेरे में आगे बढ़ती ही जाती हैं।
“शशि क्या तुम्हारे मॉम डैड हमारे रिश्ते को अपनाएंगे?” माधुरी शशि से पूछती है।
शशि माधुरी का हाथ अपने हाथ में लेकर कहने लगता है।
“तुम बिल्कुल चिंता मत करो…मेरे डैड थोड़े स्ट्रिक्ट है लेकिन वो मुझसे बहुत प्यार करते है…वो हमारे रिश्ते को खुशी खुशी अपनाएंगे” वो उसे भरोसा देते हुए कहता है।
माधुरी शशि के कंधे पर सर रखकर बस यही विश करती है कि शशि के पेरेंट्स उसे अपना ले।
“मुझे माफ करना..”शीतल अमर से कहने लगती है|
अमर अपनी नाक पर रुमाल लगाए बस सुनता जा रहा था…
“हमारा रिश्ता इस तरह से टूटेगा मैने कभी नहीं सोचा था..तुम्हे मुझसे नाराज होने का पूरा हक है” शीतल उससे कहती है|
अमर चुपचाप बस सुनता जा रहा था.. “मैने कोर्ट में डाइवोर्स फाइल कर दिया है..” शीतल कहती है|
अमर फिर भी चुप था मानो उसे पहले से ही इस बात का अंदाजा था…
“देखो मैने यह अपने फ्यूचर…” शीतल को बीच में ही रोककर अमर कहता है।
“तुम्हे सफाई देने की कोई जरूरत नहीं है…में तुम्हे किसी भी दबाव में नहीं रखूंगा…तुम तन्मय के साथ खुश हो तो में इसके आगे कुछ नहीं कर सकता…जबरदस्ती हम हमारे रिश्ते को ज्यादा दिन तक नहीं बचा सकते..”अमर कहता है।
“लेकिन बच्चे मेरे पास ही रहेंगे..में उन्हें तुम्हारे पास नहीं छोडूंगा…और बच्चों के सामने कोई तमाशा भी नहीं होगा” अमर साफ शब्दों में कहता है।
शीतल गुस्से में थी लेकिन तब वो कुछ नहीं बोलती।
“लगता है कि एक भी चाय की दुकान नहीं मिलेगी इस वक्त..” स्वीटी खिड़की के बाहर देखकर कहने लगी।
“अब भूख बर्दाश्त के बाहर है..अगर मुझे कुछ खाने को नहीं मिला तो में तुम्हारा सिर खा जाऊंगा” नेहाल स्वीटी से कहने लगता है।
तभी रमा उसके पास के लड्डू नेहाल को देती है.. “ये लो.. अपनी बहन का सर खाने से तो अच्छा ही है”
लड्डू तो ज्यादा नहीं था…लेकिन नेहाल अपने हाथ में लेकर रमा को थैंक्स कहता है।
रमा थोड़ा थोड़ा लड्डू सबको देने लगती है…
“इसकी बहुत जरूरत थी..”शशि थोड़ा लेकर माधुरी को खाने के लिए देता है।
सबको लड्डू देते देते वो कला तक पहुंचती है|
“आप ज्यादा कुछ बोल नहीं रही…?” रमा कला से पूछती है।
कला कुछ नहीं कहती है…और अपना ध्यान सिर्फ किताब में लिखने में लगा देती है।
“आपको अगर भूख लगी हो तो..ये लड्डू है..” रमा उसे कहती है।
कला थोड़ा सा लड्डू ले लेती है..और राम वापिस अपने जगह पर बैठ जाती है।
“थोड़ी अजीब सी है ये औरत..”स्वीटी पीछे देखकर हल्के से कहती है..लेकिन कला की नजर उससे मिल जाती है जिससे कला को अंदाजा आ जाता है कि उसने क्या कहा।
“जबसे में देख रहा हु बस अपनी किताब में ही लिखती जा रही है” नेहाल भी कहता है।
लेकिन कोई ज्यादा कला की तरफ ध्यान नहीं देता और गाड़ी उसी सुनसान सड़कों से बारिश के बीच आगे चलनी लगती है।
(काजल का घर)
पुलिस जोर जोर से दरवाजा ठोकती है…
एक बूढ़ी औरत दरवाजा खोलती है।
“क्या हुआ सर? आप इस वक्त हमारे घर पर कुछ बात हो गई है क्या?” वो पूछती है।
“हम मिस काजल से मिलना चाहते है क्या वो घर में है?” अंदर घुसते हुए इंस्पेक्टर कहते है।
अंदर के कोई कमरे से काजल बाहर आती है…. “येस सर…में ही हूं काजल..?” वो कहती है।
इंस्पेक्टर अपने मोबाइल में कला की तस्वीर दिखाते हुए काजल से पूछते है..”क्या हाल फिलहाल में इनसे मिली थी?” वो पूछते है।
काजल ध्यान से तस्वीर देखती है और कहने लगती है.. “हां एक वीक पहले में इनसे मिली थी..ये हमारे म्यूजियम आई थी” वो कहती है।
“आपकी कोई बातचीत हुई थी इनके साथ..?”
“नहीं ऐसे तो कोई खास बातचीत नहीं हुई थी..मैने उनको प्राइवेट म्यूजियम का टूर दिया था…”
“वो आपसे किस बारे में पूछ रही थी…जाहिर है कि टूर के समय वो क्यूरियस तो रही होगी…तो वो किस सब्जेक्ट पर ज्यादा जोर दे रही थी?”
काजल अब अपनी उंगलियां एक दूसरे पर मसलने लगी और उनकी नजर भी ऊपर नहीं थी|
“देखो यह औरत एक वीक से लापता है…हो सकता है इसकी जान भी खतरे में हो और हम इन्हें ढूंढ नहीं पा रहे है..अगर तुम कुछ ऐसा जानती हो जिससे हमें इन्हें ढूंढने में मदद हो तो प्लीज हमें बताओ”
बड़ी हिम्मत करके काजल उनसे कहने लगती है।
“उस दिन सुबह के समय वो हमारे म्यूजियम में आई थी…उन्हें बाकी कोई भी चीज में कोई दिलचस्पी नहीं थी…वो मुझे सीधे पुराने बुक्स और आर्काइव सेक्शन के बारे में पूछने लगी…में उन्हें वहां पर लेकर जाने के बाद उन्होंने मुझे बस एक बुक के बारे में पूछा” बीच में ही इंस्पेक्टर उससे पूछते है|
“कौनसी बुक?”
“उसका असली नाम तो मुझे ठीक से याद नहीं लेकिन हम लोग उसे ‘Blank Book’ ही कहते है”
“क्या है उस किताब में?” वो तुरंत पूछते है।
“कुछ भी नहीं…पूरी किताब खाली है इसलिए उसे ‘Blank Book’ कहते है।
“उन्हें क्यों उस किताब की जरूर थी..उन्होंने कुछ बताया तुम्हे?” वो पूछते है|
काजल न में गर्दन हिलाती है।
“अब वो किताब कहा पर है?” वो काजल से पूछते है।
काजल रोना शुरू कर देती है… “क्या हुआ?..अब वो किताब कहां पर है?”
काजल डर डर कर कहती है.. “उन्होंने मेरे से वो किताब मांगी…इसके बदले वो मुझे 10लाख देने को तैयार थी..हम लोग भी बहुत चीजों को स्पेस न होने की वजह से हटाने ही वाले थे..और उस लिस्ट में यह किताब भी थी..मैने शुरुआत में तो मना कर दिया लेकिन लालच में मैने वो किताब दे दी” काजल रोते रोते हुए कहती है।
इंस्पेक्टर एक सांस लेता है…”Ok..Ok लेकिन वो किताब को लेकर वो कहा चली गई?” अपने सर पर हाथ मारने लगते है.. “क्या तुम्हारे पास उस किताब की कोई तस्वीर है?” वो तुरंत पूछते है।
काजल तुरंत हां कहती है और अपने मोबाइल में उस किताब की तस्वीर दिखाती है…और ये वोही किताब है जिसमें कला अभी बस में बैठकर लिखे जा रही है।
इंस्पेक्टर ध्यान से देखते है तो उस किताब की कवर पर कुछ लिखा हुआ दिखाता है।
“यह क्या लिखा हुआ है?” वो काजल से पूछते है।
“में नहीं जानती…यह बहुत ज्यादा ओल्ड लैंग्वेज है और हम कोई भी इसे नहीं पढ़ पाएं”
(बस में)
“रघु अरे यार ये बारिश में तो एक भी दुकान खुली नहीं दिख रही है” श्याम कहता है।
“होगी होगी…आगे मिलेगी तू चिंता मत कर” रघु गाड़ी चलाते चलाते कहता है।
बस में भूख के मारे तिलमिला रहे थे लेकिन रात के समय पर कुछ मिलने की बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं थी…
लेकिन तभी ही उन्हें एक बहुत छोटी सी चाय की दुकान दिखती है..और रघु तुरंत उसके पास बस को रोक देता है।
“हे भगवान आज बचा लिया..”रघु ऊपर वाले को शुक्रिया कहता है।
“चलो चलो..जल्दी जल्दी थोड़ा थोड़ा खालों वो चाय वाला भी बंद करने की तैयारी में है” श्याम सबको कहता है और एक एक करके सब लोग नीचे उतरते है।
वो चाय की दुकान बड़ी मुश्किल से एक कोने थी एक पेड़ के नीचे जहां पर काफी कम जगह थी… बारिश न लगे इसलिए पड़े से प्लास्टिक की शेड बन हुई थी जिस पर आज की बारिश की वजह से बहुत पानी जमा हो गया था और बैठने के लिए भी गिनकर दो लड़की के पट्टी थी.. और दुकान में खाने के लिए भी बहुत ज्यादा ऑप्शन नहीं थे…
उस दुकान को लगभग 65 साल का एक बूढ़ा आदमी चला रहा था..
“रघु इस वाले पहिए में तो बिल्कुल भी हवा नहीं है..” एक अधमरे पहिए को देखकर कहता है
“चाय पीकर इस पहिए को बदल देते है…..” रघु कहता है|
“चलो भैया…सब के लिए गरमा गरम चाय बनवाओ..”नेहाल उस आदमी से कहता है।
“मम्मा यहां पर खाने के लिए कुछ भी नहीं है” नेहा शीतल से कहती है।
“अब ये पैकेट खालों हम जैसे ही सिटी में पहुंचेंगे तो आपको चाइनीस खिलाएंगे ok” वो उसे कहती है|
अमर बंटी को तब तक चाय में बिस्किट खिला ने लग चुका था…
लेडीज लेडीज सब बैठकर चाय बिस्किट और पैकेट स्नैक्स खा रहे थे…लेकिन कला थोड़ी दूर खड़ी हुई बारिश को देख रह थी।
नेहाल एक चाय का कप लेकर कला के पास जाता है… “आप चाय नहीं पी रही?” वो पूछता है।
कला कुछ नहीं कहती है और गर्दन हिलाकर न में जवाब देती है..
“आप बात नहीं कर सकती?” नेहाल फिर से पूछता है।
लेकिन कला इस बार भी कुछ नहीं कहती और नेहाल के हाथ से चाय का कप लेकर तुरंत चाय पीने लगती है।
नेहाल उसे वोही छोड़कर अपनी चाय पीने चला जाता है….
“तो आपकी लव मैरेज है हां?” स्वीटी माधुरी से पूछती है।
एक हल्की सी मुस्कान देकर माधुरी हां कहती है।
“बैंगलोर में और शशि साथ में काम करते है..वो ही हमारी मुलाक़ात हुई और बस प्यार हो गया” माधुरी चाय पीते पीते कहती है।
“ओह.. हाऊ लक्की यू आर” रमा कहती है।
“हम अभी शशि के घर ही जा रहे है..हमने उसके पेरेंट्स को कुछ बताया नहीं है…पता नहीं कि वो हमें एक्सेप्ट करेंगे कि नहीं?” माधुरी आगे कहती है।
“क्यों नहीं करेंगे यू बोथ लव इच आदर और तुम लोगो ने कुछ रॉन्ग नहीं किया है..”स्वीटी उसे कंफर्ट करते हुए कहती है।
“हमारी भी लव मैरेज थी” शीतल भी धीरे से अपनी कहनी कहने लगती है, “अमर के पेरेंट्स ने मुझे तुरंत एक्सेप्ट कर लिया था…मॉम तो मुझे देखकर इतनी खुश ही थी कि पूछो मत…”
“हाव स्वीट…” रमा कहती है।
फिर शीतल का मुंह उदास ओ जाता है… “बट नाव हमे ही पता नहीं हमारी लाइफ में क्या हो रहा है?...जो हमने सपने देखे थे उससे काफी अलग है हमारी लाइफ…लेकिन उसमें मेरी ही मिस्टेक है…”
“ आपके बीच सब ठीक नहीं लग रहा है..कोई प्रॉब्लम्स है क्या?” स्वीटी धीरे से पूछती है।
शीतल के आंखों में अचानक से आंसू थे…वो धीरे से कहती है “मेरी कुछ गलतियों की वजह से आज हमारा रिश्ता टूटने की कगार पर है…हम दोनों साथ तो है लेकिन एकसाथ नहीं…अमर और मेरे बीच किसी भी तरह का रिलेशन नहीं है..हम दोनों अब तक बस बच्चों की वजह से ही साथ में है…लेकिन अब हम दोनों का भी इस रिश्ते में दम घुटने लगा है…” आंखों से आंसू बहाते हुए शीत कहती है।
स्वीटी उसे शांत करते हुए कहती है.. “हम सब अपनी जिंदगी में अच्छा करने की ही कोशिश करते है लेकिन चीजें हमारे मुताबिक नहीं चलती..”
“हां…पति और पत्नी का रिश्ता विश्वास का है अगर वो ही नहीं रहे तो कोई भी खुश नहीं रहता” माधुरी कहती है।
दूर से खड़ी होकर कला भी ये सब सुन रही थी और उसके भी आंखों में पानी था…
(To be continued)