The Girl Who Owned the Night
अब आगे
गोदाम गोलियों की आवाज़ से गूंज रहा था।
हर तरफ चीख-पुकार मची हुई थी।
कुछ मिनट पहले तक जहाँ करोड़ों की नीलामी चल रही थी, अब वहाँ खून, धुआँ और टूटी हुई कुर्सियाँ बिखरी पड़ी थीं।
रिशिका राठौड़ अपनी पिस्तौल हाथ में लिए खड़ी थी।
उसकी साँसें बिल्कुल सामान्य थीं।
जैसे यह सब उसके लिए कोई नई बात न हो।
उसके पैरों के पास रेड वुल्फ गैंग का एक आदमी घायल पड़ा कराह रहा था।
रिशिका ने उसकी तरफ देखा।
"किसने भेजा तुम्हें?"
वह आदमी डर के मारे काँप उठा।
"म... मुझे नहीं पता।"
धड़ाम!
रिशिका ने उसके बगल की जमीन पर गोली चला दी।
आदमी चीख पड़ा।
"आखिरी बार पूछ रही हूँ।"
"स्कार फेस... स्कार फेस ने भेजा है!"
रिशिका की आँखें ठंडी हो गईं।
स्कार फेस।
मुंबई के अंडरवर्ल्ड का एक बड़ा नाम।
और उसका सबसे बड़ा दुश्मन।
"इसे ले जाओ।"
उसने अपने आदमियों को आदेश दिया।
"जिंदा।"
"जी मैडम।"
आदमी को घसीटते हुए बाहर ले जाया गया।
कुछ देर बाद पूरा गोदाम शांत हो गया।
तभी रिशिका की नजर फिर विराट पर पड़ी।
वह अब भी वहीं खड़ा था।
ना घबराहट।
ना डर।
ना कोई सवाल।
बस खामोशी।
जैसे वह इस तरह के हमले रोज देखता हो।
रिशिका को यह बात खटक रही थी।
बहुत ज्यादा।
वह धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ी।
"तुम ठीक हो?"
विराट ने उसकी तरफ देखा।
फिर हल्का सा मुस्कुराया।
"जी।"
रिशिका ने भौंहें सिकोड़ लीं।
"बस जी?"
"और क्या बोलूँ?"
"तुम्हारे सामने दर्जनों लोग मारे गए हैं।"
"हाँ।"
"और तुम डरे नहीं?"
विराट ने कुछ सेकंड उसे देखा।
फिर बोला—
"डरने से हालात बदल जाते हैं क्या?"
रिशिका चुप रह गई।
यह जवाब उसने उम्मीद नहीं किया था।
---
2 घंटे बाद...
गोदाम लगभग खाली हो चुका था।
कबीर रिशिका के पास आया।
"मैडम, गाड़ी तैयार है।"
रिशिका ने सिर हिलाया।
लेकिन उसकी नजर अब भी विराट पर थी।
कुछ तो अजीब था इस लड़के में।
बहुत अजीब।
"इसके बारे में पूरी जानकारी चाहिए मुझे।"
कबीर हैरान हो गया।
"विराट राणा?"
"हाँ।"
"लेकिन मैडम, वह तो राणा ग्रुप का बेटा है।"
"फिर भी।"
कबीर समझ गया।
जब रिशिका किसी चीज पर शक कर लेती थी तो फिर सच सामने आकर ही रहता था।
---
उधर...
विराट गोदाम से बाहर निकल रहा था।
बारिश शुरू हो चुकी थी।
ठंडी हवा चल रही थी।
उसने आसमान की तरफ देखा।
फिर अपनी जेब से फोन निकाला।
स्क्रीन पर सिर्फ एक मैसेज था।
"Order?"
विराट की आँखें कुछ पल के लिए बदल गईं।
वह मासूम लड़का गायब हो गया।
उसकी जगह कोई और था।
कोई ऐसा इंसान जिसकी आदत आदेश देने की थी।
उसने सिर्फ दो शब्द टाइप किए—
"Stand Down."
मैसेज भेजते ही फोन वापस जेब में चला गया।
अगले ही पल उसका वही मासूम चेहरा लौट आया।
जैसे कुछ हुआ ही न हो।
---
"रुको।"
पीछे से आवाज आई।
विराट मुड़ा।
रिशिका उसके सामने खड़ी थी।
उसके पीछे दस से ज्यादा हथियारबंद गार्ड थे।
"जी?"
रिशिका कुछ सेकंड उसे देखती रही।
फिर बोली—
"तुम मेरे साथ चल रहे हो।"
विराट की भौंह हल्की सी उठी।
"क्यों?"
"क्योंकि मैंने कहा है।"
"ये कोई जवाब नहीं हुआ।"
गार्ड्स एकदम सतर्क हो गए।
मुंबई में शायद ही किसी ने रिशिका से इस लहजे में बात की हो।
लेकिन रिशिका गुस्सा नहीं हुई।
बल्कि उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
"मुझे तुम पर शक है।"
"मुझ पर?"
"हाँ।"
"मैं तो एक साधारण इंसान हूँ।"
रिशिका हँसी।
"यही बात मुझे सबसे कम सच लगती है।"
कुछ पल खामोशी रही।
फिर विराट ने कंधे उचका दिए।
"ठीक है।"
अब हैरान होने की बारी रिशिका की थी।
"इतनी आसानी से मान गए?"
"मना करता तो?"
"तो भी तुम्हें साथ ले जाती।"
"तो फिर समय क्यों बर्बाद करना?"
कबीर के चेहरे पर अविश्वास था।
यह लड़का या तो बहुत बहादुर था...
या बहुत खतरनाक।
---
एक घंटे बाद...
मुंबई के सबसे आलीशान इलाकों में से एक में बनी विशाल हवेली के सामने गाड़ियों का काफिला रुका।
विराट ने बाहर देखा।
हवेली किसी महल से कम नहीं थी।
लेकिन उसके चेहरे पर कोई आश्चर्य नहीं था।
रिशिका ने यह बात नोटिस की।
ज्यादातर लोग पहली बार यह जगह देखकर दंग रह जाते थे।
लेकिन विराट...
कुछ नहीं।
जैसे यह सब उसके लिए सामान्य हो।
"अंदर चलो।"
विराट उसके साथ अंदर आ गया।
सैकड़ों करोड़ की कीमत वाली हवेली।
मार्बल की सीढ़ियाँ।
विशाल झूमर।
सशस्त्र सुरक्षा।
लेकिन विराट के चेहरे पर वही शांति थी।
रिशिका उसे ऊपर ले गई।
एक कमरे के सामने रुककर बोली—
"आज से यह कमरा तुम्हारा है।"
विराट ने दरवाजा खोला।
कमरा किसी फाइव स्टार होटल के सुइट जैसा था।
"बुरा नहीं है।"
रिशिका ने आँखें तरेरी।
"बुरा नहीं है?"
"हाँ।"
"लोग इस कमरे के लिए जान दे सकते हैं।"
"अच्छा है।"
रिशिका को पहली बार किसी को देखकर सिरदर्द होने लगा।
---
रात के दो बजे...
पूरी हवेली सो चुकी थी।
लेकिन रिशिका की आँखों में नींद नहीं थी।
वह अपने ऑफिस में बैठी फाइलें देख रही थी।
तभी कबीर अंदर आया।
"मैडम।"
"हाँ?"
"विराट राणा की रिपोर्ट।"
रिशिका ने फाइल उठाई।
उसमें सब कुछ था।
बिजनेस फैमिली।
विदेश में पढ़ाई।
दान-पुण्य।
सोशल वर्क।
अच्छी छवि।
कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं।
सब कुछ परफेक्ट।
बहुत ज्यादा परफेक्ट।
रिशिका की आँखें सिकुड़ गईं।
"कुछ नहीं मिला?"
"नहीं।"
"असंभव।"
"मैडम?"
रिशिका धीरे से बोली—
"जो इंसान इतना परफेक्ट दिखता है... वह कभी परफेक्ट नहीं होता।"
कबीर चुप रहा।
क्योंकि वह जानता था...
रिशिका का शक शायद ही कभी गलत निकलता था।
उसी समय...
हवेली के दूसरे हिस्से में...
विराट अपनी बालकनी में खड़ा मुंबई की रोशनी देख रहा था।
उसका फोन वाइब्रेट हुआ।
एक नया मैसेज आया।
"My King, do you wish us to bring you back?"
विराट के होंठों पर हल्की मुस्कान आई।
उसने जवाब दिया—
"No."
कुछ सेकंड बाद दूसरा मैसेज आया—
"Then why stay there?"
विराट ने हवेली की सबसे ऊपरी मंजिल की तरफ देखा।
जहाँ रिशिका का ऑफिस था।
फिर उसने सिर्फ एक लाइन लिखी—
"Because the game has just begun."
और उसी पल...
उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह खेल उसकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदलने वाला था।
To Be Continued... 🔥👑
यार कमेंट कर दिया करो