Unwanted Marriage With Uncle अनवांटेड मैरिज विद अंकल author- Shani Ch. 3

Unwanted Marriage With Uncle अनवांटेड मैरिज विद अंकल author- Shani - Chapter 3

Posted by Shani Rajput • Aug 19, 2026 09:04 AM

Chapter 3: अनिका का सच

विक्रम की आवाज अभी भी नैना के कानों में गूंज रही थी—

“हाँ… अनिका जिंदा है।”

नैना कुछ पल तक बिल्कुल शांत खड़ी रही।

उसकी आँखों के सामने बचपन की धुंधली यादें घूमने लगीं। उसे याद था कि जब वह छोटी थी, तब उसकी माँ उसे अक्सर एक पुरानी तस्वीर दिखाती थीं। तस्वीर में एक लड़की थी, जिसे उसकी माँ हमेशा उसकी “बड़ी बहन” कहती थीं।

लेकिन जब नैना ने पूछा था कि वह कहाँ है, तो माँ ने सिर्फ इतना कहा था—

“वह अब इस दुनिया में नहीं है।”

नैना ने उस बात को सच मान लिया था।

लेकिन आज अचानक उसे पता चला कि वह झूठ था।

उसकी बहन जिंदा थी।

और शायद उसके परिवार को इस बात की जानकारी थी।

“नैना…”

अर्जुन की आवाज सुनकर वह वर्तमान में लौटी।

“हमें यहाँ से जाना चाहिए।”

नैना ने उसकी ओर देखा।

“तुमने पहले से सब कुछ जानते हुए मुझे यहाँ बुलाया था?”

अर्जुन कुछ पल चुप रहा।

“मैं तुम्हें पूरी सच्चाई बताना चाहता था।”

“लेकिन तुमने मुझे सब कुछ नहीं बताया।”

“क्योंकि मुझे डर था कि तुम अचानक सब जानकर कोई गलत कदम उठा सकती हो।”

नैना की आँखों में गुस्सा आ गया।

“मेरी जिंदगी के बारे में हर कोई फैसला कर रहा है। मेरा परिवार मुझसे सच छिपा रहा है। विक्रम मुझे शादी के लिए तैयार करना चाहता है। और अब तुम भी मुझे आधी-अधूरी बातें बता रहे हो।”

अर्जुन ने सिर झुका लिया।

“तुम सही कह रही हो।”

“तो अब मुझे सब बताओ।”

अर्जुन ने गहरी साँस ली।

“सब कुछ एक रात से शुरू हुआ था।”

“कौन-सी रात?”

“वही रात, जब तुम्हारी बहन अनिका गायब हुई थी।”

नैना ध्यान से सुनने लगी।

“उस रात तुम्हारे पिता और विक्रम के बीच बहुत बड़ा झगड़ा हुआ था। घर में पैसों और एक पुराने कारोबार को लेकर विवाद था।”

“क्या अनिका ने वह झगड़ा देखा था?”

“हाँ।”

“फिर?”

“रात करीब ग्यारह बजे अनिका अचानक घर से गायब हो गई।”

नैना ने पूछा—

“और पुलिस?”

अर्जुन ने कहा—

“पुलिस में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।”

“फिर?”

“कुछ दिनों बाद तुम्हारे परिवार ने कहा कि अनिका की मौत हो गई।”

“लेकिन उसकी लाश?”

अर्जुन चुप हो गया।

नैना समझ गई।

“लाश कभी मिली ही नहीं?”

“नहीं।”

नैना के चेहरे का रंग उड़ गया।

“तो फिर उन्होंने कैसे मान लिया कि वह मर गई?”

“उन्होंने नहीं माना था।”

“मतलब?”

अर्जुन ने कहा—

“तुम्हारे पिता जानते थे कि अनिका जिंदा है।”

नैना की आँखें फैल गईं।

“और विक्रम?”

“वह भी।”

“तो फिर दोनों ने मुझसे झूठ क्यों बोला?”

अर्जुन ने जवाब देने के बजाय पूछा—

“क्या तुम्हें अपने बचपन का कोई ऐसा पल याद है जिसमें तुम्हारी बहन तुम्हें कुछ देना चाहती थी?”

नैना ने माथे पर हाथ रखा।

कुछ देर सोचने के बाद अचानक उसे एक दृश्य याद आया।

वह शायद सात साल की थी।

अनिका उससे कुछ कह रही थी।

“नैना, अगर कभी मैं तुमसे दूर हो जाऊँ तो इस चीज को संभालकर रखना।”

उसने शायद एक छोटा-सा लॉकेट दिया था।

नैना की आँखें अचानक बड़ी हो गईं।

“लॉकेट!”

अर्जुन ने पूछा—

“कौन-सा लॉकेट?”

“मेरी बहन ने मुझे एक लॉकेट दिया था।”

“क्या वह अभी भी तुम्हारे पास है?”

नैना ने अपनी गर्दन पर हाथ रखा।

वह लॉकेट हमेशा उसके गले में रहता था।

छोटा-सा चाँदी का लॉकेट।

उसने उसे बाहर निकाला।

अर्जुन उसे देखते ही गंभीर हो गया।

“यही है।”

“क्या?”

“यही वह चीज है जिसे अनिका तुम्हें देकर गई थी।”

नैना ने लॉकेट को ध्यान से देखा।

उसके पीछे बहुत छोटे अक्षरों में कुछ लिखा हुआ था।

उसने अब तक कभी उस पर ध्यान नहीं दिया था।

अर्जुन ने कहा—

“इसे खोलो।”

नैना ने लॉकेट का छोटा-सा ढक्कन खोला।

अंदर एक बहुत छोटी तस्वीर थी।

तस्वीर में दो बच्चियाँ थीं।

नैना और अनिका।

लेकिन तस्वीर के पीछे एक तारीख लिखी थी।

और तारीख देखकर नैना हैरान रह गई।

वह तारीख उस घटना से तीन साल बाद की थी, जब परिवार ने कहा था कि अनिका की मौत हो चुकी है।

“ये कैसे हो सकता है?”

अर्जुन ने कहा—

“यही सवाल हमें भी पूछना है।”

नैना ने लॉकेट को कसकर पकड़ लिया।

“इसका मतलब अनिका उस समय जिंदा थी।”

“हाँ।”

“तो वह कहाँ थी?”

“मुझे नहीं पता।”

“तुम्हें कुछ तो पता होगा!”

अर्जुन ने कुछ क्षण चुप रहकर कहा—

“मुझे इतना पता है कि उसे एक महिला अपने साथ ले गई थी।”

“कौन महिला?”

“नाम नहीं जानता।”

“फिर तुम यह सब कैसे जानते हो?”

अर्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—

“क्योंकि मैं उस महिला को जानता था।”

नैना कुछ बोल नहीं पाई।

“तुम उसे कहाँ मिले?”

“बहुत साल पहले।”

“और अनिका?”

अर्जुन ने नजरें झुका लीं।

“वह भी वहीं थी।”

नैना के दिल की धड़कन बढ़ गई।

“तुमने मेरी बहन को देखा है?”

“हाँ।”

“कब?”

“कुछ साल पहले।”

“वह कैसी थी?”

अर्जुन के चेहरे पर हल्की उदासी आ गई।

“तुम्हारी तरह।”

नैना की आँखों में आँसू आ गए।

“क्या वह ठीक थी?”

“हाँ।”

“क्या उसने मेरे बारे में पूछा था?”

अर्जुन कुछ देर चुप रहा।

फिर उसने कहा—

“हर दिन।”

नैना की आँखों से आँसू बह निकले।

“उसने मेरा नाम लिया था?”

“बहुत बार।”

नैना ने चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

उसे पहली बार महसूस हुआ कि उसकी बहन भी शायद इतने वर्षों से उसे याद करती रही थी।

तभी अचानक अर्जुन का फोन बजा।

उसने स्क्रीन देखी और तुरंत फोन काट दिया।

नैना ने पूछा—

“किसका फोन था?”

“जरूरी नहीं।”

“मुझे सच बताओ।”

अर्जुन ने फोन जेब में रख लिया।

“हमें यहाँ से निकलना होगा।”

“क्यों?”

अर्जुन ने मंदिर के बाहर की सड़क की तरफ देखा।

दूर एक काली कार खड़ी थी।

नैना ने भी उसे देखा।

“वह कार कब से वहाँ है?”

“कुछ मिनटों से।”

अर्जुन ने धीमे स्वर में कहा—

“शायद कोई हमारा पीछा कर रहा है।”

नैना का चेहरा डर से सफेद पड़ गया।

“कौन?”

अर्जुन ने जवाब नहीं दिया।

दोनों जल्दी से मंदिर के पीछे की पगडंडी से निकलने लगे।

कुछ दूरी पर पहुँचकर नैना ने पीछे मुड़कर देखा।

काली कार अब वहाँ नहीं थी।

लेकिन उसके भीतर डर बैठ चुका था।

अर्जुन ने कहा—

“तुम अभी सीधे घर मत जाना।”

“क्यों?”

“क्योंकि अगर तुम्हारे परिवार में कोई इस बात को छिपाने की कोशिश कर रहा है, तो उसे पता चल चुका होगा कि तुम सच के करीब पहुँच गई हो।”

नैना ने पूछा—

“तो मैं कहाँ जाऊँ?”

“रिया के घर।”

“और तुम?”

“मुझे कुछ काम करना है।”

“कौन-सा?”

अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया।

नैना ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“अर्जुन, मैं तुम पर भी पूरा भरोसा नहीं करती।”

वह मुस्कुराया।

“तुम्हें करना भी नहीं चाहिए।”

नैना ने उसे हैरानी से देखा।

“क्या मतलब?”

“सच की तलाश में किसी पर आँख बंद करके भरोसा नहीं किया जाता।”

इतना कहकर वह चला गया।

नैना कुछ देर वहीं खड़ी रही।

फिर उसने रिया को फोन किया।

“रिया, मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।”

“क्या हुआ?”

“मेरी बहन जिंदा है।”

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक खामोशी रही।

“क्या?”

“हाँ। मुझे अभी बहुत कुछ बताना है।”

शाम तक नैना रिया के घर पहुँच गई।

उसने उसे पूरी कहानी सुनाई।

रिया ने लॉकेट को ध्यान से देखा।

“नैना, इसमें कुछ छिपा हुआ हो सकता है।”

“क्या?”

“इसे किसी विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।”

दोनों ने लॉकेट को ध्यान से देखा।

रिया ने मोबाइल की टॉर्च से उसके अंदरूनी हिस्से को देखा।

उसे वहाँ एक बहुत छोटा-सा निशान दिखाई दिया।

“यह देखो।”

“क्या?”

“यह अक्षर जैसा लग रहा है।”

नैना ने देखा।

वहाँ सिर्फ दो अक्षर लिखे थे—

A.K.

नैना ने धीरे से कहा—

“अनिका कपूर?”

रिया ने तुरंत पूछा—

“तुम्हारी बहन का पूरा नाम क्या था?”

“अनिका शर्मा।”

“फिर A.K. क्यों?”

नैना के मन में एक और सवाल पैदा हुआ।

“शायद किसी और का नाम है।”

उसी समय नैना के फोन पर एक संदेश आया।

इस बार संदेश विक्रम का था।

“अपने पिता से आज रात सवाल मत करना। वह तुम्हें पूरी सच्चाई नहीं बता पाएँगे।”

नैना ने तुरंत जवाब दिया—

“तो कौन बताएगा?”

कुछ सेकंड बाद जवाब आया—

“जिसे तुमने आज मंदिर में देखा।”

नैना का दिल रुक-सा गया।

विक्रम को अर्जुन के बारे में पता था।

लेकिन इससे भी ज्यादा डरावनी बात यह थी कि विक्रम जानता था कि वह आज मंदिर गई थी।

नैना ने रिया की तरफ देखा।

“उसे सब पता था।”

रिया ने पूछा—

“किसे?”

“विक्रम को।”

“लेकिन उसे कैसे पता चला कि तुम मंदिर गई थीं?”

नैना के पास कोई जवाब नहीं था।

तभी रिया के घर के बाहर किसी गाड़ी के रुकने की आवाज आई।

दोनों खिड़की के पास गईं।

सड़क पर वही काली कार खड़ी थी।

नैना का चेहरा पीला पड़ गया।

“रिया…”

“हाँ?”

“यह वही कार है।”

दोनों कुछ सेकंड तक चुप रहीं।

फिर कार का दरवाजा खुला।

एक महिला बाहर निकली।

उसने घर की तरफ देखा।

और उसके हाथ में वही लॉकेट था, जैसा नैना के गले में था।

नैना की साँस अटक गई।

महिला ने दूर से नैना को देखा।

फिर धीरे से अपने चेहरे से दुपट्टा हटाया।

नैना की आँखें फैल गईं।

उस महिला का चेहरा उसे बहुत जाना-पहचाना लग रहा था।

उसके होंठों से सिर्फ एक शब्द निकला—

“अनिका…”

Chapter 3 समाप्त

(अब क्या हुआ आगे इस कहानी में ये जानने के लिए आपको पढ़नी पड़ेगी मेरी ये कहानी जिसका नाम है, "Unwanted Marriage With Uncle ' )

To be continued.

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