The Past- एक खौफनाक साया Ch. 1

The Past- एक खौफनाक साया - Chapter 1

Posted by Anjali Pandey • May 18, 2026 10:50 PM

साल 2026, समय: रात के ठीक 1:45 बजे।

​कोलकाता शहर की रफ्तार थम चुकी थी, लेकिन 'लाइफलाइन सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल' की सातवीं मंजिल पर सन्नाटा कुछ ज्यादा ही गहरा था। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। खिड़की के कांच पर गिरती बूंदों की आवाज के बीच केवल वेंटिलेटरों की बीप-बीप और गलियारे में जलती फ्लैशिंग ट्यूबलाइट की खरखराहट गूंज रही थी।

​डॉ. अद्वैत ने अपनी गर्दन को थोड़ा स्ट्रेच किया। छह फीट लंबे अद्वैत की चौड़ी कदकाठी पर डॉक्टर का सफेद एप्रन इस वक्त थोड़ा सा मुड़ चुका था। थकावट के कारण उसकी आँखों के नीचे हल्के काले घेरे आ गए थे। उसने अपने हाथों से उन हल्के भूरे बालों को पीछे समेटा जो बार-बार उसके माथे पर आ रहे थे और पीछे बंधी छोटी सी पोनी टेल को उंगलियों से थोड़ा ढीला किया। पिछले चौबीस घंटे से वह लगातार ऑन-ड्यूटी था।

​"सर, दो कप स्ट्रॉन्ग कॉफी?" जूनियर नर्स टीना ने काउंटर के पास से आवाज दी।

​अद्वैत ने थकी हुई मुस्कान के साथ सिर हिलाया, "हाँ टीना, प्लीज। ब्लैक कॉफी, बिना चीनी के। वरना इस नाइट शिफ्ट में आँखें खुली रखना नामुमकिन हो जाएगा।"

​अद्वैत जैसे ही स्टैफ रूम की तरफ बढ़ा, पूरे अस्पताल की लाइट अचानक गुल हो गई। एक झटके में चारों तरफ घाना, दम घोंटने वाला अंधेरा छा गया। वेंटिलेटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम तुरंत बैकअप जनरेटर पर शिफ्ट हो गए, जिससे मशीनों की बीप थोड़ी धीमी लेकिन ज्यादा डरावनी आवाज में गूंजने लगी।

​"अरे यार! इस बारिश में जनरेटर भी धोखा दे जाता है," टीना ने अपने मोबाइल की टॉर्च जलाते हुए कहा।

​लेकिन अद्वैत का ध्यान टीना की बात पर नहीं था। अचानक उसे अपनी रीढ़ की हड्डी में एक अजीब सी सिहरन महसूस हुई। अस्पताल का तापमान, जो पहले से ही एसी की वजह से कम था, अब अचानक इतना गिर गया था जैसे कोई बर्फ की सिल्ली पास लाकर रख दी गई हो। अद्वैत के मुंह से भाप निकलने लगी।

​तभी, अस्पताल के सबसे निचले हिस्से से... यानी बेसमेंट में स्थित 'मुर्दाघर' (Morgue) की तरफ से एक बेहद धीमी, सरसराती हुई आवाज आई।

​शशश... अद्वैत...

​अद्वैत के कदम वहीं जम गए। उसने झटके से पीछे मुड़कर देखा। गलियारा पूरी तरह खाली था। मोबाइल की मद्धम रोशनी में केवल स्ट्रेचरों की परछाइयां दीवारों पर किसी दानव की तरह हिलती हुई दिख रही थीं।

​"टीना... तुमने कुछ सुना?" अद्वैत की आवाज इस बार थोड़ी भारी थी।

​"क्या सर? बारिश की आवाज के अलावा तो कुछ नहीं है," टीना ने घबराते हुए चारों तरफ देखा।

​"नहीं, किसी ने मेरा नाम पुकारा। आवाज नीचे बेसमेंट की तरफ से आ रही थी," अद्वैत ने अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन करते हुए कहा।

​"सर, प्लीज डराओ मत। नीचे तो सिर्फ शवगृह है। इस वक्त वहाँ वॉर्डब्वॉय जग्गू के अलावा कोई नहीं होगा," टीना के चेहरे का रंग उड़ चुका था।

​अद्वैत का दिल तेजी से धड़कने लगा। यह पहली बार नहीं था। पिछले एक महीने से, जब भी रात के दो बजने वाले होते, उसे ऐसा महसूस होता जैसे कोई अदृश्य ताकत उसे अपनी तरफ खींच रही हो। सपनों में उसे एक पुरानी, उजाड़ हवेली दिखती थी, जहाँ चारों तरफ चीखें होती थीं और एक धुंधली सी आकृति हाथ फैलाकर उसे बुलाती थी। लेकिन आज, वह आवाज सपनों में नहीं, हकीकत में आई थी।

​"तुम यहीं रुको टीना। मैं नीचे देखकर आता हूँ। वैसे भी आज शाम को जो एक्सीडेंट वाला केस आया था, उसकी औपचारिकताएं पूरी करनी हैं," अद्वैत ने खुद को संभालते हुए कहा, हालांकि उसके अंदर का डर अब धीरे-धीरे बढ़ रहा था।

​वह भारी कदमों से लिफ्ट की तरफ बढ़ा, लेकिन लाइट न होने के कारण लिफ्ट बंद थी। उसने सीढ़ियों का दरवाजा खोला। सीढ़ियों का रास्ता और भी भयानक था। नीचे उतरते हुए हर कदम के साथ ऐसा लग रहा था मानो वह किसी पाताल लोक में जा रहा हो। दीवारों पर जमी सीलन की बदबू और ठंडी हवा का झोंका उसके चेहरे से टकराया।

​जैसे ही वह बेसमेंट के लोहे के भारी दरवाजे के पास पहुंचा, उसे अंदर से कुछ गिरने की आवाज सुनाई दी। खट!

​अद्वैत ने धीरे से दरवाजा धकेला। दरवाजा एक लंबी चूं-चूं की आवाज के साथ खुला। अंदर का नजारा देखकर अद्वैत के रोंगटे खड़े हो गए।

​मुर्दाघर के अंदर की सारी लाइटें बंद थीं। केवल कोने में रखी टेबल पर एक मोमबत्ती जल रही थी, जो हवा न होने के बावजूद अजीब तरह से फड़फड़ा रही थी। वॉर्डब्वॉय जग्गू फर्श पर बैठा था, उसका सिर पीछे की तरफ पूरी तरह मुड़ा हुआ था और आँखें पूरी सफेद हो चुकी थीं। उसके मुंह से झाग निकल रहा था। वह मर चुका था।

​"जग्गू!" अद्वैत चिल्लाया और उसकी तरफ दौड़ने ही वाला था कि तभी... मुर्दाघर के लॉकर नंबर 14 का दरवाजा अपने आप धीरे-धीरे खुलने लगा।

​कैट... कैट... कैट...

​लॉकर के अंदर से किसी के सांस लेने की तेज आवाजें आ रही थीं। कोई लाश नहीं, बल्कि कोई जिंदा इंसान अंदर था। अद्वैत ने अपनी टॉर्च की रोशनी उस लॉकर पर डाली। लॉकर के अंदर से कोई बर्फ जैसी ठंडी और काली धुंध बाहर निकल रही थी। वह धुंध धीरे-धीरे फर्श पर फैलने लगी।

​तभी, लॉकर के भीतर से दो बेहद खूबसूरत, लेकिन गहरे नीले रंग की आँखें अंधेरे में चमकीं। उन आँखों में खौफ, लाचारी और सदियों पुराना दर्द था। वह कोई आम औरत नहीं थी। उसके माहे पर एक पुराना, सोने का राजसी मुकुट था जो धूल से सना हुआ था और उसने 400 साल पुराना, फटा हुआ राजपूती लिबास पहना हुआ था, जिस पर सूखे हुए खून के निशान थे।

​वह राजकुमारी थी।

​अद्वैत उसे देखकर स्तब्ध रह गया। उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था। एक डॉक्टर होने के नाते वह इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि कोई मुर्दाघर के फ्रीजर लॉकर से जिंदा कैसे निकल सकता है। लेकिन जैसे ही राजकुमारी की नजर अद्वैत के चेहरे पर पड़ी, उसकी नीली आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उसके कांपते हुए होंठ खुले और उसने एक बेहद सुरीली लेकिन कमजोर आवाज में कहा:

​"राणा अद्वैत... तुम आ गए? मुझे... मुझे उस साये से बचाओ... वह आ रहा है..."

​अद्वैत कुछ समझ पाता, इससे पहले ही मोमबत्ती अचानक बुझ गई। पूरे कमरे में एक भयानक, गूंजती हुई हंसी गूंज उठी। वह हंसी किसी इंसान की नहीं थी। मोमबत्ती बुझते ही अद्वैत की टॉर्च की रोशनी में दीवार पर एक बहुत बड़ा, इंसानी शक्ल का लेकिन बिना चेहरे वाला 'काला साया' उभर आया। वह साया रेंगता हुआ सीधे उस राजकुमारी की तरफ बढ़ रहा था, और उसकी लंबी, नुकीली परछाईं जैसी उंगलियां राजकुमारी के गले की तरफ बढ़ रही थीं।

​राजकुमारी ने चीखते हुए अद्वैत का हाथ पकड़ लिया। जैसे ही उसका बर्फीला हाथ अद्वैत की कलाई से छुला, अद्वैत के दिमाग में एक जोरदार धमाका हुआ। उसे अपनी आँखों के सामने साल 2026 नहीं, बल्कि जलते हुए महल, तलवारों की खनखनाहट और खून से लथपथ अपनी ही लाश दिखाई दी।

​"नहीं!" अद्वैत चिल्लाया। उसने बिना सोचे-समझे अपनी दूसरी जेब से एक छोटा सर्जिकल ब्लेड निकाला और उस साये की तरफ लहराया। अजीब बात यह थी कि जैसे ही अद्वैत का हाथ हवा में घूमा, उस साये को जैसे कोई झटका लगा और वह एक खौफनाक चीख के साथ पीछे हट गया।

​अद्वैत ने समय बर्बाद नहीं किया। उसने राजकुमारी को अपनी बांहों में उठाया। वह फूल जैसी हल्की थी, लेकिन उसका शरीर बर्फ की तरह ठंडा था। अद्वैत उसे लेकर तेजी से सीढ़ियों की तरफ भागा। पीछे से उस साये की डरावनी फुसफुसाहट पूरे बेसमेंट में गूंज रही थी:

​तुम उसे ज्यादा दिन नहीं छुपा पाओगे अद्वैत... वह मेरी है... 400 साल पहले भी मेरी थी, आज भी मेरी है...

​अद्वैत हांफते हुए राजकुमारी को लेकर अपनी कार तक पहुंचा। उसने उसे पिछली सीट पर लिटाया और खुद ड्राइविंग सीट पर बैठकर कार को पूरी रफ्तार से अस्पताल के अहाते से बाहर निकाल दिया। बारिश और तेज हो चुकी थी, लेकिन कार के पीछे के शीशे (Rear-view mirror) में अद्वैत ने जो देखा, उससे उसका खून जम गया।

​अस्पताल की छत पर, उसी मूसलाधार बारिश के बीच, वह विशाल काला साया खड़ा था, और उसकी दो लाल, जलती हुई आँखें सीधे अद्वैत की कार का पीछा कर रही थीं।

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