पिंजर : अ केज ऑफ इविल डिजायर्स Ch. 1

पिंजर : अ केज ऑफ इविल डिजायर्स - Chapter 1

Posted by Jahnavi Sharma • May 24, 2026 12:15 PM

“आई एम सॉरी मिस्टर श्रीवास्तव... मुझे कहते हुए अफ़सोस हो रहा है, आज सुबह गंगाघाट के दूसरी तरफ़ कुछ मछुआरों के जाल में फंसकर एक डेड बॉडी बहार निकली थी। हमारे पास रिपोर्ट में जो भी डिटेल्स दर्ज की गई थीं, उसके हिसाब से हमें लगता है कि वह लाश आपकी बेटी पंछी श्रीवास्तव की ही है।” कॉल पर मौजूद पुलिस इंस्पेक्टर ने मिस्टर श्रीवास्तव से कहा।

जैसे ही, पंछी के पापा प्रोफेसर रोहिताश श्रीवास्तव ने यह सुना उनके हाथ से मोबाइल छूट कर नीचे गिर गया था। एक पल के लिए मानो वह अपनी जगह पर जम से गए थे।

हैलो? हैलो?“क्या आप मुझे सुन पा रहे हैं प्रोफेसर श्रीवास्तव? लगता है आवाज़ नहीं गई।” कॉल पर मौजूद इंस्पेक्टर ने कहा और फिर कॉल काट दिया था।

जैसे ही कॉल कटा, रोहिताश की आँखों से आँसू का कतरा बह गया था। उनकी नज़र सामने दीवार पर लगी अपनी बेटी पंछी की तस्वीर पर गई। वह उस फोटो में मुस्कुरा रही थी। शायद अब वह मुस्कुराहट अब वह कभी अपनी आँखों के सामने नहीं देख पाएँगे।

रोहिताश ठीक से इस ख़बर को पचा भी नहीं पा रहे थे कि तभी उनके घर के आगे पुलिस की जीप आकर रुकी। पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनकर रोहिताश की पत्नी गरिमा तुरंत किचन से बाहर आई, उसके चेहरे पर भी मायूसी छाई हुई थी और आँखों के नीचे पड़े काले घेरे इस बात का सबूत थे कि पिछले कई रातों से वह चैन से सोई तक नहीं थी।

गरिमा ने एक नज़र रोहिताश की तरफ़ देखा जो बिल्कुल शांत बैठे हुए थे जैसे उन्हें अपने आसपास की कोई ख़बर ना हो, उसने इसे ज़्यादा गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि पिछले दो महीने से उनके घर का माहौल कुछ वैसा ही था।

रोहिताश से तुरंत नज़रें हटाकर गरिमा बाहर गई और पुलिस इंस्पेक्टर की तरफ़ देखकर उम्मीद भरी आवाज़ में बोली, “इतनी सुबह आप? क्या हमारी पंछी का कुछ पता चला है? वह मिल गई है ना?”

गरिमा के सवाल सुनकर इंस्पेक्टर की नज़रें निची हो गई थीं, उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा, “नहीं मिसेज श्रीवास्तव। सुबह एक लाश मिली थी, हमें शक़ है कि वह पंछी की लाश है और आपको शिनाख्त के लिए हमारे साथ मॉर्ग रूम चलना होगा।”

गरिमा ज़ोर से चिल्लाई और रोते हुए बोली, “नहीं, आपको कोई ग़लतफ़हमी हुई है, वह मेरी पंछी नहीं हो सकती है। उसकी कैसे हो सकती है, मेरी बेटी नहीं मर सकती है, अभी तो उसकी ज़िंदगी ठीक से शुरू तक नहीं हुई थी, वह इस बार अपने जन्मदिन पर 22 साल की होने वाली थी। इतनी कम उम्र में भला कौन दुनिया को छोड़कर जाता है।”

गरिमा वहीं पर ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी थी, वहीं रोहिताश को कोई होश नहीं था। पुलिस इंस्पेक्टर उनकी हालत समझ सकते थे, जब से पंछी ग़ायब हुई थी तब से उन दोनों को कोई होश नहीं था, वह उनकी इकलौती बेटी थी।

“आपको खुद को संभालना होगा और हमारे साथ चलना होगा।” इंस्पेक्टर ने सहानुभूति देते हुए कहा।

“मुझसे, मुझसे नहीं होगा। मुझे अपनी बेटी को शादी के लाल जोड़े में देखना था। मैं उसे कफ़न में लिपटे हुए नहीं देख पाऊँगी।” गरिमा ने सिसकते हुए कहा।

“ज़रूरी नहीं कि वह लाश पंछी की ही हो। हमें बस शक़ है, हो सकता है कि हमारा शक़ ग़लत हो, यह तो तभी पता चलेगा ना जब आप चलकर उसे देखेंगे और इसके लिए आपको हमारे साथ आना होगा।” इंस्पेक्टर ने उन्हें समझाया।

“फिर तो आपको शक़ ही हुआ होगा, वह मेरी पंछी नहीं है।” गरिमा ने सिर हिला कर कहा और फिर जल्दी से रोहिताश के पास गई, वह उनका हाथ पकड़ कर बोली, “आप जाकर देख आइए। ऐसे इन्हें हम पर यक़ीन नहीं होगा। आप उस लाश को देखकर अपने मुँह से कहेंगे कि वह हमारी पंछी नहीं है, तभी इन्हें यक़ीन होगा। जो भी फॉर्मेलिटीज उन्हें पूरी कर आइए ।”

गरिमा के समझाने पर रोहिताश ने हल्के से सिर हिला दिया था, लेकिन हाँ, उनकी आँखों में छोटी सी भी उम्मीद की किरण दिखाई नहीं दे रही थी। वह निराशा भरे चेहरे के साथ उठे और इंस्पेक्टर के साथ जाने लगे, लेकिन तभी जाने से पहले उन्होंने अपने घर को पलट कर देखा, आज पंछी के बिना उनका वह बड़ा सा घर पूरी तरह सूना पड़ा था। उन्हें पंछी के हँसने-खिलखिलाने की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

“चलिए ना, पापा मान लीजिए मेरी बात। कल मेरी सगाई है और उसके बाद में मैं शादी करके यहाँ से चली जाऊँगी। सोच लीजिएगा उसके बाद कोई आपसे ज़िद नहीं करेगा। प्लीज... प्लीज... प्लीज।”

उनके घर में 2 महीने पहले पंछी के सगाई की तैयारी चल रही थी और घर में अच्छी-ख़ासी रौनक़ लगी थी, लेकिन वह आख़िरी रात थी जब पंछी उनके साथ थी। उसके बाद ना वहाँ रौनक़ लगी और ना ही कोई सगाई हुई। आज जब पंछी की मौत की ख़बर मिली तो, इस तरह से उनकी दुनिया पूरी तरह ख़त्म हो गई थी।

रोहिताश को गए हुए पूरे डेढ़ घंटे बीत चुके थे और गरिमा ने इस डेढ़ घंटे में एक पल के लिए भी आराम नहीं किया, वह दरवाज़े पर ही खड़ी उनकी राह देख रही थी।

“अब तक आए क्यों नहीं? कॉल करके पूछना सही रहेगा क्या? यह पुलिस वाले भी ना कुछ ज़्यादा ही पूछताछ करते हैं। अरे ऐसे कैसे किसी भी लाश को हमारी बेटी बता सकते हैं।” गरिमा ने हिचकिचाते हुए अपने मोबाइल की तरफ़ देखा।

वह इस कशमकश में थी कि उसे रोहिताश को कॉल करके पूछना चाहिए या नहीं, तभी गली के कोने से एम्बुलेंस के सायरन की आवाज़ सुनाई दी, इसी के साथ गरिमा का दिल धक से रह गया था। जल्द ही एम्बुलेंस में से पंछी की लाश को बाहर निकाला गया और जिस घर में दो महीने पहले खुशियाँ आने वाली थीं, वहीं अब मातम का माहौल छा गया था। आसपास के लोगों, रिश्तेदारों में ही नहीं बल्कि न्यूज़ चैनल तक में पंछी श्रीवास्तव की न्यूज़ दिखाई जा रही थी।

श्रीवास्तव हाउस से रोने-चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी, किसी को यक़ीन नहीं हो रहा था कि इतनी ज़िंदादिल और खुशमिजाज लड़की, जो अभी 22 साल की भी नहीं हुई थी, वह इतनी कम उम्र में दुनिया को अलविदा कह चुकी थी।इन सबसे ज़्यादा झटका अगर किसी को लगा था, तो वह पंछी के मंगेतर श्रव्य को था, वह उस लाश को खोई हुई निगाहों से देख रहा था जिसका चेहरा इतना ख़राब हो गया था कि किसी की देखने तक की हिम्मत नहीं थी। अगर पंछी को पहचाना जा सकता था, तो वह उसके हाथ पर बने बटरफ्लाई टैटू से था। ‌

अपनी आँखों के सामने अपने प्यार की लाश देखकर श्रव्य खुद एक लाश की तरह हो गया था।

“मुझे जल्द से जल्द तुमसे शादी करनी है। मैं जानती हूँ अभी हमारी एजुकेशन भी पूरी नहीं हुई है, करियर के बारे में ठीक से कुछ सोचा नहीं है पर मुझे तुम्हारे साथ रहना है और शादी के बिना कोई हमें साथ नहीं रहने देगा, दोनों साथ रहेंगे तो मिलकर सब कर लेंगे। तुम जानते नहीं हो पंछी श्रीवास्तव को, अभी तो मुझे पूरे आसमान को एक्सप्लोर करना है।”

उन सबको पंछी की कही हुई बातें याद आतीं तो उनका दिल और भी दर्द से भर जाता था। ‌

“तुम्हें आसमान को एक्सप्लोर करना था, आसमान में जाने को किसने कहा था? तुम बहुत बुरी हो। मुझे छोड़कर कैसे जा सकती हो? अकेले जाना ज़रूरी था क्या, साथ रहने का सपना था तो मुझे भी साथ ले चलतीं।” श्रव्य ने रोते हुए खुद से बड़बड़ा कर कहा।

हर किसी को उसके जाने का दुख लगा था और सब अपनी-अपनी तरफ़ से एक दूसरे को दिलासा दे रहे थे। अंतिम संस्कार की तैयारी की जाने लगी और घर के आँगन में आने-जाने वाले लोगों की भीड़ लगी हुई थी।

इस बीच भीड़ को धकेलते हुए कोई उस भीड़ में आगे जाने का रास्ता बना रहा था। जैसे-तैसे करके वह लड़खड़ाते कदमों में बेहोशी के साथ आगे पहुँची और उसकी नज़र सामने पड़ी अपनी ही तस्वीर पर गई, जिस पर माला चढ़ी हुई थी।

वह और कोई नहीं पंछी थी, जिसने एक नज़र अपने फोटो की तरफ़ देखा और फिर वहीं बेहोश होकर गिर पड़ी थी।

°°°°°°°°°°°°°°°°

आई होप कि आपको कहानी का पहला भाग पसंद आया होगा, तो क्या लगता है, पिछले 2 महीने से पंछी कहां थी और अपनी ही फ्यूनरल में पहुंचकर उसे कैसा लग रहा होगा? पढ़कर समीक्षा कर दीजिएगा। अगले पार्ट पर मिलते हैं और हां, फर्स्ट पार्ट है तो पढ़कर सारे अच्छे से रिव्यू करके जाना।

100%