Psycho Husband Innocent Wife Ch. 3

Psycho Husband innocent wife - Chapter 3(“ये लेवल है तुम्हारा?” )

Posted by Moon Star • May 01, 2026 12:43 PM

वो अपनी केबिन में पहुंचा—ग्लास डोर बंद हुआ, और बाहर खड़े लोगों की रीढ़ सीधी हो गई।

टेबल पर रखी फाइल उसने उठाई… एक नजर डाली… और अगले ही पल उसे साइड में फेंक दिया।

“ये लेवल है तुम्हारा?” उसकी ठंडी आवाज इंटरकॉम में गूंजी।

बाहर खड़ा मैनेजर पसीना पोंछते हुए अंदर आया…

क्योंकि यहां नौकरी नहीं—अगस्त्या के मूड पर जिंदगी चलती थी।

अगस्त्या की आंखों में हल्की-सी चमक थी… जैसे कोई खेल शुरू होने वाला हो। कुछ देर बाद,

उसने उंगली से इशारा किया—

“पीयून… इधर आ।”

पीयून कांपते हुए अंदर आया।

अगस्त्या ने टेबल पर रखे दो गिलास की तरफ देखा… फिर मुस्कुराया—

“तुझे गेम्स पसंद हैं?”

पीयून कुछ बोल नहीं पाया।

अगस्त्या आगे झुका… आवाज़ धीमी कर दी—

“आज एक छोटा सा गेम खेलते हैं… तेरी किस्मत के साथ।”

उसने दोनों गिलास उसकी तरफ सरकाए—

“एक में पानी है… और दूसरे में… तेरी आखिरी सांस।”

पीयून के होंठ सूख गए।

अगस्त्या हल्का हंसा—

“टेंशन मत ले… 50-50 chance है… लाइफ भी मिल सकती है।”

फिर अचानक उसका चेहरा सख्त हो गया—

“या फिर… यहीं खत्म।”

कमरे की हवा भारी हो गई।

“चल… चुन। देखूं तेरी किस्मत कितनी वफादार है।”

पीयून ने कांपते हुए एक गिलास उठाया।

अगस्त्या ने उसे घूरते हुए कहा—

“एक ही घूंट में… हीरो मत बनना, टाइम नहीं है मेरे पास।”

पीयून ने आंखें बंद कीं और गिलास पी गया।

कुछ सेकंड…

कुछ नहीं हुआ।

वो जिंदा था।

उसकी आंखों में उम्मीद चमकी—

“सर… मैं बच—”

अगस्त्या जोर से हंस पड़ा।

धीरे-धीरे उसके पास आया…

और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला—

“अरे… इतना जल्दी खुश हो गया?”

अगले ही पल—

उसने दूसरा गिलास उठाया… और जबरदस्ती उसके मुंह में डाल दिया।

“गेम अभी खत्म नहीं हुआ… घटिया आदमी।”

“सर—प्लीज—!”

लेकिन देर हो चुकी थी।

कुछ सेकंड में ही—

पीयून की सांसें टूटने लगीं… शरीर कांपता हुआ जमीन पर गिर गया।

कमरा फिर से शांत।

अगस्त्या ने नीचे देखा… और होंठ टेढ़े किए—

“किस्मत… हमेशा साथ नहीं देती।”

उसने जेब से फोन निकाला—

“क्लीन कर दो।”

बस।

दरवाज़ा खुला…

आदमी आया…

और लाश लेकर चला गया।

अगस्त्या वापस कुर्सी पर बैठा…

और फाइल खोलते हुए बुदबुदाया—

“नेक्स्ट।”

दूसरी तरफ,

ऑटो ने धीरे-धीरे ब्रेक लगाया—

“मैडम, आ गया आपका ऑफिस।”

जूही ने पर्स से पैसे निकालते हुए सामने नजर उठाई…

और एक पल के लिए बिल्कुल चुप रह गई।

उसके सामने खड़ी थी—एक विशाल, शीशे से ढकी ऊंची बिल्डिंग।

इतनी चमकदार कि धूप उसकी दीवारों से टकराकर आंखों में चुभ रही थी।

“ये…?” उसने खुद से बुदबुदाया।

उसने जल्दी से मोबाइल निकाला, एड्रेस दोबारा चेक किया—

लोकेशन वही थी।

“इतनी बड़ी कंपनी में काम करती है निम्मी?” उसके चेहरे पर हल्की हैरानी आ गई।

ऑटो वाले को पैसे देकर वो धीरे-धीरे नीचे उतरी।

हवा में हल्की ठंडक थी—लेकिन माहौल में एक अजीब-सी सख्ती भी।

गेट के बाहर सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे—सीधे, सतर्क, जैसे किसी आम ऑफिस की नहीं… किसी साम्राज्य की रखवाली कर रहे हों।

जूही अंदर बढ़ी।

जैसे ही उसने कांच के बड़े दरवाजे को धक्का दिया—

अंदर की दुनिया एकदम अलग थी।

मार्बल फ्लोर…

ऊपर से झूलते महंगे झूमर…

हर तरफ लोग—फॉर्मल कपड़ों में, तेज कदमों से चलते हुए…

और हर चेहरे पर एक अजीब-सा दबाव।

जूही ने हल्का सा गला सूखा महसूस किया।

“निम्मी तो बस एक सिंपल जॉब करती है… ये जगह तो…”

उसने सोचा, लेकिन बात पूरी नहीं कर पाई।

तभी उसका फोन वाइब्रेट हुआ—

निम्मी कॉलिंग…

“हां बोल, मैं पहुंच गई हूं,” जूही ने फोन उठाते ही कहा।

“ओह गॉड, तू सच में आ गई! सुन—मैं अभी नीचे नहीं आ पाऊंगी, मीटिंग में फंस गई हूं। तू रिसेप्शन के पास खड़ी रह, मैं किसी को भेजती हूं या खुद आ जाती हूं थोड़ी देर में।” निम्मी की आवाज में घबराहट साफ थी।

जूही ने इधर-उधर देखते हुए कहा,

“ठीक है… लेकिन तू यहां करती क्या है? ये जगह तो—”

“जूही, बाद में बताती हूं… अभी बस वहीं रुकना। और हां—ज्यादा इधर-उधर मत घूमना।”

कॉल कट।

जूही ने भौंहें चढ़ा दीं—

“इतना ड्रामा क्यों कर रही है ये…”

वो धीरे-धीरे रिसेप्शन की तरफ बढ़ी।

उसके कदम खुद-ब-खुद धीमे हो गए—

क्योंकि वहां खड़े लोगों का व्यवहार… कुछ अलग ही था।

कोई हंस नहीं रहा था।

कोई बेफिक्र नहीं था।

हर कोई जैसे किसी अदृश्य डर में जी रहा हो।

जूही ने फाइल को थोड़ा कसकर पकड़ लिया।

तभी—

पास से दो कर्मचारी तेजी से गुजरे—

“सुना क्या? आज फिर किसी को निकाल दिया उसने…”

“श्श्श… नाम मत लेना… कैमरे हर जगह हैं।”

जूही का ध्यान तुरंत उधर गया।

“कौन…?” उसने मन ही मन सोचा।

दिल में हल्की-सी बेचैनी उठी—

लेकिन उसने खुद को संभाला।

“Relax जूही… तू यहां सिर्फ फाइल देने आई है… कोई जॉब जॉइन नहीं कर रही।”

वो वहीं खड़ी होकर निम्मी का इंतजार करने लगी।

कुछ सेकंड…

फिर कुछ मिनट…

और तभी—

ऊपर के फ्लोर से अचानक हलचल हुई।

लोग एकदम साइड में हटने लगे—

जैसे कोई बहुत बड़ा शख्स आ रहा हो।

जूही ने अनजाने में उधर देखा—

और उसी पल…

जूही अभी फोन रखकर मुड़ी ही थी कि अचानक—

धड़ाम!

वो किसी से इतनी जोर से टकराई कि उसका संतुलन बिगड़ गया…

लेकिन गिरने से पहले ही एक मजबूत हाथ ने उसकी कलाई पकड़ ली।

उसकी सांस अटक गई।

धीरे-धीरे उसने ऊपर देखा—

और सामने… अगस्त्या रंधावा।

उसकी पकड़ कलाई पर कसती जा रही थी… जैसे वो छोड़ना ही नहीं चाहता।

जूही ने झटके से हाथ छुड़ाने की कोशिश की,

“छोड़िए…!”

लेकिन उसने छोड़ा नहीं।

बल्कि उसे अपनी तरफ थोड़ा और खींच लिया।

अब दोनों के बीच बस कुछ इंच का फासला था।

“देख कर नहीं चल सकती?” उसकी आवाज़ धीमी थी… मगर सीधा दिल पर लगने वाली।

जूही की आंखों में गुस्सा आ गया,

“आप भी तो देख सकते थे!”

अगस्त्या की आंखों में हल्की-सी चमक आई—खतरनाक वाली।

“मुझसे बहस?” उसने और करीब झुकते हुए कहा,

“पहले दिन… और इतनी हिम्मत?”

जूही ने उसकी आंखों में आंखें डाल दीं,

“हिम्मत नहीं… आदत है गलत के सामने झुकने की नहीं।”

एक पल के लिए सन्नाटा।

उसकी पकड़ और कस गई।

जूही को दर्द हुआ… पर उसने चेहरा नहीं बदला।

अगस्त्या ने गौर से उसे देखा—

पहली बार कोई उसकी पकड़ में होते हुए भी… डर नहीं रहा था।

उसके होंठों पर हल्की, टेढ़ी मुस्कान आई।

“तुम जानती भी हो… किससे टकराई हो?”

जूही ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया—

“मुझे फर्क नहीं पड़ता।”

बस… यही वो पल था।

अगस्त्या की आंखों का रंग जैसे बदल गया।

उसने अचानक उसकी कलाई छोड़ दी—

लेकिन जाते-जाते उसके कान के पास झुककर धीमे से बोला—

“पड़ेगा…”

जूही एक सेकंड के लिए जड़ हो गई।

वो सीधा खड़ा हुआ… अपनी जैकेट ठीक की…

और बिना पीछे देखे आगे बढ़ गया।

जूही वहीं खड़ी रह गई—

दिल तेज़ धड़क रहा था…

पर इस बार डर से नहीं—

एक अजीब-सा एहसास था…

जैसे तूफान अभी शुरू हुआ हो।

जूही ने एक गहरी सांस ली… जैसे अभी-अभी हुए टकराव को अपने अंदर दबा रही हो।

तभी पीछे से आवाज़ आई—

“जूही!”

वो मुड़ी—निम्मी भागती हुई उसकी तरफ आ रही थी।

“सॉरी यार, थोड़ा लेट हो गई… तू ठीक है ना? चेहरा इतना सीरियस क्यों है?” निम्मी ने आते ही पूछा।

जूही ने हल्की-सी मुस्कान बनाई और हाथ में पकड़ी फाइल उसकी तरफ बढ़ा दी,

“ये रही तेरी फाइल… तू इसे घर पर ही भूल आई थी। फोन करके ऐसे बुलाया जैसे दुनिया खत्म हो गई हो।”

निम्मी ने राहत की सांस ली,

“थैंक गॉड! अगर ये फाइल नहीं मिलती ना, तो आज मेरा बॉस मुझे जिंदा खा जाता।”

जूही ने भौंहें सिकोड़ लीं,

“इतना खतरनाक है क्या?”

निम्मी ने इधर-उधर देखा… फिर थोड़ा पास आकर धीमे से बोली,

“खतरनाक और… पागल दोनों हैं। यहां सब उससे डरते हैं। उसकी नजर पड़ जाए ना, तो लोग सीधे खड़े हो जाते हैं।”

जूही ने हल्का सा हंसने की कोशिश की,

“तू यहां काम कैसे कर लेती है फिर?”

निम्मी ने कंधे उचकाए,

“आदत हो जाती है… या यूं कह ले, मजबूरी बना देती है।”

जूही कुछ बोलने ही वाली थी कि उसे अचानक वही एहसास हुआ…

जैसे कोई उसे देख रहा हो।

उसने धीरे-धीरे नजर घुमाई—

कुछ दूरी पर… ग्लास के उस पार…

अगस्त्या रंधावा खड़ा था।

उसकी नजरें सीधी उसी पर टिकी थीं।

न कोई हड़बड़ी… न कोई झिझक…

बस एक अजीब-सी गहराई… जैसे वो उसे पढ़ रहा हो।

जूही का दिल एक पल के लिए तेज़ धड़का।

निम्मी अभी भी कुछ बोल रही थी,

“और सुन, तू जल्दी निकल जाना यहां से… ज्यादा देर रुकी ना, तो—”

“वो कौन है?” जूही के मुंह से अचानक निकल गया।

निम्मी रुक गई… और उसके नजरों का पीछा करते हुए उधर देखा—

जैसे ही उसकी नजर अगस्त्या पर पड़ी… उसका चेहरा एकदम उतर गया।

“जूही…” उसने फुसफुसाते हुए कहा,

“नीचे देख… अभी के अभी।”

लेकिन जूही ने नजर नहीं हटाई।

और उधर—

अगस्त्या के होंठों पर धीरे-धीरे एक हल्की-सी मुस्कान उभरी।

पज़ेसिव… खतरनाक… और पूरी तरह से उसी के लिए। तभी उसने निम्मी को काॅल कर केबिन में बुलाया ,वो घबराई पता नहीं अब क्या होगा,

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