मुझे हाथ तक नहीं लगाया
मुंबई का एक सी फेसिंग अपर्टमनट..
रात के समय दूर तक शांत संदर की खामोशी।
इस अपर्टम का इंटयर फांस टीम का था।
लग्जरियस एंटीक से उस घर की सौभ और बढ़ा रहा था।
उसी घर के एक रूम में सलिंग-टू-फैन विंडो पर एक 26 साल का आदमी कुछ सोच रहा था
हेज़ल आँखों।
लाइट पिंक लिप्स।
हलकी सेव. वो भी सेट की हुए ।
और फेस पर एक चमक।
यें है अनुराग माहेश्वरी। AM वाच ⌚️कंपनी की सीईओ।
AM वाच ना केवल इंडिया की बल्कि पुरे वर्ल्ड की फेमस वाच में से एक है।
इसे बड़े बड़े बिजनेसमैन.. पोलटिसन.. यहा तक की सेलिब्रिटी भी पहने थी।
इसके न्यू डिज़ाइन को मार्किट में आने से पहले ही इसकी एडवन बुकिंग हो जाती थी।
अनुराग ने यें कंपनी अपने दम पर शुरू की थी।
जब वो 15 साल का था तो वी पढ़ाई की साथ साथ एक घड़ी ठीक करने वाली दुकान पर काम किया था।
वहीं से उसे घड़ियों की इतनी अच्छी नॉलेज हुई थी।
आज उसका ब्रांड AM वॉच दुनिया की इतनी अच्छी वॉचेस में से एक है, यह बस अनुराग की दिन-रात की मेहनत का ही नतीजा है।
अनुराग एकटक शांत समंदर को देख रहा था। तभी उसके रूम का डोर ओपन होता है और उसके बचपन का दोस्त कबीर अंदर आते हुए उसे कहता है.
कबीर " अनु वो आ गई है "
अनुराग पीछे पलट के कबीर को देखता है और एक कोल्ड एक्सप्रेशन के साथ कहता है.
" ठीक है उसे अंदर भेजो "
कबीर बाहर जाता है और 5 मिनट बाद एक लड़क
जिसने हॉट सी शॉर्ट ड्रेस पहनी थी और उसके ऊपर एक ट्रांसपेरेंट सा स्टॉल रखा था
और मुंह पर आधा किलो मेकअप होता हुआ था वह अंदर आती है।
लड़की अंदर आकर एक बड़ी सी स्माइल के साथ अनुराग को देखती है।
अनुराग एक नजर उस लड़की को देखता है. और अपनी बॉस उतारते हुए उससे कहता है।
"बेड पर बैठ जाओ "
वो लड़की बहुत ही अंदाज से बेड की तरफ जाती है और बहुत ही नजाकत के साथ बेड पर बैठ जाती है और अनुराग को अपने पास आने का इशारा करती है।
अनुराग अपनी वॉच उतारता है। और बेड की दूसरी तरफ से बेड के ऊपर बैठ जाता है।
अनुराग उस लड़की की गोद में 1 पिलो रखता है और उसकी गोद में अपना सर रख देता है।
लड़की 5 मिनट के लिए हैरान हो जाती है। पर फिर अपना स्टॉल हटने आने लगती है।
अनुराग की आंखें बंद थी. पर फिर भी वह बंद आंखों के साथ उस लड़की से कहता है।
"इसकी जरूरत नहीं है चुपचाप सो जाओ और मुझे भी सोने दो"
लड़की यह सुनकर थोड़ी चौक जाती है। वह अपने मन में कहती है।
" किया में ठीक नहीं लग रही है क्या । इतनी हॉट एंड सेक्सी बन कर आई हूं मुझे देखकर तो किसी की भी नियत खराब हो जाती। पर ये आदमी बिना कुछ किए ऐसी सो रहा है।
""शीठ "" यें मेरे पैसे तो देगाना,
यही सोचते-सोचते उसकी भी आंख लग जाती है। अगले दिन सुबह 5:00 बजे। अनुराग के रूम के दरवाजे पर नॉर्क होता है।
डोर की आवाज सुनकर लड़की नींद से जाग जाती है और देखती है अनुराग अभी भी उसकी गोद में वैसे ही सर रख के सो रहा है।
धीरे से तकिए समेत अनुराग का सर बेड पर रखती है । और उठ कर दरवाजा खोलती है। सामने कबीर होता है। वह से देखकर धीरे से कहता है.
कबीर.. बाहर आओ.
लड़की हैरानी के साथ कबीर से कहती है।
"पर सर ने कुछ किया नहीं है-- मैं उठा दूं क्या.
कबीर.. उसकी कोई जरूरत नहीं तुम बाहर आओ।
लड़की.. पर सच में, सर ने मुझे हाथ तक नहीं लगाया। में यहा बुकिंग पर आई थी. अब आप लोग यह बहाना मत बनाना कि उसने कुछ किया नहीं है तो मुझे पैसे भी नहीं मिलेंगे।
कबीर.. उसकी टेंशन मत लो तुम्हें तुम्हारी पैसे मिल जाएंगे फिलहाल बाहर आओ कहीं ऐसा ना हो हमारी आवाज से अनुराग उठ जाए । पता नहीं कितने दिनों बाद सोया है।
लड़की कबीर की बात सुनकर थोड़ा हैरान होती है फिर कबीर से कहती है.. 1 मिनट रुको मैं 1 मिनट में आती हूं.
जल्दी से वापस रूम में आती है और कुछ ढूंढती है। उसी वह सामान मिल जाता है और कुछ टाइम बाद जल्दी से रूम से बाहर आ जाती है।
बाहर आकर कबीर उस लड़की के हाथ में पैसों का एक पैकेट पकड़ आता है। यह लो तुम्हारे पास.
लड़की पैकेट लेते हुए कहती है। साहब आज पहली बार यह पैसे मुझे बोझ नजर आ रहे हैं।
कबीर.. यह तुम्हारी मेहनत के ही पैसे हैं। और कभी जरूरत पड़े तो मेरे असिस्टेंट को कॉल कर देना . तुम्हें और पैसे मिल जाएंगे। और हाँ जाने से पहले नाश्ता करके जाना
लड़की.. साहब एक बात कहूं "" हम तो यह काम मजबूरी में करते हैं। दुनिया हमें गंदी नजरों से देखती हैं। और अब इन सब से फर्क नहीं पड़ता. अब तो आदत हो गई थी इन सब के साथ जीने की। पर साहब एक बात पूछूं।
कबीर.. पूछो
लड़की.. साहब हमारी तो मजबूरी है यह काम करने की। पर आज पहली बार हमें हम से ज्यादा मजबूर कोई देखा है।वो जो ऊपर सो रहे हैं । उन्होंने मुझे बुलाया तो पर उन्होंने कुछ किया नहीं तो पैसे भी दिए।
वजह जान सकती हूं.
कबीर मुस्कुराते हुए.. क्योंकि उसे सिर्फ सुकून की तलाश है।
लड़की अजीब नजरों से कबीर को देखती है और पूछती है..
"सुकून मतलब "
कबीर.. सुकून मतलब चैन से सोना। अनुराग बस चैन से सोना चाहता है. तुम पहले नहीं हो तो यहां आई हो। अनुराग आए दिन अलग-अलग लड़कियों को बुलाता रहता है. कुछ हाईप्रोफाइल घरों की लड़कियां तो बिना पैसों की आ जाती है. पर अनुराग उनकी तरफ देखता भी नहीं । और तुम्हारे जैसी बहुत सी लड़कियों को उसने पैसों से भी मदद की है।
लड़की भी अचंभे से अभी भी कबीर को देख रही थी कबीर उसकी जिज्ञासा समझते हुए उसे कहता है।
घबराने की जरूरत नहीं है.
वो पागल नहीं है.
😄 हां बस उसकी हरकतें पागल वाली है। वह दुनिया में सुकून की तलाश में बस भटक रहा है.।
लड़की.. साहब वो साहब ऐसे हैं तो उनके परिवार वाले कुछ कहते नहीं
कबीर.. वह अनाथ है।उसका इस दुनिया में कोई नहीं।
यह सुनकर लड़की थोड़ी हैरान होती है।
कबीर.. हैरान मत हो. सिर्फ वही नहीं मैं भी अनाथ हूं. हम दोनों का ही दुनिया में कोई नहीं।
लड़की.. पर आप और सर देखने में तो बहुत ही अच्छे घर के लग रहे हैं। घर भी कितना अलीशान है। यह सब कैसे हो
कबीर.. मैं और अनुराग एक ही ऑर्फनेज में थे । महेश्वरी अनाथ आश्रम.(काल्पनिक नाम) इसीलिए अनुराग अपने नाम के पीछे माहेश्वरी लगाता है। जब हम दोनों 9 साल के थे. तवा पर एक पति-पत्नी आए शायद उनको कोई औलाद नहीं थी।
इसीलिए अनाथ आश्रम में बच्चों को गोद लेने आए। उन्हें मैं और अनुराग दोनों पसंद आ गए थे। वहां की मेंट्रेन ने यह फैसला हम दोनों पर छोड़ दिया कि हम दोनों में से कौन उनके साथ जाएगा।
अनुराग ने मेरे अच्छे भविष्य की कल्पना करते हुए मुझे उनके साथ भेज दिया.
क्योंकि वह है ही ऐसा. हमेशा दूसरों के बारे में सोचता है। कभी खुद के बारे में नहीं सोचा.
मुझे मां-बाप मिल गए. घर मिल गया।
नाम के पीछे मेहरा सरनेम जुड़ गया।
पर अनुराग वो तो अभी भी अनाथ आश्रम में अकेला था। उसका एकमात्र दोस्त मैं ही था वहां पर। मेरे जाने के बाद वह वहां पर पूरी तरह से अकेला हो गया। मुझे अच्छे से मालूम था अनुराग किसी से ज्यादा बोलता नहीं है किसी से ज्यादा गुलता मिलता नहीं है। इसलिए मुझे पता था कि वहां पर अकेला होगा. जिन लोगों ने मुझे गोद लिया था वह मुझे अपने बेटे कितना प्यार करते थे. क्योंकि मैं उनका इकलौता बच्चा था मेरी हर फरमाइश हर जिद को सर आंखों पर रखते थे।
बस उस दिन मैंने अपने मैंने उनसे एक ही फरमाइश की उसी एक अच्छी एजुकेशन मिले। मेरे ज़िद मेरे मां-बाप ने खुशी-खुशी पूरा किया. उन्होंने अनुराग की पढ़ाई का पूरा खर्चा खुद ही उठाया। पर उसने पढ़ाई के साथ-साथ वॉच कंपनी में काम करके यह साबित कर दिया कि उसे अपने पैरों पर खड़े होने के लिए किसी की रहमों करम की जरूरत नहीं। पापा को अनुराग यह बात बहुत अच्छी लगी इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों ना वह भी अनुराग को गोद ले ले. पर तभी मेरी मां ने उन्हें यह खुशखबरी दी कि वह मां बनने वाली है।
घर में अब तक कोई बच्चा नहीं था उस घर में मेरे आने के बाद बच्चा हो रहा था। पर मेरे लिए उनका प्यार बिल्कुल भी कम नहीं हुआ। जब मेरी छोटी बहन हुई। अनुराग उससे मिलने आता था. उसका नाम हमने छवि रखा था। अनुराग में हम दोनों छवि के साथ बहुत खेलते थे.
पापा मौका देखकर मां से अनुराग को गोद लेने की बात की बात की. मां ने यह कहकर मना कर दिया. कि 2 बच्चे काफी हैं। हम अनुराग की पढ़ाई का खर्चा तो उठा ही रहे हैं ना. अब खुद नहीं चाहता कि उसकी पढ़ाई पर हम खर्च करें वह अपना खर्च खुद उठाता है तो इसमें हम क्या कर सकते हैं. उनके लिए मैं और छवि काफी थे।
यह बात अनुराग ने सुन ली थी । और उस दिन उसके मन में यह भावना आ गई कि इस दुनिया में उसका कोई नहीं है. वह अकेला है. अब उसे कोई भी नहीं चाहिए था।
वह तो मैं उसके साथ जबरदस्ती रहता हूं वरना वह तो मुझे भी अपनी जिंदगी से निकाल बाहर करें . एपिसोड कितनी कामयाबी हासिल करने के बाद भी वह अकेला है। इसलिए सुकून की तलाश में रहता है।
लड़की कबीर की बातें सुनती है और उसे कहती है.. साहब एक बात कहूं।
कबीर.. हाँ बोलो
लड़की.. ऊपर जो साहब है ना वह बहुत अच्छे हैं. हम दिल से दुआ करेंगे कि उनके यह तलाश जल्द से जल्द खत्म हो जाए। साहब अगर वह इस तरीके से हम जैसी लड़कियों को अपने पास लाते रहेंगे फिर तूने सुकून कभी नहीं मिलेगा।
कबीर.. तुम कहना क्या चाहती हो।
लड़की.. साहब आप उन साहब से कहिए कि वह शादी कर ले.
कबीर.. क्या शादी.
लड़की.. हां साहब. आप उनसे कहिए वह शादी कर ले. जिस दिन उनकी जिंदगी में कोई आएगा उनकी तलाश अपने आप खत्म हो जाएगी.
कबीर लड़की की बात ध्यान से सुनता है इतने में एक मेड वहां आती है और कहती है कि नाश्ता तैयार है। कबीर उस लड़की से कहता है कि तुम नाश्ता करके जाना
,, और वह ऊपर अनुराग के कमरे की तरफ चला जाता है।
ऊपर कमरे में अनुराग अपनी आंखें खोलता है. देखता है उसके आसपास कोई नहीं था।घड़ी में 10:00 बज रहे थे। यह कोई नई बात नहीं थी. जब भी उसके रूम में कोई लड़की आती थी,, हमेशा उसके उठने से पहले कबीर उन लड़कियों को वहां से बाहर भेज देता था।
पर आज अनुराग को अपने बेड पर एक नोट मिलता है।
उसे उठाता है और पड़ता है। जो लड़की उसके साथ कल रात थी उसने यह नोट लिखा था.
"" शुक्रिया साहब
मैंने बहुत सी रातें बहुत से लोगों के साथ गुजारी हैं, पर कल रात सुकून से सोई हूं..। मैं ऊपर वाले से दुआ करूंगी क्या आपकी जो भी इच्छा हो वह जल्द से जल्द पूरी हो जाए 😊।
अनुराग उस नोट को पड़ता है और एक हल्की सी स्माइल करता ही
अनुराग बेड से उठने की वाला होता है कितने में कबीर उसके रूम में आता है।
कबीर अनुराग से कहता है.. कितने रातो के बाद सोया है.
अनुराग.. चार
कबीर.. अनु क्या जरूरत है दिन रात जाग कर इतना काम करने की । जितना है काफी है। थोड़ी देर घर आकर आराम कर लेगा तो कुछ बिगड़ नहीं जाएगा तेरा। पर ऐसी रात रात भर जागकर अपनी सेहत खराब करेगा
अनुराग.. घर आके भी क्या फायदा. कौन सा यहां मेरा कोई इंतजार कर रहा है।