My Strict Professor - Chapter 1
Chapter 1 – A New Beginning
सुबह के 7:15 बज रहे थे।🌞
खिड़की से आती सुनहरी धूप सीधे आयरा के चेहरे पर पड़ रही थी। अलार्म तो पाँच मिनट पहले ही बंद हो चुका था, लेकिन आज नींद अपने आप खुल गई थी।🥱🥱
आख़िर आज उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दिन था।
आज वह पहली बार Royal Commerce University जाने वाली थी।
आयरा शर्मा..
बाईस साल की एक साधारण-सी लड़की, लेकिन उसके सपने बिल्कुल साधारण नहीं थे।
उसने अपनी मेहनत के दम पर पूरे राज्य में पहली रैंक हासिल की थी। उसी उपलब्धि की वजह से उसे देश के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में स्कॉलरशिप मिली थी।
वह जल्दी से बिस्तर से उठी और आईने के सामने खड़ी हो गई।
"आज से एक नई शुरुआत..."
उसने खुद को मुस्कुराकर देखा।
"डरना मत, आयरा... तू यहाँ तक अपनी मेहनत से पहुँची है।"
रसोई से उसकी माँ की आवाज़ आई—
"आयरा... नाश्ता तैयार है!"
"आ रही हूँ, माँ!"
आयरा जल्दी से तैयार होकर नीचे आई।
डाइनिंग टेबल पर उसके पिता पहले से बैठे अख़बार पढ़ रहे थे।
उसे देखते ही अख़बार मोड़कर मुस्कुरा दिए।
"मेरी बेटी तो आज बिल्कुल प्रोफेसर जैसी लग रही है।"
आयरा हँस पड़ी।
"पापा... अभी तो स्टूडेंट हूँ।"
उसकी माँ ने उसके सामने गरम-गरम पराठे रख दिए।
"इतनी मेहनत की है तूने... बस ऐसे ही आगे बढ़ती रहना।"
आयरा ने दोनों के पैर छुए।
"आप दोनों का आशीर्वाद रहेगा तो सब अच्छा होगा।"
उसके पिता ने उसके सिर पर हाथ रखा।
"एक बात हमेशा याद रखना..."
"कभी किसी के पैसे या रुतबे से डरना मत... इंसान की पहचान उसके व्यवहार से होती है।"
आयरा ने सिर हिलाया।
"जी, पापा।"
कुछ देर बाद वह अपना बैग लेकर घर से निकल गई।
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कॉलेज का विशाल कैंपस दूर से ही दिखाई दे रहा था।
ऊँची-ऊँची इमारतें...
हर तरफ़ हरियाली...
सैकड़ों छात्र-छात्राएँ...
सब अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त थे।
आयरा कुछ पल वहीं खड़ी होकर सब देखती रही।
"वाह..."
"यही है मेरा नया कॉलेज..."
उसकी आँखों में चमक थी।
उसी समय पीछे से किसी ने उसकी आँखों पर हाथ रख दिए।
"बताओ मैं कौन हूँ?"
आयरा मुस्कुराई।
"मीरा..."
पीछे खड़ी लड़की ज़ोर से हँस पड़ी।
"यार... हर बार पहचान लेती हो!"
दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया।
मीरा और आयरा की मुलाक़ात ऑनलाइन ओरिएंटेशन के दौरान हुई थी। कुछ ही दिनों में दोनों इतनी अच्छी दोस्त बन गई थीं कि लगता था बरसों से एक-दूसरे को जानती हों।
मीरा बिल्कुल आयरा के उलट थी।
जहाँ आयरा शांत और समझदार थी...
वहीं मीरा चंचल, बातूनी और हर समय मुस्कुराने वाली लड़की थी।
"चलो जल्दी..."
मीरा ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"सुना है इस कॉलेज के प्रोफेसर्स बहुत स्ट्रिक्ट हैं।"
आयरा हँस दी।
"हम पढ़ने आए हैं... डरने नहीं।"
"हाँ, लेकिन एक प्रोफेसर का नाम तो मैंने पहले ही सुन लिया है।"
"कौन?"
मीरा थोड़ा नाटकीय अंदाज़ में फुसफुसाई—
"प्रोफेसर रुद्र राज सिंह।"
आयरा ने भौंहें चढ़ाईं।
"इतना खास क्या है उनमें?"
"खास नहीं... खतरनाक!"
"पूरे कॉलेज में उनकी क्लास से सब डरते हैं।"
"कहते हैं, अगर पाँच मिनट भी लेट हो गए तो बाहर।"
"अगर असाइनमेंट पूरा न हो तो पूरी क्लास के सामने डाँट पड़ती है।"
"और..."
"उन्होंने आज तक किसी स्टूडेंट की एक भी बेकार बहाना नहीं सुना।"
आयरा हल्का-सा मुस्कुराई।
"अच्छा है..."
"कम से कम पढ़ाई तो अच्छी होगी।"
मीरा ने सिर पकड़ लिया।
"तू ना... सच में अलग ही पीस है।"
दोनों हँसते हुए एडमिन ब्लॉक की तरफ़ बढ़ने lagi..
कॉलेज के विशाल कैंपस में कदम रखते ही आयरा की नज़र हर तरफ़ घूमने लगी। सामने हरे-भरे लॉन थे, जिनके बीचों-बीच पत्थरों से बना एक लंबा रास्ता मुख्य भवन तक जाता था। दोनों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे और नए छात्र अपने-अपने विभाग खोजने में व्यस्त थे।
मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा, "यार... ये कॉलेज तो किसी फिल्म के सेट जैसा लग रहा है।"
आयरा हल्का-सा मुस्कुराई।
"हाँ... लेकिन यहाँ तक पहुँचने के लिए मैंने कितनी रातें जागकर पढ़ाई की हैं, ये सिर्फ़ मैं जानती हूँ।"
"अब बस एक ही सपना है..."
"क्या?"
"मम्मी-पापा को कभी किसी चीज़ की कमी महसूस न होने दूँ।"
मीरा कुछ पल उसे देखती रही। उसे हमेशा आयरा की यही बात सबसे अच्छी लगती थी कि इतनी बड़ी सफलता मिलने के बाद भी उसके अंदर ज़रा भी घमंड नहीं था।
दोनों कैंपस में लगे नोटिस बोर्ड के पास पहुँचीं। वहाँ नए छात्रों की क्लास लिस्ट लगी हुई थी। भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि किसी का नाम ढूँढना भी मुश्किल हो रहा था।
"अरे... मेरा नाम मिल गया!" मीरा खुशी से बोली।
आयरा भी अपना नाम ढूँढने लगी। कुछ सेकंड बाद उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।
"मिल गया..."
"Section A."
दोनों ने राहत की साँस ली।
तभी कॉलेज की घंटी बजी।
चारों तरफ़ भाग-दौड़ शुरू हो गई।
सीनियर्स अपने-अपने दोस्तों को बुला रहे थे, नए छात्र क्लासरूम खोज रहे थे और पूरे कैंपस में हलचल बढ़ गई थी।
मीरा धीरे से बोली, "सुन... मुझे ना थोड़ा डर लग रहा है।"
आयरा हँस दी।
"पहला दिन है, सबको लगता है। दो-तीन दिन में सब ठीक हो जाएगा।"
"अगर प्रोफेसर ने सवाल पूछ लिया तो?"
"तो जवाब देंगे।"
"और नहीं आया तो?"
"तो सीखेंगे।"
मीरा ने नाटकीय अंदाज़ में सिर पकड़ लिया।
"तू इंसान है या मोटिवेशनल स्पीकर?"
दोनों ज़ोर से हँस पड़ीं।
उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि उनकी यह बेफ़िक्र हँसी कुछ ही देर में एक ऐसे इंसान के सामने थम जाएगी, जो पूरे कॉलेज में अपने अनुशासन और सख़्त स्वभाव के लिए जाना जाता था।
आयरा ने एक बार फिर पूरे कॉलेज की इमारत की ओर देखा।
उसके मन में सिर्फ़ एक ही बात चल रही थी—
"यही जगह मेरे सपनों को नई उड़ान देगी।"
आयरा ने गहरी साँस ली और आसमान की ओर देखा। उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी। उसे यकीन था कि यह कॉलेज सिर्फ़ उसकी पढ़ाई की शुरुआत नहीं, बल्कि उसकी पूरी ज़िंदगी बदलने वाला था। उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि आने वाले दिनों में उसे ऐसे लोगों से मिलना होगा, जो उसकी सोच, उसके हौसले और उसकी किस्मत—तीनों को बदल देंगे।
उसे नहीं पता था कि इसी कॉलेज में उसकी ज़िंदगी का सबसे कठिन इम्तिहान सिर्फ़ किताबों का नहीं, बल्कि हालात और रिश्तों का भी होने वाला था।
To Be Continued...
Hlo my readers ye mera 1st novel h aapko kesa lga mujhe jrur btana or mujhe aage bharne me help Krna..aap sabhi ka thanku aapka review mere liye bhout mayne rakta h..❣️🫰