चुलबुली सांझ आपकी प्यारी सी दुनिया - Chapter 3
मुंबई का सबसे लग्जरियस और पॉश इलाका जहां पर बड़े-बड़े अमीरों के अलावा और कोई रहना अफोर्ट नहीं नहीं कर सकता था। यहां के हर घर में या तो कोई बिजनेस टायकून था या फिर माफिया या फिर गैंगस्टर थोड़ी देर बाद ही गाड़ी एक बहुत बड़े मेन गेट से होते हुए एक बहुत ही आलीशान और बड़े से मेंशन के सामने रुकी.....!!
सूर्या बिना देर किए जल्दी से अंदर चला गया रात हो जाने के कारण सभी लोग अपने रूम में सोए हुए थे। तो वो सीधा अपने रूम मैं जाकर बाथरूम में फ्रेश हुआ.... और अपनी फाइल्स और लैपटॉप लेकर सोफे पर बैठ कर काम करने लगा।
दूसरी तरफ मुंबई कृष्णा चोल में
सांझ चल उठ जा और जल्दी से घर के काम में मेरा हाथ बटा। फिर तुझे कॉलेज भी जाना है , और मुझे काम पर इसलिए जल्दी कर .... कल की तरह देर मत कर दियो।
अपनी मां की बात सुनकर वह उठ कर बैठ गई। और अपनी उनींदी खूबसूरत गहरी हेजल आंखों से अपनी मां को देखते हुए बच्चों की तरह बोली- मुझे कॉलेज नहीं जाना आई, वहां पर सभी लोग मुझे मेरे रंग की वजह से चिढ़ाते है। कोई मुझसे दोस्ती भी नहीं करता ना ही अपने पास बैठाता है। हर वक्त मेरा मजाक उड़ाते हैं। इतना कहकर मुंह बना कर वहीं बैठ जाती है।
वही उसकी मां जो दाल में छौका लगा रही थी। उनसे उसका उदास चेहरा देखा नहीं गया , तो वो उसके पास आई और उसे प्यार से पूचकारते हुए बोली - ऐसा नहीं कहते सांझ तू क्या है यह तु बहुत अच्छी तरह से जानती है। तो फिर ऐसे लोगों की बातों का क्या बुरा मानना यह तो होते ही दोगले लोग हैं। आज तेरे रंग रूप की वजह से तुझ में कमियां निकालते हैं। कल जब पढ़ लिख कर तू कुछ बन जाएगी। तो तेरे आगे पीछे कुत्तों की तरह मंडराएंगे इसीलिए ऐसे लोगों की बातों को दिल पर मत लिया कर अब चल जल्दी से तैयार हो....!!
सुनीता की बात सुनकर भी सांझ मुंह बनाकर वैसे ही लेती रही , आखिर जिद्दी जो थी वो उसे ऐसे देख सुनीता सर हिलाते हुए मुस्कुराई और फिर प्यार से उसके बालों में हाथ फेरते हुए उससे बोली!'' बच्चा तू नहीं चाहती कि तू कुछ बनकर अपनी आई का नाम रोशन करें, जिससे तेरी आई को भी लोगों के सामने प्राउड फील हो ।
अपनी आई की बात सुनकर सांझ की हेजल आंखों में चमक आ गई , वो एकदम से उठकर बैठ गई और फिर सुनीता का हाथ पकड़ कर चमकती हुई आंखों के साथ मुस्कुराते हुए उससे बोली!'' आई अगर मैं किसी दिन सच में कुछ बन गई ना तो सबसे तेरा काम पर जाना बंद करवा दूंगी, मुझे बिल्कुल नहीं पसंद जब तू मेरी वजह से दूसरों के घर पर काम करती है। इतना कहकर सांझ ने आगे बढ़कर सुनीता के गाल को चूम लिया और फिर मुस्कुराते हुए बेड से उतर कर भागते हुए बाथरूम में घुस गई, ये देख सुनीता भी मुस्कुराते हुए वापस किचन में आ गई और खाना बनाने लगी।
ये हैं सांझ दिखने में बेहद खूबसूरत , तीखे नैन नक्श , गोल चेहरा , गहरी हेजल आंखें जिनमें कोई एक बार देख ले तो उन में डूब कर रह जाए पर कमबख्त वो हमेशा नजर के चश्मे की आड़ में छुपी रहती थी। लंबे घने काले घुंघराले बाल जो उसके कमर पर लहराने के लिए बेताब रहते पर सांझ उन्हें चोटी से बाहर नहीं आने देती। एक कमी थी उसमें वो था उसका रंग जो कि बेहद काला था। और इसी वजह से गली, मोहल्ले, चौल के बच्चे उसे काली कलूटी काली बिल्ली कहकर बुलाते थे। लेकिन सांझ तो सांझ थी.....!!
एकदम हंसती खिलखिलाती चुलबुली मस्त मौला 19 साल की सांझ ! रंग काला होने के बावजूद भी अपनी हरकतों से सभी को एक ना एक बार अपनी ओर आकर्षित कर ही लेती थी! चाहे वो अच्छाई में हो या बुराई में लेकिन उसे किसी से कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। वो बस अपने में मस्त रहती थी सुबह उठकर अपनी आई के साथ काम में हाथ बटाना.... उसके बाद कॉलेज....! कॉलेज के बाद घर पर पढ़ाई उसके बाद कुछ पैसे इकट्ठे करने के लिए सिलाई करना! इन्हीं सब कामों में उसे रात हो जाया करती थी जिसके बाद सुनीता उसकी आई घर आ जाती थी। तो दोनों मां बेटी साथ में खाना बनाकर कुछ समय साथ बिताती थी।
थोड़ी देर में वो तैयार होकर बाहर हॉल में आकर वही रखी कुर्सी पर बैठ गई। उसका मुंह अभी भी फुला हुआ था, पहले सुनीता जी ने उसे अपनी बातों में लेकर तैयार होने के लिए मना तो लिया था, लेकिन अब वापस से कॉलेज जाने के नाम से उसे चिड़ हो रही थी। तभी सुनीता हाथ में खाना लेकर आई और उसके फूले हुए मुंह को देखकर मुस्कुरा उठी....! और प्यार से उससे बोली- वैसे आज कॉलेज जाने के नाम पर इतना नाटक क्यों किया जा रहा है? कहीं दाल में कुछ काला तो नहीं इतना कहकर शक भरी निगाहों से सांझ को घूरने लगती है!
उनके इस तरह घूरने से सांझ हरबड़ा जाती है और हकलाते हुए उनसे बोली वो,,,वो,,आ,, आई,,,क,, कल कॉलेज,,, में,,,,
वो इतना ही कह पाती है। कि तभी दरवाजे से अंदर आते हुए एक लड़का बोला- कल इसने एक लड़के को सबक सिखाने के लिए जो इसे हमेशा से कहता है- की काली बिल्ली ने रास्ता काट दिया उसके ऊपर स्याही (इंक) फेंकी .....!! लेकिन अब इसकी बुरी किस्मत कहे या उस लड़के की अच्छी किस्मत कि ठीक उसी वक्त वह लड़का तो उस जगह से उठ गया? और उस जगह पर हमारे प्रिंसिपल सर प्रकट हो गए और सारी इंक उनके कपड़े और उनके फेस के ऊपर गई तभी से प्रिंसिपल सर इससे खार खाए बैठे हुए हैं! और यह खबर डीन तक भी पहुंच गई है तो उन्होंने कॉलेज में आपको बुलाया है। अब वो इसे रस्टिगेट करते हैं या फिर वार्निंग देकर छोड़ते हैं यह तो वही जाने.....?!
इतना कहकर वहीं बैठकर सुनीता जी के हाथ से प्लेट लेकर खाना खाने लगता है। साथ ही उन दोनों के चेहरे को भी देख रहा था जिस पर ना जाने कितनी भाव तेजी से आवा जाई कर रहे थे। वही सुनीता जी हैरानी से सांझ को देख रही थी। और सांझ वो तो आंखों में अंगारे लिए सामने बैठे लड़के को देख रही थी जो इत्मीनान से उसके हिस्से का नाश्ता कर रहा था।
तभी उस लड़के को महसूस हुआ कि शायद उसने कुछ गलत किया है, यही महसूस कर उसने जल्दी से पराठे को फोल्ड कर हाथ में ले लिया और सुनीता की तरफ देखते हुए उससे बोला !' 'चाची मुझे लगता है कि अभी यहां का माहौल मेरे लिए सही नहीं है , इसीलिए मुझे यहां से जाना चाहिए, इससे पहले की कोई जंगली बिल्ली बनकर मेरे ऊपर झपट्टा मारे ।
कहकर वो अपनी सीट से उठा ही था कि तभी एकदम से सांझ उसकी तरफ लपकी और गुस्से में उसे मुक्का मारते हुए बोली!'' आदि के बच्चे में तुझे छोडूंगी, नहीं कल बोला था ना तुझे, घर पर अपना मुंह बंद रखियो पर तेरी जबान कैची की तरह चलती है, कभी बंद होने का नाम नहीं लेती आज तो मे इसे काट कर रख दूंगी ।
वही आदि उससे खुद को छुड़ाते हुए बाहर की तरफ भागते हुए बोला!'' चाची बाय शाम को मिलता हूं और इस नालायक को समझा कर टाइम से नीचे भेज देना , मैं ज्यादा देर इंतजार नहीं करूंगा अगर ये 10 मिनट में नीचे नहीं आई , तो मैं अकेला ही कॉलेज चला जाऊंगा।
सांझ भी गुस्से में आदि रुक मैं तुझे छोडूंगी नहीं ... कहते हुए उसके पीछे भागने को हुई, कि तभी पीछे से एकदम से सुनीता ने आकर उसका कान पकड़ लिया और गुस्से में उससे बोली!'' तू उसे तो तब छोड़ेगी पर पहले तु मुझसे तो बच कर दिखा , उनकी बात सुनकर सांझ बनावटी हंसी हंसते हुए उनकी तरफ पलटते हुए उनसे कुछ कहने को हुई , कि तभी सुनीता ने एकदम से उसका कान मरोड़ दिया और गुस्से में उसे डांटते हुए बोली;'' कितनी बार कहा है शांत रहा कर , कॉलेज में हंगामा मत किया कर , पर तुझे समझ नहीं आती ना मेरी बात, जानती है ना मैंने कितनी मुश्किल से तेरा वहां एडमिशन कराया और तू अपनी हरकतों से वहां से भी निकलना चाहती है।
वही सांझ सुनीता से अपना कान छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, वो रोनी सूरत बनाकर चिल्लाते हुए सुनीता से बोली !' 'आह आई लग रही है आह छोड़ो दर्द हो रहा है, आई आई आदि झूठ बोल रहा है, मैंने कुछ नहीं किया वो तो पागल है उसे कुछ भी नहीं पता ।
तो सुनीता उसके कान को कस कर पकड़ते हुए गुस्से में बोली!'' अच्छा उसे कुछ नहीं पता पर तुझे तो सब पता है ना फिर तूने क्यों नहीं बताया मुझे अभी तक कुछ भी, क्योंकि तू जानती है कि उसमें तेरी गलती है अगर तू बताती तो मुझसे झूठ नहीं बोल पाती, इसीलिए अब तक चुप थी ना और कॉलेज जाने के नाम से नाटक कर रही थी तेरी तो आज खैर नहीं, तू रुक कह कर उसने सांझ का कान छोड़ दिया और इधर-उधर कुछ देखने लगी, तभी उनकी नजर किचन में रखे बेलन पर गई, यह देख सुनीता तेज कदमों से किचन की तरफ बढ़ गई और वहां से बेलन उठा लिया फिर उसे लेकर सांझ की तरफ आने लगी, वो गुस्से में सांझ की तरफ बढ़ते हुए बोली!'' सांझ आज तो मैं तेरी टांगे तोड़ दूंगी , तू रुक जा , बहुत शरारत करती है ना तू ।
वही सुनीता को अपनी तरफ आते देख सांझ घबरा गई , उसे इस दुनिया में सिर्फ दो ही चीजों से डर लगता था एक इंजेक्शन से और दूसरा अपनी आई से वो कुछ सोचने लगी , जिससे अपनी आई की मार से बच सके सोचते हुए अचानक उसे कुछ सूझा और उसकी आंखें शरारत से चमकने लगी , उसने अपनी आंखें बड़ी करते हुए अपने मुंह पर हाथ रख लिया और तेज आवाज में चिल्लाते हुए बोली!'' होओ आहह आई तेरे पीछे डायनासोर।
उसकी बात सुनकर सुनीता एक पल के लिए हैरान रह गई, उसे कुछ समझ नहीं आया लेकिन सांझ के चिल्लाने से वो घबरा जरूर गई , उसने एकदम घबराते हुए पीछे मुड़ते हुए कहा !''क्या डायनासोर मेरे पीछे, और उनके पीछे कुछ भी नहीं था सुनीता की आंखों में ठंडक उभर आई
उसने गुस्से में अपनी आंखें बंद की!'' सांझ आज तो तू गई, रुक तेरी तो खैर नहीं... कहते हुए जैसे ही वो सामने की तरफ पलटी, तो सांझ और उसका बैग वहां से गायब था , यह देख सुनीता ने गहरी सांस ली और खुद से बोली !''यह नालायक लड़की पता नहीं कब सुधरेगी हर रोज एक नई शरारत , हर रोज एक नया पंगा, इसकी यह हरकतें एक दिन मेरी जान ले लेंगी ।
(तो यह है , हमारी छोटी क्यूट सी थोड़ी शरारती, नटखट, चुलवुली, तो थोड़ी कांडी, और वक्त पड़ने पर सभी से प्यार जताने वाली सांझ....!! और सांझ के साथ हुई छोटी सी मुलाकात आपको कैसी लगी...? मुझे कमेंट करके जरूर बताइएगा। और हां कहानी जारी रहेगी आप सब रीडर्स अपनी रेटिंग्स कमेंट जरुर दें और मुझे फॉलो करके सपोर्ट करें)