तेरे इश्क़ में जोगी - Chapter 1
मेरे भाई एथिकल होने की जरूरत नहीं, मेरे हिसाब से जिंदगी जीने के लिए यह समझना जरूरी है। कि आजकल की दुनिया में चल क्या रहा है? बस लाइफ इज सो सिंपल .....इसका ना तो कोई फार्मूला है, और न ही कोई अर्थ।
न ही ज्यादा दुनियादारी की बातों में उलझना है, कुछ नहीं रखा बेवजह की इस समझदारी में .......तो मुझे कोई फर्क भी नहीं पड़ता ....मेरे बारे में क्या सोचते हैं क्या नहीं.... मैं जैसा हूं खुद को पसंद हूं ,और वैसे भी लड़कियों को अपने पीछे लगाने में करना ही ......क्या पड़ता है? एक नजर बस देखा, और जाना कि उसकी जिंदगी में आखिर कमी क्या है ?किसी को पैसे की कमी होती है, जो कि मुझे नहीं है....... किसी को ऐश शौक होता है, जैसा कि मुझे है ।किसी की जिंदगी में प्यार भरी मीठी बातों की कमी होती है, जो कि मुझे बखूबी करनी आती है। तो कोई बस अच्छा लाइफस्टाइल चाहती है, जो कि मैं अफोर्ड कर सकता हूं ।किसी को घूमना फिरना, मौज मस्ती पब ,क्लब कसीनो यह सब पसंद है ......जो कि मैं उन्हें दे सकता हूं , किसी के साथ दो चार जज्बात भरे लफ्ज़ बोलने होते हैं, और क्या........
बस .... इट्स'एस सो सिंपल ,और क्या चाहिए ?अब कोई मुझे कैसेनोवा कहे ,तो कहे। यह टैग मुझे मेरी शख्सियत के कारण मिला है, मैं बुरा नहीं मानता। यह टाइटल मैंने खुद कमाया है, मेरी काबिलियत का सबूत है,और मैं इसे एंजॉय करता हूं ।मैं कैसेनोवा हूं,और मुझे कैसेनोवा बनना पसंद है। अच्छा लगता है, जब कोई मुझे इस नाम से पुकारता है तो......
यह दौलत आखिर किस काम आनी है? मेरे शौक पूरे करने के ही ना, तो क्यों ना करूं? जब मैं आराम से कर सकता हूं। मर मर के, डर-डर के जीना मुझे कतई पसंद नहीं। उसने इतराते हुए कहा ।
हर लड़की एक जैसी नहीं होती ....... बहुत देर बाद उसके दोस्त के मुंह से कुछ निकला था।
99% लड़कियां ,मैं जो बता रहा हूं। उस आंकड़े में फिट बैठ जाती है ,और एक परसेंट जो बच गई। वह ....मुझे क्या करना है ?बची रहे ।मुझे बस अपनी जिंदगी जीनी है ,
और अगर किसी दिन सच्ची मोहब्बत हो गई तो...... क्या उस लड़की के लिए खुद को बचाकर नहीं रखोगे ?
सेम ठहाका लगाकर हंसा और बहुत देर तक हंसता ही रहा।
कल को ऐसा हुआ, तो तुम्हें यह एहसास ना घेर ले कि तुम काबिल नहीं हो ....., तुम वक्त रहते समझ क्यों नहीं जाते। वह उसे समझाने की कोशिश कर रहा था, जो कि अभी भी जारी थी।
बड़ी मुश्किल से सेम ने अपनी हंसी को नियंत्रित किया।मैं ऐसी बातों को ही ना काबिले बर्दाश्त मानता हूं ।क्या है यह प्यार , एतबार ,सच्ची मोहब्बत, कुछ नहीं....महज शब्द.......मेरे लिए सब जाया है ।ना मुझे पहले इनमें कभी रुचि थी ,और ना अब होनी है। अब काम की बात करें ....बहुत हो गया यह लेक्चर ,
नो डाउट वह काम में भी बहुत अच्छा था। रात भर पर पार्टियां और अय्याशियां करने के बाद फिर सुबह वक्त पर ऑफिस आता। सलीके से अपने काम खत्म करना ,हर काम को बेहद बारीकी और हर डील को इंपॉर्टेंस देना। यह उसके गुण थे, बस एक ही बुरी लत थी कि रात होते ही वह शख्स वह नहीं रहता था। जो दिन के उजाले में होता था, और उसकी यह बातें अगर कोई सुन लें ,तो उसे जजमेंटल तो कहेगा ही ......साथ में किसी मां बाप की परवरिश पर भी सवाल उठेगा, और उसे इन्हीं बातों का डर लगता था।
किसी दिन वाकई मोहब्बत हो गई ना तो बर्बाद हो जाओगे। सच्ची मोहब्बत बर्बाद कर देती है ,और तुम जैसे शख्स को दो जरूर कर देगी ।जो हर काम इतनी शिद्दत से करता है ,वह मोहब्बत करेगा तो क्या ही करेगा ......
उसकी मोहब्बत में बेशक शिद्दत और गहराई होगी। लेकिन फिर ऐसे शख्स की मोहब्बत कबूल कौन करेगा ?उसे सोचते हुए भी अफसोस हो रहा था ।भगवान करे उसके जीवन में मोहब्बत जैसा लफ्ज़ कभी शामिल ही ना हो। क्योंकि अगर ऐसा हुआ, तो उसका दोस्त बचेगा नहीं........ और वह अपने दोस्त को मिटते हुए नहीं देखना चाहता था ।समझाने का कोई फायदा नहीं था ।लाख बार समझा चुका था,
लेकिन किसी अपने का ना होना भी सबसे बुरा है इस संसार में, लोग अपनी जिंदगी को खिलौना बना बैठते हैं ।इसमें फायदे उठाने वाले आते हैं ,अपना मतलब देखने वाले आते हैं ।और आए गए चेहरे को तबाह कर जाते हैं ।ऐसी तबाही वह नहीं चाहता था। वह जैसा भी था, एक मतलबपरस्त,खुद पसंद, खुदगर्ज लेकिन अपने ही जैसी लड़कियों का चुनाव करता था। अक्सर राते रंगीन और दिन व्यस्त गुजरते थे ।लेकिन क्या करें.....? इस एक बुरी आदत के अलावा वह इंसान ठीक ही था, और सबसे जरूरी उसका दोस्त था ....तन्हा नहीं छोड़ सकता।
काम का लोड बढ़ गया है मेरे भाई, सेक्रेटरी का क्या हुआ? उसने काम करते हुए ही उसे याद दिलाया।
जैसी तुम्हें चाहिए, उसमें वक्त लगेगा।
अच्छा और मुझे कैसी चाहिए? तुम्हें कैसे मालूम? उसने उसकी ओर देखते हुए एक आंख मारते हुए कहा।
ऐसी ही, तुम्हारी तरह......
मेरी तरह हरकत करने वाली ....यू मीन ...
जी नहीं ,तुम्हारी तरह काम को डेडीकेटेड.... जो ऐसी छिछोरी हरकतों को भी झेल ले ।उसने गुस्से में कहा ,तो वह मजे से हंसा ।
यू नो ब्रदर ,आई एम वेरी प्रोफेशनल .....
या ....आई नो वेरी वेल, बट इट्स अबाउट नॉट ए डे बेबी...... इट्स अबाउट नाइट, यह सिर्फ तुम्हारे दिन के बारे में नहीं है ,रात में तुम क्या बन जाते हो? वह भी तो देखना है। अब पूरा दिन तुम्हारे साथ रहेगी ,लेकिन रातों को जो बिजनेस पार्टी और मीटिंग होती है। उनका क्या ?क्योंकि अंधेरे में तो तुम वह रहोगे नहीं जो उजाले में होते हो ।
हां ,लेकिन कब तक..... तुझे पता है, मैं एक ही चीज से बोर हो जाता हूं ।हर बार मुझे सेम टेस्ट नहीं चाहिए । मेरा बस नाम सेम है।इसलिए फ़िक्र मत करो, वह सिर्फ एक दो तीन बार से ज्यादा नहीं होगा ।
हां ,लेकिन कोई भी शरीफ लड़की तुम्हें एक बार तो क्या टच भी नहीं करने देगी। और तुम अपनी हरकतों से बाज आओगे नहीं। इसलिए सोच समझ कर सेक्रेटरी रखनी पड़ेगी,
और उनका क्या जो मेरी बहुत सारी सेक्रेटरी पहले से हैं ......
ओह रियली, जिन्हें तुम बिजनेस डील के लिए यूज करते हो ....! उसने तंज से कहा।
हां तुम फ़िक्र मत करो ,रातों को अक्सर में पार्टी में मैं उन्हें ही ले जाता हूं ।अब मुझे हारना पसंद नहीं, जिस डील में हाथ डालता हूं ।वह डन होनी ही चाहिए । उसके लिए तुम्हें मालूम ही है क्या क्या करना पड़ता है ,और इस कॉर्पोरेट वार्ड में क्या-क्या होता है?
इसलिए जो भी मिले रख लो, लेकिन जल्दी होनी चाहिए ।और हां ......काम का नॉलेज होना चाहिए, यूं ही मुंह उठाकर किसी को मत रख लेना ।वह भी मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा ।और हां उसका कैरेक्टर कैसा है...... इसका मुझे समराइज कर देना ताकि सोच समझकर हाथ डालूं ।कल को यूं ही हरासमेंट के केस में फंसना नहीं चाहता मैं..... वैसे भी आजकल लड़कियों को नया हथियार मिल गया है, पहले मर्जी से साथ जाओ और फिर मोलेस्टेशन एंड हैरेसमेंट का केस करवा दो।
इतना सस्ता कानून है क्या इंडिया का..... कि रेप चार्ज यों ही लग जाते हैं ?सीरियसली ........ इट इज रियली डिस्गस्टिंग ....वह बड़बड़ाया और वह उसे देखता ही रहा ।क्या आदमी था यह ....कुछ समझ नहीं आता ।
वाकई वह इसे बर्बाद नहीं देखना चाहता था ,हर चीज को पहले ही सोच समझकर फैसले लेता, दिमाग से...... दिल तो जैसे बंध कर रखा है।
वैभव और समर्थ की दोस्ती उन रिश्तों में से थी जो शब्दों से नहीं, नज़रों और हालात से बयां होते हैं।
समर्थ की ज़िंदगी में बहुत लोग आए और गए, मगर वैभव वो एक शख़्स था जो उसके सबसे अंधेरे और बेतरतीब दिनों में भी साथ खड़ा रहा।
दोनों की दोस्ती की गहराई कुछ इस तरह थी ।
भरोसे की बुनियाद बहुत मजबूत थी।
समर्थ अगर किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करता था, तो वो वैभव था। वह जानता था कि वैभव कभी उसकी पीठ पीछे कुछ नहीं करेगा, चाहे पूरी दुनिया उसका विरोध करे।
ख़ामोश समझदारी की आहटें यहां गूंजती थी।
दोनों के बीच बहुत कुछ बिना कहे भी समझा जाता था। समर्थ की आंखों का गुस्सा, उसका ठंडा पड़ जाना, या अचानक का सन्नाटा ..... वैभव बिना शब्दों के जान लेता था कि अंदर क्या चल रहा है।
टकराव और वफ़ादारी साथ-साथ.......थी यहां।
कभी-कभी वैभव समर्थ को आईना दिखाने से भी नहीं डरता था। अगर समर्थ हद पार कर जाता, तो वही उसे रोकने की हिम्मत रखता था। और यही उनकी दोस्ती की सबसे सच्ची परत थी , वो सिर्फ साथ नहीं देता था, सही राह पर खड़ा भी रखता था।
अतीत का एक साझा दर्द था।
दोनों के बीच एक अतीत जुड़ा था , कुछ ऐसा जो उन्हें बाकी दुनिया से अलग जोड़ता था। शायद किसी नुकसान का दर्द, या वो वक्त जब उन्होंने एक-दूसरे के लिए अपनी हदें तोड़ी थीं।
संरक्षक और साथी का मेल की झलकियां यहां देखी जा सकती थी।
समर्थ दुनिया को दिखाने के लिए निर्दयी और स्वार्थी था, मगर वैभव के सामने वह वही था जो कभी बचपन में था , नाज़ुक, गुस्सैल, मगर दिल से सच्चा।
वहीं वैभव, समर्थ के लिए एक एंकर था। जब वह टूटने के कगार पर होता, वैभव उसे खींच लाता था, बिना किसी दावे या सवाल के।
इक नदी थी, जो कभी भी
सागर से मिल ना सकी...
रास्ते के पर्वतों को
पार कर ना सकी...
रूखी सी, सुखी सी, प्यासी अधुरी सी,
अब तक है बिछी वहां...
इक कतरा आंसु का, उसमें पर बाक़ी है
मेरे ही तरहां पीया...
पियू बोले,पिया बोले,क्या ये बोले,जानूं ना
जिया डोले,क्यों ये डोले,हौले हौले जानूं ना........