Red Rose Ch. 2

Red Rose - Chapter 2

Posted by Himali • Aug 17, 2026 09:51 PM

बारिश अब और तेज़ हो चुकी थी। खिड़की पर टकराती बूँदों की आवाज़ जैसे कमरे के अंदर जलती हुई आग को भड़काने का काम कर रही थी।

संक्षिप्त ने जब सेलेना को बिस्तर पर धकेला, उसके silk gown की पतली स्ट्रैप्स पहले ही ढलक चुकी थीं। उसकी सफ़ेद त्वचा पर बारिश की ठंडी हवा और संक्षिप्त की गर्म साँसें—एक अजीब सा contrast बना रही थीं।

“संक्षिप्त…” सेलेना ने भारी साँसों में कहा, उसकी आवाज़ में डर और चाहत दोनों थे।

“Shh…” संक्षिप्त ने उसके होंठों पर उँगली रखी। “No more words. Tonight I take what you’ve been hiding.”

संक्षिप्त ने सेलेना का  गाउन खींचकर पूरी तरह उतार दिया। अब उसके सामने सेलेना का **** शरीर था—bare, trembling, लेकिन आँखों में एक आग लिए।

संक्षिप्त उसके ऊपर झुका, होंठों से उसकी गर्दन, collarbone, फिर धीरे-धीरे उसके नाजुक उभरे हुए बदन तक। उसने एक-एक को rough lips से पकड़ लिया, जीभ से tease किया और फिर हल्के दाँतों से काटा।

सेलेना के होंठों से एक uncontrolled कराह निकली—“Ahhh… , संक्षिप्त…”

संक्षिप्त का  हाथ अब नीचे सरक चुके थे। उसने उसकी जाँघों को spread किया, और उँगलियाँ उसकी सॉफ्टनेस तक पहुँचीं। सिर्फ़ हल्का सा touch… लेकिन सेलेना का पूरा शरीर काँप उठा।

“Damn, you’re already prepare” संक्षिप्त ने गहरी आवाज़ में कहा।

सेलेना ने उसकी आँखों में देखा—“Maybe… I was waiting for this.”

संक्षिप्त ने उसके पैरों को और फैलाया और अपने होंठ उसके inner thighs पर रख दिए। संक्षिप्त ने धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते हुए आखिरकार उसकी सॉफ्टनेस तक पहुँचकर जीभ से पहला long, wet lick दिया।

“अह्ह्हह्ह” सेलेना की पीठ गद्दे पर तन गई।

संक्षिप्त अब लगातार उसे explore कर रहा था—licks, , जीभ से उसकी सॉफ्टनेस  को tease करता हुआ। संक्षिप्त के हाथ उसकी जाँघों को पकड़कर उसे और open रखे हुए थे।

सेलेना के कराहने की आवाज़ कमरे की खामोशी और बारिश की आवाज़ के बीच और भी तीव्र हो रही थी। “Oh god… don’t stop… don’t you taking stop…”

संक्षिप्त ने उसकी सॉफ्टनेस को हल्के-हल्के दाँतों से काटा और फिर जीभ से तेज़ी से rub किया। सेलेना अब बिस्तर पर पागल होकर करवटें बदल रही थी।

सेलेना ने संक्षिप्त के बाल पकड़कर उसका सिर अपनी ओर और दबा दिया। “ harder… make me crazy now!”

संक्षिप्त ने और तेज़ी से अपनी जीभ चलाई। कुछ ही मिनटों में सेलेना का पूरा शरीर काँप गया और एक जोरदार थ्रस्ट में उसकी कराह फूट पड़ी।

“Ahhhhhh…  yes…”

सेलेना  साँसें अब भी भारी थीं, लेकिन आँखों में और भी भूख झलक रही थी।

—

दो घंटे बाद

जैसे ही उनका **** करीब आया, खिड़की के पास फिर वही परछाई हिली।

संक्षिप्त ने एक पल के लिए ऊपर देखा। “Someone’s here…”

लेकिन सेलेना ने उसकी गर्दन पकड़कर उसे फिर से अपनी ओर खींच लिया। “Not now… don’t you dare stop.”

संक्षिप्त ने और तेज़ thrusts लगाए। दोनों का शरीर अब uncontrolled था।

कुछ ही पलों में उसने जोरदार तरीके से उसे भर दिया—संक्षिप्त  का गर्म सलाइवा सेलेना  अंदर गहराई तक चला गया। “Ah yessss…” सेलेना **** की लहरों में काँप उठी।

कमरे में सिर्फ़ उनकी भारी साँसें और बाहर की बारिश की आवाज़ गूँज रही थी।

संक्षिप्त ने उसके गाल पर हाथ रखा और गहरी आवाज़ में कहा—

“This isn’t over, . Either you’re the next victim… or you’re the bait.”

सेलेना की मुस्कान रहस्यमयी थी, होंठ अब भी भीगे हुए— “Maybe I’m both.”

___

दूसरी ओर

बारिश लगातार बरस रही थी। मुंबई की सड़कों पर पानी जमा हो चुका था। रात की हवा में नमी और डर दोनों घुले हुए थे।

कबीर रॉय, जोन का ips ऑफिसर, अपनी गाड़ी किनारे लगाकर उतरा। उसके रेनकोट की हुड पर पानी टपक रहा था। उसने बीड़ी जलाने की कोशिश की लेकिन हवा और बारिश ने हर बार लौ बुझा दी। झुंझलाकर उसने बीड़ी जेब में डाल दी और अंधेरी सड़क पर आगे बढ़ गया।

स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी टिमटिमा रही थी। तभी उसकी नज़र पड़ी— सड़क किनारे एक धुंधली परछाई हिलती हुई।

“कौन है वहाँ?” कबीर ने ऊँची आवाज़ में पुकारा।

परछाई हल्की सी मुड़ी और फिर ज़मीन पर गिर गई। कबीर दौड़कर वहाँ पहुँचा। कबीर के सामने जो नज़ारा था उसने उसका दिल दहला दिया।

एक लड़की की लाश पड़ी थी। भीगे बाल, आँखें खुली और खाली… और गले में कसकर बंधा हुआ लाल रिबन। रिबन पर से बारिश की बूँदें फिसलकर खून के धब्बों में मिल रही थीं।

कबीर के पैर जम गए। उसने तुरंत टॉर्च निकाली और रोशनी उस पर डाली। लड़की की कलाई पर भी गहरे नीले निशान थे, जैसे किसी ने ज़ोर से पकड़ा हो।

“व्हाट द …?” कबीर बड़बड़ाया।

कबीर का दिमाग़ तुरंत तेज़ी से दौड़ने लगा। ये वही पैटर्न था— वही रेड रिबन वाला क़त्ल। पर इस बार सबसे डरावना सच ये था कि उसने खुद उस परछाई को हिलते हुए देखा था। यानी, कातिल यहीं कहीं आस-पास था।

कबीर ने चारों ओर टॉर्च घुमाई। बारिश की परतें उसके सामने जैसे धुँध का पर्दा बना रही थीं। दूर ऊँचाई पर, एक बारहवीं मंज़िल की खिड़की में रोशनी जल रही थी। परदों के पीछे दो परछाइयाँ हल्की-हल्की हिल रही थीं।

कबीर की नज़रें जम गईं।

वो समझ गया— कोई ऊपर व्यस्त था… और इसी बीच ये लाश नीचे रख दी गई थी।

कबीर ने तुरंत वायरलेस उठाया। “Control, this is Roy. We’ve got another body. Female victim. Same pattern. Location—Marine Drive stretch. I need backup, right now.”

वायरलेस से सिर्फ़ खरखराहट आई। शायद बारिश ने सिग्नल बिगाड़ दिया था।

कबीर घुटनों के बल बैठकर लाश के पास आया। उसने धीरे से लड़की की पलकों को बंद करने की कोशिश की, पर ठंडी त्वचा उसके हाथों में चुभ गई।

“किसने किया ये…” कबीर की आवाज़ गुस्से से भर गई।

वो उठकर सड़क के बीच में खड़ा हुआ। बारिश उसके चेहरे पर गिर रही थी लेकिन उसकी आँखों में सिर्फ़ एक ही आग थी— इस बार वो कातिल को ढूँढकर छोड़ेगा।

ऊपर, उस खिड़की के पीछे, उसे लगा कोई उसे देख रहा है। पर जैसे ही उसने नज़र गड़ाई— परदा धीरे से खिसक गया।

कबीर ने दाँत भींचते हुए बुदबुदाया— “The game has just begun.”

किसी कमरे में कोई खतरनाक धुन बजा रहा था।

हलके उजालो में

हलके अंधेरो

में जो एक राज़ है

क्यों खो गया है वह

क्या हो गया है की

वह नाराज़ है

ए रात इतना बता

तुझको तो होगा पता हां

__

100%