बेपनाह प्यार है (Complete) Ch. 1

बेपनाह प्यार है - Chapter 1

Posted by Mamta Meena • May 05, 2026 02:36 PM

नहीं राधिका नहीं मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता तुम समझती क्यों नहीं मैं तुम्हें अपनी जान से ज्यादा प्यार करता हूं मर जाऊंगा मैं तुम्हारे बिना,,, पूरब ने राधिका की तरफ देखते हुए कहा,,,,,,,

 

नहीं पूरब तुम समझने की कोशिश करो मैं और तुम कभी एक नहीं हो सकते,,,,,,,

भला आकाश और धरती का क्या मेल जैसे नदी के दो किनारे कभी आपस में नहीं मिल सकते उसी तरह हम भी कभी एक नहीं हो सकते,,, राधिका दूसरी तरफ अपना मुंह करके अपने आंसू छुपाते हुए बोली,,,,,,,,

राधिका तुम यह कैसी बातें कर रही हो क्या तुम न यही सोच कर मुझसे प्यार किया था बोलो राधिका,,,, पूरब राधिका के सामने आकर उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,,,,,

तब यह सुनकर राधिका बड़ी मुश्किल से अपने आंसू काबू में करते हुए बोली पूरब तुम इस इलाके के सबसे रईस ठाकुर वीरेंद्र प्रताप के छोटे भाई और उनके इकलौते वारिस हो,,,,,,,

यह कहते हुए उसका गला भर आया उसने अपने आप को संभाला और बोली और मैं एक अनाथ गरीब छोटी जात की हूं अगर तुम्हारे भाई को हमारे बारे में कुछ भी पता चलेगा तो क्या होगा यह सोचा है तुमने,,,,

यह सुनकर पूरब बोला नहीं राधिका मैं कुछ नहीं जानता मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि मैं तुमसे प्यार करता हूं और बेपनाह प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना नहीं रह सकता,,,,,

लेकिन तुम यह सोच कर डर रही हो कि अगर मेरे भैया को इस बारे में कुछ भी पता चलता है तो इसमें गलत क्या है,,,,,,,

अरे प्यार करना गुनाह थोड़ी ना है, मैं तुमसे बेपनाह प्यार करता हूं और मैं तुम्हारे लिए किसी भी प्रकार की सजा भुगतने के लिए तैयार हूं,,,,, लेकिन तुम्हारे बिना नहीं रह सकता,,,,,, पूरब ने अपने आंसुओं को रोकने की नाकामयाब कोशिश करते हुए राधिका का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा,,,,,,,

यह सुनकर राधिका पूरब की तरफ देखते हुए बोली नहीं पूरब यह नहीं हो सकता मैंने कहा ना अगर तुम्हारे भैया को हमारे बारे में पता चलेगा तो तुम्हारा तो कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन हां मैं और मेरी दादी के लिए जरूर परेशानी खड़ी हो जाएगी,,,,,,,,

यह कहते हुए राधिका ने अपना हाथ छुड़ाकर दूसरी तरफ देखते हुए कहा पूरब मैं तुम्हारे लिए अपनी जान भी दे सकती हूं लेकिन अपनी दादी को दुखी नहीं देख सकती,,,,

यह सुनकर पूरब बोला राधिका तुम यह कैसी बात कर रही हो अगर,,,,

तब  पूरब की बात बीच में ही काटते हुए राधिका बोली पूरब तुम्हारे भैया कभी भी हमारे रिश्ते को स्वीकार नहीं करेंगे,,,,,,,

यह तुम भी जानते हो कि मैं अपनी मां पापा को तो बचपन में खो चुकी हूं अब अपनी दादी को नहीं  खोना चाहती,,,,,,,

हां पूरब मेरी दादी मेरे लिए मेरी दुनिया है और उसकी खुशी से बढ़कर मेरे लिए कुछ नहीं है उसने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ देखा है बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं अब मैं उन्हें और दुखी नहीं कर सकती,,,,,,,

इसलिए यही बेहतर होगा कि तुम मुझे भूल जाओ,,,,,,,यह कहते हुए राधिका ने अपने आंसू छुपाने के लिए अपने पीठ दूसरी तरफ कर ली,,,,,

तब यह सुनकर पूरब बोला राधिका मैं अपने भैया को जानता हूं वह भी मुझसे बहुत प्यार करते हैं देखना बह हमारे रिश्ते को जरूर स्वीकार करेंगे,,,,,,,

यह कहते हुए पूरब फिर राधिका के सामने आ गया और अपने दोनों हाथों में उसका चेहरा लेना चाहा,,,,,,,

लेकिन राधिका झटक कर दूर जा खड़ी हुई और बोली देखो पूरब हर मां बाप अपने बच्चों की भलाई चाहते हैं और उससे बहुत प्यार करते हैं,,,,,,,

लेकिन उन्हें बह जिस समाज में रहते हैं उनके बारे में भी सोचना पड़ता है,,,,,,,

मैं जानती हूं कि तुम्हारे भैया भी तुम्हारे लिए तुम्हारे मां बाप है लेकिन वह भी समाज में रहते हैं और इस समाज में उनकी कितनी इज्जत है यह तुम जानते हो,,,,,

इसलिए  बह कभी भी नहीं चाहेंगे कि उसके भाई का रिश्ता एक अनाथ और नीच जाति की लड़की से हो,,,,

यह सुनकर पूरब बोला राधिका तुम समझने की कोशिश करो अरे मेरे भैया औरों की तरह नहीं है अगर तुम्हें लगता है कि वह हमारा रिश्ता कभी स्वीकार नहीं करेंगे तो फिर भी मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकता,,,,,,

यह सुनकर राधिका बोली देखो पूरब मेरे पास और बातें करने का समय नहीं है और वैसे भी शाम होने को आई है मुझे घर जाना होगा दादी बहुत परेशान होगी और तुम तो जानते ही हो कि रात होने के बाद कोई भी अपने घर से बाहर नहीं निकलता है,,,,,

यह कहते हुए जाते हुए राधिका जाने लगी और फिर मुड़कर बोली भगवान के लिए पूरा फिर कभी मुझसे मिलने की या बात करने की कोशिश भी मत करना,,,,,,

तब यह सुनकर पूरब बोला राधिका यह तुम कैसी बातें कर रही हो सच सच बताओ तुम्हें मेरी कसम की आज तुम ऐसी बातें क्यों कर रही हो क्या किसी ने तुमसे कुछ कहा है बताओ,,,

 

यह सुनकर राधिका बोली नहीं पूरब मुझसे किसी ने कुछ नहीं कहा है,,,,, राधिका पूरब से अपनी नजरें चुराते हुए बोली,,,,

फिर पूरब राधिका के हाथ की  बाहे  पकड़कर उसकी आंखों में आंखें डालकर बोला तो फिर तुम ऐसी बातें क्यों कर रही हो,,,,,,,

बोलों क्या जब तुमने मुझसे प्यार किया था क्या तुम्हें उस समय यह सब कुछ समझ में नहीं आया था क्या उस समय तुम्हें मेरे बारे में कुछ पता नहीं था क्या तुम उस समय कुछ नहीं जानती थी तो सब कुछ जानते हुए भी तुमने मुझसे प्यार क्यों किया बोलो राधिका ,,,,

यह सुनकर पूरब की तरफ देख कर बोली पूरब उस समय मैं नासमझ थी पूरब बिना कुछ सोचे समझे बिना यह जाने कि कि इसका अंजाम क्या होगा मैं तुमसे प्यार करने की गलती कर बैठी लेकिन अब मुझे अपनी गलती का एहसास है,,,,,

यह कहते हुए राधिका अपनी बांह छुड़ाते हुए बोली मुझे अपनी गलती का एहसास है पूरब यह कहते हुए उसका गला भर आया,,,,,

गलती तुम्हें मुझसे प्यार करना गलती नजर आता है राधिका पूरब राधिका के मुंह को दोनों हाथों में लेकर उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,,,

यह देखकर राधिका ने झटके से अपने आपको पूरब से अलग किया और अपना मुंह गुस्से में दूसरी तरफ करते हुए बोली पूरब यह क्या कर रहे हो तुम,,,,,

मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और तुम्हारे प्यार में सच में पागल हो जाऊंगा पूरब  राधिका से बोला,,,,

बस अब मुझे कुछ नहीं सुनना राधिका गुस्सा दिखाती हुई बोली,,,,,

राधिका की बात को अनसुनी करते हुए पूरब आगे बोला राधिका और उसने राधिका का हाथ अपने हाथों में ले लिया और रोते हुए बोला राधिका मैं तुमसे बेपनाह प्यार करता हूं मैं तुम्हारे लिए इस पूरे समाज से लड़ सकता हूं ,,,,

अगर हमारा यह है समाज हमारे रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा तो मैं तुम्हें लेकर इतनी दूर चला जाऊंगा जहां कोई भी हमारे रिश्ते पर उंगली ना उठा सके,,,,,,,

मैं तुम्हें हमेशा खुश रखने की कोशिश करूंगा मैं वादा करता हूं अपनी जान से ज्यादा तुमसे प्यार करूंगा लेकिन प्लीज मुझे छोड़कर मत जाओ यह कहते हुए पूरब फूट-फूटकर रो पड़ा,,,,,,

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