रिश्ते नाम के Ch. 1

रिश्ते नाम के - Chapter 1

Posted by Arohi Gupta (मुस्कान) • Jun 30, 2026 04:14 PM

"अहमदाबाद"

"गोयकां का मेंशन में एक औरत जबरदस्ती एक लड़की को सीडीओ से खींचते हुए नीचे ला रही थी लड़की उसे और से अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है वह उसे औरत से छुटने की बेतहाशा कोशिश करती है वह लड़की कभी गिर जाती तो वह औरत उसको घसीटते हुए उसे खींच रही थी इसी चक्कर में उसे लड़की को बहुत छोटी आ जाती है पर उसे औरत को उसे लड़की पर बिल्कुल तरस नहीं आता है वह औरत उसे लड़की को घसीटते हुए लाकर हाल के बीचों बीच में गिरा देती है।

वह लड़की अपने आंसू भरी आंखों से उसे औरत को देखते हैं।

यह है सीमा गोयंका राजीव गोयंका की बीवी और

राजवीर गोयंका की मां इसके परिवार का नाम अहमदाबाद के बड़े अमीर घरों में लिया जाता है।

इतना घमंड है इन्हें की यह इंसान को इंसान नहीं समझती है। इन्होंने जिस लड़की को ऐसे में रहने से घसीटते भी नीचे लाकर गिराया है वह लड़की उनकी बहू है। अभी एक महीने पहले इनकी बेटे की शादी इस लड़की से हुई है।

यह है सिया गोयंका जो अभी वैसे गिरी हुई रो रही है।

निकल जा मेरे घर से तुझ जैसी लड़की मेरे घर में नहीं रह सकती है। सिमा चिल्लाते हुए बोली।

माझी एक बार मेरी बात तो सुनिए सिया रोते हुए बोली।

खबरदार जो तूने मुझे अपनी इस गंदी जुबान से मां का मैं कुछ नहीं हूं तेरी । सिमा गरजते हुए बोली।

सिया सिमा के चिल्लाने से डर जाती है वह वैसे ही सर झुकाए खड़ी रहती है।

सिया हिम्मत करके बोली : "ठीक है मैं चली जाऊंगी बस एक बार राजवीर आ जाए मैं उनका जवाब सुनना चाहती हूं।"

"उसका क्या जवाब सुनना है वह मेरा बेटा है मैं जो बोलेगी वह वही करूंगा और उसने तुम्हें डाइवोर्स दे दिया है यकीन नहीं होता है तो यह देखो डाइवोर्स पेपर को उसकी सिग्नेचर है सिमा उसके सामने डाइवोर्स पेपर दिखती है जिस पर राजवीर के सिग्नेचर थे।

"राजवीर के सिग्नेचर डाइवोर्स पेपर से देखकर श्रेया की आंखों में आंसू आ जाते हैं उसे यकीन नहीं होता है कि उसका तलाक हो गया है अभी तो उसकी शादी हुई थी हां जिन हालातो में उसकी शादी हुई वह सही नहीं थे बस शादी तो शादी होती है हर लड़की का सपना होता है सिया के भी कुछ सपने थे सिया के भी कुछ अरमान थे जो आज उसके आंसुओं के साथ बह रहे हैं।"

"अब मेरा मुंह क्या देख रही हो निकलो यहां से इस घर में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है तुम जैसी बचलन लड़की को मैं इस घर की बहू नहीं मानती और मैं ना ही अपने बेटे की बीवी वो तो मेरी मजबूरी थी कि उस वक्त मेरी मजबूरी थी जो  मैंने तेरी शादी अपने बेटे से होने दी वरना तुझ जैसी लड़की को मैं अपने घर की नौकरानी तक ना बनाऊं गोयंका खानदान की बहू बनाना तो बहुत दूर की बात है।"

"मांजी एक बार मेरी बात तो सुन लीजिए मेरी कोई गलती नहीं है आप जैसा सोच रही हैं वैसा कुछ नहीं है।" सिया अपनी सफाई देते हुए बोली ।

"सीमा को तो कुछ सुना ही नहीं था उसे तुम मौका मिल गया सिया को घर से निकलने का वह बस इसी मौके में थी जो आज उसे मिल गया उसने सिया की बाजू कसकर पड़ती है और खींचते हुए उसे गेट के बाहर धकेल देती है सिया गिरने वाली थी तभी किसी दो मजबूत हाथों ने उसको गिरने से बचा लिया।"

"सिया अपने आंसू भरी आंखों से उसे इंसान को देखते हैं...! उसे इंसान की उम्र कुछ 50 से 55 के बीच होगी उसके  हल्के सफेद बाल आंखों पर नजर का चश्मा हल्की सफ़ेद दाढ़ी कोट पैंट पहने वह इंसान हैरानी से एक बार सिया को देखा है और एक बार सीमा को देखा है वह इंसान इंसान और कोई नहीं राजीव गोयंका थे।"

"बेटा आप ठीक तो हैं। "वह सिया को खड़ा करते हुए बोले।

"आपका दिमाग खराब हो गया है क्या यह हमारे घर की बहू है आप उनके साथ ऐसा बर्ताव कैसे कर सकती हैं।"राजीव सीमा को घूरते हुए बोले वह एक समझदार और सुलझे हुए इंसान लग रहे थे उनके चेहरे पर इस वक्त बहुत गुस्सा था।"

"जो कर रही हूं सही कर रही हूं राजवीर के पापा यह लड़की इस घर में रहने लायक नहीं है।" सीमा गुस्से से सिया को घूरते हुए बोले।

"सीमा आखिर ऐसा क्या हो गया है जो आप सिया के बारे में ऐसा बोल रही हैं अभी 1 महीने से तो सब ठीक था अचानक से आपका बर्ताव कैसे बदल गया।"राजीव हैरानी से सीमा को देखते हुए बोले।

"अच्छा होगा यह बात आप अपनी लाडली बहू से पूछिए कि इसने हमें धोखा क्यों दिया।" सीमा सिया को घूर रही थी वही सिया अपना सर झुकाए बस सीमा की बातें सुन रही थी।

सीमा की बात सुनकर राजीव हैरानी से बोले : "धोखा कैसा धोखा सीमा।"

मुझे क्या पूछ रहे हैं आप इस लड़की से पूछिए ना कि उसने क्या किया है। सीमा सिया पर उंगली पॉइंट करते हुए बोली।

सिया अपना सर झुकाए चुपचाप सीमा की बातें सुन रही थी राजीव जी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है क्यों सीमा अपनी बहू को ऐसे बेइज्जत करके घर से निकल रही है।

वह सिया की तरह देखते हुए बोले : सिया बेटा तुम ही मुझे बता दो की बात क्या है कौन से धोखे के बारे में सीमा बात कर रही है।

अंकल जी वह हम हम वह ऐसा है। सिया इतना बोल पाई थी की सीमा बीच में बोलती है।

हम क्या कर रही है लड़की सच बताना अपने अंकल को की तूने क्या गुल खिलाया है। मां सीमा उसकी बाजू को कस कर पकड़ कर हिलाते हुए बोली।

सिया के आंखों में आंसू आ जाते हैं इसका एक आंसू उसके गाल पर आकर गिर जाता है सीमा के ऐसे पकड़ने से उसके हाथ में दर्द होने लगती है।

सीमा यह क्या कर रही हो पागल हो गई हो क्या राजीव सीमा को सिया से अलग करते हुए बोले।

"हां मैं पागल हो गई हूं...! वो भी आपकी वजह से मैंने मना किया था..., कि इस लड़की की शादी मेरे बेटे से नहीं होगी पर आप नहीं माने कर दी जबरदस्ती शादी मेरे बेटे की इस कुलक्षणी से...! "

" अरे मैं तो पहले से इस शादी के खिलाफ थी पर आपकी खुशी के खातिर मैं इस दो कौड़ी की अनाथ लड़की को अपने घर की बहू बनाने को तैयार थी....! पर मुझे क्या पता था कि ये कुलक्षणी अपने पाप छुपाने के लिए मेरे बेटे से शादी कर रही है।" सीमा गुस्से में सिया को उल्टा सीधा बोले जा रही थी।

तुम्हारा मतलब क्या है तुम कहना क्या चाहती हो। राजीव को कुछ समझ नहीं आ रहा था वह परेशान होते हुए बोला।

" मैं यह बोलना चाहती हूं कि यह जो भोली सूरत बनाए सामने खड़ी लड़की है यह मां बनने वाली है इसकी कोख मे बच्चा हैं। सीमा सिया को देखते हुए राजीव से बोली।"

"क्या बच्चा।" राजीव जी हैरानी से बोले।

सिमा की बात सुनकर सिया कश कर अपनी आंखें बंद कर लेती है....! उसकी आंखों से बेतहाशा आंसू बहे जा रहे थे।"

"नहीं सिमा तुम्हें कुछ ग़लतफैमी हुई होंगी सिया ऐसी नहीं है।" राजीव सीमा को समझाते हुए बोले।

"इसमें भी मैं गलत हूं राजीव जी हद करते हो आप  आपको पता है ना शादी के 1 दिन बाद ही राजवीर अमेरिका चला गया था इसे यहां छोड़कर और इसकी शादी को एक महीना हो गया है वह अभी तक वापस नहीं आया है तो फिर यह बच्चा राजवीर का हो ही नहीं सकता इतना तो आप भी समझते हैं कि यह बच्चा किसी और का है क्योंकि जब 1 महीने से राजवीर यह है ही नहीं और इसको जब राजवीर शादी के 1 दिन बाद ही छोड़ गया था उसने इसको छुआ तक नहीं है तो यह बच्चा इसकी कोख मैं कैसे आया मतलब यह हमें धोखा दे रही है यह पहले से प्रेग्नेंट थी...! "

यह बच्चा किसी और का है मतलब आप समझ रहे हैं ना राजीव जी पर फिर भी आप इस लड़की का साइट ले रहे हैं...!  मतलब मुझको समझ नहीं आता है कि इस लड़की ने इन 1 महीने में ऐसा क्या जादू कर दिया है आप पर जो आप अपनी बीवी से ज्यादा इस कल की आई लड़की पर भरोसा करते हैं। "सीमा अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से राजीव को घूरते हुए देख रही थी।

राजीव को समझ नहीं आ रहा था कि वह सीमा को कैसे समझाएं।

वह सीमा को समझने की कोशिश करते हुए बोले : सीमा मेरी बात को समझो सिया को हम बचपन से जानते हैं वह ऐसी लड़की नहीं और तुम भी सिया को कब से जानती हो।

राजीव बहुत सुलझे और शांत स्वभाव के इंसान थे इसलिए वह कही सुनी बात पर भरोसा नहीं करते थे ऐसा नहीं था कि उन्हें सीमा पर भरोसा नहीं है उन्होंने सीमा पर भरोसा था पर वो सिया को भी बहुत अच्छे से जानते थे इसलिए वह किसी को गलत नहीं बोल सकते हैं।

बस बहुत हुआ मैंने बहुत सुन ली आपकी बात अब आप मेरी बात सुनिए यह लड़की यहां नहीं रहेगी बस। सीमा राजीव को घूरते हुए  बोली।

"पर सीमा।"राजीव इतना बोल पाए थे की सीमा सिया की तरफ घूमते हुए बोली।

तू अभी तक यहीं खड़ी है गई नहीं शक्ल क्या देख रही हो निकलो यहां से। सीमा उसको खींचते हुए बोली।

मांजी मैं सच बोल रही हूं मुझे कुछ नहीं पता है अगर आप मुझे निकाल दोगे तो मैं कहां जाऊंगी। सिया रोते हुए सीमा से बोली।

जहन्नुम में जो मेरी बला से पर मैं तुझ जैसी कुलक्षणी को मैं अपने घर में एक पल के लिए बर्दाश्त नहीं कर सकती हूं।

सीमा यह आप क्या कर रही हो बेचारी बच्चे इतनी रात को कहां जाएगी एक बार तो सोचो। राजीव पीछे से सीमा से बोले।

बस कीजिए राजीव जी अगर अब आपने मुझे रोकने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। सीमा वैसे ही सिया को ले जाते हुए बोली।

सीमा सिया को घर से बाहर निकाल देती है और उसके मुंह पर दरवाजा बंद कर देती है।

आखिर अब सिया कहां जाएगी...!  क्या करेगी सिया खुद को बेकसूर साबित करने के लिए और कहां है राजवीर क्या वह सिया का साथ देगा और किसका है यह बच्चा जानने के लिए पढ़ते रहिए। " रिश्ते नाम के "

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क्रमशः

मुस्कान

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