The Dark Romnce ( Mafiya's Love) - Chapter 1
मुंबई शहर की रात अक्सर चमकदार रोशनियों के पीछे अपने काले साए छुपा लेती है। मानसून की पहली बारिश ने सड़कों को कांच की तरह चमका दिया था। 'गुलमोहर अपार्टमेंट्स' की तीसरी मंज़िल पर बने एक छोटे, सादे से फ़्लैट की खिड़की पर बारिश की बूंदें एक अजीब सी धुन में बज रही थीं।
अंदर, कमरे में हल्की मद्धम रोशनी फैली हुई थी। एक पुराने लकड़ी के स्टडी टेबल पर ढेर सारी मेडिकल की किताबें बिखरी थीं। आन्या शर्मा टेबल पर झुकी हुई, अपनी चश्मे की फ़्रेम को थोड़ा ऊपर खिसकाते हुए एनाटॉमी के एक पन्ने को ध्यान से पढ़ रही थी। उसने सफ़ेद कॉटन का हल्का कुर्ती-पायजामा पहन रखा था, बाल एक ढीले से जूड़े में बंधे थे, जिनसे कुछ लटें निकलकर उसके गालों पर आ रही थीं।
आन्या कोई साधारण लड़की नहीं थी; उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई और मासूमियत थी, जो आज के दौर में कम ही देखने को मिलती है। सेंट ज़ेवियर्स मेडिकल कॉलेज में आन्या का नाम सबसे होनहार स्टूडेंट्स में गिना जाता था। उसके लिए दुनिया बहुत सीधी थी—मेहनत करो, लोगों का इलाज करो, और अपने परिवार को खुश रखो।
कमरे की दीवार पर लगी घड़ी ने रात के ग्यारह बजाए। टिक-टिक की आवाज़ कमरे की ख़ामोशी को काट रही थी।
आन्या ने लंबी सांस ली, अपनी आँखें मलीं और हाथ में पकड़े पेन को टेबल पर रख दिया। उसने खिड़की की तरफ़ देखा। बारिश अब थमी नहीं थी, बल्कि हवा के थपेड़ों के साथ उसकी रफ़्तार और बढ़ गई थी। उसके दिल में एक अजीब सी बेचैनी उठने लगी।
"आरव अभी तक घर नहीं आया..." उसने बुदबुदाते हुए दीवार पर टंगी घड़ी को दोबारा देखा।
आरव उसका छोटा भाई था—महज़ इक्कीस साल का। माँ-बाप के एक कार हादसे में गुज़र जाने के बाद, आन्या ने ही अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आरव को संभाला था। वह आरव से बेइंतहा प्यार करती थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से आरव का व्यवहार बदलने लगा था। वह अक्सर देर रात तक बाहर रहता, फ़ोन पर फुसफुसाकर बातें करता और मांगने पर बहाने बनाता।
आन्या ने अपने फ़ोन की स्क्रीन ऑन की। कोई मैसेज नहीं, कोई कॉल नहीं। उसने आरव का नंबर डायल किया।
कॉल रिंग होती रही... तीन बार, चार बार... फिर वॉइसमेल पर चली गई।
"आरव, तुम कहाँ हो? रात के ग्यारह बज चुके हैं। तुम्हें पता है न मुझे कितनी फ़िक्र होती है? जैसे ही ये मैसेज मिले, तुरंत घर आओ," आन्या ने वॉइसमेल पर मैसेज छोड़ा, लेकिन उसकी घबराहट कम होने के बजाय और बढ़ गई।
उसने अपने हाथों को आपस में रगड़ा। उसकी उंगलियाँ ठंडी पड़ रही थीं। उसने सोचा कि शायद थोड़ा पानी पीने से उसका दिल शांत होगा। वह धीमे कदमों से छोटे से किचन की तरफ़ बढ़ी।
किचन में जाकर उसने कांच के गिलास में पानी डाला। जैसे ही उसने पहला घूँट लिया, पूरे फ़्लैट की बिजली अचानक चली गई।
गहरा सन्नाटा और मुकम्मल अंधेरा।
शहर की स्ट्रीट लाइट्स भी जैसे एक झटके में बुझ गईं। पूरे इलाके में सिर्फ़ दूर कहीं गड़गड़ाते बादलों की आवाज़ रह गई।
आन्या का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसने तुरंत अपने फ़ोन की टॉर्च जलाई। सफ़ेद रोशनी की लकीर अंधेरे को चीरती हुई ड्राइंग रूम के फ़र्श पर पड़ी। वह धीमी चाल से वापस ड्राइंग रूम की तरफ़ बढ़ी ही थी कि तभी—
खट!
घर के मुख्य दरवाज़े का हैंडल धीरे से घुमा।
आन्या रुक गई। उसकी सांसें थम गईं। टॉर्च की रोशनी दरवाज़े पर टिक गई।
"आरव? तुम हो क्या?" उसकी आवाज़ कांप रही थी।
दरवाज़ा धीरे से खुला। बाहर की ठंडी, गीली हवा अंदर आई और उसके साथ आई खून की एक तीखी, कड़वी महक।
दरवाज़े की चौखट पर आरव खड़ा था—या यूं कहें कि वह मुश्किल से अपने पैरों पर टिका हुआ था। उसके कपड़े भीगे हुए थे, बाल माथे पर चिपके थे, और उसके चेहरे पर ख़ौफ़ का ऐसा साया था जो आन्या ने पहले कभी नहीं देखा था। उसके होंठ नीले पड़ चुके थे और दांये गाल पर नीला-काला चोट का निशान था।
"आरव!" आन्या का कांच का गिलास हाथ से छूटकर फ़र्श पर गिरा और छन-छन की आवाज़ के साथ टूट गया।
वह टॉर्च फेंककर आरव की तरफ़ भागी। उसने आरव को गिरने से पहले संभाल लिया। आरव का शरीर बर्फ़ की तरह ठंडा था और वह थर-थर कांप रहा था।
"आरव! क्या हुआ तुम्हें? ये चोट कैसे लगी? किसने मारा तुम्हें?" आन्या के हाथों में आरव का खून लग गया। उसकी चीख हलक में ही दब कर रह गई।
आरव ने कांपते हाथों से आन्या के कंधे को पकड़ा। उसकी आँखों में आंसू बह रहे थे, लेकिन वे आंसू दुख के नहीं, शुद्ध ख़ौफ़ के थे।
"दी-दीदी... मुझे... मुझे बचा लो... वो... वो लोग आ रहे हैं..." आरव की आवाज़ हकला रही थी, सांसें तेज़-तेज़ चल रही थीं।
"कौन लोग आरव? तुम किस बारे में बात कर रहे हो? चलो, पहले अंदर बैठो," आन्या उसे खींचकर सोफ़े तक ले जाने लगी, लेकिन आरव ने उसके हाथ को कसकर पकड़ लिया।
"नहीं दीदी! समय नहीं है! वो... वो मुझे मार डालेंगे! मैंने... मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी दीदी... बहुत बड़ी गलती!" आरव फूट-फूटकर रोने लगा।
"क्या गलती आरव? साफ़-साफ़ बताओ मुझे! तुम कहाँ गए थे?" आन्या की आँखों में भी आंसू आ गए। वह एक डॉक्टर की तरह आरव की नब्ज़ चेक करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन एक बहन का दिल डर से फटा जा रहा था।
आरव ने अपनी जैकेट की अंदरूनी जेब में कांपता हुआ हाथ डाला। उसने एक मोड़कर रखा हुआ, भारी-भरकम लिफ़ाफ़ा निकाला।
वह लिफ़ाफ़ा गहरे लाल (Crimson) रंग का था। उसके ऊपर कोई डाक टिकट नहीं था, कोई पता नहीं था। बस एक वैक्स की सील (Wax Seal) लगी हुई थी—गहरे काले रंग की मोम पर उकेरा हुआ एक ख़ौफ़नाक 'चील' (Eagle) का निशान।
"ये... ये उन्होंने दिया है," आरव ने वह लिफ़ाफ़ा आन्या के हाथ में थमा दिया, जैसे वह कोई जलता हुआ कोयला हो।
आन्या ने उस लाल लिफ़ाफ़े को देखा। उस पर उकेरे गए ईगल के निशान को देखकर ही उसके रोंगटे खड़े हो गए। ऐसा लग रहा था मानो वह निशान किसी इंसान का नहीं, बल्कि किसी अंधेरी हुकूमत का प्रतीक हो।