हुकुम सा की जुनूनियत भरी मोहब्बत Ch. 2

हुकुम सा की जुनूनियत भरी मोहब्बत - Chapter 2

Posted by Minu Singh • Aug 03, 2026 09:54 PM

हुकुम सा का गुस्सा देखकर रामू काका डर के मारे कांपने लगते हैं... !

वही हुकुम सा गुस्से से अपने हाथों की मुट्ठीया भींचे सोफे पर जाकर बैठते हुए अपने घड़ी को देखने लगते हैं

डाॅक्टर को दिया वक्त बस पूरा होने ही वाला था कि तभी डाॅक्टर हाॅफते हुए कमरे में दाखिल हुआ और चौखट पर खड़ा होकर हाॅंफने लग

हुकुम सा डाॅक्टर को देखते हुए सर्द आवाज में बोले

"लगता हैं आपको अपने जिंदगी और नौकरी की बिल्कुल भी चिंता नहीं है डाॅक्टर साहेब"

हुकुम सा के बात का मतलब समझ आते ही डाॅक्टर दौड़ते हुए गायत्री जी के पास जाकर मिमियाते हुए बोला

"हुकुम सा आप लोग बाहर जाइए हम जल्दी ही बड़ी रानी सा का चेकअप कर के आपको बताते हैं"

हुकुम सा चुपचाप कमरे से बाहर निकल गए और उनके ही पीछे रामू काका भी बाहर आ गये.

हुकुम सा कमरे से बाहर निकल कर बैचेनी से टहलने लगते हैं...!

कुछ देर बाद

डाॅक्टर बाहर आकर हुकुम सा को देखते हुए बोला

"बडी रानी सा अब बिल्कुल ठीक है हुकुम सा हमने उन्हें इंजेक्शन दे दिया है कुछ देर में उन्हें होश भी आ जाएगा पर ध्यान रखिएगा कि बड़ी रानी सा ज्यादा स्ट्रेस ना ले क्योंकि स्ट्रेस उनके हेल्थ के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है.....!

डाॅक्टर यह कहां के वहां से चल जाता है...!

डाॅक्टर की बातों को सुनकर हुकुम सा अपने कमरे के अंदर चले गए और अपनी मासा को एक नजर देखकर हुकुम सा एक कुर्सी खींच के बेड के पास रखने के बाद मासा का एक हाथ अपने दोनों हाथों में लेकर बैठकर देखने लगते हैं....!

कुछ ही देर में ही गायत्री जी को होश आ गया था और अपनी आंखे खोलते ही उनकी नजर सीधे हुकुम सा पर पड़ी गायत्री जी हुकुम सा को देख हल्का मुस्कुराने के बाद उठने की कोशिश करने लगती है...!

हुकुम सा बिना कुछ बोले गायत्री जी को सहारा देकर ठीक से बेड पर बिठा देते हैं... !

कुछ देर की शांति के बाद हुकुम सा बोलें

"मासा सा क्या हम आपसे कुछ पूछ सकते हैं?"

उनकी बात सुन गायत्री जी हां मैं सर हिलाया

हुकुम सा अपने मासा सा के चेहरे पर नजरें टिकाते हुए उनसे पूछते हैं.... !

"क्या आप सच में चाहती है कि हम दादा सा की पसंद हुई लड़की से शादी करें?"

गायत्री जी खुशी से चहकते हुए बोली

"हां बिल्कुल हमारा बस चलता तो हम कब के उन्हें अपने घर के बहु बना चुके होते पता नहीं क्या जादू है उनमें आपको पता है सूर्या हम कितने एक्साइटेड हैं कल उन्हें अपने बहू के रुप में देखने के लिए"

गायत्री जी के चेहरे की खुशी बता रही थी कि उनका कहा एक एक बात सच हैं सच में वह बहुत ज्यादा खुश लगा रही थी...!

हुकुम सा अपने मासा को इतने खुश देखकर अपने मन ही मन बोले

"अब तो शादी करने होगी सुर्य सिंह प्रताप"

फिर हुकुम सा गायत्री जी को अपने कमरे में से उनके कमरे में ले जाकर अच्छे से बेड पर लेटा दिए

तभी गायत्री जी मुस्कुराते हुए बोली

"सूर्या अब आपको हमारी चिंता करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है हमें इतनी जल्दी कुछ नहीं होगा अब आप जाकर आराम कर ले हमें सुबह ही गांव के लिए निकलना है और हां आप हमारी बिमार पड़ने के बारे में घर में किसी को मत बताइएगा"

हुकुम सा अपने सर हिलाते हुए बोले

"ठीक है मासा"

यह बोलते हुए अपने कमरे में चले गए और दरवाजा अंदर से लॉक कर के बेड पर बेसुध हो कर गिर पड़े

अगली सुबह

महक के घर में बहुत चहल पहल मची हुई थी महक के दादा जी सभी पर गुस्सा करते हुए जल्दी जल्दी काम करने को हिदायत दे रहे थे महक के दादा जी अपनी पोती की शादी में दिलों जान से जुटे हुए थे...!

तभी एक राज नाम का लड़का दादाजी के पास आकर दादा जी को आराम से एक कुर्सी पर बैठते हुए बोलता है

"दादा जी आप परेशान क्यों हो रहे हैं? राज हैं ना राज के होते हुए महक की शादी में कोई कमी नही रहेगी और ना ही राजस्थान के आओ भगत में किसी प्रकार की कोई कमी होगी"

सतेन्द्र जी आराम से कुर्सी पर बैठ जाते हैं और प्यार से राज के सर पर हाथ रखते हुए बोले

"हम जानते हैं राज बेटा कि तुम्हारे होते हुए कोई कमी नहीं रहेगी तुम जानते हो हमें तुम पर इतना भरोसा है कि अगर हमने अपने दोस्त को वादा ना किया होता तो हम तो महक की शादी तुम से ही करते"

राज भी सतेन्द्र जी का एक हाथ अपने हाथों में थामते हुए कहा

"दादा जी मेरी किस्मत शायद इतनी अच्छी नहीं है कि महक जैसी प्यारी और मासूम लड़की मेरी किस्मत में आए महक तो सिर्फ हुकुम सा की किस्मत में लिखी है"

ये बोलते हुए राज की आंखों में हल्की सी आंसू आ जाते है...!

तभी पीछे से महक की आवाज आती है

"दादा और दादा का यह बुड्ढा दोस्त क्या बातें कर रहे हो"

राज अपने आंखों की आंसू को साफ करते हुए बोलता है

"दादा जी इस चुहिया को समझा लो इसकी शादी होने वाली है और यह अभी भी मुझे बुड्ढा बुड्ढा बोलती है मैं ना इस का सर फोडा दूंगा मैं किस एंगल से बुड्ढे नजर आता हूं??"

महक राज के तरफ देखते हुए बोलती है

"अरे हम तुम्हें तुम्हारा शरीर देखकर बुड्ढा थोडी ना बोलते हैं हम तो तुम्हारे विचार और तुम्हारी यह बुड्ढों जेसे अक्ल को देखकर बुड्ढा बोलते हैं तुम्हारे जैसे विचार निकलते है, उनसे तुम बुड्ढा ही लगते हो बिल्कुल बुड्ढा की तरह बातें करते हो तुम वरना शरीर से तो हटे कटे नौजवान लगाते हो अरे उम्र ही क्या है तुम्हारी पच्चीस साल ना हमसे बस पांच साल छह महीने ही तो बड़े हो लेकिन हरकतें तुम्हारे बुड्ढा जैसे ही है हूं"

यह बोलते हुए महक एकदम राज के पास आती है और फिर जोर से चिल्लाते हुए उसके कान में बुड्ढा बुड्ढा बोला कर भाग जाती है तो राज भी उसके पीछे पीछे भागने लगता है...!

और सतेन्द्र जी ऐसे दोनों को बच्चों की तरह झगड़ते हुए देखकर हंसने लग जाते हैं....!

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